Monday, June 25, 2018

पुस्तक समीक्षा "हैशटैग आशिकी"


हफीज किदवई, जो कि आम भाषा में गंभीर समस्याओं को बड़ी आसानी से लिख देने की कला में माहिर हैं l उनकी लिखी किताब "हैशटैग आशिकी" एक बार फिर से उनकी सरल, सहज लेखनी को परिभाषित करती है l

हैशटैग आशिकी में कुल 89 अध्याय हैं.. छोटे छोटे ये अध्याय हमें जीवन को बड़ी पास से दिखाते हुए गंभीर विषयों पर सोचने को विवश करते हैं l

शुरुआत उन्होनें नाम के मुताबिक ही आशिकी से ही की है जिसे पढ़ के लगता है कि ये हम से ही होकर गुजरा है.. चीजों को बारीकी से देखना और उसे खूबसूरत शब्दों में पिरो देने में माहिर होने के चलते ही उनके खुद के बड़ी संख्या में पाठक है l
किताब की शुरुआत इश्क़, मोहब्बत से करते हुए वो आगे गंभीर विषयों पर लिखते हुए आगे बढ़ते हैं l गंभीर विषय जब तक आपके दिमाग को झकझोर कर सीख देते हैं और जैसे ही आप किताब को रखकर बाद में पढ़ने की सोचते हुए अगला पन्ना पलटएंगे तो फिर ये इश्क़ का एक खुशनुमा अध्याय लिख कर वो दिमाग को ताज़ा करने वाला तड़का लगा देते हैं l



 माँ अध्याय में मां पर कैसे लिखे ये पूछते हुए बहुत कुछ लिख जाते हैं.. "मेरी माँ मेरे सामने दुनिया छोड़े न कि उसके सामने मैं l मरना सभी को है, मगर मैं नहीं चाहता एक माँ अपने बेटे के मरने का दर्द सहे l" इससे उन्होने माँ की पीड़ा को बखूबी समझा और लिखा है l
"दामाद" अध्याय से उन्होंने वर्तमान स्थिति पर तंज किया है कि हमें कमी निकालने के बजाय बेटों को तरह अपने देश को ठीक करने में सहयोग देना चाहिए l
 "नफरत, बक्श दो, आतंक के खिलाफ, नासूर, जिस्‍म, कश्मीर, महात्मा गांधी, वहशी, मज़हब नमक है, ये भी तो हैं" अध्यायों से देश की समस्याओं को बड़ी आसानी से खूबसूरत शब्दों में बयां किया है जो सोचने को मजबूर करता है और इन सबके बीच इश्क़ का तड़का लगता रहा है l इस तरह पूरी किताब पाठक को पूरी तरह से बांधे रखती है l आखिरी पन्नो में" शादी शादी" से अभी युवाओं की बेवक्त बुलायी समस्या भी लिख ही डाली है और बीच बीच नवाबों और जमीदारों के कहानी, किस्से बखूबी गढ़े गए हैं l

कुल मिलाकर ये युवाओं से बुजुर्गों तक सभी वर्गों और धर्मों के पढ़ने लायक किताब है, यहां बुजुर्ग पढ़ते हुए इससे अपने वक़्त को याद करेंगे तो युवा वर्ग कहेगा कि "Yes it's happening". सभी को इसे पढ़ना चाहिए और उसके बाद संभाल कर  बुक सेल्फ में रख देना चाहिए ताकि वक्त मिलने पर फिर पढ़ सकें क्यू कि ये कभी भी बासी और उबाऊ नहीं लगेगी l

Sunday, June 24, 2018

ट्विटर की अपील से तीन भारतीय दोहा कतर ambassy की मदद से मुक्‍त हुए


11 मई  2018 को शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान के डाइरेक्टर  रीटा शर्मा को सूचना मिली कि मोहम्मद शाहिद नाम का व्यक्ति Qutar दोहा में शेख नसीर के यहां रसोइया की नौकरी के लिए गया था लेकिन कुछ ही दिन बाद उसने अपने पत्नी को बताया कि वो शेख उसे मारता, पीटता है और खाना नहीं देता, साथ ही उसने जो Vedio भेजी उससे पता चलता है कि वो मज़दूरी का काम कर रहा था l इस संबंध में मोहम्मद शाहिद की पत्नी ने embassy दोहा सहित सभी जगह लेटर भेजकर मदद मांगी और कोई जवाब न मिलने पर बहुत मायूस हो गयी तभी किसी से बात करने पर उन्होने संस्था तक पहुंचायी और उसके बाद शाहिद के परिवार की परेशानी सोशल मीडिया पर अपडेट की गयी , साथ ही दोहा ambassy और सुषमा स्वराज जी, मोदी जी के साथ कई जिम्मेदार लोगों को ट्वीट और मेल किया l


इसके बाद सोशल मीडिया से ही कुछ दोस्तों ने मुहिम आगे बढ़ायी l जिसमें Sujeet Gupta दोहा Qutar  embassy से लगातार coordinate करते रहे और साथ Manoj Nishad जी, ओम सोनी जी ट्वीट और retweet करते रहे l

और 14 मई को embassy Doha ने जवाब दिया कि उन्होनें उक्त व्यक्ति शाहिद के साथ मौजूद दो और इंडियन्स को मुक्त करा लिया है और कानूनी कार्रवाई के बाद वो इंडिया भेजेंगे l





 07 जून को embassy से जवाब आया कि सभी कार्यवाही पूरी कर ली गयी है और 15 जून तक शाहिद सहित दोनों भारतीय भारत आ जाएंगे और ये खबर मिलते ही उक्त परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी और पवित्र रमजान और आने वाली ईद की खुशी दोगुनी हो गई सबके लिए l



साथ ही 13 जून को उक्‍त परिवार द्वारा संस्था को बताया गया कि सभी लोग सुरक्षित वापस आ गए हैं l
संस्था द्वारा बताया गया कि पहली बार कोई मामला संस्था द्वारा ट्विटर और मेल, फोन के माध्यम से पूरी तरह हल कर लिया गया जो कि अत्यंत खुशी की बात है l