गुलामी की जंजीरों में है इस बार भी, लेकिन इस ये विदेशी नहीं देश की अंदरुनी ताकत है, जिसे हम नाम राजनीति का देते है, जिसमे कन्हैया और रेप के दरिंदगे बचाये जाते हैं, कभी नाबालिग कह कर और कभी अभिव्यक्ति की आजादी, ये जवाब दे सकते हैं माननीय मोदी और माननीय केजरीवाल की जिस पर हैं देशद्रोह का अपराध और जो जमानत पर है, वो कैसे संबोधित करता हैं इलाहाबाद की यूनिवर्सिटी, कब कहा गयी वो नेता जिन्होंने रोक था आगे बढ़ कर किसी को , जवाब दे केजरीवाल जी कि हम अपने देश में अपनी नहीं तो क्या विदेशी जीत की ख़ुशी मनाये, अब कहा गयी अभिव्यक्ति की आजादी।।
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