Tuesday, June 3, 2025

स्त्रियों की स्वतंत्रता

खान सर के रिसेप्सन की फोटो जब पब्लिक प्लेटफॉर्म पर आई तो लोगों ने अपने अपने विचार रखने शुरू किए। स्टेज पर खड़े नव दंपति बेहद ही खूबसूरत और खुश दिख रहे है... दुल्हन भले ही हल्के घूंघट में हैं लेकिन हंसी और खुशी झलक रही हैं। 
यहां मुद्दा ये बिल्कुल नहीं है कि प्रगतिशील विचारों वाले युवाओं के आदर्श खान सर ने अपनी पत्नी से स्टेज पर घूंघट क्यों करवा रखा हैं? अगर परिवार में इतनी ही बंदिश थी तो स्टेज पर बुलाया ही क्यों? या सवाल ये भी नहीं है कि हर व्यक्ति अपने परिवार के रीति रिवाज को निभाने के लिए स्वतंत्र हैं... मुद्दा बस इतना सा ही हैं कि जब कोई भी व्यक्ति लोगों का आइडियल बनता हैं और युवा उसको फॉलो करने लगते हैं तो फिर उसके हर कदम और किए गए कार्यों पर उसकी एक अलग जिम्मेदारी बन जाती है ... क्योंकि एक बड़ा वर्ग उनसे प्रेरित हो रहा हैं।
खासकर बात यहां लडकियों की है जो भी उन्हें आदर्श मानती है.. उनके दिखाए रास्ते पर चलती हैं और घर परिवार में जरूर उनकी चर्चा करती होंगी और जब वो स्वछंद जीवन और रीति रिवाज के खिलाफ आएंगी तो उन्हें कहा ही जाएगा कि देखो तुम्हारे आदर्श, सर तो ऐसा करते हैं न, तो तुम्हे क्यों परहेज हैं? वो तुमसे ज़्यादा पढ़े लिखे होकर भी परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं तो फिर तुम्हारी क्या मजाल जो मना करो?
लड़कियां इस तरह की बातें बचपन से ही सुनती हुई बड़ी होती है... कई बार उनकी तरक्की के रास्ते और बढ़ते कदम पर जंजीरें सिर्फ इसीलिए लगवा दी जाती है कि उनके परिवार, समाज में कोई ऐसा नहीं करता और उनसे पढ़ी लिखी लड़कियां भी रूढ़ियों और परम्पराओं को निभाती आई हैं।
मैं खुद एक बेहद ही संपन्न और पढ़े लिखे परिवार से होने के बावजूद अपनी पढ़ाई के लिए समय से बाहर नहीं आ पाई क्यों कि हमारे खानदान की लड़कियां अपनी मर्जी से बाहर रहकर पढ़ाई नहीं करती थीं और भला एक लड़की अकेले कैसे रहेगी बाहर, मगर भाइयों के लिए शुरू से ही पूरी छूट थी। बहुत मशक्कत के बाद और एक लंबा सुनहरा समय गंवाने के बाद अकेले जब बाहर आई तो पूरा समाज मेरे खिलाफ था मगर फिर भी मैने अपने घर की महिलाओं पर लगी सारी बंदिशे तोड़कर न केवल आजाद किया वरन उन्हें अपने विचार रखने की भी स्वतंत्रता मिली हां इसका खामियाजा मैने जरूर अपना सुख, चैन, समय गवाकर दिया... और अगर अब मैं बेहद प्रगतिशील होने के बाद किसी से शादी करके घूंघट डालकर स्टेज पर आऊ तो बहुत सारी लडकियों के लिए मुश्किलें पैदा करूंगी और ये बिल्कुल भी मेरा निजी विषय नहीं होगा... समाज के लडकियों के प्रति एक जिम्मेदारी होगी ठीक वैसी ही जिम्मेदारी खान सर की थी जिस पर उन्होंने पानी फेर दिया.... और खान सर का स्टेज पर घूंघट डाले पत्नी के साथ लोगों से मिलना और फोटो खिंचवाना बिल्कुल भी निजी विषय नहीं है।

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