हफीज किदवई, जो कि आम भाषा में गंभीर समस्याओं को बड़ी आसानी से लिख देने की कला में माहिर हैं l उनकी लिखी किताब "हैशटैग आशिकी" एक बार फिर से उनकी सरल, सहज लेखनी को परिभाषित करती है l
हैशटैग आशिकी में कुल 89 अध्याय हैं.. छोटे छोटे ये अध्याय हमें जीवन को बड़ी पास से दिखाते हुए गंभीर विषयों पर सोचने को विवश करते हैं l
शुरुआत उन्होनें नाम के मुताबिक ही आशिकी से ही की है जिसे पढ़ के लगता है कि ये हम से ही होकर गुजरा है.. चीजों को बारीकी से देखना और उसे खूबसूरत शब्दों में पिरो देने में माहिर होने के चलते ही उनके खुद के बड़ी संख्या में पाठक है l
किताब की शुरुआत इश्क़, मोहब्बत से करते हुए वो आगे गंभीर विषयों पर लिखते हुए आगे बढ़ते हैं l गंभीर विषय जब तक आपके दिमाग को झकझोर कर सीख देते हैं और जैसे ही आप किताब को रखकर बाद में पढ़ने की सोचते हुए अगला पन्ना पलटएंगे तो फिर ये इश्क़ का एक खुशनुमा अध्याय लिख कर वो दिमाग को ताज़ा करने वाला तड़का लगा देते हैं l
माँ अध्याय में मां पर कैसे लिखे ये पूछते हुए बहुत कुछ लिख जाते हैं.. "मेरी माँ मेरे सामने दुनिया छोड़े न कि उसके सामने मैं l मरना सभी को है, मगर मैं नहीं चाहता एक माँ अपने बेटे के मरने का दर्द सहे l" इससे उन्होने माँ की पीड़ा को बखूबी समझा और लिखा है l
"दामाद" अध्याय से उन्होंने वर्तमान स्थिति पर तंज किया है कि हमें कमी निकालने के बजाय बेटों को तरह अपने देश को ठीक करने में सहयोग देना चाहिए l
"नफरत, बक्श दो, आतंक के खिलाफ, नासूर, जिस्म, कश्मीर, महात्मा गांधी, वहशी, मज़हब नमक है, ये भी तो हैं" अध्यायों से देश की समस्याओं को बड़ी आसानी से खूबसूरत शब्दों में बयां किया है जो सोचने को मजबूर करता है और इन सबके बीच इश्क़ का तड़का लगता रहा है l इस तरह पूरी किताब पाठक को पूरी तरह से बांधे रखती है l आखिरी पन्नो में" शादी शादी" से अभी युवाओं की बेवक्त बुलायी समस्या भी लिख ही डाली है और बीच बीच नवाबों और जमीदारों के कहानी, किस्से बखूबी गढ़े गए हैं l
कुल मिलाकर ये युवाओं से बुजुर्गों तक सभी वर्गों और धर्मों के पढ़ने लायक किताब है, यहां बुजुर्ग पढ़ते हुए इससे अपने वक़्त को याद करेंगे तो युवा वर्ग कहेगा कि "Yes it's happening". सभी को इसे पढ़ना चाहिए और उसके बाद संभाल कर बुक सेल्फ में रख देना चाहिए ताकि वक्त मिलने पर फिर पढ़ सकें क्यू कि ये कभी भी बासी और उबाऊ नहीं लगेगी l

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