फिर से एक स्वतंत्रता आन्दोलन की जरूरत है..
फिर से एक भगत सिंह को आना होगा..
फिर से एक सुभाष चंद्र बोस को आना होगा..
लड़नी होगी हिंसक, अहिंसक दोनों ही लड़ाइयां
इस स्वतंत्रता संग्राम में दुश्मन अंग्रेज नहीं
बल्कि घर में छुपे हुए वो पुरुष वर्ग है,
जो मौका पाते ही स्त्री को लूटना चाहता है,
उसे नोचना चाहता है..
ये लोग बड़े शातिर है..
इन्हें पहचानना भी मुश्किल है..
ये सामने से वार नहीं करते हैं..
ये छुपकर किसी अकेली स्त्री का इंतजार कर रहे होते हैं ये आपके सामने बैठकर ही..
दिमाग में Rape के ख़यालात बना रहे होते हैं..
बस मौका मिलते ही टूट पड़ते हैं..
इनके खात्मे के लिए स्त्री को भगत सिंह बनना होगा..
सुभाष चंद्र बोस बनना होगा ..
करना होगा इनसे सामना..
रोकना होगा इन्हें..
चढ़ाना होगा इनको सूली पर..
ये लड़ाई घर से भी होगी और बाहर भी..
बनना होगा हर स्त्री को मजबूत..
भागने के बजाय सामना करना ही होगा
बलात्कारी मानसिकता से और..
इनसे आंख से आंख मिलाकर..
इन्हें इनकी गलती बतानी होगी..
इन्हें मजबूर करना होगा बदलने के लिए..
वर्ना हर दिन बेटियाँ ऐसे ही मरती रहेंगी..
और हम उनके कब्र पर फूल चढ़ाते रहेंगे...
रीटा शर्मा