पिछले 24 घंटे से हम एक विडीयो देख रहें हैं जिसमे बुर्का पहने एक लड़की कॉलेज में आती हैं और उसके आते ही पहले से ही तैयार छात्रों का समूह उसे देखते ही जय श्री राम का नारा लगाता है,, ये उसी कॉलेज के छात्र है ये उनके यूनिफॉर्म से पता चल रहा है और जवाब में बुर्का पहने लड़की जिसका नाम मुस्कान खान है अल्लाह हूं अकबर का नारा देती हैं... वीडियो को देखकर एक पल के लिए ऐसा लगता था कि जैसे साबित करना है इन छात्र छात्राओं को अपनें अपने धर्म, पहनावे को। ये वीडियो कर्नाटक के मंड्या जिले के प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज का है,
दरसअल विवाद तब शुरू हुआ जब कर्नाटक के उडुपी जिले के एक सरकारी प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज में हिजाब पहनकर आई छात्राओं पर रोक लगाया गया. अब ये मामला तुल पकड़ चुका है, कर्नाटक में ही कई जगह हिंसक प्रदर्शन हुए हैं, देश के कई हिस्सों में भी इस पर चर्चा कम विवाद ज्यादा चल रहा है, ट्विटर पर भी हिजाब के पक्ष, विपक्ष में ट्रेंड कराए जा रहे हैं l
मामला कर्नाटक हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है, जहां सुनवाई के दौरान उन्होने छात्रों से शांति, सौहार्द बनाए रखने की अपील की है l देश के पांच राज्यों में चुनाव से ठीक पहले हिजाब विवाद राजनीति से भी प्रेरित लग रहा है.. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के इस स्टेटमेंट के बाद अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती है चाहे वो हिजाब हो, घूंघट हो या बिकनी.. माहौल और भी गर्म हो गया है, जबकि पिछले दिनों हुए प्रयागराज में बेटी के साथ बलात्कार, हत्या पर खामोश रही थी और ख़ासकर राजस्थान, अलवर में हुए एक मूक बधिर बेटी के साथ रेप, बर्बरता को पुलिस एक्सीडेंट का रूप देने की कौशिश में थी, FSL की रिपोर्ट में बलात्कार होने की पुष्टि हुई है, बेटी को न्याय नही मिला है और प्रियंका गांधी चुप है, ये हमारे नेतागण भी चुनाव और अवसर देखकर न्याय दिलाने के लिए खड़े होते हैं... स्कूल और ज्यादातर कॉलेज में ड्रेस कोड होता है और हम सबने उसका पालन भी किया है.. ये हिजाब विवाद भी कॉलेज प्रशासन और छात्राओं के बीच है इसे वही सुलझाना चाहिए और नेतागण को अपनें फायदे के लिए कम से कम शिक्षा को तो राजनीति के घेरे में नही ही लाना चाहिए । धार्मिक आधार पर, पहनावा के आधार पर बटवारा करके पढ़ाना और फिर " हम एक है " कि बात कहना मुश्किल होगा, नफरती माहौल में कम से कम स्कूल कॉलेज में धर्म के आधार पर बटवारा नही ही होना चाहिए
कर्नाटक सरकार के राजस्व मंत्री आर अशोक ने कहा है कि सरकार हिजाब या केसरिया के पक्ष मे नही है.. छात्र गलियों में जो चाहे पहने लेकिन स्कूल में ड्रेस कोड ही चलेगा l
कर्नाटक के प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन मंत्री बीसी नागेश ने छात्रों के बवाल पर कहा है कि कोई भी कानून को अपनें हाथ में नही ले सकता और बदमाशों को बक्शा नही जायेगा , उन पर एक्शन लिया जायेगा l
सुरक्षा की दृष्टि से कर्नाटक में स्कूल कॉलेज को बंद कर दिया गया है मगर जिस तरह से इस पर राजनीति हो रही है तो मामला थमने का नाम नही ले रहा है.. इसमें तमाम ऐसे स्त्री, पुरुष बुद्धिजीवी भी कूद पड़े हैं जो अनुशासन की बात करते थे, जिनके खुद के पहनावे बेहद ही आधुनिक है, जिन्होंने अपने जाति, धर्म के सभी बंधन तोड़े है, बेवजह धार्मिक पहचान को ओढ़ने वालो को ज्ञान दिया है वो भी ट्विटर, फेसबुक पर आकर "अपनी मर्जी के कपड़े पहनने की बात"कहकर स्कूल के नियमों को भी ताक पर रख रहें हैं... मर्जी से अगर खुद को ढकना ही है तो घर में, बाहर, स्कूल पहुंचने तक ढकने की आजादी किसी ने छीनी थोड़े ही है बस स्कूल नियमों के तहत ही अंदर प्रवेश करने से मना कर रहा है... लडकियों के पास रास्ता है कि गेट पर हिजाब, नकाब उतार सकती है और जाते वक्त पहन सकती है... क्यू कि स्कूल एक ऐसी संस्था है जहां मानसिक, बौद्धिक विकास किया जाता हैं तो छात्र या उनके माता पिता अपनी बुद्धि नही ही सौप सकते हैं l मामला कोर्ट में है तो निर्णय के आधार पर ही मुस्लिम बेटियों को स्कूल कॉलेज के अंदर नकाब, हिजाब पहनने की सहूलियत दी जाएगी या नहीं ये वक्त के साथ पता चलेगा लेकिन तब तक चुनावी माहौल में धर्म का करारा छौंक लगने से सियासी दलों को फायदा मिल जाने वाला है l