Tuesday, September 20, 2022

चडीगढ़ में हैरतंगेज कारनामा – छात्रा ने साथी छात्राओं का पॉर्न वीडियो किया वायरल


महिला अपराधों की संख्या में दिन प्रति दिन इजाफा 
होता जा रहा है। रेप, मर्डर एक आम सी बात हो चली है .. हत्या वो नृशंस तरीके से .. कुचल कर, जलाकर। महिला अपराध ज्यादातर पुरूषों द्वारा ही किए जाते रहे हैं और घरेलू हिंसा के मामले में महिला पर महिला द्वारा अत्याचार देखने को मिलता है। 
मगर बीते दिन एक हैरान करने वाला वाकया चंडीगढ़ की एक यूनिवर्सिटी से सामने आया जिसमें एक छात्रा द्वारा अपने ही पीजी में रह रही अन्य छात्राओं का कपडे बदलते हुए, नहाते हुए वीडियो बनाने के बाद अपने एक दोस्त को भेजती रही और उस लड़के ने उन विडियोज को वायरल कर दिया। मामला सामने आते ही वीडियो में दिख रही लडकियों ने कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की और हॉस्टल में हंगामा होने, ल़डकियों की तबियत बिगड़ने पर पुलिस, एंबुलेंस बुलाई गई। इस मामले में शामिल लड़के, लडक़ी को गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस प्रशासन द्वारा सख्ती से कार्यवाही की बात कहीं जा रही है।
यहां गंभीर विचारणीय प्रश्न जो सामने है वो ये कि " आखिर उक्त छात्रा का अन्य लडकियों का पॉर्न वीडियो बनाने का मकसद क्या था? उसे इसकी प्रेरणा कहां से मिली? वीडियो बनाते और उसे दूसरी जगह भेजते वक्त उसे कानून/ पुलिस का डर क्यूं नही सताया?"
बीते कई सालों से देखा जा रहा है कि गंभीर महिला अपराध जब घटित होते हैं तो उस पर पुलिस कोई एक्शन नहीं ही लेना चाहती है या भारी दवाब आ जाने पर केवल केस दर्ज़ करके इतिश्री कर लेती है, न तो समय से आरोपी को गिरफ्तार करती हैं और न ही चार्जशीट ही समय से तैयार की जाती हैं। 2 साल पहले घटित हुई हाथरस की बेटी के साथ हुए अपराध, उसके बाद पुलिस का व्यवहार और अब तक उसे न्याय न मिल पाना ही एक वजह है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। माननीय न्यायालय द्वारा भी अति गंभीर मामलों में आरोपी को स्टे दे देना समाज में कानून/पुलिस/कोर्ट फैसले के प्रति भय को खत्म कर रहा है। जाहिर है कि अपराधियों की अपराध करते वक्त ये मानसिक स्थिति रहती होगी कि "उक्त मामले में तो कुछ हुआ नही तो लोग हमारा क्या ही कर लेंगे ?"
दिल्ली के निर्भया कांड जिसने पूरा देश हिला कर रख दिया था, कानून में परिवर्तन भी किए गए मगर तब भी एक अपराधी नाबालिग बनकर कोर्ट से आजाद होकर समाज, न्याय व्यबस्था को मुंह चिढ़ा ही रहा है। महिला अपराध होने पर स्पष्ट, तय शुदा समय में जब तक पुलिस, कोर्ट अपने फैसले/ कार्यवाही नहीं करेंगे, अपराध इसी तरह न्याय व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता रहेगा। महिला अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस, माननीय न्यायालय को अलग से एक कमेटी बनाने की जरूरत है ताकि केस के बड़े बोझ के चलते हमारी बेटियां अपराधियों के खूनी पंजे से आजाद होकर जी सकें।

Sunday, July 3, 2022

श्याम

कल श्याम को लौटते हुए काफी रात हो गईं थी, लगभग बारह से ऊपर हो रहा था और वो बाइक से था। सुनसान सड़के, लंबे लंबे युकलिपटिस के पेड़, चारों तरफ फैले उसके सूखे पत्ते। कोई गिलहरी भी उस पर गुजरती तो बड़े ज़ोर की आवाज आती और वो बाइक की स्पीड और बढ़ा लेता। बस ऊपर वाले से दुआ कर रहा था कि जल्दी से ये जंगल खत्म हो और मन ही मन प्रण भी कर रहा था कि आगे से शाम होने के बाद कभी इधर से नहीं निकलेगा।
सोचते सोचते, डरते डरते बाइक चला ही रहा था तभी अचानक से उसके बाइक के आगे एक बूढ़ा व्यक्ति ने हाथ दे कर रोकने के लिए इशारा किया वो, खुले खुले बड़े बड़े बाल, लुंगी पहले हुए था , किसी गांव देहात का लग रहा था। इतनी रात अचानक बीच जंगल में कोई बूढ़ा कैसे आ जायेगा, ये सोच कर श्याम ने बाइक और तेज कर ली। तभी अचानक से दूर खड़ा हुआ बूढ़ा उसके बाइक के आगे आ गया और बाइक खुद ही बंद हों गई।

बूढ़ा व्यक्ति –" क्या शहरी बाबू एक बूढ़े गरीब आदमी को जंगल पार भी नहीं छोड़ सकते हो क्या "

श्याम –"नही, नही, ऐसा नही है, मैं बस थोड़ा जल्दी में था"
तभी लपक कर बूढ़ा आदमी उसके बाइक पर बैठ गया और कहा कि चलो शहरी बाबू....
श्याम ने बाइक स्टार्ट की तो ऐसा लगा कि बाइक पर उसने कुछ बहुत भारी सामान रख लिया है, बहुत वजन है... जबकि बूढ़ा दुबला पतला ही था।
रास्ते भर वो बजरंगबली हनुमान का नाम लेता रहा और अपने प्राणों की दुहाई देता रहा।
जैसे ही जंगल पार हुआ उसने बाइक रोक दी और कहा, उतरिए बाबा... जंगल खत्म हो गया.... दो तीन बार बोला तो कोई जवाब न पाकर उसने पीछे मुडकर देखा तो एक बहुत सुंदर सी ल़डकी बैठी हुईं थीं बाइक पर...
उसने डर के मारे इतनी ज़ोर से चीख मारा कि बाइक समेत दोनों लोग नीचे गिर पड़े....

क्रमश: 


Pfccindia.com पर publish 

Monday, June 27, 2022

समीक्षा – सोशल कॉकटेल

सौरभ द्विवेदी द्वारा लिखित कहानी संग्रह"सोशल कॉकटेल" जीवन की खट्टे मीठे अनुभव, घटना के साथ जोड़ते हुए दिशा, मार्गदर्शन दिखाते हुए खुद में ही बेहद अनूठा संग्रह है। जहां घर परिवार, समाज की चिंता भी जाहिर होती है तमाम बुरी घटनाओं को महसूस करके। कहानी संग्रह पूरी विविधता को समेटे हुए हैं। कहानी के माध्यम से जिस तरह समाज, देश, दुनिया में घटित हो रहे घटनाओं को बेहद गूढता से अनुभव करके लिखा गया है लेखक के कोमल मन और समाज के प्रति उनकी चिंता को दर्शाता है।


कहानी ‘शख्स से शख्सियत’ में कर्म के सिद्धान्त की बात करते हैं, संदेश देते हैं कि व्यक्ति कर्म के बल पर Dr कलाम जैसी बड़ी शख्सियत बनकर युवाओं के लिए प्रेरणास्पद बन सकते हैं।


कहानी ‘खुशबू रोजगार की’ में वो बताते हैं कि कोई भी काम छोटा बड़ा नही होता है। समाजिक दिखावे के बजाय अवसर अनुसार निर्णय लेने चाहिए।


‘पुष्पक विमान’ कहानी में लेखक मन की तुलना पुष्पक विमान की गति से करता है। हर व्यक्ति को चेतन, अवचेतन मन को समझते हुए बुरे विकारों को नष्ट करने के आध्यात्म की ओर जाना चाहिए और बिना मन की इच्छाओं को खत्म किए सुखमय जीवन बिताना चाहिए।


कहानी ‘विश्व के लिए भारत एक बाजार’ में बढ़ती जनसंख्या से उपजी भुखमरी, कुपोषण, अशिक्षा, असमानता, भ्रष्टाचार आदि पर चिंतन करते दिखते हैं, वो कहानी के माध्यम से बताते हैं कि भारत की बढ़ती जनसंख्या अन्य देशों के लिए केवल एक बाजार भर है जहां वो अपने उत्पादन खपाना चाहते हैं बस।


संग्रह की आखिरी कहानी ‘अर्धविक्षिप्त कौन?’ में वो एक अर्द्ध विकसित लडके कालू के माध्यम से कहानी में बताते हैं कि किस तरह छोटी छोटी बातों बढ़कर बलात्कार का रूप धारण करती है। सब तरफ़ सर्व सुलभ एडल्ट मूवी, वीडियो पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं।

कुल मिलाकर समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, भौतिक, मानसिक आदि पर गहन चिंतन कर कहानियों के रूप में बटोरकर एक कॉकटेल पाठकों के लिए तैयार करते हैं l


Wednesday, June 22, 2022

ये कैसी उलझन –धारावाहिक

प्रतिलिपि पर प्रकाशित ☺️



ये कैसी उलझन?


मां के बताए गए लडके से आज रुचि को मिलने जाना है लेकिन वो बहुत उलझन में हैं क्यू कि अभी उसकी स्टडी नही पूरी हुई है। अगर शादी तय हो गई तो पढाई छूट जायेगी क्यू कि उसकी पीएचडी पुरे होने में अभी दो साल और बाकी है। जैसा कि उसकी बहन नेहा ने बताया कि लडके आयुष्मान के मां बाप पुरानी सोच के है और वो चाहते हैं कि बहु घरेलु बनकर रहे मगर पढ़ी लिखी साथ ही संस्कारी इसलिए ही उसके घर रिश्ता भेजा है। अगर नौकरी करने जैसी कोई बहु की इच्छा हो भी तो केवल किसी स्कूल, कालेज में ही पढ़ाए बस ज्यादा बाहर के मर्दों से मिलना जुलना न रहे उसका। 

जब से रुचि ने ये जाना है बहुत ऊहांपोह में है, वैसे उसे पीएचडी के बाद बनना तो प्रोफेसर ही है मगर किसी भी बंधन में नही रहना चाहती है, उसका मन है कि वो आजाद खयाल वाले परिवार का हिस्सा बनें। इसी उधेड़बुन में वो उल्टा सीधा तैयार होकर निकल पड़ी आयुष्मान से मिलने, दिए गए पते पर जाकर उसने मां की दी हुई डीटेल व्हाट्सएप पर देखी और वही से आयुष्मान का नम्बर लेकर कॉल किया …

हेलो “क्या आयुष्मान जी से बात हो रही है?”

दूसरी तरफ से…”जी जी, आप रुचि जी बात कर रही है …आप कहां है मैं तो रेस्टोरेंट के अंदर हूं, दो मिनट रुकिए मैं आता हूं आपकों लेने के लिए।“

रुचि ने फोन काटकर एक लंबी सास ली ऐसे माने कोई जंग लड़ने जा रही हो…


हेलो, “आप रुचि , मैं आयुष्मान “

आइए अंदर चलते हैं, आपसे मिलकर अच्छा लगा, आपकों पता है कि सुबह मैं तो बहुत नर्वस था…अचानक रुककर उसने एक टेबल की तरफ इशारा करके बैठने को बोला तो रुचि बैठते हुए थैंक यू बोली और आयुष्मान की तरफ़ देखा तो अच्छा खूबसूरत, स्मार्ट लगा मगर रुचि तो उसके परिवार के बंधन में नही रहना चाहती थी तो मना करने का मन बनाकर आई थी…..




भाग दो

आयुष्मान – रुचि जी, चाय या कॉफी और उसके साथ खाने में कुछ लेंगी क्या?

रुचि– जी, केवल कॉफी ही मंगा ले बस


आयुष्मान– कॉफी का आर्डर देने के बाद, जी बताएं यहां आने में कोई मुश्किल तो नहीं हुई न? आप इस शहर रांची से कितना परिचित हैं? मतलब आप यहां कब से रह रही है? पीएचडी के लिए ही आई है या उससे पहले से है यहां?

रूचि– जी, पीएचडी मेरी सन् 2000 में शुरू हुई थी और मैं यहां 1998 में आई थी 


आयुष्मान– अच्छा! फिर दो साल क्या किया ? मतलब एंट्रेंस की तैयारी या कुछ और?

रूचि– तैयारी के साथ साथ एक स्कूल में जॉब भी की थी दो साल

आयुष्मान सवाल पर सवाल किए जा रहा था और रूचि परेशान होने लगीं। उसे ऐसे लगा जैसे कि शायद आयुष्मान सवालों की एक लिस्ट बनाकर लाया है और उसी आधार पर उसका आकलन तय करेगा। रूचि बेमन से सब बताती रही, मगर उसका दिल कह रहा था कि ये आयुष्मान उसके लिए सही जीवनसाथी नहीं साबित होगा.. और वो उठ कर चली जाए। करीब एक घंटे सवालों के बाद आयुष्मान रूचि से बोला कि आपकों कुछ पूछना है तो पूछ सकती है वैसे आपके घर पर तो मेरे घर वालों ने सब बता ही दिया है। रूचि को उसमे थोड़ा अकड़ और बेड एटीट्यूड दिख रहा था…उसने मन ही मन सोचा कि बता तो उसके घर वालों ने भी सब दिया ही होगा फिर सवालों की झड़ी क्यू लगा रखी है? रूचि जी, एक बात बताऊं सुनते ही वो चौंक गईं क्यू कि वो अपने दिमागी उलझन में फंस गईं थी ..

रूचि, जी कहे

आयुष्मान – देखिए! शादी के बाद आप प्रोफेसर की नौकरी तयशुदा समय में कर सकती है और उसके बाद आपकों घर संभालना होगा, हमारे घर में नौकर नही रखे जाते तो घरेलू काम आपकों खुद करने होंगे, साफ सफाई से लेकर खानें तक

रूचि कुछ देर तो आयुष्मान को देखती रहीं, फिर बोली कि क्यू नौकर रखने से आपकों क्या दिक्कत है? वैसे भी आप तो बाहर रह रहे हैं और एक जॉब वाली ल़डकी भला सारा काम कैसे अकेले कर लेगी? हमारे घर में तो मां जॉब नहीं करती है फिर भी शुरू से ही साफ सफाई, बाकी मदद के लिए सहायिका रख रखी है।

आयुष्मान – जी, हमारे यहां ये रिवाज नही है और आपकों रिवाजों का पालन तो करना ही होगा, ठीक है! अब काफी बात हो गईं तो तय है कि हमारी शादी हो रही है? मुझे उम्मीद है कि आपकों कोई दिक्कत नहीं होगी मुझे हां करने में …चलिए अब चलते हैं।

रूचि को तो कांटों खून नहीं, फिर भी क्या बोले कुछ समझ नहीं आ रहा था तो चुप ही रह गईं और आयुष्मान के पीछे पीछे रेस्टोरेंट से बाहर आ गईं और आयुष्मान को शुक्रिया कहते हुए पार्किंग में आकर अपनी स्कूटी स्टार्ट की…आयुष्मान जितना मुंह फट और एटीट्यूड वाले शख्स से पहली बार मिली थी वो।



भाग तीन


आयुष्मान से मिलकर जब घर पहुंची तो थोडी अपसेट थी, उसने मम्मी को कॉल की और सारी डीटेल बताई कि किस तरह से लड़का अपनी बातें, मर्जी उस पर थोप रहा था? उसने एक बार भी ये नही पूछा कि "वो क्या चाहती है?"

मम्मी का जवाब था कि बेटा ल़डकी हो तो थोड़ा तो एडजस्ट करना होगा, धीरे धीरे सब सेट हो जायेगा, अब देख न! मैं जब शादी होकर आई थी तो तेरे पापा बहुत जिद्दी, गुस्से वाले थे, शादी के 20 साल तक मैं केवल अपने मायके और उनके साथ ही साल में एक दो बार बाजार गई होंगी और अब तक कितना आजाद खयाल हो गए…खुद ही कहते हैं कि यहां जाओ, वहां जाओ…।

इस पर रुचि झुंझलाते हुए बोली कि "मां मैं जिंदगी के बीस साल तक इंतजार नही कर सकती हूं" फिर फोन रख दिया.. पापा से कुछ कहना ही बेकार था क्यू कि वो लडके का घर, परिवार, शिक्षा, नौकरी का हवाला देगें, उनके हिसाब से ल़डकी नौकरी करे ये जरुरी नहीं है और शादी के बाद घर परिवार की जिम्मेदारी आने पर उसे वहीं सब संभालना चाहिए l

यही सब सोचते सोचते उसने खाना बनाया, अनमने मन से थोड़ा ही खाया और यूं ही किचन में रखकर आ गईं कि कल सुबह किचन और बर्तन जल्दी उठकर साफ कर लेगी।

मन शादी और आयुष्मान की बात में उलझ कर रह गया था तो वो पढाई में भी ध्यान नहीं लगा पा रही थी, थोडी ही देर में परेशान होकर टीवी खोल लिया और न्यूज देखने के बाद सो गईं। 


अगले दिन सुबह आठ बजे नींद खुली तो वो हड़बड़ा कर उठ बैठी क्यू कि घर का काम, लंच बनाकर पैक करना, कल के बर्तन साफ़ करने के बाद उसे कालेज भी जाना था और उसके पास केवल डेढ़ घंटे ही थे।

वो जल्दी जल्दी काम समेटने लगी और बिना नाश्ता बनाएं ही तैयार होकर निकल पड़ी कि आज बाहर से खा लेगी कुछ भी..।


रास्ते भर वो सोचती रही है कि पता नहीं ये लड़कियों की जिंदगी इतनी मुश्किल क्यू होती हैं ? जब शुरू से ही पढाई बाहर की, आजाद खयाल रही तो ये अचानक से क्यू बंधन में बंधना? शादी करना चाहिए, ठीक है लेकिन ऐसे परिवार में क्यू जहां इतने बंधन हो और वो कंफर्टेबल न फील करें। अचानक तेज से उसने ब्रेक लगाया क्यू कि सामने दूसरी गाड़ी आ गईं थी…गिरते गिरते बची ….


"मैडम जब गाड़ी संभाल नही पाती तो चलाती क्यू हो? आज अपने साथ साथ मुझे भी अस्पताल पहुंचा दिया होता"  जोर से बड़बड़ाता हुआ सामने वाला आदमी चला गया तो रुचि को खुद पर बहुत गुस्सा आया कि गाड़ी चलाते वक्त उसका ध्यान क्यू भटक रहा है?


भाग चार



घर पहुंच कर स्कूटी खड़ी करके पहले तो चेक किया कि कही कोई स्क्रैच तो नही आया है और फिर ताला खोलकर घर के अंदर गई, हाथ मुंह धोकर चाय बनाकर उसने मम्मी को कॉल लगाई और आज के वाकये के बारे में बताया कि किस कदर वो अपसेट है जब से आयुष्मान से मिलकर आई है …।


इस पर मां बोली कि ठीक है बेटा हम लोग आयुष्मान की फैमिली से बात करेगें कि ल़डकी को पढ़ने, अपने तरीके से रहने, नौकरी करने पर कोई भी बंधन नही होना चाहिए और साथ ही घर में मदद करने के लिए कोई सहायिका रखनी होगी l इस पर रुचि को थोड़ी तसल्ली तो हुई मगर वो इस उम्मीद में थी कि मां शायद ये कहे कि वो इस रिश्ते को मना कर देंगी।


रूचि ने अपने परेशान मन को शांत करने के लिए थोडी देर ध्यान लगाया और फिर पढ़ने को बैठ गईं। रात 12 बजे तक पढ़ती रही, फिर भूख लगने पर न्यूडल्स बनाकर खा कर सो गईं।


सोने से पहले उसने खुद से वादा किया कि वो ध्यान आयुष्मान से हटाकर पढाई और अपने पर रखेगी वर्ना शादी का तो पता नही किसी दिन एक्सिडेंट करके अस्पताल में एडमिट ही हो जायेगी।


अगले दिन उठने पर उसने अच्छे से अपना पुराना रूटीन फॉलो किया, योगा मेडिटेशन, पूजा पाठ, लंच पैक करके शांत मन से निकली कालेज के लिए…कॉलेज पहुंचने पर वो प्रोफेसर उस्मान से मिलने गई जिनके मार्गदर्शन में वो पीएचडी कर रही थी तो उन्होंने पास में ही खडे एक लडके से परिचय कराते हुए कहा कि रुचि " इससे मिलो, ये है Mr राहुल, नए पीएचडी स्कॉलर है अभी इसी साल ज्वाइन किया है, थोड़ा बहुत इसे समय समय पर गाइड करते रहना"


रूचि "जी सर!"


हेलो राहुल


हेलो मैम


फिर थोड़ी देर प्रोफेसर से बात करके वो क्लास में आ गईं और आगे की थीसिस लिखने के बारे में सोचने लगीं



क्रमश:


दोस्तों, कहानी पढ़े और अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर दे, शुक्रिया




भाग पांच



आज काफी देर तक कॉलेज में ही रुकी रही रुचि क्यू कि थीसिस लिखना था उसे आज और उसके बाद कल कुछ फील्ड पर जाकर लोगों की राय जाननी थी। उसका टॉपिक था " बदलते परिदृश्य में ग्रामीण महिलाओं की स्थिति" तो अभी तक जितनी भी रिसर्च और प्रोफेसर से डिस्कशन हुआ था उसे आज ही लिख लेना चाह रही थी तो तेजी से आज उसका हाथ कागज पर चल रहा था। वक्त काफी हो चुका था और धीरे धीरे करके प्रोफेसर भी जा रहे थे क्यू कि उनकी क्लास पूरी हो चुकी थी, रुचि ने टाइम देखा तो चार बज रहे थे तो उसने सोचा कि 10–15 मिनट बाद वो भी निकल जायेगी यहां से। 


तभी रुचि जी, आज आपकों जाना नही है क्या? की आवाज पर चौंकी तो देखा कि नया स्कॉलर राहुल खड़ा हुआ था …।


रूचि अपना सामान समेटते हुए बोली कि बस निकल ही रही थी


राहुल– जी मैम! मैं आपकों घर तक छोड़ देता हूं


रूचि– थैंक यू, मगर मेरे पास स्कूटी है, चली जाऊंगी


राहुल– ओके मैम, मैं निकल ही रहा था तो सोचा आपकों पूछ लूं…


फिर राहुल और रूचि दोनो ही पार्किंग तक साथ में आए और फिर रुचि घर आ जाती हैं…आज उसका दिमाग पूरी तरह थीसिस में लगा हुआ है, वो सोच रही है कि कल क्या और कैसे बात करेगी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं से, लोकेशन तो उसने चुन ली है…तभी राहुल का फोन आता है और वो कहता है कि मैम मैं भी आपके साथ कल फील्ड पर चलना चाहता हूं, मुझे भी थोड़ा आइडिया हो जायेगा सवाल पूछने का, बात करने का…आज पार्किंग की तरफ़ आते हुए ही उसने राहुल को बताया था कि उसे कल फील्ड में जाना है डाटा जुटाने और नम्बर भी एक्सचेंज किए थे l 


रूचि ने कहा कि ठीक है, कल दस बजे कालेज के सामने मिले और वही से आगे के लिए निकलेंगे।


अगले दिन दस बजे राहुल और रूचि कालेज गेट पर मिलते हैं और फिर लोकेशन पर जाते है, रुचि को आज राहुल से काफी मदद मिल जाती हैं, सवाल पूछते वक्त, फोटो खींचने के लिए.. तीन चार घंटे तक सवालों, रिसर्च का सिलसिला चलता रहता है, राहुल बहुत जेंटली रुचि को फॉलो करता है। फिर एक जगह रुककर रुचि बैठ जाती हैं, सामने हैंडपंप देखकर हाथ मुंह धोती है, राहुल से भी बोलती है फिर लंच बॉक्स निकालकर राहुल के साथ खाना शेयर करती हैं… खाना खाते वक्त घर, परिवार, पढ़ाई, सपने आदि को लेकर दोनो के बीच खूब बातें होती है। 

फिर एक और घंटा गांव में बिताने के बाद दोनों वापस निकल पड़ते हैं… घर आकर रुचि मैटेरियल इकट्ठा करती हैं, फोटो लैपटॉप में सेव करती हैं और फिर खाना बनाने में लग जाती हैं, हमेशा से थोडी कम थकी और निश्चिंत है क्यू कि उसे आज राहुल से काफी मदद मिल गई थी।


भाग छह



रूचि आज सोच रही थी कि देखते ही देखते साल 2005 आ गया, बस उसकी पीएचडी पूरी होने में लगभग एक साल और बाकी है.. उसे इस वक्त ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। राहुल से भी थोडी मदद फील्ड रिसर्च और डाटा कलेक्ट करने में ले लेंगी तो थोडी सुविधा होगी और राहुल को भी आइडिया हो जाएगा फील्ड रिसर्च का…उसे याद है कि उसने भी पीएचडी के शुरुआत में सीनियर्स के साथ मदद करते हुए काफी कुछ सीखा था। 


वो गंभीर होकर डाटा रिसर्च पर डीटेल लिख ही रही थी तभी मम्मी की कॉल आ गई तो उसने बोला कि फ्री होकर बात करूंगी रात को, अभी कुछ जरुरी लिख रही हूं…


पूरी बात सुनने से पहले ही मां ने ये कहकर बम गिरा दिया कि "तेरी शादी तय हो गई है…एक महीने बाद सगाई है…डेट भी तय हो गईं हैं…जिस दिन तेरे पिताजी आने के लिए रिजर्वेशन करा देगें तब आ जाना"


सुनते ही उसने सर पकड़ लिया और मां ने फोन काट दिया….


रूचि फिर से थीसिस लिखने में व्यस्त हो गईं क्यू अब तो उसे घर भी जाना है और सगाई जैसी आफत भी सर पर आ रही हैं, पता नहीं पिताजी रुक क्यू नही जाते साल भर के लिए, लेकिन उनसे कहने का कोई फायदा नहीं है क्यू कि वो किसी की भी बात मानते तो है ही नही…


रात नौ बजे तक वो थीसिस लिखती रही …फिर थक जानें पर उठकर टहलने लगी और फिर खाना बनाने की तैयारी में लग गईं, खाना बनाते हुए वो याद कर रही थी कि आयुष्मान का व्यवहार उसके साथ कितना रूखा था अगर उसने ऐसा ही रवैया रखा तो कैसे चल पाएगा शादी का रिश्ता…किचन का काम समेटकर उसने मां को फोन लगाया…

मां दुनियां भर की सीख देते हुए तसल्ली दे रही थी कि सब ठीक होगा, वो अच्छा सोचकर सगाई,शादी की तैयारी करें…



भाग सात



आज रात का ही पिताजी ने घर आने के लिए रिजर्वेशन करा दिया है और दो दिन बाद उसकी सगाई भी है। रूचि ने थक हार कर आखिर में अपने भाग्य से समझौता कर लिया है और आगे की जिंदगी नियति पर छोड़ दिया है । घर में सगाई की तैयारी चल रही है…सभी लोग इंतजाम करने में व्यस्त हो गए हैं …


रूचि को मां ने पार्लर भेज दिया है , पार्लर से तीन घंटे में वापस आईं तो काफी थक गई थी…खाना खाकर सो गईं और कुछ देर में मां पिता की परेशान आवाज से नीद खुली तो देखा कि पिता किसी बात पर बहुत परेशान दिख रहे हैं उसने अपने छोटे भाई को बुलाकर पूछा तो उसने बताया कि उसके सुसराल वालों ने दहेज में रांची में ही एक 4 BHK की डिमांड की है। पिताजी के पास इतने पैसे नहीं हैं और कहां से इंतजाम करे इसमें ही परेशान हैं। उन्होंने कहा है कि इंतजाम हो जाएं तभी सगाई करने के लिए बातचीत करें।


रूचि कुछ देर तो चुप रही फिर पिताजी के पास जाकर बोली कि "पिताजी आप मना कर दिजिए, मेरी पीएचडी पूरी हो जाएगी तो अच्छे अच्छे बिना दहेज वाले रिश्ते खुद ही आ जायेंगे"


पिताजी–"बेटा! तू चिंता मत कर , हम लोग बात करेगें…4 नही तो 2 BHK तो खरीद ही लेंगे तेरे लिए, आखिर रहना तो तुझे ही है न"




ये कैसी उलझन – भाग आठ



पिताजी फ़ोन पर लगातार रिक्वेस्ट कर रहे थे कि आप शादी न तोड़िए और हम अपनी हैसियत के हिसाब से 2 BHK खरीदकर बिटिया को दहेज में देगें…लेकिन फोन कट जाता हैं।


पिताजी भारी आवाज में मां से कह रहे हैं कि उन्होंने सगाई तोड़ दी है …रुचि का कल का ही रिजर्वेशन करा देते हैं वापसी का…कम से कम उसकी पढाई का नुकसान तो न हो….


रूचि चाहकर भी कुछ नही कह पा रही थी पिताजी से, उसने अगले दिन की वापसी के लिए सामान पैक कर लिया और किचन में जाकर दही, बेसन मिलाकर हाथों में रगड़ने लगी ताकि महेंदी छूट जाएं, वो इस तरह नही जाना चाहती थी और मन ही मन सोच रही थी कि प्रोफेसर, सीनियर्स और दोस्तों को व्हाट्सएप करके ही बता देगी कि उसकी सगाई टूट गई है ताकि जाने पर ऑकवर्ड सिचुएशन न फेस करनी पड़े।



आधी रात तक पिताजी बड़े भारी मन से आंगन में चहलकदमी करते रहे क्यू कि उन्हें बहुत अपमानजनक लग रहा था रुचि की सगाई का टूटना…. अगले सुबह रुचि को स्टेशन छोड़ने पिताजी जाते हैं तब भी रुचि कुछ भी नहीं बोल पाती पिता को परेशान देखकर…रुचि खुद नही चाहती थी कि सगाई हो मगर पिता को दुखी देखकर वो भी दुखी हो रही थी ।


वापस आकर वो फिर से थीसिस लिखने में लग गईं, आए दिन उसे फील्ड विजिट करनी होती थी तो जूनियर राहुल उसके साथ ही होता था उससे रुचि को बड़ी मदद मिल जाती थी नोट डाउन करने में और फोटो क्लिक करने में…वो राहुल का अपनी तरफ़ कुछ झुकाव भी महसूस कर रही थी….



दोस्तों, कहानी पढ़े और अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर दे…


शुक्रिया


क्रमश:



भाग– नौ


फील्ड रिसर्च लगभग पूरी हो गईं थी और अब बस थीसिस का कुछ भाग गाइड के साथ डिस्कस करके लिखना शेष रह गया था…रुचि को कभी कभी ये सपना सा लगता कि वो डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाली हैं, उसे वो दिन याद आने लगते जब वो पीएचडी एंट्रेंस की तैयारी कर रही थी ….


अब वो कॉलेज ज्यादा जाने लगी थी ताकि डिस्कशन का काम पूरा हो और पूरी थीसिस को फाइनल टच दे सकें। जूनियर राहुल की भी पीएचडी शुरू हो चुकी थी और वो एक और जूनियर के साथ फील्ड विजिट करने जाता तो कॉलेज कम ही आता, मुलाकात भी कभी हफ्ते पंद्रह दिन में हो जाती। राहुल उसे रात को कॉल किया करता और थीसिस लिखने को लेकर कुछ कुछ पूछता लेकिन रुचि को लगता कि जैसे वो कॉल करने,बात करने के लिए थीसिस का बहाना लेता है…रुचि भी बात कर लिया करती।


आज प्रोफेसर ने सुबह दस बजे बुलाया था क्यू कि उनकी कोई क्लास थी नही और वो आज रुचि का सारा क्वेरी हल करके अपना काम खत्म करना चाह रहे थे…रुचि जब प्रोफेसर के केबिन में गई तो राहुल पहले से मौजूद था, उसने इशारों से हेलो बोला और फिर रुचि अपनी थीसिस के बचे भाग को पूछकर पूरा करने में लग गईं। जितनी तेज प्रोफेसर बोल रहे थे उतना तेज लिखना संभव नही था तो उसने फोन का रिकॉर्डर ऑन कर लिया। करीब तीन बाद बाहर निकली तो देखा राहुल बाहर ही उसका इंतजार कर रहा था। रूचि को थोडी हैरानी भी हुई की ये तीन घंटे से यहां बैठा है…पास पहुंची तो राहुल बोला


"मैम! क्या आप साथ में कॉफी पीने चलेगी"?


रूचि ने कुछ सोचकर हां कर दी


फिर दोनो पास के बरिस्ता कैफे में गए, कॉफी का आर्डर करने के बाद राहुल ने पूछा कि


"मैम! अब आपकी पीएचडी तो पूरी होने वाली है तो फिर आप क्या करेंगी? मतलब यही रहकर जॉब या घर जायेंगी"?


रूचि ने लंबी सांस लेकर कहा कि अभी कुछ भी पता नहीं


ल़डकियों की जिंदगी बड़ी ही अनिश्चित होती हैं, उन्हे खुद नही पता होता है कि अगले पल क्या होने वाला है? आधा फ़ैसला तो घर वाले बिना पूछे ही कर देते हैं


राहुल बड़े दार्शनिक अंदाज में बोला कि आप खुद तय कर लीजिए और निश्चित होकर जिए…


उसके इस स्टाइल पर रुचि हंस पड़ी और उसकी बातों का मतलब पूछा….


थोडी देर तक राहुल सर झुका कर बैठा रहा, फिर बोला कि देखिए मैम , मैं काफी दिन से सोच रहा था बोलने को मगर हिम्मत नहीं हो रही थी …आपकों ठीक लगे तो आप हां कर दीजिएगा…कोई प्रेशर नहीं है…




भाग– दसवां व अंतिम



राहुल ने बोलना शुरू किया कि


"मैम! मैं आपसे काफी समय से बात करना चाह रहा था मगर मौका नही मिला, इसलिए जब प्रोफेसर ने कल बताया कि आज आपकी थीसिस पूरी करा देगें, आपकों बुलाया है तो मैं भी आ गया ताकि आपके फ्री होते ही मैं आपसे समय मांग कर बात कर संकू।"


इसीलिए ही मैं आपकों यहां लेकर आया…. राहुल अटक अटक कर बोल रहा था…दरअसल मैं आपकों पसंद करता हूं और आगे की जिंदगी साथ बिताना चाहता हूं, जब आपने सगाई की बात बताई थीं तो मैं निराश हो गया था और प्रभु कृष्ण से मदद मांगी थी और आपकी सगाई नही हुई।


आप चाहे तो सोचकर बताने के लिए समय ले लीजिए…मुझे कोई ऐतराज नहीं हैं…


बोलकर राहुल रुचि की ओर देखने लगा तो रुचि का जवाब था कि मैं अभी कुछ का नही सकती, तुमको पहले मेरे घर वालों से बात करनी होगी, उनकी रजामंदी जरुरी है मेरे लिए। 


राहुल ने कहा, ठीक है ! एक बार आप अपने घर में जिक्र कर दीजिए फिर मैं अपने मम्मी पापा से बात करके उनके साथ आपके घर रिश्ता लेने जाऊंगा।


इसके बाद रुचि वापस घर आ जाती हैं, बड़ा अजीब सा मन हो रहा है उसका। सोच रही है कि पता नहीं घर वाले क्या कहेंगे? 


तभी मम्मी की कॉल आती है तो वो कहती है कि मम्मी आपसे कुछ बात कहनी है …इस पर मम्मी बोलती है कि हां बता…कोई लड़का पसंद है क्या?


रूचि अवाक सी! आपकों कैसे पता? 


मम्मी, अरे ! रात को सपना देखा था कि तू एक लडके को लेकर घर आई है और उसी से शादी करना चाहती थी…इसीलिए पूछा



रूचि, हां मम्मी, बात कुछ ऐसी ही है… एक लड़का जो जूनियर है, नाम है राहुल…उसने कल शादी के लिए प्रोपोजल दिया था, अब घर आकर बात करना चाहता है…


मम्मी, ठीक है; तेरे पापा से बात करती हूं, कुछ समय लगेगा उन्हे मानने में, फिर बुला लेना बातचीत के लिए…


रूचि की तो जैसे पूरी टेंशन ही खत्म हो गईं थी…जब से राहुल ने कहा था, बड़ी परेशान सी थी कि घर पर कैसे बोलूं?


मम्मी के सपने ने तो सब आसान बना दिया…



रूचि राहुल को फ़ोन करती हैं…राहुल, मैंने मम्मी से बात कर ली है और आप भी घर पर बात कर ले, जैसे ही मम्मी बोलेंगी…आपकों घर जाना है बातचीत के लिए….


राहुल की तो खुशी का ठिकाना न रहा, उसने रुचि को थैंक यू, बदले में रुचि भी हंसते हुए उसे थैंक यू कहती है…..




कहानी समाप्त



पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया….



Wednesday, April 20, 2022

बाबा दरवाजा खोलो –समीक्षा

 मोनिका शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक "दरवाजा खोलो बाबा" शीर्षक से ही दिल के करीब लग रही है। ऐसे लग रहा है कि किताब का शीर्षक खुद ब ख़ुद कह रहा है कि बाबा ससुराल विदा करने के बाद भी अपनी बेटी के लिए दिल और घर का दरवाजा हमेशा ही खोल कर रखना ताकि जरुरत पड़े तो वापस आ सकूं उस घर जहां बचपन में मेरी किलकारियां गूजी थी... पति के चौखट को लांघने का साहस भी कर पाऊं मैं अगर ससुराल में मन, आत्मा मृतप्राय हो जाएं तो।


 लेखिकाओं, ख़ासकर नारीवारी लेखिकाओं ने मां, नारी की महिमा पर खूब किताबे लिखी हैं , पुरुष प्रधान समाज, उनकी कठोर व्यवस्था पर भी खूब वर्णन होता रहता है मगर पिता रूपी पुरुष के त्याग, बच्चों ख़ासकर बेटियों के प्रति ममता, समर्पण पर कम ही लिखा गया है या कहें कि खुद पुरूषों ने अपनी भावनाओं, संवेदनाओं को कम ही जाहिर किया है।
डा मोनिका ने पुरुष प्रधान समाज के भीतर बैठा पिता, भाई, पति रूपी संवेदनामयी पुरुष को भी दिखाने की कोशिश की है और उनकी अभिव्यक्ति बखूबी जाहिर हो भी रही है।
 "पिता की दस्तक " पाठ में वो कहती है कि दरवाजे पर पिता की दस्तक..
 "सब ठीक हो जायेगा" भर कह देना,
आस की मिठास,
' कोशिश तो करो ' के आदेश में घुला अगुवाई का स्वर 
साहस का पदचाप
विफलता के विषाद भरे दौर में पीठ पर मिली थपकी
सम्बल की थाप
'बोलो क्या चाहिए?' पूछते प्रश्न की मनुहार
हर मनोरथ को पूरने वाली संपन्नता का गौरवमयी भरोसा बनी l 
ये कविता पढ़कर मुझे अनायास ही पिता और उनके हाथों का स्पर्श, सुरक्षा याद आ गई ...।
पिता रूपी पुरुष की मानवीय संवेदनाओं के वर्णन के साथ साथ किताब के आखिरी कविता "विमंदित सोच" में वो समाज में व्याप्त महिला अपराध, दुष्कर्म पर भी कड़ा प्रहार करती है 
"कुत्सित मानसिकता के असंतुलन से उपजी
दुष्कर्म की प्रवृति हो
या हो समाचार
किसी दुष्कर्म पीड़िता के मानसिक संतुलन खो देने का।
दंभी और शोषक सोच से उपजी
दोनो ही विकृत स्थितियां पर्याप्त हैं,
समूची पृथ्वी पर भय के बीज रोपने
अविश्वास के दोलन से संस्कारों की आधारशिला डिगाने
और सम्पूर्ण प्रकृति का पोर पोर दहलाने को।

Wednesday, March 16, 2022

हिजाब पर होती राजनीति

पिछले 24 घंटे से हम एक विडीयो देख रहें हैं जिसमे बुर्का पहने एक लड़की कॉलेज में आती हैं और उसके आते ही पहले से ही तैयार छात्रों का समूह उसे देखते ही जय श्री राम का नारा लगाता है,, ये उसी कॉलेज के छात्र है ये उनके यूनिफॉर्म से पता चल रहा है और जवाब में बुर्का पहने लड़की जिसका नाम मुस्कान खान है अल्लाह हूं अकबर का नारा देती हैं... वीडियो को देखकर एक पल के लिए ऐसा लगता था कि जैसे साबित करना है इन छात्र छात्राओं को अपनें अपने धर्म, पहनावे को।  ये वीडियो कर्नाटक के मंड्या जिले के प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज का है,
 दरसअल विवाद तब शुरू हुआ जब कर्नाटक के उडुपी जिले के एक सरकारी प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज में हिजाब पहनकर आई छात्राओं पर रोक लगाया गया. अब ये मामला तुल पकड़ चुका है, कर्नाटक में ही कई जगह हिंसक प्रदर्शन हुए हैं, देश के कई हिस्सों में भी इस पर चर्चा कम विवाद ज्यादा चल रहा है, ट्विटर पर भी हिजाब के पक्ष, विपक्ष में ट्रेंड कराए जा रहे हैं l 
 मामला कर्नाटक हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है, जहां सुनवाई के दौरान उन्होने छात्रों से शांति, सौहार्द बनाए रखने की अपील की है l देश के पांच राज्यों में चुनाव से ठीक पहले हिजाब विवाद राजनीति से भी प्रेरित लग रहा है.. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के इस स्टेटमेंट के बाद अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती है चाहे वो हिजाब हो, घूंघट हो या बिकनी.. माहौल और भी गर्म हो गया है, जबकि पिछले दिनों हुए प्रयागराज में बेटी के साथ बलात्कार, हत्या पर खामोश रही थी और ख़ासकर राजस्थान, अलवर में हुए एक मूक बधिर बेटी के साथ रेप, बर्बरता को पुलिस एक्सीडेंट का रूप देने की कौशिश में थी, FSL की रिपोर्ट में बलात्कार होने की पुष्टि हुई है, बेटी को न्याय नही मिला है और प्रियंका गांधी चुप है, ये हमारे नेतागण भी चुनाव और अवसर देखकर न्याय दिलाने के लिए खड़े होते हैं... स्कूल और ज्यादातर कॉलेज में ड्रेस कोड होता है और हम सबने उसका पालन भी किया है.. ये हिजाब विवाद भी कॉलेज प्रशासन और छात्राओं के बीच है इसे वही सुलझाना चाहिए और नेतागण को अपनें फायदे के लिए  कम से कम शिक्षा को तो राजनीति के घेरे में नही ही लाना चाहिए  । धार्मिक आधार पर, पहनावा के आधार पर बटवारा करके पढ़ाना और फिर " हम एक है " कि बात कहना मुश्किल होगा, नफरती माहौल में कम से कम स्कूल कॉलेज में धर्म के आधार पर बटवारा नही ही होना चाहिए
 कर्नाटक सरकार के राजस्व मंत्री आर अशोक ने कहा है कि सरकार हिजाब या केसरिया के पक्ष मे नही है.. छात्र गलियों में जो चाहे पहने लेकिन स्कूल में ड्रेस कोड ही चलेगा l
कर्नाटक के प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन मंत्री बीसी नागेश ने छात्रों के बवाल पर कहा है कि कोई भी कानून को अपनें हाथ में नही ले सकता और बदमाशों को बक्शा नही जायेगा , उन पर एक्शन लिया जायेगा l
सुरक्षा की दृष्टि से कर्नाटक में स्कूल कॉलेज को बंद कर दिया गया है मगर जिस तरह से इस पर राजनीति हो रही है तो मामला थमने का नाम नही ले रहा है.. इसमें तमाम ऐसे स्त्री, पुरुष बुद्धिजीवी भी कूद पड़े हैं जो अनुशासन की बात करते थे, जिनके खुद के पहनावे बेहद ही आधुनिक है, जिन्होंने अपने जाति, धर्म के सभी बंधन तोड़े है, बेवजह धार्मिक पहचान को ओढ़ने वालो को ज्ञान दिया है वो भी ट्विटर, फेसबुक पर आकर "अपनी मर्जी के कपड़े पहनने की बात"कहकर स्कूल के नियमों को भी ताक पर रख रहें हैं... मर्जी से अगर खुद को ढकना ही है तो घर में, बाहर, स्कूल पहुंचने तक ढकने की आजादी किसी ने छीनी थोड़े ही है बस स्कूल नियमों के तहत ही अंदर प्रवेश करने से मना कर रहा है... लडकियों के पास रास्ता है कि गेट पर हिजाब, नकाब उतार सकती है और जाते वक्त पहन सकती है... क्यू कि स्कूल एक ऐसी संस्था है जहां मानसिक, बौद्धिक विकास किया जाता हैं तो छात्र या उनके माता पिता अपनी बुद्धि नही ही सौप सकते हैं l मामला कोर्ट में है तो निर्णय के आधार पर ही मुस्लिम बेटियों को स्कूल कॉलेज के अंदर नकाब, हिजाब पहनने की सहूलियत दी जाएगी या नहीं ये वक्त के साथ पता चलेगा लेकिन तब तक चुनावी माहौल में धर्म का करारा छौंक लगने से सियासी दलों को फायदा मिल जाने वाला है l

Tuesday, January 4, 2022

क्या भारत में भी लोकप्रिय हो रही है ‘One Night Stand’ की संस्कृति ?


क्या भारत में भी लोकप्रिय हो रही है ‘One Night Stand’ की संस्कृति ?

One Night Stand

भारत के महानगरों में बढ़ता वन नाईट स्टैंड (One Night Stand) का चलन अब टीनएज बच्चों, युवाओं के साथ साथ किसी कारणवश अपने पार्टनर से अलग रह रहे शादी शुदा स्त्री-पुरुष के बीच बहुत लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो ये पश्चिमी चलन भारत के लिए खतरे की घण्टी है।

इससे सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी) ,HIV, एड्स सहित तमाम तरह की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अभी ऐसे रिश्ते मुंबई, दिल्ली, नोएडा गुड़गांव जैसों शहरों में ही पनप रहे हैं लेकिन उन्मुक्त सेक्स की चाहत इसे छोटे शहरों, कस्बों तक आज नहीं तो कल ले ही आएगी।

क्या है One Night Stand ?

वन नाईट स्टैंड का सीधा सा मतलब है कि किसी भी अजनबी से बिना किसी रिश्ते, दोस्ती, भावना के , उसके बारे में जाने बिना सीधे सेक्सुअल रिलेशन बना लेना है।

ऐसा करना कई बार युवाओं के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। महानगरों की भागम भाग जिंदगी में किसी को वैसे भी एक दूसरे से ज्यादा मतलब रहता भी नहीं है और ऐसे में अगर आपका सेक्सुअल पार्टनर कोई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति हुआ तो क्षण भर की मौज मस्ती पूरी जिंदगी को नर्क में डाल सकती है।

वो आपको अपनी बात मानने के लिए मजबूर कर सकता है/सकती है, ब्लैकमेल कर सकता/सकती है और हो सकता है और अगर आप शादीशुदा हैं तो ये बात आपकी अच्छी खासी शादी शुदा जिन्दगी को भी तबाह कर सकती है। क्षण भर की मौज मस्ती तमाम तरह की कानूनी मुसीबतें भी खड़ी कर सकती हैं जिसका लम्बा दुष्प्रभाव जिंदगी पर पड़ सकता है।

क्या कहता है विदेशी सर्वे ?

एक विदेशी सर्वे में हुए खुलासे से पता चलता है कि 25% अमेरिकन और यूरोपियन के तीन से पांच सेक्स पार्टनर रह चुके हैं, इसमे से 60% के दस तक सेक्सुअल पार्टनर रहे हैं और इसमें से 7% लोगों के 30 से अधिक सेक्स पार्टनर रहे हैं..और इसमें से ज्यादातर ने वन नाईट स्टैंड के लिए प्लान किया

जबकि कुछ लोगों ने क्लब्स में मिलने के बाद सेक्सुअल रिलेशन बनाये (सोर्स इंटरनेट) भारत में अभी ये चलन नया है तो ऐसे सर्वे होना संभव नहीं है लेकिन चलन बढ़ा तो एड्स के रोगियों की भरमार हो जाएगी।

जब मुझे पहली बार 2018 में नोएडा में एक 17 साल की खूबसूरत सी बच्ची के मुंह से ये सब सुनने को मिला तो आश्चर्य का ठिकाना न रहा..मुझे तो उसकी सुरक्षा की भी चिंता होने लगी..

आप किसी क्लब में किसी अनजाने व्यक्ति से मिल रहे हैं भले ही वो आपके कॉलेज का हो, डांस किया, ड्रिंक्स किया, सहमति से वन नाईट स्टैंड पर गई लेकिन अगर लड़के ने कई और लड़कों को बुला लिया या आपके विरोध पर रेप या मर्डर हो गया तो..? इशारों में समझाया भी उसे कि दोस्ती, प्यार सही है मगर वन नाईट स्टैंड से दूर रहे।

कई बार बहुत सारे शादी शुदा जोड़ो की सेक्स फैन्टैसी इतनी ज्यादा होती है कि वो अपने पार्टनर के साथ संतुष्ट नहीं हो पाते हैं और कुछ नया पाने की चाहत में उनका मन सेक्स पार्टनर (One Night Stand) की तलाश में रहता है और कई बार ऐसे ही रिश्ते परिवार बिखरने की बजह बन जाते हैं।


अगर बात टीनएज बच्चों की जाए तो उनमें ये चलन बहुत लोकप्रिय है लेकिन कब इच्छा, सहमति से हटकर किसी बात पर असहमति और बलात्कार में तब्दील हो जाये, कह नहीं सकते ?

नैतिकता, संस्कृति से भी ऊपर जो बात करने लायक सबसे जरूरी चीज आपका स्वास्थ्य हैं। वन नाईट स्टैंड में कई सारे सेक्सुअल रिलेशन से होकर गुजरे लोगों में एसटीडी, एड्स (HIV) होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।

ऐसी स्थिति में केवल अपनी मस्ती के लिए बिताए गए क्षण (One Night Stand) आपके लाइफ पार्टनर और परिवार के लिए बीमारी का खुला निमंत्रण दे सकते हैं।

ऐसे रिश्ते से बचना और अपने जीवनसाथी के साथ कमिटमेंट ज्यादा सुरक्षित होगा लेकिन फिर भी जो ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव रहते हैं। अलग अलग लोगों के साथ, उन्हें समय समय पर HIV की जाँच कराते रहना चाहिए..इस समय तो सरकार भी जागरूकता के लिए तमाम तरह से प्रचार मे जुटी हैं

कई बार अनजाने में युवा हो जाते हैं शिकार !

कई बार छोटे शहरों से गये युवा इसकी चपेट में अनजाने में ही आ जाते हैं..अगर कोई उन्हें केवल वन नाईट स्टैंड के तहत अप्प्रोच कर रहा होता है तो उसे प्यार समझ बैठते हैं।

जबकि उनका केवल इस्तेमाल करके उनका साथी किनारे कर देता है और ऐसे युवा डिप्रेशन में चले जाते हैं और कई बार सुसाइड की भी कोशिश करते हैं।

बदलते हुए समय हमें इस पर अपने बड़े होते हुए बच्चों के साथ खुलकर बात करने की जरूरत है। उन्हें सेक्स एजुकेशन के साथ साथ समाज में विष की फैले गलत लोगों,

विचारों, चलन पर बात करने की जरूरत है। बड़े होते हुए बच्चों के साथ दोस्त बनकर रहे ताकि आपका बच्चा अगर ऐसे किसी ब्लैकमैलिंग वन नाईट स्टैंड के चक्कर में फंस जाए तो उसे बाहर निकालने में मदद करे, उसकी काउंसलिंग करायी जाए


Published in https://themediavoice.com/one-night-stand-culture-spreading-in-india/