Monday, January 27, 2020

बातचीत को प्रभावी कैसे बनाया जाए



लाइफ स्टाइल
प्रभावी बातचीत के लिए जरूर अपनाएं ये 5 तरीके
किसी की कमी बताना और सुधारना अच्छी बात है लेकिन एक ही बात को बार बार न कहें. अगर कोई वाकई सुधरना चाहता है और आपकी बात को ध्यान से सुन रहा है तो खुद में सुधार अवश्य लाएगा.  
रीटा | January 25, 2020
 


कभी कभी ऐसा होता है कि हम कहीं जाते हैं और किसी से मिलते हैं तो उनसे हुई बातचीत हम बहुत प्रभावित करती है और लंबे समय तक उसे याद रखते हैं. बातचीत करते समय शब्दों के साथ साथ शरीर के हाव भाव दोनों पर ही ध्यान देना होता है.
आइए बातचीत करने के कुछ खास तरिकों के बारे में यहां जानते हैं -

1. ज्यादा निंदा /आलोचना से बचें – किसी की कमी बताना और सुधारना अच्छी बात है लेकिन एक ही बात को बार बार न कहें. अगर कोई वाकई सुधरना चाहता है और आपकी बात को ध्यान से सुन रहा है तो खुद में सुधार अवश्य लाएगा. दो तीन कहने पर भी आपको कोई अन्तर नहीं दिखता तो उसे उसके हालत पर छोड़ देना चाहिए, चाहे घर हो या औफिस..

2. प्रशंसा सबके बीच में करें मगर आलोचना अकेले में – अगर किसी की तारीफ करनी है तो सबके सामने करें. इससे उस व्यक्ति में आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. लेकिन जब उसे किसी बात पर टोकना हो तो अकेले में बुलाकर बोले. भले ही आप औफिस में बौस क्यों न हो. कई बार सामने की डांट इतनी चुभ जाती है कि लोग सालों साल नहीं भूल पाते हैं और कहीं कहीं कलीग भी मजाक बनाते हैं. इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें.

3. बात करते समय सकारात्मक रहें – औफिस हो या घर, जब भी किसी इशू /समस्या पर डिस्कशन चल रहा है तो समस्या और उसकी वजह पर बात करते समय सकारात्मक रहे और समस्या के निदान पर जरूर चर्चा करें. आप की सकारात्मकता दूसरों को भी प्रेरणा देगी और जल्दी ही समस्या से भी मुक्ति मिल जाएगी.

4. बौडी लैंग्वेज पर ध्यान दें– बोलते समय हाव भाव और बौडी लैंग्वेज, आई कानटेक्ट का ध्यान रखे. जब आप किसी से बात कर रहे हैं तो उस समय आपके हावभाव ठीक होने चाहिए. साथ ही आई कानटेक्ट भी होना चाहिए ताकि सामने वाले को भी लगे कि आप उन्हें जानने, समझने में interested है और साथ ही आपका भी अच्छा इम्पैक्ट उस पर जाता है.

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5. बातचीत ध्यान सुने – जब भी कोई आपसे कुछ कह रहा हैं तो उसे ध्यान से सुने, इससे न केवल आप अच्छे listener साबित होंगे बल्कि आपको कुछ न कुछ नया जानने को मिलता रहेगा और हमेशा गुड स्पीकर बनने के लिए गुड Listener होना जरूरी होता है.

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मन बड़ा व्याकुल सा है

मन बड़ा व्याकुल सा है..
अच्छा कम बुरा ज्यादा हैं,
हम जितना हक अधिकार की मांगें करते हैं
उतना ही डाका पड़ जाता है,
ये है कौन जो नज़रे जमा कर बैठा है?
ये है कौन.? जो बात बात पर डंडे चलवाता है?
कानून के रखवालों के हाथ ही
कानून को शर्मसार करवाता है,
शांति की एक सभा में कुछ उदंडो को बुलवाता है
वो आते हैं, कुछ नारे लगाते हैं, कुछ हुड़दंग मचाते है,
कभी आग लगवाते है तो कभी कुछ पत्थर चलवाते है
और फिर शुरू हो जाता है दमन का खेल,
हम नहीं है उस भीड़ के साथ जो हर वक़्त
भूखे भेड़िये सी मौके पर नजरे जमाए रहता है,
फिर भी थाने हमें खींचकर उन्हें छोड़ दिया जाता है
अच्छा, आखिर ये है कौन जो हमें नाच नचा रहा है,
हम क्यू नहीं इनकी पहचान करते हैं
इन्हें भीड़ से अलग करके, आईना दिखाते हैं 
क्यू नहीं हम कोशिशों से अच्छा समाज बनाते हैं..
मन बड़ा व्याकुल सा है
अच्छा कम बुरा ज्यादा हैं l




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रीटा शर्मा

Saturday, January 18, 2020

जाने NCRB की रिपोर्ट के अनुसार अपराध का स्तर

https://www.sarita.in/society/national-crime-records-bureau


जानें, राष्ट्रीय आपराधिक रिकार्ड ब्यूरो

NCRB की ताजा रिपोर्ट 9 जनवरी 2020 को आई है, जिसमें आकड़े चौंकाने वाले हैं.

रीटा | January 18, 2020

बाल अपराध – रिपोर्ट कहती हैं कि 2018 में 1 लाख 40 हजार से ज्यादा अपराध हुए हैं. अगर इसे प्रतिदिन के हिसाब से देखे 388 अपराध हर दिन हुए है जो कि बहुत अफसोस जनक है .

CRY ( Child Right and You) NRCB की रिपोर्ट पर अपने अध्ययन में कहती हैं कि बाल अपराध में सबसे ज्यादा मामले अपहरण और जोर ज़बरदस्ती के है जो पिछले साल की तुलना में लगभग 16% बढ़े हैं.  वही पास्को ( Protection of child from Sexual Offences) के अंतर्गत दूसरे सबसे ज्यादा अपराध 39,827 मामलें दर्ज हुए हैं जिसमें 9312 केस रेप के दर्ज हुए हैं.

 पॉलिसी रिसर्च की डायरेक्टर प्रीति मेहरा का कहना है कि “जहां एक तरफ बाल अपराध की संख्या में वृद्धि हुई है वही दूसरी इन मामलों में रिपोर्ट का दर्ज होना ये दर्शाता है कि खुद लोग और सरकार इन आपराधिक मामलों में सचेत हुई है l”

 बाल अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार का नाम सबसे ऊपर है जहां 51% अपराध होते हैं और इन सभी प्रदेशों में उत्तर प्रदेश का नाम सबसे ऊपर आता है l

महिला अपराध – NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक हर 15 मिनट में एक रेप का मामला देश में दर्ज हो रहा है l 2018 में लगभग 34,000 रेप के मामले सामने आए, पिछले वर्ष की तुलना में अपराध में वृद्धि हुई है l

महिला अपराध में बढ़ोतरी की एक वजह पुलिस और कानून का सख्त न होना भी है l जैसा कि पिछले साल कुलदीप सिंह सेंगर का रेप केस सामने आने पर पुलिस ने पीड़ित के ही परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था l

किसानों की आत्महत्याएं.. रिपोर्ट के मुताबिक 10,349 किसानों ने आत्महत्या की है.. फसल खराब होने, बढ़ते कर्ज या अन्य कारणों के चलते

 साम्प्रदायिक/ जातीय दंगे – पिछले कुछ महीनों में प्रोटेस्ट और उस दौरान हिंसा भी सामने आ रही है जो कि एक गलत शुरुआत है l जातीय और साम्प्रदायिक दंगे पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज हुए हैं l

 मेट्रो शहरों में अपराध में बढ़ोतरी – रिपोर्ट के मुताबिक मेट्रो शहरों में अपराध के मामलों में दिल्ली सबसे ऊपर है जहां दिल्ली में 29.6 प्रतिशत है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और विशेष व स्थानीय कानून (एसएलएल) शामिल हैं l

NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक साल दर साल अपराध, हिंसा में बढ़ोतरी ही हो रही है l सरकार को इस पर अध्ययन कर अपराध के कारण और रोकथाम के उपाय को लागू की जरूरत है और साथ ही पुलिस प्रशासन को आपराधिक मामलों में सचेत रहने और संवेदनशील होने की जरूरत है.. ताकि हर अपराध record हो सकें और FastTrack कोर्ट के माध्यम से एक समय सीमा के अंदर न्याय मिलने से कहीं न कहीं अपराध में कमी आएगी l 2012 का दिल्ली का सबसे क्रूरतम अपराध गैंगरेप पर अब 7 साल बाद फांसी की सजा तय की गई l न्याय में विलंब और अपराध को छुपाया/दबाया जाना भी अपराध होने की वजह है l हम सबको अपराधी का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए भले ही वो किसी भी परिवार या तबके से आता है.. राजनीति में भी आपराधिक व्यक्तियों का बहिष्कार जरूरी है.. वोट देते समय जांच पड़ताल जरूर करनी चाहिए ताकि अपराधी को भी अपराध करते समय सामाजिक बहिष्कार का डर सताये l


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यूपी में कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने के व्यापक मायने

http://marginalised.in/2020/01/17/commissionary-system-to-be-implemented-in-up-and-its-meaning/



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यूपी में कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने के व्यापक मायने…

 January 17, 2020 Marginalised Writer 0 Comments Commissionary system in UP, UP police
Rita Sharma*

यू पी में बिगड़ती हुई कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कमिश्नर सिस्टम को लागू करने के लिए सिफारिश की जाती रही है l इसके पीछे की वजह ये बतायी जाती है कि पुलिस और जिला प्रशासन के बीच सही तालमेल नहीं बन पाता है l
भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के तहत जिला अधिकारी (DM) के पास पुलिस को नियंत्रण करने के कुछ अधिकार होते हैं l CRPC ( दंड प्रक्रिया संहिता), Executive Magistrate को कानून और व्यवस्था को नियंत्रित करने की शक्तियां प्रदान करता है l आसान शब्दों में कहा जाए तो
पुलिस अधिकारी के पास लाठी चार्ज, फायरिंग, धारा 144 लगाने जैसे अधिकार नहीं थे, इसके लिए उन्हें DM या मंडल कमिश्नर या शासन के आदेश के तहत काम करना होता था l
सूत्रों के मुताबिक जवाहरबाग कांड, मुजफ्फनगर सहित सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा से संबंधित रिपोर्ट पाया गया कि जिला प्रशासन और पुलिस के बीच तालमेल ठीक नहीं थे। लेकिन अगर कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाता है, तो पुलिस को जिला प्रशासन से संबंधित मामले में एक्शन लेने के लिए प्रशासन के आदेश मिलने की बाध्यता से मुक्त हो जाएगी। जबकि इसे यूपी में CAA के व्यापक विरोध और उसमें हुई हिंसा और पुलिस द्वारा बल प्रयोग से भी जोड़ कर देखा जा रहा है l
यू पी DGP ओ पी सिंह का कहना है कि अब जनता पुलिस से तुरंत जवाबदेही चाहती है और कई बार तुरंत एक्शन जरूरी होता है जो कि शासन से मिलने पर देरी के चलते गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं l
नयी कमिश्नर प्रणाली 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहरों में होती है तो वही यू पी की आबादी 20 करोड़ से भी ज्यादा है l अभी लखनऊ और गौतम बुद्ध नगर ( नोएडा) में ही इसकी शुरुआत की गई है l
इस कमिश्नरी व्यवस्था आने के बाद पुलिस के पास CRPC के तहत लाठी चार्ज, फायरिंग, धारा 144 लगाने जैसे अधिकार आ जाते हैं l पुलिस को होटल, रेस्त्रां और आर्म्स लाइसेंस जारी करने का अधिकार मिल जाता है l आरोपी पर जुर्माना लगाकर जेल भेजने, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, नारकोटिक्स, एक्साइज से जुड़ी पावर भी पुलिस कमिश्नर के पास आ जाती है l

कौन कौन से पद होंगे कमिश्नरी प्रणाली में?

 इस नयी व्यवस्था के तहत पुलिस कमिश्नर, संयुक्त आयुक्त (ज्वाइंट कमिश्नर JP), डिप्टी कमिश्नर (DCP), सहायक आयुक्त (ACP), पुलिस इंस्पेक्टर (PI), सब इंस्पेक्टर (SI) और पुलिस दल होगा l
इस व्यवस्था में एक महिला SP होंगी l महिला SP खास तौर से महिला सुरक्षा के लिए तैनात होंगी l
पुलिस कमिश्नर शहर में उपलब्ध स्टाफ का उपयोग अपराधों को सुलझाने, कानून व्यवस्था की बहाली, अपराध की रोकथाम और ट्रैफिक सुरक्षा के लिए करेगा l
इस कमिश्नरी व्यवस्था की खासियत त्वरित कार्रवाई और गुणवत्ता पूर्ण जांच और संवेदनशीलता के साथ निपटने में हैं l
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई सहित कई राज्यों में पहले से ही ये व्यवस्था लागू हैं l इस व्यवस्था के तहत जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन को अधिकारों से लैस कर दिया गया है वही उन पर जवाबदेही भी तय की गई है l अब देखने वाली बात ये है कि पुलिस इस कमिश्नरी व्यवस्था के तहत कानून व्यवस्था बहाल करती है और जनता के प्रति संवेदनशील रहती है कि नहीं क्यूकि यू पी पुलिस दमन के लिए ज्यादा पहचान बनाती है चाहे वो सेंगर का केस हो या चिन्मयानन्द..प्रेशर के चलते कारवाई न कर पाने की वजह खत्म होने के बाद पुलिस वाकई दबंगों पर सक्रिय होती हैं ये देखने वाली बात है l
*Rita Sharma is Lucknow based social activist.


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Thursday, January 16, 2020

परिभाषित_होती_स्त्री

 कभी माँ, कभी बेटी, कभी बहू बनकर
अपनी पहचान ढूंढती एक स्त्री, 
हमेशा सबकी खुशी में खुश होती
आसमान में उड़ जाने को भी मचलती स्त्री, 
कभी डांट डपट कर; कभी घर परिवार का हवाला देकर,
बार बार चौखट के अंदर आती स्त्री,
गर इन सब बाधाओं को पार करके,
घर द्वारे को लांघ के; कुछ पहचान बना पाती है तब भी सहकर्मियों की निगाह में खटती स्त्री
अवसर पाकर छली भी जाती,
जब भी इन पुरुषों को किसी को दिखाना होता नीचा,
तब भी गालियों से नवाजी जाती स्त्री ,
कभी किसी का माल बनकर,
तरक्की के लिए सप्लाई की जाती स्त्री  ................................
क्या कभी स्त्री ने सवाल किया इन मूढ़ मालिकों से?
क्यू स्त्री सहारा बने उनकी तरक्की का?
क्यू बार बार लांछित की जाती स्त्री?

#SaySorryMrPM

युवा होता भारत


https://www.sarita.in/society/society-swami-vivekanand

युवा होता भारत

"उठो, जागो और जब तक मत रुको तब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए."
रीटा | January 13, 2020
 
नरेंद्र ( स्वामी विवेकानंद) का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता (कोलकाता) में हुआ. उनके जन्म दिवस को ही हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं. बालक नरेंद्र बचपन से ही बहुत जिज्ञासु स्वभाव के थे और हर वक़्त सवाल करते रहते थे, इस पर कुछ लोग हंसते थे और कुछ मौन हो जाते हैं.
इत्तेफाक से एक दिन स्वामी परमहंस जी से उनकी मुलाकात हुई.. उन्होंने नरेंद्र के सभी प्रश्नों का जवाब दिया. स्वामी जी से धर्म, वेदांत, संस्कृति की शिक्षा लेकर प्रचार प्रसार करने निकल पड़े. इस बीच उनकी मुलाकात राजस्थान के राजा अजित सिंह से हुई, उन्होंने ही “विवेकानंद” नाम दिया और शिकागो में हो रहे विश्व धर्म सम्मेलन में भेजा. स्वामी विवेकानंद को शून्य काल में बोलने के लिए समय दिया गया था, मगर जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो वहां मौजूद सभी देशों के लोग मंत्र मुग्ध हो गए. इसी विश्व धर्म सम्मेलन से उन्होंने बहुत ही कम उम्र में भारत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई , इसलिए उनका जन्म दिवस “युवा दिवस” के रूप में मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद में गजब की वाक पटुता और तर्क शक्ति थी. स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं.. उनके आदर्श समाज, युवाओं के लिए मिशाल है. स्वामी विवेकानंद ने युवा शक्ति का केन्द्र शरीर के बजाय मन को माना है और मानसिक शक्तियों के विकास पर जोर दिया है. इसके लिए उन्होनें युवाओं को पथ प्रदर्शन भी किया है.
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उनका कहना है कि “महसूस करो कि तुम महान हो और महान बन जाओगे”. भारत सर्वाधिक युवाओं वाला देश है और देश की दशा दिशा को बदलने के लिए युवाओं की सक्रियता बहुत जरूरी है. युवाओं को स्वामी विवेकानंद के मूल्यों, आदर्शों को समझने और प्रेरित होनी की जरूरत है.
युवा शब्द वास्तव में आयु, रूप से परे सक्रियता, उत्साह, स्फूर्ति और सकारात्मकता का प्रतीक है. हम हर वर्ष 12 जनवरी को युवा दिवस के अवसर पर युवाओं के बीच तरह तरह के प्रोग्राम, भाषण, परेड व लेखन द्वारा स्वामी विवेकानंद के विचारों से अवगत कराया जाता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

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फूल सा नाजुक और खूबसूरत है सास बहू का रिश्ता

https://www.grihshobha.in/relationship/bitterness-in-mother-in-law-relationship

Relationship

फूल सा नाजुक और खूबसूरत है सास बहू का रिश्ता

सास बहू का रिश्ता हमेशा से ही थोड़ा उलझा माना गया है मगर ऐसा है नहीं. बाकी सभी रिश्तों की तरह यहां भी समझदारी की ही जरूरत होती है.
Reeta | January 13, 2020

  
सास बहू का रिश्ता हमेशा से ही थोड़ा उलझा माना गया है मगर ऐसा है नहीं. बाकी सभी रिश्तों की तरह यहां भी समझदारी की ही जरूरत होती है. जितना एक लड़की के लिए ससुराल नया होता है उतना ही ससुराल वालों के लिए बहू को समझना.. सभी के लिए एक नयी शुरुआत होती है और समझने के लिए वक़्त चाहिए होता है.
हर व्यक्ति की सोच और व्यवहार अलग होता है और ये सब कुछ परिवार पर निर्भर करता है. जब भी हम बहू लाते हैं या बेटी देते हैं तो ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि नए परिवार की सोच समझ कुछ न कुछ जरूर मिलती हो तो सामंजस्य करने में आसानी होती है और आने वाले नए मेहमान को पूरा समय देना चाहिए कि वो बेहतर समझ बना सकें.

बहू जब ससुराल आती है तो उसकी बहुत सारी उम्मीदें और इच्छाएं होती है और साथ ही अंजाना डर भी.. ठीक उसी तरह सास और परिवार के अन्य लोग भी उम्मीदे लगाए होते हैं कि बहू उनके सोच और समझ के अनुसार ही रहे, खाए पिये.. यही उम्मीदें कभी कभी अनबन का कारण भी बन जाती है.. एक लड़की जिसने अपने 25-26 साल अपने हिसाब से परिवार में लाड़ दुलार में जिए है वो रातों इतनी समझदार नहीं हो सकती कि एक नए परिवार और उनकी तौर तरीके को सीख कर उनके अनुसार जिम्मेदारी ले ले. किसी भी नयी चीजें को समझने और उसे आत्मसात करने में वक़्त लगता है ठीक उसी तरह नए रिश्तों को समझने और महसूस करने में भी समय लगता है.
वैसे तो टेक्नोलॉजी और बदलते समय के साथ शादी से पहले न केवल लड़का लड़की बल्कि परिवार वाले भी मिलते जुलते रहते हैं तो थोड़ा समझ एक दूसरे के लिए विकसित हो जाती है मगर फिर भी घर में सभी को शुरू में सरल और सहज बर्ताव करना चाहिए. ये बात समझने की है कि जितना अटपटा बहू की बातों और आदतों से ससुराल पक्ष को लगता है उतना ही लड़की को भी सभी कुछ नया और अलग देखकर लगता है. दोनों ही पक्ष को समझने और एक दूसरे को वक़्त देने की जरूरत होती है.. घर का माहौल सरल रखें ताकि किसी को भी असुविधा होने पर स्वस्थ्य बात की जा सकें. सभी की अपनी कुछ आदतें होती है जिसे हम हमेशा फालो करना चाहते हैं.. बहू अगर कुछ ऐसा करती है तो जबरन दबाव डालकर न रोके अगर उसकी कोई खास इच्छा या शौक हो तो उसे पूरा करने दे तभी वो सबको अपना समझ पाएगी.. . ठीक उसी तरह हर परिवार के अपने कुछ मान्यताएं, रिवाज होते हैं जिसे सभी करते हैं और बहू से भी सीखने की उम्मीद की जाती है.. बहू को इसे सीखने, समझने की कोशिश करनी चाहिए ताकि वो खुद परिवार का हिस्सा बनकर पारिवारिक परंपराओं को आगे बढ़ा सकें.

रिश्तों में स्पेस देना भी बहुत जरूरी है, एक बेटा जो अभी तक मां के अनुसार ही चल रहा होता है शादी के बाद एक लड़की के आ जाने से काफी वक़्त साथ ही गुज़ारतेहैं.. इससे कभी कभी मां के मन में असुरक्षा की भावना आने लगती है और ये चिढ़ कई बार बात बात पर टोक कर या तानें के रूप में बाहर आती है.. यहाँ मां के साथ साथ बहू को भी समझना होगा.. माँ को अब लाड़ प्यार बहू बेटे को साथ करना चाहिए वहीं बहू को ध्यान रखना चाहिए कि माँ बेटे के बीच वो दरार की वजह न बनें और माँ बेटे की आपसी बातचीत को न बुरा माने और न ही हस्तक्षेप करें.. अगर कुछ मन मुटाव होता भी है तो इस पर खुल कर बातचीत कर लेनी चाहिए. नए घर में रहने और परिवार के रख रखाव और जिम्मेदारियों को जितना बेहतर सास बता, समझा सकती है उतना कोई भी नहीं.. नए परिवार में सास बहू का रिश्ता माँ बेटी से बढ़कर ही होना चाहिए जिसमें प्यार दुलार, नोक झोक और एक दूसरे को सुविधा देने की भावना होनी चाहिए.

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Sunday, January 12, 2020

करे थोड़ी सी देखभाल और पाए सॉफ्ट और शाइनी स्किन

https://www.sarita.in/lifestyle/beauty-tips-for-dry-skin

लाइफ स्टाइल साजसज्जा

करें थोड़ी सी देखभाल और पाए ड्राई स्किन के बजाय सौफ्ट, चमकती त्वचा

सर्दियों में ड्राई स्किन को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. ठंड में ड्राई स्किन रूखी, सूखी और पपड़ी सी दिखने लगती है और जरूरत से ज्यादा देखभाल और अतिरिक्त नमी की जरूरत होती है.
रीटा | January 11, 2020
 
 

सर्दियों में ड्राई स्किन को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. ठंड में ड्राई स्किन रूखी, सूखी और पपड़ी सी दिखने लगती है और जरूरत से ज्यादा देखभाल और अतिरिक्त नमी की जरूरत होती है.. आइए जानते हैं कि कैसे कुछ खानपान और देखभाल के साथ सर्दियों में भी ड्राई स्किन को चमकदार बनाए रख सकते हैं जो चीजें आपको किचन में ही मिल जाएगी और कुछ समय देने भर से आप बेहतर महसूस करेंगी..

1- उचित मात्रा में (8 से दस ग्लास) पानी पीते रहना चाहिए, अगर ज्यादा सर्दी हो तो गुनगुना पानी भी पी सकते हैं. पानी हमारी स्किन को हाइड्रेड रखता है और प्राकृतिक नमी बनी रहती है. आप नहाने के लिए भी हल्के गर्म पानी का ही इस्तेमाल करें ज्यादा गर्म पानी स्किन को नमी को कम करता है. नहाने के तुरंत बाद ही टावेल से पोंछ कर कोई अच्छा मौश्चराइजर या तेल लगा सकती है. नहाने के तुरंत बाद त्वचा नर्म होती है और उस समय लगायी गयी क्रीम बेहतर रिजल्ट देती है l
2- सर्दियों में खासकर रूखी त्वचा के लिए सही क्रीम या प्राकृतिक तेल का चुनाव भी अहम होता है. अगर तेल लगाना चाहती है तो नारियल या जैतून का तेल अच्छा रहेगा. थोड़ा ज्यादा समय हो तो नहाने से पहले ही तेल से मसाज कर ले और एक घंटे बाद गुनगुने पानी से नहाकर नर्म तौलिये से हल्के हाथो से पोंछ ले.. इससे डेड सेल्स भी निकल जाएंगे और उसके बाद हल्का सा माश्चराइजर लगा ले.. इससे स्किन ज्यादा कोमल और चमकदार रहेगी.
3- साबुन भी कोई क्रीम बेस्ड या माइल्ड ही ले.. चेहरे के लिए शहद युक्त फेसवाश ले.. अगर चेहरा ज्यादा ड्राई नज़र आ रहा है तो थोड़ा शहद अप्लाई करें और 10 – 15 मिनट बाद नौर्मल पानी से धो ले l इसी तरह दूध को भी कौटन बाल से चेहरे पर लगाकर छोड़े और 10 मिनट बाद धो ले.. ये चेहरे को ड्राई होने से रोकेगा l दूध न केवल चेहरे को नम रखता है बल्कि research कहती हैं कि दूध पीने से भी स्किन rebuild होती है.. इसमें मौजूद phospholipids स्किन समस्याओं को कम करते हैं.
4. कोई भी अच्छी पेट्रोलियम जैली हमेशा साथ रखे.. जब भी हाथ, चेहरा या होंठ सूखे लगे तो थोड़ी सी लगा ले.. ये नमी को बरकरार रखेगा l दिन में दो बार चेहरे पर क्रीम और एक बार पूरी बॉडी पर तेल या क्रीम जरूर लगाए.. तेल वही चुने जो आपको सूट करता हो और चिपचिपाहट न हो.. रात में सोते वक़्त कुहनियों, होठों, एड़ियों पर अलग से पेट्रोलियम जैली जरूर लगाए..दिन में मोजे पहन कर रखने से भी पैर मुलायम बने रहेंगे l लिपस्टिक लगाने से पहले भी थोड़ी पेट्रोलियम जैली हमेशा लगाए l दिन में चेहरे पर सनस्क्रीन लगाना न भूले और साथ ही रात को सोते वक़्त कोई भी अच्छी नाइट क्रीम या बेबी क्रीम लगा सकती हैं.
15 दिन में एक बार किसी अच्छी क्रीम से चेहरे पर मसाज करना बेहतर होगा या महीने में एक बार पार्लर भी जाकर cleansing करा सकती है और इसका चुनाव अपनी स्किन टाइप देखकर करें..

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बच्चों में पनप रही आपराधिक मानसिकता का कैसे पता करें


https://www.sarita.in/lifestyle/relation-children-and-crime

लाइफ स्टाइल परिवार

बच्चों की आपराधिक मानसिकता को कैसे पता करें ?
बदलते समय के साथ अब बहुत जरूरी हो गया है कि माता पिता और परिवार के बुजुर्ग सभी बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखें.

रीटा | January 4, 2020
 

"बच्चे मन के सच्चे", ये हम सब कहते सुनते आए हैं .अपनी निश्छल मुस्कान और मासूमियत से सबका मन मोह लेने वाले बच्चे सभी को भाते हैं लेकिन कभी कभी यही बच्चे कुछ ऐसा कर गुजरते हैं कि हम सब सोचते रह जाते हैं कि बालमन में ऐसी आपराधिक मानसिकता कैसे जन्मी पता ही नहीं चला .

बदलते समय के साथ अब बहुत जरूरी हो गया है कि 
माता पिता और परिवार के बुजुर्ग सभी बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखे.. बच्चे का सामान्य से हटकर कुछ अलग व्यवहार आने वाली परेशानी का संकेत हो सकता है l 
 बच्चों के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए पारिवारिक वातावरण का अच्छा और सुमधुर होना बहुत जरूरी होता है l बड़ों की आपस की बातें भी कभी कभी बच्चों को परेशान कर सकती है जिसका असर उनके विकास पर पड़ सकता है जैसे कि माता पिता या बड़े बुजुर्गों के बीच कोई मतभेद है तो उस पर बच्चों के सामने कहा सुनी न करें, साथ ही आपस में बात करते समय भी शब्दों का चुनाव भी बेहतर करें l क्यू कि बच्चें जो देखते सुनते हैं वैसा ही आचरण करते हैं केवल स्कूल का बेहतर माहौल उनके व्यक्तित्व का निमार्ण नहीं कर सकता है l
बच्चें जहां और जिनके बीच खेलते और बातचीत करते हैं उनके संबध में भी जानकारी रखे और खुद बच्चों से सीधे पूछताछ भी करते रहे l केवल बातचीत करके आप आराम से बच्चों के बारें में जानकारी जुटा सकती है, बच्चों का दोस्त बनकर बात करना, उनकी समस्या हल करना बहुत जरूरी हो गया है l
2017 में गुरुग्राम के रेयान पब्लिक स्कूल में जिस अबोध बच्चे की हत्या हुई थी उसके पीछे का कारण जानकर तो हम सबको बहुत हैरानी हुई थी.. केवल एक्जाम, PTM टालने के लिए एक बच्चे ने दूसरे की हत्या का सहारा लिया l जिस बच्चे को एक्जाम का डर था वो अपनी मां और टीचर से भी बात कर सकता था, अपनी परेशानी कह सकता था अगर उससे टीचर और माता पिता का दोस्ताना व्यवहार होता तो l साथ ही सोचने वाली बात ये भी थी कि उसके मन में हत्या का विचार और प्लान कैसे आया..? ऐसी सोच और विचार एक दो दिन में नहीं पनपते हैं.. घर, स्कूल के दोस्त या कोई TV सीरियल से सम्भवतः प्रेरित हुआ हो l उसके व्यवहार में परिवर्तन भी दिखने लगा होगा अगर घर से कोई भी नोटिस करता तो बच्चा अपराधी बनने से बच जाता है और दूसरा बच्चा जीवित होता l
ऐसी छोटी छोटी बातों का बालमन पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है.. पहले के समय में झाड़ फूक, टोना टोटका से लोग इलाज़ की कोशिश करते थे, लेकिन अब चाइल्ड psychology के लिए अलग से स्टडी की जाती है और बच्चे को समझ कर उन्हें counseling द्वारा बेहतर करने का प्रयास किया जाता है l अगर बच्चों में कभी भी कोई बदलाव या चिड़चिड़ापन दिखे तो उनसे बात करें और समस्या न समझ आये तो डॉक्टर की मदद ले l
बच्चों में स्वस्थ आदतों का विकास करें, उन्हें पौष्टिक खाना की आदत डाले, पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद के लिए भी समय दे l कुछ समय खुद भी उनके साथ बिताए और उस समय उनके बारें में, दोस्त, टीचर, स्कूल और पसंद नापसंद पर उन्हें बिना टोके उनकी बात सुनें l

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न्यू ईयर रेज्यूलेशन

https://www.sarita.in/lifestyle/new-year-resolution-2020

लाइफ स्टाइल
NEW YEAR RESOLUTION : इन 7 कामों से बनाएं नये साल को खास
हर नये साल के साथ कुछ न कुछ खास करना चाहिए जिससे हमारी जिंदगी और बेहतर हो सकें . कुछ ऐसी बातें जिसकी हम सबको सख्त जरूरत और साथ ही मांग भी होती है.
रीटा | January 2, 2020
 

नया साल दस्तक दे चुका है और हम बड़े जोर शोर से उसका स्वागत कर रहे हैं . नया साल नयी जोश और उमंग लेकर तो आता ही है साथ में कुछ बीते साल की कुछ चिंता और परेशानी भी ले आता है जिसे हमने लापरवाही और आलस्य में अनदेखा किया होता है . हर नये साल के साथ कुछ न कुछ खास करना चाहिए जिससे हमारी जिंदगी और बेहतर हो सकें . कुछ ऐसी बातें जिसकी हम सबको सख्त जरूरत और साथ ही मांग भी होती है . साल दर साल कुछ न नया करते रहने से हम बेहतरीन जिंदगी जी सकते हैं . आइए इस साल के साथ अपने लिए कुछ नया करने का वादा करते हैं और साथ ही उसे रोज निभाने का भी...  

1—सबसे पहली जगह हम सबको अपनी सेहत को देनी चाहिए l अपनी बॉडी टाइप के हिसाब से योग, एक्सरसाइज, जिम, वॉक में से कुछ भी चुन सकते हैं l अगर कोई स्वास्थ्य समस्या है तो डॉक्टर के निर्देशानुसार ही रुटीन फालो करें l अगर कुछ परहेज करना है तो उसकी आदत भी धीरे धीरे डाल ले तो बढ़ती उम्र में भी जिंदगी का आनंद ले पाएंगे l
2—दूसरी जगह बुरी आदतों को छोड़ने के लिए रखे l कुछ भी ऐसा जिसका असर आप पर या परिवार पर नकारात्मक पड़ता हो, एल्कोहल, स्मोकिंग या कुछ भी.. अगर जरूरत पड़े तो इसके लिए काउंसलर की भी सहायता लेने से न हिचकिचाए l
 3—कुछ न कुछ नया सीखने की चाहत भी रखनी चाहिए l कुछ भी नया सीखे, पढ़े या फिर यात्रा करें जो भी आपको पसंद हो, अकेले या फिर परिवार के साथ जैसे आप एंजॉय कर पाते हैं l कुछ नया सीखते रहने से नयी ऊर्जा बनी रहती है l राइटिंग, सिंगिंग, म्यूजिक, इंस्ट्रूमेंट कुछ भी सीख सकते हैं और अगर बेहतर कर पा रहे हैं तो पार्ट टाइम प्रोफेशन भी बना सकते हैं l
4—बेहतर भविष्य के लिए कुछ पैसे जमा करने की आदत भी इस साल के resolution में डाले l अपनी आय के हिसाब से गुल्लक या अकाउंट में इसे जमा कर सकते हैं l
5—नौकरी या व्यवसाय की बेहतरी के अवसर की तलाश को भी अपनी लिस्ट में जरूर जगह दे, इसके लिए अगर कोई स्किल्स डिवेलप करने की जरूरत पड़े तो भी पीछे न हटे l चाहे नौकरी हो या व्यवसाय खुद को ऑनलाइन रजिस्टर्ड करें और वक्त वक़्त पर अपडेट भी करती रहे l
6—कुछ वक़्त परिवार, बच्चे, बुजुर्ग के लिए निकालने के बारें में सोचे, इससे न केवल आपका परिवार खुश रहेगा बल्कि आपका स्ट्रेस लेवल भी कम होगा l अगर घर में बच्चे हो तो कुछ देर उनके साथ जरूर खेले इससे आपको नयी स्फूर्ति मिलेगी l
 7-- अगर स्टूडेंट है या किसी प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो पहले ही दिन से शेड्यूल तय कर ले और हर दिन अपने ध्येय को पूरा करें l दिन का टार्गेट पूरा करने के बाद कोई अन्य कार्य करें l पढ़ाई के साथ म्यूजिक, योग/वॉक और ग्रुप डिस्कशन को जरूर शामिल करें ताकि स्ट्रेस न होने पाए l
8-- नए साल के resolution में पर्यावरण संरक्षण और सोशल वर्क कर लिए दे.. घर में, आसपास या जहां खाली पेड़ पौधे लगाए, बच्चों को भी साथ रखे.. समय समय पर खाद पानी देते रहें l मोहल्ले, कॉलोनी या कोई भी जरूरतमंद दिखे तो उसकी मदद जरूर करें.. इससे बच्चों में भी दयालुता की भावना विकसित होगी जो अच्छे समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है l
इन सभी बिंदुओं में से जो भी resolutions आपके बे‍हतर जिंदगी के लिए जरूरी है.. उसे चुने और पूरा करने का समय जरूर निकाले.. शुरू शुरू में आदत में लाने के लिए थोड़ी मेहनत करनी होगी लेकिन रुटीन में आ जाने के बाद आपके लिए बहुत आसान होगा.. आइए थोड़ा समय अपने लिए निकालते हैं और आने वाला साल बेहतर बनाते हैं l

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परीक्षा के वक़्त क्या सावधानी बरते

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लाइफ स्टाइल परिवार

परीक्षा के समय बच्चों का ऐसे रखें ध्यान

परीक्षा का समय आते ही बच्चों के साथ साथ अभिभावक भी ज्यादा चिंतित दिखने लगते हैं. बदलते समय के साथ बच्चे पढ़ाई से ज्यादा समय मोबाइल गेम और इंटरनेट की दुनिया पर बिताने लगे हैं.
रीटा | December 30, 2019
 

परीक्षा का समय आते ही बच्चों के साथ साथ अभिभावक भी ज्यादा चिंतित दिखने लगते हैं. बदलते समय के साथ बच्चे पढ़ाई से ज्यादा समय मोबाइल गेम और इंटरनेट की दुनिया पर बिताने लगे हैं. थोड़ा सा खाली वक़्त और हाथ में मोबाइल.. उस पर से जब वक़्त परीक्षा का हो तो अभिभावक के लिए खुद परीक्षा की घड़ी आन पड़ती है कि कैसे बच्चों को पढ़ाई के लिए बैठाया जा सके और उनका मन भी लगा रहे.

1- परीक्षा के समय से कुछ पहले बच्चों को सुबह उठ कर 1 घंटे पढ़ने की आदत डाले और सुबह के ब्रेकफास्ट में कुछ भी उनका मनपसन्द तैयार करें, खाने के लिए जो इनरजेटिक भी हो और इसकी तैयारी रात से ही कर लें.

जब सुबह उठकर पढ़ने की आदत रहेगी तो परीक्षा के समय भी रात का पढ़ा हुआ आराम से दोहराया जा सकेगा.

2- परीक्षा का शेड्यूल तय होते ही उसी हिसाब से टाइम टेबल बना ले, किस विषय कितना पढ़ना है और कौन सा विषय की तैयारी हो चुकी है, ये सब बच्चों से डिस्कस करके टाइम टेबल तय कर ले और पढ़ाई के दौरान थोड़ा खेलने को भी दे ताकि बच्चे बोर न हो . अगर ट्यूटर पढ़ाता हो तो उनसे शेड्यूल बनाए और उनका पढ़ाया हुआ खुद revise भी कराए ताकि पढ़ाई के संबध में बच्चे से आपकी बात भी होती रही.


3- पढ़ाई के समय बच्चों के खाने पीने का भी खास ध्यान रखें. हेल्दी और हल्का फूड ही खाने को दें ताकि बच्चे को सुस्ती न आए. अगर बच्चा मैगी या पास्ता की मांग करता है तो उसमें सीजनल सब्जियों को डाले.

पानी भी बराबर पिलाती रहे और लिक्विड डायट में जूस, सूप दिया जा सकता हैं.

4. बच्चों की परीक्षा के समय थोड़ा खुद को भी अनुशासन में रखे, अगर आप वर्किंग वुमन है तो थोड़ा जल्दी आने की कोशिश करें और सोने से पहले उनके पढ़े हुए पर थोड़ा डिस्कस करें और अगर घरेलू महिला है और खुद पढ़ा सकती है तो खुद ही पढ़ाए, इससे ट्यूशन के पैसे तो बचेंगे ही साथ ही बच्चों से ज्यादा कनेक्ट हो पाएंगी.

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लिव इन रिलेशनशिप : नैतिकता Vs जरूरत

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लाइफ स्टाइलसंबंध

लिव इन रिलेशनशिप : नैतिकता Vs जरूरत

लिव इन का साधारण सा मतलब है कि बालिग हो चुके लड़के और लड़की सहमति के आधार पर एक साथ एक छत के नीचे रह सकते हैं, जहां संबंध उनकी मर्जी पर ही बिना शादी के बंधन में बंधे होते हैं .

रीटा | December 10, 2019

लिव इन रिलेशनशिप, जो मूलतः पश्चिमी देशों का चलन है. अब भारत में भी तेजी से चलन में आ रहा है . लिव इन महानगरों में शौक में कम जरूरत पर ज्यादा आधारित होता है. लिव इन का साधारण सा मतलब है कि बालिग हो चुके लड़के और लड़की सहमति के आधार पर एक साथ एक छत के नीचे रह सकते हैं, जहां संबंध उनकी मर्जी पर ही बिना शादी के बंधन में बंधे होते हैं .

अगर पारम्परिक भारत की नजर से देखा जाए तो अनुचित और गलत शुरुआत लगती है. मगर इसे महानगरों के सन्दर्भ में देखे तो अब भागमभाग जिंदगी में ऐसे रिश्ते एक जरूरत से बन गए हैं. शहरों में नौकरी और पढ़ाई के लिए आए युवक/युवतियों की जरूरतें ज्यादा और पैसे कम होते हैं जहां आसानी से वो अपने मेल पार्टनर के साथ किराये के साथ हर खर्चे को बांट सकती है .

लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग कई बार विवाह भी करते हैं . इसके साथ एक और परंपरा खासकर फिल्मी जगत में चल पड़ी है कि शादी से पहले लिव इन में रहकर एक दूसरे को जानने समझने की, बहुत हद तक ठीक भी है मगर लिव इन में रहने के बाद समझ बूझ कर शादी करने पर भी आपका पार्टनर से शादी चल पाएगी इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है.

जरूरत से शुरू हुए ऐसे रिश्ते अब मौज मस्ती और शारीरिक जरूरत को पूरा करने का एक जरिया भी बन चुके हैं. इसमें शारीरिक हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे अपराध भी जन्म लेने लगे हैं . सहमति से साथ आए दो लोग किसी भी छोटी सी बात पर असहमति होने पर आरोप प्रत्यारोप तक बात आ पहुंचती है .

ऐसे रिश्ते की नाजुकता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कानून भी बनाए हैं ताकि सामाजिक अव्यवस्था न फैले. कभी कभी ऐसा भी होता है कि लड़के या लड़की में से किसी भी एक का भावनात्मक लगाव ज्यादा होता है और वो साथ रहना या शादी करना चाहते हैं मगर दूसरा किसी भी बंधन में आने से इंकार करता है तो उस समय एक के लिए स्थिति बहुत विकट हो जाती है या कई बार लोग शादी की बात करके लिव इन रिलेशनशिप में रहने को राजी करते हैं और अपनी यौन इच्छा पूरी करने के बाद छोड़ कर निकलने में गुरेज नहीं करते वजह साफ है कि कोई सामाजिक या कानूनी बंधन नहीं है इसलिए भी कानूनी संरक्षण जरूरी बन जाता है लिव इन रिश्तों पर भी.


आइए कुछ कानूनी पहलुओं पर भी नज़र डालते हैं जो कोर्ट द्वारा तय किए गए हैं –

1. लिव इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा से संरक्षण प्राप्त है मतलब अगर लिव इन पार्टनर मार पीट करता है तो आप कानूनी सहायता ले सकती है .

2. अगर लिव इन से बच्चे का जन्म हो जाता है तो उसे पिता की सम्पत्ति से सभी जायज अधिकार प्राप्त होंगे. हां मगर लड़की को कानूनी रूप से पत्नी का दर्जा नहीं दिया जाएगा. लड़का या लड़की दोनों को ही अपनी शादी करने का अधिकार है.  बच्चा किसके साथ रहेगा ये दोनों मिलकर तय कर सकते हैं या कोर्ट भी जा सकते हैं .

3. लड़की भी गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है ये तब तक मिलेगा जब तक लड़की कहीं और शादी नहीं कर लेती या लड़के की मृत्यु हो जाने की स्थिति में भी गुजारा भत्ता बंद हो जाएगा.. लड़के की सम्पत्ति में लड़की दावा नहीं कर सकती .

4. अगर आप विदेश में लिव इन में रह रहे हैं या विदेशी व्यक्ति के साथ रह रहे हैं तो कानूनी संरक्षण भी वही का स्थानीय कानून से ही मिलेगा .

ध्यान रहे कि आपके लिव इन पार्टनर का बालिग होना बहुत जरूरी है मतलब लड़की 18 साल और लड़का 21 साल.. अन्यथा आप को कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है..

अगर लिव इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला लेते हैं तो लड़की और लड़के दोनों को चाहिए कि वो अपनी अपनी priority तय कर ले . एक दूसरे का प्राथमिकता भी चेक कर लें और भविष्य के लिहाज से भी तय कर लें कि शादी के बंधन में बंधना है या नहीं.. स्पष्ट रूप से ये बात एक दूसरे के सामने रखे. शादी के वादे के बाद लिव इन रिलेशनशिप में रहकर शादी से मुकरने पर भी आप पर कानूनी रूप से कार्रवाई हो सकती है. इस बात का हमेशा ख्याल रखे. बाकी सभी रिश्तों की तरह लिव इन भी समाज का चलन बनता जा रहा है तो उसे एक स्वस्थ्य रिश्ते की तरह ही निभाने की बात होनी चाहिए.



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सर्दियों के मौसम में फालो करें ये डाइट

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हेल्थ टिप्स

सर्दियों में फौलो करें ये 5 डायट

विटामिन सी युक्त फल और सब्जी लेनी चाहिए और आंवला एक बेहतर उपाय है इसे कच्चा, सब्जी या मुरब्बे में ले सकते हैं.
रीटा | December 6, 2019
 

मौसम में जैसे ही नमी, ठंड आती है.. रंग बिरंगे स्वेटर, ढेर सारी खाने पीने की चीजें और घूमने के आलावा कुछ चिंता भी लाती है क्योंकि इस समय थोड़ी सी लापरवाही से सर्दी जुकाम की समस्या होने लगती है. यहां हम आपको बताते हैं कुछ सलाह और कुछ खास टिप्स.. जिन पर अमल करके आप सर्दियों के मौसम को खूबसूरत और यादगार बन सकती हैं.

सर्दियों के मौसम में ऐसा हो आपका खानपान

सर्दियों में भी खूब पानी पिये जिससे त्वचा में नमी बरकरार रहें . ज्यादा सर्दी होने पर पीने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें .
2. सर्द मौसम में आम समस्या सर्दी जुकाम की होती है. विटामिन सी युक्त फल और सब्जी लेनी चाहिए और आंवला एक बेहतर उपाय है इसे कच्चा, सब्जी या मुरब्बे में ले सकते हैं. बेहतर होगा कि मार्केट से मुरब्बा खरीदने के बजाय घर में ही बना लिया जाए.. आंवला की जैली भी बना सकते हैं इसके लिए बस आंवले को कद्दूकस करना है और कढ़ाई में स्वादानुसार चीनी डालकर कुछ देर धीमी आंच पर पकाना है.. जब नर्म हो जाए तो ठंडा करके जार में रख ले.. इसे ब्रेड, बिस्किट या खाने के साथ खा सकते हैं.. एक बार बनाकर हफ्ते भर के लिए स्टोर कर सकते हैं. इसके अलावा आंवले की चटनी या फिर छोटा छोटा काटकर लहसून के साथ फ्राई करके खाया जा सकता है.


3 . तिल, गुड़ और मूंगफली का सेवन भी सर्दी को दूर करता है. मूंगफली तो हमें जगह जगह ठेलों पर मिल जाती है, खुद भी घर में भूनकर पैकेट बनाकर पर्स में रखा जा सकता है और भूख लगने पर इससे बेहतर और कोई विकल्प हो ही नहीं सकता है .

4. हमारे घरों में बड़े बुजुर्ग हमेशा ही सर्दियों में शुद्ध घी और मावे युक्त गोंद के लड्डू खाने की सलाह देते हैं जो कि इस मौसम में सबसे उत्तम होता है खासकर बच्चों के लिए .


5 . सर्दियों में मार्केट में तरह तरह के सब्जी, साग और फल मिलने लगते हैं जो कि कुदरत ने सेहत के तैयार किए होते हैं.. अगर बच्चों के लिए मैगी या माइक्रोनी जैसा भी कुछ बना रहे हैं तो भी उसमें टमाटर, गाजर, शिमला मिर्च, मटर के दाने डाले और बच्चों को हेल्दी फूड खाने के बारें में जरूर जागरूक करें.


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सर्दियों में ऐसे करें अपनी खूबसूरती की देखभाल

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5 टिप्स : सर्दियों में ऐसे करें अपनी खूबसूरती की देखभाल

सर्दियों में त्वचा का रूखा सूखा और बेजान होना एक बड़ी समस्या होती है.

रीटा | December 6, 2019

त्वचा की देखभाल वैसे तो हर मौसम में करनी होती है लेकिन सर्दियों में त्वचा का रूखा सूखा और बेजान होना एक बड़ी समस्या होती है

यहां हम आपको  आसान टिप्स बता रहे हैं जिससे हर वक्त आप खिली खिली नजर आएंगी.

1- चेहरे को हमेशा ठंडे पानी से धोए और नहाने के लिए गुनगुना पानी ही ले. नहाने के तुरंत बाद कोई अच्छा माश्चराइजर लगाए या नहाने के कुछ देर पहले नारियल के तेल से मसाज भी कर सकते हैं . सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें . इसके अलावा नमी बरकरार रखने के लिए गुलाबजल और गिलसरीन मिलाकर एक बोतल में रख दे इसे सोने से पहले चेहरे और हाथ पैरों में लगाए .

2- होठों के लिप बाम या जेल दिन में दो से तीन बार लगाए..  लिपस्टिक लगाने से पहले कोई वैसलीन जेल थोड़ी देर पहले लगा ले .

3- बालों में धोने से दो घंटे पहले औयलिंग जरूर करें.. नारियल का तेल सर्दियों के लिए बेहतर होता है और चाहे तो उसमें थोड़ा नीबू भी मिला ले .

4-सर्दियों में पपीता, केला आसानी से मिलने वाला फल है इसे खाने के साथ साथ चेहरे पर लगा सकते हैं . पके पपीता का एक टुकड़ा, आधा केला और थोड़ा शहद मिलाकर अच्छे से मैश कर ले और चेहरे तथा शरीर के अन्य भागों पर लगा ले, सूखने पर ठंडे पानी से धो ले . पपीते और केले में एंटी आक्सीडेंट, विटामिन ए और अन्य पोषक तत्व होते हैं . ये नमी के साथ साथ एंटी एजिंग का भी काम करते हैं.

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5- इस मौसम में पैरों का भी खयाल रखे.. एड़ियों को स्क्रब से रगड़ कर साफ करें, सोते समय वैसलीन लगाए, साथ ही मोजे पहन कर रखे . घुटने, कोहनी और अन्य सूखी दिखने वाली जगहों पर अलग से दो तीन बार कोई अच्छा क्रीम या मलाई लगा सकती है .

इन सबके साथ ही हर दिन थोड़ा थोड़ा एक्सरसाइज या वाक भी रूटीन में शामिल करें ताकि आप एक्टिव रहे और एक्स्ट्रा कैलोरीज बर्न होती रहे.. ज्यादा ठंड तो घर के अंदर ही योग बेहतर विकल्प है.. बच्चों को भी खेलने दे बस खेलते समय अच्छे से कपड़े पहनाएं.. धूप निकलने पर सुबह 10 से 15 मिनट जरूर बैठे जिससे विटामिन डी मिलेगा जो हड्डियों को मजबूत बनाता है.. अगर घर में बच्चे है तो उन्हें सुबह की धूप जरूर दिलाए और हो सके तो धूप में ही तेल की मसाज करें .

इस तरह आप सभी चिंताओं से मुक्त सर्दियों का खुशनुमा मौसम इंजौय कर पाएंगी .


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