Monday, January 27, 2020
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मन बड़ा व्याकुल सा है
Saturday, January 18, 2020
जाने NCRB की रिपोर्ट के अनुसार अपराध का स्तर
जानें, राष्ट्रीय आपराधिक रिकार्ड ब्यूरो
NCRB की ताजा रिपोर्ट 9 जनवरी 2020 को आई है, जिसमें आकड़े चौंकाने वाले हैं.

बाल अपराध – रिपोर्ट कहती हैं कि 2018 में 1 लाख 40 हजार से ज्यादा अपराध हुए हैं. अगर इसे प्रतिदिन के हिसाब से देखे 388 अपराध हर दिन हुए है जो कि बहुत अफसोस जनक है .
CRY ( Child Right and You) NRCB की रिपोर्ट पर अपने अध्ययन में कहती हैं कि बाल अपराध में सबसे ज्यादा मामले अपहरण और जोर ज़बरदस्ती के है जो पिछले साल की तुलना में लगभग 16% बढ़े हैं. वही पास्को ( Protection of child from Sexual Offences) के अंतर्गत दूसरे सबसे ज्यादा अपराध 39,827 मामलें दर्ज हुए हैं जिसमें 9312 केस रेप के दर्ज हुए हैं.
पॉलिसी रिसर्च की डायरेक्टर प्रीति मेहरा का कहना है कि “जहां एक तरफ बाल अपराध की संख्या में वृद्धि हुई है वही दूसरी इन मामलों में रिपोर्ट का दर्ज होना ये दर्शाता है कि खुद लोग और सरकार इन आपराधिक मामलों में सचेत हुई है l”
बाल अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार का नाम सबसे ऊपर है जहां 51% अपराध होते हैं और इन सभी प्रदेशों में उत्तर प्रदेश का नाम सबसे ऊपर आता है l
महिला अपराध – NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक हर 15 मिनट में एक रेप का मामला देश में दर्ज हो रहा है l 2018 में लगभग 34,000 रेप के मामले सामने आए, पिछले वर्ष की तुलना में अपराध में वृद्धि हुई है l
महिला अपराध में बढ़ोतरी की एक वजह पुलिस और कानून का सख्त न होना भी है l जैसा कि पिछले साल कुलदीप सिंह सेंगर का रेप केस सामने आने पर पुलिस ने पीड़ित के ही परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था l
किसानों की आत्महत्याएं.. रिपोर्ट के मुताबिक 10,349 किसानों ने आत्महत्या की है.. फसल खराब होने, बढ़ते कर्ज या अन्य कारणों के चलते
साम्प्रदायिक/ जातीय दंगे – पिछले कुछ महीनों में प्रोटेस्ट और उस दौरान हिंसा भी सामने आ रही है जो कि एक गलत शुरुआत है l जातीय और साम्प्रदायिक दंगे पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज हुए हैं l
मेट्रो शहरों में अपराध में बढ़ोतरी – रिपोर्ट के मुताबिक मेट्रो शहरों में अपराध के मामलों में दिल्ली सबसे ऊपर है जहां दिल्ली में 29.6 प्रतिशत है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और विशेष व स्थानीय कानून (एसएलएल) शामिल हैं l
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक साल दर साल अपराध, हिंसा में बढ़ोतरी ही हो रही है l सरकार को इस पर अध्ययन कर अपराध के कारण और रोकथाम के उपाय को लागू की जरूरत है और साथ ही पुलिस प्रशासन को आपराधिक मामलों में सचेत रहने और संवेदनशील होने की जरूरत है.. ताकि हर अपराध record हो सकें और FastTrack कोर्ट के माध्यम से एक समय सीमा के अंदर न्याय मिलने से कहीं न कहीं अपराध में कमी आएगी l 2012 का दिल्ली का सबसे क्रूरतम अपराध गैंगरेप पर अब 7 साल बाद फांसी की सजा तय की गई l न्याय में विलंब और अपराध को छुपाया/दबाया जाना भी अपराध होने की वजह है l हम सबको अपराधी का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए भले ही वो किसी भी परिवार या तबके से आता है.. राजनीति में भी आपराधिक व्यक्तियों का बहिष्कार जरूरी है.. वोट देते समय जांच पड़ताल जरूर करनी चाहिए ताकि अपराधी को भी अपराध करते समय सामाजिक बहिष्कार का डर सताये l
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Thursday, January 16, 2020
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लिव इन रिलेशनशिप : नैतिकता Vs जरूरत
लिव इन का साधारण सा मतलब है कि बालिग हो चुके लड़के और लड़की सहमति के आधार पर एक साथ एक छत के नीचे रह सकते हैं, जहां संबंध उनकी मर्जी पर ही बिना शादी के बंधन में बंधे होते हैं .
लिव इन रिलेशनशिप, जो मूलतः पश्चिमी देशों का चलन है. अब भारत में भी तेजी से चलन में आ रहा है . लिव इन महानगरों में शौक में कम जरूरत पर ज्यादा आधारित होता है. लिव इन का साधारण सा मतलब है कि बालिग हो चुके लड़के और लड़की सहमति के आधार पर एक साथ एक छत के नीचे रह सकते हैं, जहां संबंध उनकी मर्जी पर ही बिना शादी के बंधन में बंधे होते हैं .
अगर पारम्परिक भारत की नजर से देखा जाए तो अनुचित और गलत शुरुआत लगती है. मगर इसे महानगरों के सन्दर्भ में देखे तो अब भागमभाग जिंदगी में ऐसे रिश्ते एक जरूरत से बन गए हैं. शहरों में नौकरी और पढ़ाई के लिए आए युवक/युवतियों की जरूरतें ज्यादा और पैसे कम होते हैं जहां आसानी से वो अपने मेल पार्टनर के साथ किराये के साथ हर खर्चे को बांट सकती है .
लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग कई बार विवाह भी करते हैं . इसके साथ एक और परंपरा खासकर फिल्मी जगत में चल पड़ी है कि शादी से पहले लिव इन में रहकर एक दूसरे को जानने समझने की, बहुत हद तक ठीक भी है मगर लिव इन में रहने के बाद समझ बूझ कर शादी करने पर भी आपका पार्टनर से शादी चल पाएगी इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है.
जरूरत से शुरू हुए ऐसे रिश्ते अब मौज मस्ती और शारीरिक जरूरत को पूरा करने का एक जरिया भी बन चुके हैं. इसमें शारीरिक हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे अपराध भी जन्म लेने लगे हैं . सहमति से साथ आए दो लोग किसी भी छोटी सी बात पर असहमति होने पर आरोप प्रत्यारोप तक बात आ पहुंचती है .
ऐसे रिश्ते की नाजुकता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कानून भी बनाए हैं ताकि सामाजिक अव्यवस्था न फैले. कभी कभी ऐसा भी होता है कि लड़के या लड़की में से किसी भी एक का भावनात्मक लगाव ज्यादा होता है और वो साथ रहना या शादी करना चाहते हैं मगर दूसरा किसी भी बंधन में आने से इंकार करता है तो उस समय एक के लिए स्थिति बहुत विकट हो जाती है या कई बार लोग शादी की बात करके लिव इन रिलेशनशिप में रहने को राजी करते हैं और अपनी यौन इच्छा पूरी करने के बाद छोड़ कर निकलने में गुरेज नहीं करते वजह साफ है कि कोई सामाजिक या कानूनी बंधन नहीं है इसलिए भी कानूनी संरक्षण जरूरी बन जाता है लिव इन रिश्तों पर भी.
आइए कुछ कानूनी पहलुओं पर भी नज़र डालते हैं जो कोर्ट द्वारा तय किए गए हैं –
1. लिव इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा से संरक्षण प्राप्त है मतलब अगर लिव इन पार्टनर मार पीट करता है तो आप कानूनी सहायता ले सकती है .
2. अगर लिव इन से बच्चे का जन्म हो जाता है तो उसे पिता की सम्पत्ति से सभी जायज अधिकार प्राप्त होंगे. हां मगर लड़की को कानूनी रूप से पत्नी का दर्जा नहीं दिया जाएगा. लड़का या लड़की दोनों को ही अपनी शादी करने का अधिकार है. बच्चा किसके साथ रहेगा ये दोनों मिलकर तय कर सकते हैं या कोर्ट भी जा सकते हैं .
3. लड़की भी गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है ये तब तक मिलेगा जब तक लड़की कहीं और शादी नहीं कर लेती या लड़के की मृत्यु हो जाने की स्थिति में भी गुजारा भत्ता बंद हो जाएगा.. लड़के की सम्पत्ति में लड़की दावा नहीं कर सकती .
4. अगर आप विदेश में लिव इन में रह रहे हैं या विदेशी व्यक्ति के साथ रह रहे हैं तो कानूनी संरक्षण भी वही का स्थानीय कानून से ही मिलेगा .
ध्यान रहे कि आपके लिव इन पार्टनर का बालिग होना बहुत जरूरी है मतलब लड़की 18 साल और लड़का 21 साल.. अन्यथा आप को कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है..
अगर लिव इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला लेते हैं तो लड़की और लड़के दोनों को चाहिए कि वो अपनी अपनी priority तय कर ले . एक दूसरे का प्राथमिकता भी चेक कर लें और भविष्य के लिहाज से भी तय कर लें कि शादी के बंधन में बंधना है या नहीं.. स्पष्ट रूप से ये बात एक दूसरे के सामने रखे. शादी के वादे के बाद लिव इन रिलेशनशिप में रहकर शादी से मुकरने पर भी आप पर कानूनी रूप से कार्रवाई हो सकती है. इस बात का हमेशा ख्याल रखे. बाकी सभी रिश्तों की तरह लिव इन भी समाज का चलन बनता जा रहा है तो उसे एक स्वस्थ्य रिश्ते की तरह ही निभाने की बात होनी चाहिए.
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सर्दियों के मौसम में फालो करें ये डाइट
सर्दियों में ऐसे करें अपनी खूबसूरती की देखभाल
5 टिप्स : सर्दियों में ऐसे करें अपनी खूबसूरती की देखभाल
सर्दियों में त्वचा का रूखा सूखा और बेजान होना एक बड़ी समस्या होती है.

त्वचा की देखभाल वैसे तो हर मौसम में करनी होती है लेकिन सर्दियों में त्वचा का रूखा सूखा और बेजान होना एक बड़ी समस्या होती है
यहां हम आपको आसान टिप्स बता रहे हैं जिससे हर वक्त आप खिली खिली नजर आएंगी.
1- चेहरे को हमेशा ठंडे पानी से धोए और नहाने के लिए गुनगुना पानी ही ले. नहाने के तुरंत बाद कोई अच्छा माश्चराइजर लगाए या नहाने के कुछ देर पहले नारियल के तेल से मसाज भी कर सकते हैं . सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें . इसके अलावा नमी बरकरार रखने के लिए गुलाबजल और गिलसरीन मिलाकर एक बोतल में रख दे इसे सोने से पहले चेहरे और हाथ पैरों में लगाए .
2- होठों के लिप बाम या जेल दिन में दो से तीन बार लगाए.. लिपस्टिक लगाने से पहले कोई वैसलीन जेल थोड़ी देर पहले लगा ले .
3- बालों में धोने से दो घंटे पहले औयलिंग जरूर करें.. नारियल का तेल सर्दियों के लिए बेहतर होता है और चाहे तो उसमें थोड़ा नीबू भी मिला ले .
4-सर्दियों में पपीता, केला आसानी से मिलने वाला फल है इसे खाने के साथ साथ चेहरे पर लगा सकते हैं . पके पपीता का एक टुकड़ा, आधा केला और थोड़ा शहद मिलाकर अच्छे से मैश कर ले और चेहरे तथा शरीर के अन्य भागों पर लगा ले, सूखने पर ठंडे पानी से धो ले . पपीते और केले में एंटी आक्सीडेंट, विटामिन ए और अन्य पोषक तत्व होते हैं . ये नमी के साथ साथ एंटी एजिंग का भी काम करते हैं.
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5- इस मौसम में पैरों का भी खयाल रखे.. एड़ियों को स्क्रब से रगड़ कर साफ करें, सोते समय वैसलीन लगाए, साथ ही मोजे पहन कर रखे . घुटने, कोहनी और अन्य सूखी दिखने वाली जगहों पर अलग से दो तीन बार कोई अच्छा क्रीम या मलाई लगा सकती है .
इन सबके साथ ही हर दिन थोड़ा थोड़ा एक्सरसाइज या वाक भी रूटीन में शामिल करें ताकि आप एक्टिव रहे और एक्स्ट्रा कैलोरीज बर्न होती रहे.. ज्यादा ठंड तो घर के अंदर ही योग बेहतर विकल्प है.. बच्चों को भी खेलने दे बस खेलते समय अच्छे से कपड़े पहनाएं.. धूप निकलने पर सुबह 10 से 15 मिनट जरूर बैठे जिससे विटामिन डी मिलेगा जो हड्डियों को मजबूत बनाता है.. अगर घर में बच्चे है तो उन्हें सुबह की धूप जरूर दिलाए और हो सके तो धूप में ही तेल की मसाज करें .
इस तरह आप सभी चिंताओं से मुक्त सर्दियों का खुशनुमा मौसम इंजौय कर पाएंगी .
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