Thursday, December 29, 2016

शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान द्वारा बच्चों को निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा 6 माह और 1 साल देने का निर्णय गांव की बच्चों की अत्यंत मांग पर लिया है।
आप सभी से अनुरोध है कि अगर आपके पास कोई लैपटॉप या डेस्कटॉप अच्छी कंडीशन में हैं जो आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हो, तो संस्था को दान करके इस पुण्य काम में सहभागी बनें। गांव बदलेगा तो देश बदलेगा। 
जय हिन्द

संपर्क करें
रीता शर्मा
शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान,
हज़ हाउस, सरोजिनी नगर, लखनऊ
8960685078

Friday, December 16, 2016

श्रद्धांजलि


जब तक स्त्री खुद खड़ी होकर अधिकारों की बात नहीं करती, सही गलत का फैसला खुद नहीं करती, गलत निगाहों को फोड़ने और गलत हाथों को तोड़ने की हिम्मत नहीं रखेगी, तब तक समाज यूँ ही निर्भया के बारे में लंबी लंबी बात करेगा। हम क्यों अपने सुरक्षा के लिए दूसरों से उम्मीद कर रहे हैं? अपनी सुरक्षा, अधिकार, सीमाएं, शिक्षा के साथ आगे बढे, कानून ने बहुत अधिकार रखे है महिलाओं को....आगे बढे और अपनी तथा दूसरों की सुरक्षा खुद सुनुश्चित करें.... भेड़ियों से कोई उम्मीद ना रखें
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श्रधांजलि निर्भया को जिसके चलते कानून में बहुत बदलाव आये हैं💐💐.

Sunday, October 9, 2016

सर्टिफिकेट वितरण समारोह


आज दिनांक 9 अक्टूबर 2016 को शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान द्वारा ग्राम- सरैया व् रामपुर, बक्शी का तालाब में चलाये जा रहे 6 माह के निशुल्क सिलाई कोर्स का समापन सर्टिफिकेट वितरण के साथ किया गया। संस्था द्वारा 6 माह का सिलाई कोर्स, 3 माह का इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स, 1 सप्ताह का महेंदी, कढ़ाई व् नेल आर्ट आदि निशुल्क सिखाया गया। सर्टिफिकेट वितरण समारोह में ग्राम प्रधान, संस्था की डायरेक्टर सुश्री रीता शर्मा, संस्था सदस्य, छात्राए व् ग्राम वासी मौजूद रहें। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से की गयी तथा छात्राओं ने उत्साहपूर्वक विभिन्न सांस्कृतिक गीत, भक्ति गीत गाये। छात्राओं का भविष्य उज्जवल हो, वह आत्मनिर्भर बन सकें और देश का नाम रोशन करे इस कामना के साथ संस्था के डायरेक्टर द्वारा कार्यक्रम का समापन किया गया।

धन्यवाद्
                                                                 रीता शर्मा
                                            शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान, लखनऊ
                                           



मो न. 8960685078, 9807701280

Friday, June 3, 2016

मथुरा


मथुरा जिले के जवाहरबाग में अवैध कब्जे को हटाने मैं सत्याग्रहियों द्वारा  फायरिंग मैं हमारे प्रदेश के जाबांज अधिकारी शहीद एस.पी.सिटी मथुरा  श्री मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह श्री संतोष यादव को शत् शत् नमन💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
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विचारणीय तथ्य ये हैं कि हाइकोर्ट के आदेश के बावजूद सत्याग्रहियों द्वारा जगह ना खाली किये जाने पर मामले की गंभीरता क्यों नहीं समझी गयी? पर्याप्त पुलिस जवान और सुरक्षा के इन्तज़ाम क्यों नहीं किये गए? सीनियर पुलिस अधिकारी मौके पर क्यों नहीं मौजूद थे, अगर थे तो मामला बढ़ते देखकर समय से सही आर्डर क्यों नहीं किये? क्या सीनियर अधिकारी और राजनीतिज्ञ सिर्फ न्यूज़ चैनल पर अफ़सोस जताने के लिए है? लंबे समय से चल रहे इस मामले में पहले से सख्त इंतज़ाम क्यों नहीं किये गए? इन पर पुलिस की निगरानी क्यों नहीं थी, अगर थी तो इतनी भारी मात्रा में गोला- बारूद जवाहर बाग कैसे पहुचे? इनमे किसकी मिलीभगत हैं? सत्याग्रहियों का नेता रामवृक्ष पुलिस के होने के बावजूद कैसे भागा, किसने की सहायता? क्या पुलिस और सेना लापरवाही और देर से आर्डर के चलते शहीद होने के लिए हैं? ये हमारी सुरक्षा के लिए हैं, लेकिन शासन से इन्हें पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी गयी? ऐसे ही लापरवाही चलती रही तो कौन जायेगा सेना और पुलिस में? बेशक देश की सेवा और जनता की सुरक्षा के लिए ये शहीद होते हैं, लेकिन लापरवाही के चलते जान गवाने के लिए नहीं? क्या 20 लाख के मुआवजा से इनकी शहादत को आकां जा सकता है?===========================
 अब सरकार को चाहिए कि इस मामले की सख्त जाचं कराये, दोषी जो भी हो, उन पर कारवाही हो। शहीद पुलिस अधिकारी के परिवार को उचित मुआवजा मिले, परिवार को पर्याप्त सहायता और बच्चों की अच्छी शिक्षा की व्यवस्था और आश्रितों को नौकरी दी जाए। घायल पुलिस के जवान को उचित इलाज़ और मुआवजा दिया जाए, ये सरकार का प्रथम और पुनीत कर्त्तव्य और अपनी पुलिस प्रशासन के प्रति जिम्मेदारी है।



Saturday, May 21, 2016

महेंदी वर्कशॉप

आज रामपुर, सरैया में शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान द्वारा शुरू किया गया  1 हफ्ते की महेंदी वर्कशॉप का समापन हुआ। प्रतियोगिता में विनर और दो रनर अप रहे, जिन्हें संस्था की ओर से सर्टिफिकेट दिया जायेगा, और अच्छी बात ये रही कि महेंदी टीचर भी इसी गांव से थी, जिन्हें उचित पेमेंट किया गया।

सेल्फ डिफेन्स ट्रेनिंग


आज शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान द्वारा 15 दिनों का निशुल्क सेल्फ डिफेन्स ट्रेनिंग कैंप अलीगंज, सेक्टर सी का समापन हुआ। इसमें कराटे एंड कराटे अकादमी  के ट्रेनर Mr शुभम ने बहुत मेहनत की बच्चों को सिखाने में। आज रखी गयी प्रतियोगिता में 6 बच्चों को बेस्ट परफॉरमेंस का सर्टिफिकेट दिया जायेगा-- आयुषी सोनकर,मुस्कान साहनी,रक्षा शुक्ला, सुनयना सिंह, अन्वेषा श्रीवास्तव, नंदिनी सिंह, राधा सिंह।

रीता शर्मा
डायरेक्टर ऑफ़ शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान, लखनऊ

पॉवर

जब किसी के पास पॉवर आ जाती है तो वो सुप्रीमो बनकर अपनी इच्छानुसार मनमानी करने लगता है, इसलिए हमारा समाज, देश विदेशों की तुलना में पिछड़ा हैं। जब तक ये मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक हम विकासशील ही बने रहेंगे।

राजनितिक योग्यता

सभी सरकारी पदों के लिए होने वाली प्रतियोगिताओ की तरह राजनितिक पदों पर आवश्यक अहर्ताओ के साथ परीक्षा प्रणाली और कार्य अनुभव अनिवार्य करना चाहिए। इससे उन्हें अपने अधिकार, सीमा क्षेत्र और कार्य प्रणाली का पता चलेगा और सिस्टम दुरूस्त हो पायेगा।

रोड एक्सीडेंट


पता नहीं समाज किस दिशा में जा रहा हैं, हम जितना ही पढ़ते जा रहे हैं, उतने ही असभ्य और अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। कल दो रोड एक्सीडेंट देखे, मन बहुत व्यथित हुआ....।
एक बक्शी का तालाब, लखनऊ
काफी दूर थी कुछ कर नहीं पायी, एक बच्चा रोड क्रॉस कर रहा था, कार ने टक्कर मारी और भाग लिया और वहां मौजूद लोगो ने गाड़ी का no तक ना देखा, वरना कारवाही हो सकती हैं। हम अक्सर ये देखते हैं कि जब कोई रोड क्रॉस करता हैं तो ये गाड़ी वाले और स्पीड बड़ा लेते हैं, जबकि यातायात नियम कुछ और कहते हैं, अब ज़ेब्रा क्रासिंग हर जगह है नहीं और जहाँ है वह पालन नहीं करते। पता नहीं वो बच्चा कैसा होगा? बेहद अमानवीय
और शाम को एक गाड़ी ने एक कुत्ते के बच्चे पर गाड़ी चढ़ा दी उसे भी बहुत चोट आई, वही बात रुकना नहीं चाहते। और फिर एक ऑटो ने एक और टक्कर दी, रुकना नहीं था। कुछ रोड पर रहने वाले लोगों उस puppy को उठाया और रोड के किनारे किया। भागने की दौड़ में शामिल हैं हम।
ऐसे लोगों पर सख्त कारवाही होनी चाहिए, आये दिन ऐसा होता रहता हैं, जब किसी बड़े के साथ हादसा होता हैं तो न्यूज़ कवरिंग। आम जन की तो कही गिनती ही नहीं होती।अक्क्जडेन्ट

सम्मान

कल से लोग पोस्ट पर पोस्ट कर रहे हैं कि एक दलित की बेटी ने आईएस टॉप किया। ये क्या है? निंदनीय आईएस बनने पर दलित कैसे?? एक राजपूत की बेटी एसएसपी बनी और .....। ये सब बंद करे, देश की बेटी ने टॉप किया हैं और देश की बेटी एसएसपी बनी हैं। जातिवाद फैलाना बंद करे और प्रतिभा का सम्मान करें।

न्याय

न्याय प्रक्रिया को इतना जटिल, पेचीदा और लंबी व्यवस्था बना दिया हैं कि आम जन जो कम पढे लिखे या अशिक्षित हैं, उनकी समझ और पहुच से दूर हैं। अब ये भी बड़े लोगों को दी गयी सुविधा में शामिल हो गयी हैं।

इंतज़ार

यूँ इंतज़ार की घड़िया पल पल कर बढ़ती जा रही हैं, इन्तज़ार का बढ़ना उनके ठीक होने की चिंता में बदल जाता है। हर आहट पर द्वार को तकती हूँ कि शायद वो आ रहे हैं।

सुकुन


मीलो चलते चलते थक चुके है हम,
मिल जाये कोई घने पेड़ की छाया।
शीतलता और सुकुन का अहसास,
कुछ एक पल सुकुन की नींद।
लेकिन कहाँ मिलेगा ये सुकुन,
जंगलों और पेड़ो को काट चुके है खुद ही हम।।

इलज़ाम

दूसरों को इलज़ाम देने वाले,जरा खुद को भी देख ले। हो सकता है कि खुद में कोई कमी नज़र आ जाएं।

जख़्म


तूने जख्मों को कुरेदा कुछ इस तरह,
कि मरहम लगाने की मुद्दतों की कोशिश बेकार हो गयी,कहाँ जाऊ अपने इन फिर से ताज़ा हुए घाव के साथ, खुद को छुपाने का कोई ठौर ठिकाना ना रहा।।

आगमन


तेरे आने के बाद कुछ हसरतें जवां होने लगी, सपनों ने भी ले ली हैं नयी उड़ान।
अहसास भी कुछ यूँ होने लगा कि बरसो पुरानी चीज़ कुछ नयी नयी नज़र आने लगी।।

रिश्ते

कह कर बातों से मुकर जाना, यही दुनिया का दस्तूर रहा हैं, कोई भी वफायें, दिल्लगी रोक ना पायी, इस दस्तूर का निभाने में।

Saturday, April 23, 2016

जिम्मेदारी

जब से madiaon से सम्बंधित सूचना दी हैं, तीन बार कॉल आ चुकी है, जानकारी के लिए। माना कि शुरू की दो कॉल पर ठीक से ना सुना, ना जवाब दिया फिर भी देर से ही सही जागे तो। हमें लगता हैं कि हर किसी को जिम्मेदार नागरिक की तरह अपना फर्ज अदा करना चाहिए और कुछ गलत होने पर सूचित करना चाहिए। तो हो सकता है कि समाज से कुछ बुराई कम की जा सकें। पुलिस को समाज की सेवा में तत्पर होना चाहिए और समय के भीतर समस्या का निवारण करना चाहिए।

Friday, April 22, 2016

up पुलिस


देर आये दुरुस्त आये....
स्थान... madiaon ऑटो स्टैंड, निकट madiaon थाना, लखनऊ
कुछ सज्जन( मुस्टंडे) लोग खड़े थे, जैसे ही कोई टैक्सी भरती, झट ड्राइविंग सीट पर बैठकर कर कहते थाने चलो और सारी सवारी उतार देते। दोपहर का बारह बजे का समय, तेज धूप वैसे ही लोगो को परेशान कर रही थी, ऊपर से ये सघन चेकिंग अभियान। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात इस सघन चेकिंग अभियान में ना तो कोई वर्दीधारी पुलिस, ना ही यातायात पुलिस और ना ही RTO ऑफिसर। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये क़ानूनी रूप से सही है कि दूर खड़े होकर देखो, सवारी भरते ही खाली करवाओ और पुलिस स्टेशन के बहाने टैक्सी को एक गली में ले जाओ?? क्या इसकी परमिशन है? अगर कोई अभियान था मौजूदा अधिकारी कहा थे? ये नौंटकी पुलिस स्टेशन से 50 मीटर की दूरी पर हो रही थी। सब् की तरह मैं शिकार हुई, एक में बैठी, उतार दी गयी, दूसरी में बैठी उतार दी गयी और फिर मैंने पूछा ये क्या नौटंकी है? जवाब मिला पेट्रोल टैक्सी को रोकना है, अरे भाई रोकना है तो खाली टैक्सी को रोको, पैसेंजर को क्यों परेशान कर रहे हो। उन्होंने कहा पीछे वाली में बैठ जाओ वो जायेगी, और हद तो तब हो गयी जब उसे भी रोक कर सवारी उतारने लगे, अब सहनशक्ति जवाब दे चुकी थी, मैंने कहा कोई नहीं उतरेगा मैं पुलिस को बुलाती हूँ और 100 डायल किया, 100 का नाम सुनते ही बोले कि मैडम के टैक्सी को जाने दो और बताया कि ये RTO ऑफिसर जो .....। खैर हमारा टैक्सी आगे बढ़ गयी और कुछ देर बाद 100 par बात हुई और मैंने सारी डिटेल दी। सेण्टर पहुची बच्चे जा चुके थे मूड बहुत अपसेट था , मैंने फिर से 100 पर डायल किया इस बार मैम ने उठाया, फिर से डिटेल पूछी, फिर कहा सर से बात करे, मैंने फिर से कहानी कही और पूछा कि बिना पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और RTO के कौन सा अभियान चल रहा था और पैसेंजर को क्यों परेशान किया जा रहा था, जवाब मिला वो शायद पेट्रोल वाली गाड़ी की चेकिंग थी, मैने पूछा जिम्मेदार अधिकारी कहाँ थे, उन्होंने कहा दिख्वाते हैं मैंने कहा कि ये न्यूज़ पब्लिश करवाउंगी, जवाब मिला बिलकुल करवाये। खैर दो घंटे बात कंप्लेंट no मिला गया और कॉल आई कि आप कहा पर हैं मैंने कहा ऑफिस में, कंप्लेन के वक्त वही थी, थोड़ा बहुत जवाब दिया मैंने, बिजी थी सो बात  नहीं कर पायी।
1.. सवाल ये उठता है कि तीसरी बार में कंप्लेन नंबर क्यों मिला, पहली बार में क्यों नहीं?
2.. एक बार सारी डिटेल बताने के बाद बार बार क्यों पूछना, क्या मै अपराधी हूँ?
3... इंतना सुस्ता एक्शन क्यों जबकि बहुत नजदीक हैं पुलिस स्टेशन?
4. जब उस रास्ते से निकली वापस तो एक बाइक पर पुलिस खड़ी थी।
तो दोस्तों क्या कहाँ जाये देर आये दुरुस्त आये, जब राजधानी का ये हाल हैं तो गांव का क्या होगा??

Thursday, April 21, 2016

ग्रुप फ़ोटो




अब हमारे जॉब प्रोफाइल में एक नया एक्सपीरियंस ऐड हुआ सिलाई टीचर। कहते हैं कि सीखी हुई चीज कभी बेकार नहीं जाती, जब 12th पास आउट हुई माँ ने अड्मिशन करा दिया , क्योंकि उन्हें इसका बहुत शौक था, पापा से लड़ कर हम बहनों को भेजना शुरू किया, पापा नहीं चाहते थे कि हम ये सीखे, हम भी दीदी के साथ खेलते कूदते पूरा कोर्स सीख गए, फिर काफी कुछ सिला भी। वक्त और आगे की पढ़ाई के साथ आगे बढ़ गए। इसको पता था कि आज ये सीखा हुआ काम आएगा, क्योंकि इतनी दूर गांव में, भीषण गर्मी में कोई जाने को तैयार नहीं, सो हम ही उतर गए जंग में, बच्चे बहुत खुश हैं, क्योंकि उनको उनके गांव में ही सुविधा मिल रही हैं, धीरे धीरे बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है।

वार्तालाप


शक्तिस्वरूपा सिलाई केंद्र में बात करने से पता चला कि इन बच्चियों के भी बहुत सपनों हैं, बहुत सारी डिमांड की हैं सबने, देखते हैं कितनी पूरी कर पाते हैं, लेकिन परिवार और समाज की बेढ़ियाँ अभी भी जबर्दश्त तरीके से बंधी हैं, हमने घर घर जाकर बोला है तो लड़कियां आना शुरू हुई हैं, बहुत जरुरी हैं इनको समाज की मुख्य धारा से जौड़ना और आश्चर्य की बात ये हैं कि अभी भी कुछ लोग अशिक्षित हैं, जबकि गांव में ही 8th तक सरकारी स्कूल है जहा सारी सुविधाएँ हैं, और मिड डे मील भी अच्छे से बनता हैं, स्कूल में खूब साफ सफाई है, खेलने के लिए प्ले ग्राउंड हैं। हमने उन अशक्षित बच्चों के लिए एक "अनोखी पाठशाला" सोची है, जल्द ही शुरू करेंगे। हमने आज इन्हें कानून, पुलिस 100, और 1090 की जानकारी दी, जो किसी को पता तक ना थी और सरकारी योजनाओं के बारे में भी बात की।

रीता शर्मा
शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान
सरैया, रामपुर बक्शी का तालाब, लखनऊ

Tuesday, April 19, 2016

सिलाई केंद्र



शक्तिस्वरूपा सिलाई केंद्र में बच्चे सिलाई कटाई करते हुए।

Thursday, April 14, 2016

samaj

आज का समाज इतना दूषित हो चूका हैं कि हमारे मन साफ़ रखने से कुछ नहीं होगा। चाहे वो स्त्री हो या पुरुष। हम सिर्फ ये कह कर नहीं छोड़ सकते हैं कि वो बड़ा हैं, क्योंकि ये वहशी, दरिंदे बड़े ही होते हैं, बच्चों के केस तो काम ही दिखते हैं। जीरो टॉलरेंस पर हम सब को रहना चाहिए, कानून तो पहले से ही मौजूद हैं। एक किस्सा बताती हूँ एक दिन एक स्कूल बच्ची हमारे साथ ऑटो में बैठी और एक बेहद ही बुजुर्ग सज्जन पहले से थे, बच्ची उनके बगल में बैठी, उन्होंने बच्ची के पैरों पर हाथ रखा, जब तक मैं बोलती, वो चिल्ला पड़ी...... ये क्या बदतमीज़ी है.... मैंने तो ये देख लिया था, सज्जन बोले बद्तमीज़ लड़की चुप कर... मैंने क्या किया है और साथ में पुरुष सज्जन भी बोले बहुत बदतमीज़ है बड़ों से बोलने की तमीज़ नहीं.... अब बारी मेरी थी.... 100 no डायल किया और पास के पुलिस स्टेशन पर ऑटो रुकवा  लिया और बोली चलो ... बताते हैं बड़ों से बात करने की तमीज़.... बुजुर्ग सज्जन भाग लिए। तो ये तर्क बिलकुल ना दे कि वो बड़ा है जाने दो.....

shubh shuruat

आज से पूजा पाठ के बाद हमारा 6 माह सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ।




Tuesday, April 12, 2016

संवाद

सरैय्या, रामपुर बेहड़ा का प्रचार प्रसार और संवाद पूरा हुआ। अब बच्चियों के लिए 6 months सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम 14 अप्रैल 2016 से शुरू हो रहा है, गाँव वालों का अपनापन आज भी बरक़रार हैं, सही कहते हैं कि असली भारत गांव में ही बसता हैं।

Thursday, April 7, 2016

सरकार का उत्तम प्रयास


सरकार के सराहनीय कदम और दूसरों को इनसे सबक-------
उत्तर प्रदेश---- सरकार का बेहतरीन और सराहनीय पहल और उम्मीद से ज्यादा सफल रही, 1090 वीमेन पॉवर लाइन। अनचाहे कॉल और sms से परेशान लड़कियों से शुरू किया गया इस प्रयास अब नए आयाम तय कर रहा हैं। अब घरेलू झगड़ा, राह चलते किसी का तंग करना, कोई सलाह, कोई पुलिस अधिकारी का नंबर.... सबका एक सोलुशन...1090। बेहतरीन पहल लेकिन और प्रयास की जरुरत। अन्य प्रदेश को इस बारे में विचार करना चाहिए।
बिहार...... बिहार में पूर्णतया शराबबंदी पिछड़े कहे जाने वाले राज्य का अग्रणी कदम। बहुत सारे अपराध और परेशानियों पर नियंत्रण, लेकिन इसका तोड़ भी निकाला जा रहा होगा। प्रशंशनीय कदम, अन्य प्रदेश को सोचना चाहिए इस बारे में।
दिल्ली..... देश राजधानी दिल्ली, एक केंद्र शासित प्रदेश, माननीय केजरीवाल जी की पहल.... मोहल्ला क्लीनिक  एक उत्तम प्रयास। जिसकी प्रशंसा यूनाइटेड एस्टेट ने भी की हैं। पहल अच्छी है, बहुतों को मदद मिलेगी, बशर्ते सही से लागू हो,अन्य प्रदेश को सबक लेना चाहियें

Wednesday, April 6, 2016

ध्यान


मनुष्य एक नायाब तोहफा है, परमात्मा का इस धरती पर। उसे सर्वसमर्थ और बुद्धिमान बना के भेजा है, ताकि वो उत्तम सृष्टि की रचना कर सकें। मनुष्य (स्त्री और पुरुष) को परमात्मा ने सारे गुणो से नवाजा हैं-- प्रेम, त्याग, तपस्या, समर्पण, जनकल्याण और इन सब के साथ ही अहंकार, स्वार्थ, लोभ, मोह। ताकि इन सबसे एक उत्तम सृष्टि की रचना कर सकें, लेकिन अब परमात्मा प्रदत्त सृष्टि में मनुष्य स्वार्थी हो चला है, वो सभी गुणों को अपने हित के लिए ही साध रहा हैं।
अब मनुष्य एक रोग हो चला है, अब जरुरत आन पड़ी इस रोग को पहचानने और इसके चिकित्सा की। इस "मनुष्य" नामक रोग दो तरीके से हो रहा हैं--1-- बाहरी 2--- आतंरिक। औषधि से हम बाहरी रोग का निवारण कर रहे हैं और नित नए उपाय भी खोजे जा रहे हैं। आतंरिक रोग का निवारण "ध्यान" है और निशुल्क भी। समाज में फैल रहा जहर इस गंभीर बीमारी का घोतक है। उस परमात्मा को याद करे कुछ क्षण, एक अद्भुत, अलौकिक आनंद की प्राप्ति होगी, ये स्वार्थ, लोभ, मोह, छल, अहंकार का स्वत हो जायेगा और हम स्व की प्राप्ति करेंगे, ये"स्व" परहित की भावना लिए हुए होगा। तो चले आधात्मिक शांति और आतंरिक रोग समाप्त करने के लिए ध्यान की ओर.....

##चलो ध्यान की और##

Tuesday, April 5, 2016

रिश्तों के बदलते हुए आयाम


रिश्तों के बदलते हुए आयाम
रिश्ते समाज को चलाने के लिए बहुत जरुरी होते हैं। पति-पत्नी, बच्चों से परिवार और परिवार से समाज का निर्माण होता हैं। एक अच्छा समाज ही एक अच्छे देश का निर्माण कर सकता है। परिवार समाज और देश की धुरी है। अच्छे व्यक्ति के निर्माण के लिये अच्छे आचार, विचार, संस्कार, शिक्षा-दीक्षा का होना जरुरी हैं, ताकि वह परिवार का, समाज का और देश का दायित्व निर्वाह कर सकें।
वर्तमान समय में रिश्तों के मायने बदल रहे हैं। युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता को अपना रही है और माननीय न्यायालय ने युवाओं के हक़ में बहुत सारे कानून भी बना दिये हैं। ये सारे अधिकार और स्वछँदता उन्हें उनकी तरक्की के लिए दिये गए हैं, लेकिन उसके दुष्परिणाम निकल कर सामने आ रहे हैं। युवा कैरियर को पाने, रिश्तों की उधेड़बुन,आगे बढ़ने की अंधाधुंध दौड़ में चल रही है, जिसमे वो सही और गलत का फर्क भूल जाते हैं और मनवांछित परिणाम ना आने पर डिप्रेशन, अवसाद, मानसिक रोग, आत्महत्या, मर्डर जैसे गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं, युवा पीढ़ी में आत्म- संयम, आत्म-नियन्त्रण, सहनशीलता, धैर्य खत्म हो चुका हैं, जोकि हर इंसान के सफल और संतुष्टि प्रद जीवन के लिए बहुत जरुरी है। कैरियर की असफलता, रिश्तों का टूटना और कडुवाहट के चलते गलत कदम उठा रहे हैं, इससे उनका दर्द तो खत्म हो जा रहा है, लेकिन परिवार और समाज के लिए असहनीय दर्द छोड़ जाते हैं।
आज के परिदृष्य में माँ-पिता का दोस्ताना व्यवहार, कोई परेशानी होने पर counsellor और doctor से सलाह लेना जरुरी हो गया है, समय पर समस्या का निदान हो सकता हैं। युवाओं की गला-काट दौड़ में माता-पिता का ये दायित्व बन चुका हैं कि बच्चों की परेशानियों में काउंसलर बनकर मदद करें, ताकि वो गुमराह होने से बचे, क्योंकि युवा पीढ़ी पर ही देश का दारोमदार टिका हुआ हैं।

Saturday, April 2, 2016

रिश्ते


हमने लिव इन जैसी पाश्चात्य सभ्यता ग्रहण तो कर ली, लेकिन भारतीय मूल्यों में लपेट कर, हम बड़ी हस्तियों और फिल्मी दुनिया को छोड़ दे तो ऐसे रिश्ते दोस्ती से शुरू होते हैं और आपसी समझ से शादी का कमिटमेंट पर लिव इन पर आते हैं। यदि इनमे से कोई एक निकलना चाहे तो परिस्थितियां गंभीर हो जाती हैं। ऐसे रिश्तों में हम ऐसी डगर में चल पड़ते हैं कि दोस्त छूट जाते हैं और शादी ना होने पर सामाजिक और पारिवारिक प्रताड़ना झेलने का डर धीरे धीरे अवसाद में धकेलता हैं और हम लाइव इन पार्टनर को वापस पाने की कोशिश में मानसिक रूप से टूटने लगने हैं और ऐसी स्थिति में व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है, अगर दोस्त और परिवार का साथ मिल जाये तो ठीक.... नहीं तो क्षण क्षण मरता एक इंसान आखिर में आत्महत्या का सहारा लेता हैं। दीर्घकालिक परिस्थितियों से उपजी पीड़ा का क्षण भर में निदान हैं आत्महत्या।
जैसा मीडिया में आया कि प्रत्युषा बनर्जी की व्हाट्स एप्प स्टेटस उसकी बुरी स्थिति दर्शा रहा था, फिर भी किसी भी दोस्त और परिवार का ना ध्यान देना बताता हैं कि रिश्तों में कितना स्वार्थ आ गया हैं।
##दुखद घटना##

Friday, April 1, 2016

कानून में बदलाव

जयपुर में 12 साल की बच्ची के साथ अन्नाय में सहभागी बन रही हैं, पुलिस पर पत्रकार संघ, समाज सेवक और सोशल मीडिया के दवाब के चलते दोषी ACP को suspend करके नया अधिकारी लाया गया है और फिर से जाँच चल रही हैं और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया गया हैं। मगर ये क्या ये नैतिक रूप से गलत नहीं है कि बच्ची फिर से सवालों का जवाब दे, ये मानसिक पीड़ा देना नाबालिग बच्ची को, क्या कानून इज़ाज़त देता है? अगर देता है तो बदले ऐसा कानून, दोषी कोई और, पेशी बार बार भुक्तभोगी की।

Wednesday, March 30, 2016

warning


एक किस्सा आज का.... एक पुलिस भाई साहेब, कल हमने उनको टैग किया था, जयपुर वाले न्यूज़ पर जिसमें पुलिस की आलोचना थी। इनको बुरा लगा बस फिर क्या था....... शुरू बकवास msg, हम बोले देखो भाई वर्दी में ये शोभा नहीं दे रहा है और जरा हमारा प्रोफाइल तो देखो, बोले क्या कर लोगी, जल्दी करो, गिरफ्तार करवायो, हम इन्तज़ार में हैं, ड्यूटी जाने में देर हो रही है.... और हम भी कोई कम थोड़े ये सब रोज की ही बात हैं, कर दिया कंप्लेन, देखते है क्या होता है .......
पेश है उनकी कुछ बानगी......
Kisme complain krogi ji
Complain kr ke usko meri photo de dena,kis ko bhej rhi ho arrest krane ke leye,Bhejo yr jaldi buejo fir mai duty ja rha hu nhi milunga ,Kya hua bolo yr kaha chali gayi ji

करने को तो ब्लाक कर सकते थे लेकिन हम देखना चाहते हैं कि ये लोग क्या क्या सद्भावना वाले काम करते हैं

Tuesday, March 29, 2016

इंसाफ की दरकार


पुलिस प्रशासन द्वारा इंसानियत हुई शर्मसार

जयपुर(राजस्थान) के एक गाँव में सौतेली माँ के बुलाये गए कुछ लोगों ने एक 12 साल की मासूम बच्ची के साथ यौन दुव्र्यवहार(sexual harrasment) जैसी घिनौनी हरकत पर कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही हैं। ये बात नवंबर दिसंबर 2015 की है। तीन मासूम बच्चे अकेले हैं, माँ गुजर चुकी है और पिता जेल में हैं तो पीठ पीछे सौतेली माँ ने ये कांड रचाया। पिता के मित्र द्वारा खाना पीना मिल जाता है बस, केस वापस लेने के लिए बच्चों पर दबाव बनाया जा रहा हैं। एक पत्रकार राशिद जी द्वारा मिली सुचना पर मैंने खुद बात की, शैतानों द्वारा सताई गयी बच्ची के भाई जो खुद 16 साल का नाबालिग बच्चा है, का कहना हैं" लोग फ़ोन करके गालिया देते हैं, केस वापस लेने के लिए धमका रहे हैं, स्थानीय पुलिस केस वापस लेने के लिए दबाव डाल रही हैं, पुलिस कहती हैं कि लड़की झूठ बोल रही हैं और भाई को भी 2-3 दिन जेल में रखा हैं।" ये बच्चा सबसे मदद की गुहार कर रहा हैं, मीडिया में खबर आई थी मगर कन्हैया और ओवैसी जैसी प्राथमिकता मिलती तो शायद इंसाफ मिल चूका होता। मैंने इन बच्चों के लिए women and child right Department jaipur बात की और डिटेल भेजी है, देखते है कि यहाँ कोई सुनवाई है या महज दिखावे के लिए ही है। " जब कानून के रखवाले कानून का गला घोटे,अपराधियों को सुरक्षा दे, तो उस समाज का भविष्य क्या होगा?? समझ नहीं आता कि पुलिस अपने आप को क्या साबित करना चाहती है? मीडिया से प्रार्थना हैं कि एक जुट होकर इन बच्चों को न्याय दिलवाये इससे पहले कि कोई अनहोनी हो, बच्चे बहुत दहशत में हैं।

Sunday, March 27, 2016

जिम्मेदारी

अभी कुछ दिन पहले एक सरकारी बिल्डिंग मैं हज़रतगंज जैसे एरिया में बिल्डिंग के बाहर एक जुड़ा पार्क बिना गेट का, नो एंट्री। पांच कॉलेज गोइंग बच्चे वहा बैठ कर गुजरती हुइ गर्ल्स पर कमेंट्स कर रहे थे। पुलिस शिकायत पर पता चला कि वे मंत्रियों के बच्चे थे। ना मैन एंट्री पर गॉर्ड को पता ना ही बिल्डिंग में बने ऑफिस वालो को। कितना असुरक्षित है हमारा समाज कि किसी रेस्ट्रिक्टिएड एरिया में कोई बैठा है हमें पता ही नहीं।।

सभ्यता

बेहद ही भीड़भाड़ वाले जगह से होकर निकल रही थी, रिक्शा पर थी। ट्रैफ़िक ज़ाम था, रिक्शा वाला निकलने की पूरी कोशिश मे था, तभी एक कार वाले भाई साहेब जोर जोर से हॉर्न देने लगे, जबकि आगे जाने की जगह नहीं थी, मुझे और उन्हें दोनों को दिख रहा था। मैं पीछे को पलटे तो देखा भाई साहेब बहुत गुस्से में हॉर्न दिए जा रहे थे और साथ ही लिप्सिंग कर रहे थे.. बेवकूफ बेवकूफ। क्योंकि उन्हें वही पार्क करनी थी जहा रिक्शा वाला खड़ा था। अरे भाई जगह खाली होगी तब न आगे जायेगा ये रोब कहे का......

मंज़िल


जिंदगी का कटु सत्य, जब कुछ नैक करने घर से निकले,
राहो में सबने रोड़ा अटकाया,
मुश्किले हजार खड़ी की,
लेकिन मज़बूत इरादों ने डिगने ना दिया,
हम चलते रहे मंज़िल पाने की ओर।।

रिश्ते


ये रिश्तों का खोखलापन ना प्यार ना मधुरता,
बस निभाने की कवायद साथ चलने की मजबूरी।
दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है नया जमाना आ गया है,
रिश्तों के मायने बदल गए है क्योंकि सब एडवांस हो गए है।।

कलह


गाँव में रास्ते से गुजर रही थी मंज़िल की तरफ। आज प्रोग्राम था हमारा प्राइमरी स्कूल में। तभी अचानक चलते चलते पाव रुक गए, एक ग्रामीण महिला ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी, क्योंकि उसका पति उसे हाथों औऱ पैरों से मार रहा था और गलियां भी दे रहा था, वो स्त्री भी अपने पति के माँ, बहनों को गाली दे रही थी। शायद कोई पारिवारिक झगड़ा था। लोग इकट्ठा हो रहा था। मेरा मन कर रहा था जाकर कहू कि मार क्यों रहे हो, कोई दिक्कत है तो आपस में बातें करो। तभी उसने पास से एक हरी डंडी उठाकर और ज़ोर जोर से मारने लगा, सभी तमाशा देख रहे थे कोई कुछ नहीं कह रहा था। महिला पर इस तरह से सरेआम हिंसा और हमारा कानून कहाँ किन किताबों में छुपा हुआ हैं, कौन करेगा ऐसे लोगों के साथ इंसाफ़। उस स्त्री को तो शायद ये भी पता नहीं था कि महिलाओं पर हिंसा करना कानूनन अपराध हैं। तभी एक सज्जन बोले तो दुर्जन वृद्ध बाइक से निकले, कुछ देर तमाशा देखा फिर बोले "डंडे से नहीं हाथों और पैरों से ही मारो"। मैंने वहां से हटना उचित समझा, क्योकि कई बार ऐसे मौके पर विरोध कर, पुलिस बुलाकर मैं बहुत चर्चित हो चुकी हूँ। मैं अपने गंतव्य की तरफ बढ़ गयी। पर सोचती रही कि ऐसी घरेलू हिंसा को बस महिलाओ को जागरूक करके, कानून बताकर ख़त्म की जा सकती हैं।

स्त्री माँ हैं, पालिका हैं
गृहलक्ष्मी हैं, बेटी है, बहन है।
फिर ये दुर्दशा क्यों, भूल गयी हो क्या तुम
ऐ नारी अपना ये रूप, सबला से अबला कैसे।
तोड़ो समाज की बेड़ियाँ, बनाओ खुद को सशक्त इतना कि हो नारी होने पर अभिमान।।

Nari shakti


हम दुर्गा हैं, हम काली हैं,
हम झांसी की रानी और रजिया सुल्ताना हैं।
किस से डरना, जिसे जन्म हमने दिया,
वो हम पर ही अत्याचार करे।
ना ना ये ना होगा, क्या नारी तूने कोई अपराध किया।
क्यों सुनती हैं, क्यों सहती हैं
खुद की तू पहचान कर,
हक़ से जीने का अधिकार मांग।।

Justice for Dr Narang & his family


डॉ नारंग की हत्या देश की राजधानी में इससे पता चलता हैं कि अपराधी कितने बेखौफ हो गए है, उनका मनोबल कितना बड़ गया हैं । किसी कॉलोनी में घुस के कोई इस तरह पीट पीट कर मार देता है एक व्यक्ति को छोटी सी बात पर, ये दर्शाता है कि लोग कितने असहनशील और निर्दय प्रवत्ति के हो रहे है, दूसरी बात एक एरिया में बाहर से कुछ लोग आते है हिंसा फैलाने कोई विरोध नहीं करता, इंसानियत एक बार फिर से शर्मसार हुई हैं वरना क्या मजाल की कोई हाथ भी लगा दे, जब कोई हादसा अपने साथ होता है तो हम कहते है कि पब्लिक को साथ देना चाहिए और जब कुछ गलत होते देखते है तो मौन? ये कैसा पहलू है इंसानियत का, बेहद ही शर्मनाक।
खैर जो होना था, हो गया अब इंसाफ की दरकार है सरकार से, बालिग हो या नाबालिग सजा मिलनी चाहिए और पीड़ित परिवार को मुआवजा, बच्चे की पढ़ाई का खर्चा सरकार उठाये, सरकारी नौकरी दे और किसी सुरक्षित स्थान पर रहने की जगह। और एक बात इस बार नाबालिग के नाम पर किसी को नया नाम और सिलाई मशीन नहीं मिलनी चाहिए। ये नाबालिग अपराध बढ़ता ही जा रहा हैं, इस पर सख्त कार्यवाही की जरुरत हैं, वरना देश का भविष्य अपराधियों के नाम होगा।
##Justice for Dr. Narang & his family##

Saturday, March 26, 2016

संघर्ष

 वो स्याह काली रात थी, शायद जिंदगी की भी काली रात जब सब कुछ लुट गया था उसका, पति जो नयी दुल्हन ले आया था, अब दो मासूम बच्चों के साथ कहा जाये कुछ सूझ नहीं रहा था पति ने तो धक्के मारकर दरवाजा बंद कर लिया था। मायके वाले भी इतने अमीर ना थे कि उनसे सहारा मांगती, यही सब सोचते सोचते रात हो गयी, बच्चे तो भूखे पेट सो चुके थे। भोर होने के साथ वो हिम्मत के साथ उठ खड़ी हुई कि हार नहीं मानेगी और किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएगी। उसकी पोटली में माँ के दिए कुछ गहने थे, उसने उसे बेच कर एक किराये पर छोटा सा कोठरी नुमा घर लिया और घर घर जाकर काम माँगा, जिससे उसे कुछ अच्छी जगह पर काम मिल गया, दिन रात मेहनत करके बच्चों का स्कूल में एडमिशन करवाया। अब सब कुछ ठीक होने लगा था। बच्चे बड़े होने लगे, एक बेटा और एक बेटी दोनों ही उसके जान थे। अब बस उनकी पढ़ाई ख़त्म होने और नौकरी लगने का इंतज़ार कर रही थी, फिर वो घर में ही रह कर आराम करेगी बहुत काम कर लिया, अब शरीर साथ ना दे रहा था। ये सब सोच ही रही थी कि तभी बेटा मिठाई लेकर माँ माँ चिल्लाता हुआ अंदर आया। उसने कहा क्या हुआ क्यू चीख रहा हैं। अरे माँ..... तुम्हे पता हैं कि तुम्हारे इस बेटे ने इंजीनियरिंग टॉप की हैं। माँ के मुँह में मिठाई खिलाते हुए बोला, तभी बेटी मुँह लटकाकर अंदर आई तो भाई ने कहा इसे क्या हुआ? उसने कहा मुझे अमेरिका की एक कंपनी से कॉल लेटर आया है, तो भाई ख़ुशी से चीखा और बोला ये तो ख़ुशी की बात हैं। उसने कहा कि मुझे तुम लोगों से इतनी दूर  नहीं जाना। माँ के ख़ुशी से आंसू निकल पड़े कि इतनी मेहनत और संघर्ष आखिर रंग लायी अब जल्दी से दोनों का व्याह कर तीर्थ यात्रा पर निकल जाउंगी और उठ पड़ी भगवान के आगे दीपक जलाने।

हास्य व्यंग


हास्य व्यंग्य

हमें समझ कभी नहीं आया कि इ लोगे इत्ती जल्दी केएस तरक्की पाये गए जरूर कौनो फिक्सिंग होइहैं, यहाँ हम डिग्री लेकर आज तक किसी कंपनी के सीईओ न बन पाये और बताओ कि चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन गया और तो और अभीन अभी न सुनने में आया था कि smirti जी होटल में बर्तन धुलती थी अब तो भैया कौनो जुगाड़ करके उ होटल का पता दे दो ताकि वही जाइ के बर्तन धूल कर कम से कम शिक्षामंत्री तो बन ही सकी

देशभक्ति

गुलामी की जंजीरों में है इस बार भी, लेकिन इस ये विदेशी नहीं देश की अंदरुनी ताकत है, जिसे हम नाम राजनीति का देते है, जिसमे कन्हैया और रेप के दरिंदगे बचाये जाते हैं, कभी नाबालिग कह कर और कभी अभिव्यक्ति की आजादी, ये जवाब दे सकते हैं माननीय मोदी और माननीय केजरीवाल की जिस पर हैं देशद्रोह का अपराध और जो जमानत पर है, वो कैसे संबोधित करता हैं इलाहाबाद की यूनिवर्सिटी, कब कहा गयी वो नेता जिन्होंने रोक था आगे बढ़ कर किसी को , जवाब दे केजरीवाल जी कि हम अपने देश में अपनी नहीं तो क्या विदेशी जीत की ख़ुशी मनाये, अब कहा गयी अभिव्यक्ति की आजादी।।

Friday, March 25, 2016

murder's of doctordoctor family


आज समाज बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है, बात बात पर राजनीति, अपराधियो को शरण और आम आदमी तो गाजर मूली की काटे जा रहे है, अब तो देश की राजधानी तक ना सुरक्षित रही हैं। ये बहुत ही निंदनीय वक्त है, इस पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। अब वक्त आ गया है कि आम जन खड़ा होकर अधिकारों की , सुरक्षा की न्याय की मांग करे और देश के ठेकेदारों को ये बात याद दिलाये कि वो देश के सेवक हैं, समाज की जिम्मेदारी है उन पर, अपने कर्तव्यों का पालन करें।
Dehli me huwe dukhad gahatna par shok aur unke liye shanti ki prarthana.

Monday, March 21, 2016


जीवनसाथी

दोनों अपनी ही अपनी बोले जा रहे थे, कोई सुनने को ना तैयार था, झगड़ा बढ़ता ही जा रहा था, अचानक पति बोला-" तलाक दे दो", पत्नी ने कहा सही कह कह रहे हो मैं भी यही सोच रही थी। फिर दोनों अपने अपने कमरें में चले गए। रीना बेटे के पास बैठ गयी और सोचने लगी कि अब तो मैं अच्छा कमाने लगी हूँ, अलग होने पर कोई दिक्कत नहीं आएगी, बस अब बर्दाश्त नहीं करुँगी। सारा दिन घर, ऑफिस, बच्चा और ऊपर से रिश्तेदार, सब कुछ निभाते निभाते मशीन बन गयी हूँ, फिर भी पति के पास 5 मिनट नहीं है मेरे लिए और ना प्यार के शब्द। एक वो समय था कि बस प्यार ही प्यार, वक्त ही वक्त समय भी कितना जल्दी बदलता हैं। अचानक बेटा उठ बैठा--- अरे! माँ रो क्यों रही हो? पापा ने फिर कुछ कहा क्या? अभी बात करता हूँ, उठने लगा.....। रीना हाथ पकड़ कर बैठाते हुए बेटा कुछ नहीं हुआ.... हँसते हुए । फिर सोचने लगी कि कृष्णा समय से पहले ही बड़ा हो रहा है, उसके मानसिक विकास पर असर पड़ेगा। जल्दी ही कोई फैसला लेगी।
उधर शांतनु सोच रहा था कि अब उसे रोज रोज की किच किच से मुक्ति चाहिए कुछ भी हो। सारा दिन ऑफिस की टे न्शन, टारगेट, बॉस की फटकार और फिर घर आते ही-- ये करो वो करो, मार्केट जाऊ, ये भी कोई जिंदगी हैं कही सुकुन नहीं। अब तलाक ही हल हैं इस कलह से मुक्ति का, बस खर्च ही उठाना पड़ेगा, अब तो अच्छा कमाने लगा हूँ।
नन्हा सा बच्चा कृष्णा सोने का बहाना करते हुए रो रहा था क्योंकि उसने माँ पापा की बात सुन ली थी। अगर माँ पापा अलग होते हैं तो फिर वो माँ के पास.... या पापा....। एक को छोड़ना, एक के साथ रहना... नहीं नहीं मुझे दोनों चाहिए। क्या माँ पापा मेरे लिए मैनेज नहीं कर सकते है? मुझे माँ पापा का पैसा, गिफ्ट नहीं चाहिए, प्यार चाहिए......।

रीता शर्मा