Thursday, September 6, 2018

चेहरे पर झुर्रियों के लिए क्या करें?

चेहरा पर आम तौर से देखभाल न करने पर 30 की उम्र पार करने पर झुर्रियों (wrinkles) का दिखना आम बात है और केवल चेहरा ही नहीं इसका असर हाथ, पैरों तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर भी दिखता है l झुरियों की वजह कई बार खान पान का सही न होना, कोई बीमारी या फिर त्वचा का सही मॉइश्चराइज ना (नमी की कमी) करना होता है l

ये कुछ टिप्स अपनाकर आप अपने चेहरे और बाकी त्वचा को झूरियाँ मुक्त रखे


1-नारियल का तेल

माथे पर झुर्रियों को दूर करने के लिए थोड़ा नारियल तेल चेहरे पर लगाए और फिर क्लॉक और एंटी क्लॉक वाइज़ मसाज करें lइसे 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर एक नैपकिन से वाइप कर ले l
नारियल का तेल प्राकृतिक नमी बरकरार रखता है l



2- गुलाब जल

गुलाब जल को कॉटन में लेकर उससे चेहरे, गर्दन को हल्के हाथों से पोछे l गुलाब जल क्लीनजिंग का भी काम करता है l गर्मियों में इसका आइस क्यूब बना कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं l


3- जैतून का तेल (ऑलिव ऑयल)

जैतून का तेल हाथों में लेकर इसे चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें और चेहरे पर लाइंस पर ज्यादा ध्यान दे, चाहे तो थोड़ा नारियल तेल भी मिला सकते हैं l


4- नीबू का रस -

आप चाहे तो नीबू, नारंगी और अंगूर का रस मिक्स कर सकते हैं या फिर केवल नीबू का रस ले सकते हैं l अगर स्किन सेंसिटिव है तो थोड़ा पानी मिला ले l इसे कॉटन से पूरे चेहरे और गर्दन पर लगाए और सूखने पर धूल ले l

विटामिन सी युक्‍त फल भी त्वचा को तरोताज़ा रखते हैं l सभी खट्टे फल और मौसमी फल खाने से भी त्वचा स्वस्थ्य और सुंदर दिखेगी l इसके साथ ही व्यायाम और योगा भी शरीर और मन दोनों को ही स्वस्थ्य रखता है l

समलैंगिकता अब अपराध नहीं - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धारा 377 को गैरकानूनी करार दिया है। इसके बाद अब समलैंगिकता अपराध नहीं रहेगा। इसके बाद से ही देश भर में ही एलजीबीटी कम्यूनिटी इसका जश्न मना रही है।

आइए जानते हैं कि और किन किन देशों में ये कानूनी तौर पर मान्य है - -

वर्ष 2000 में नीदरलैंड्स दुनिया का पहला ऐसा देश बना था जहां पर सेम सेक्‍स के कपल्‍स को शादी करने, तलाक लेने और बच्‍चों को गोद लेने कानूनी वैधता हासिल हैं l नीदरलैंड्स में 82 प्रतिशत लोग गे मैरिज का समर्थन करते हैं और किसी भी यूरोपियन यूनियन के देश में यह सर्वोच्‍च स्‍तर है।

बेल्जियम में संसद ने जब गे मैरिज को कानूनी जामा पहनाया तो काफी विरोध हुआ। ग्‍लोबल कैंपेन के बाद भी आज तक यहां पर इसे कानूनी मान्‍यता मिली हुई है।

अमेरिका के सिर्फ 14 राज्‍यों में सेम सेक्‍स या गे सेक्‍स मैरिज को कानूनी वैधता मिली हुई है।


साउथ अफ्रीका की कोर्ट ने वर्ष 2005 में एक आदेश पारित किया जिसके तहत उसने गे मैरिज को रोकना या फिर इसका विरोध करने को देश के संविधान के खिलाफ बताया गया। इसके अगले साल संसद की ओर से इस कानून को पास कर दिया गया और इस तरह से यहां पर गे या सेम सेक्‍स मैरिज कानून के तहत आ गई।

कनाडा में दो वर्ष तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद गे मैरिज को वैधता हासिल हुई।

आइसलैंड की 49 सदस्‍यों वाली संसद ने वर्ष 2010 में इसे कानून की मान्‍यता दी थी। इस कानून के पास होने के बाद आईसलैंड की प्रधानमंत्री जोहाना सिगुरदारडोट्टीर से शादी कर ली थी।

वर्ष 2009 में नॉर्वे की सरकार ने सेम सेक्‍स मैरिज को कानूनी वैधता दी थी। इसी वर्ष नॉर्वे की ही तरह स्‍वीडन में भी वर्ष 2009 में संसद की ओर से गे कपल्‍स को पूरी तरह से शादी करने का अधिकार दिया था। स्‍वीडन की संसद में बड़े बहुमत के साथ इस कानून को पास किया गया था।


पुर्तगाल की रुढ़‍िवादी विचारधारा वाली राष्‍ट्रपति अनीबाल कावाको सिल्‍वा ने देश के पहले गे मैरिज पर दस्‍तख्‍त किए और साथ ही देश की सर्वोच्‍च अदालत से इस बिल का रिव्‍यू करने को कहा था। वर्ष 2010 में पुर्तगाल में सेम सेक्‍स मैरिज कानून पास हो गया। हालांकि यहां पर अभी बच्‍चों को गोद लेने की मंजूरी नहीं है।


अर्जेंटीना दुनिया का पहला लैटिन अमेरिकी देश बना जिसने गे मैरिस को कानूनी मान्यता दी थी। इस बिल को उस समय पोप फ्रांसिस ने भगवान की योजनाओं का खात्‍मा करने वाला बताया था।


फ्रांस की राष्‍ट्रीय संसद ने हजारों विरोध प्रदर्शनकारियों के बीच वर्ष 2013 में इस कानून को पास किया था। 29 मई 2013 को फ्रांस में पहली गे मैरिज हुई थी। फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद इसी वर्ष ब्राजील की नेशनल काउंसिल ऑफ जस्टिस ने देश में सेम सेक्‍स मैरिज को कानूनी दर्जा दिया था।


डेनमार्क ने 80 के दशक में नागरिक संगठनों में सेम सेक्‍स पार्टनर्स को मंजूरी देकर दुनिया में एक नया इतिहास रचा था। इसके बाद वर्ष 2012 में यहां पर सेम सेक्‍स मैरिज को पूरी तरह से कानूनी वैधता दी गई। यहां पर सेम सेक्‍स कपल्‍स चर्च में शादी कर सकते हैं और बच्‍चों को गोद ले सकते हैं।

29 मार्च 2014 को यूनाइटेड किंगड में सेम सेक्‍स मैरिज को कानूनी दर्जा मिला था।


साभार - - इंटरनेट 

Wednesday, September 5, 2018

सवर्णों ने आरक्षण के विरोध में किया आज भारत बंद का एलान

आरक्षण और एससी, एसटी एक्ट के विरोध में विभिन्न संगठनों द्वारा आज भारत बंद का आह्वान किया गया है l उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा समेत उत्तर भारत में इसका असर देखने को मिल रहा है l

मध्य प्रदेश में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है l आरक्षण के विरोध में केंद्रीय मंत्रीयों को घेरने के अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को काला झंडा दिखाए जाने, गाड़ी पर पथराव और जूते फेकने जैसी घटनाएं हुई हैं l यहां पर पेट्रोल पंप, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं l एमपी के 11 जिलों में धारा 144 लगा दी गई है और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है क्यू कि 2 अप्रैल को बंद के दौरान यहां हिंसा और मौत भी हुई थी l



संभावित सभी जगह हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था के इंतज़ाम किए गए हैं l

ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी विधायक के बेटे ने दी जान से मारने की धमकी




फेसबुक पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने बीजेपी विधायक उमा देवी के 19 वर्षीय पुत्र प्रिंसदीप को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। उमा देवी दमोह जिले की हटा विधानसभा सीट से बीजेपी की विधायक हैं।
गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया सिंधिया पांच सितंबर को अपने प्रचार अभियान के तहत हटा जिले में एक जनसभा को संबोधित करने वालें हैं और खटिक की पोस्ट को इसी जनसभा से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रिंस को एसडीएम कोर्ट ने 11 सितंबर तक के लिए जेल भेज दिया है। प्रिंस द्वारा फेसबुक पर  विवादास्पद पोस्ट करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले उन्होंने मंदसौर गोलीकांड के समय सीएम के उपवास पर बैठने को लेकर भी एक विवादित पोस्ट फेसबुक पर डाली थी। कांग्रेस ने पुलिस को प्रिंसदीप खटीक की फेसबुक अकाउंट के स्क्रीन शाट एवं शिकायती आवेदन सौंपा। प्रिंस ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि..."सुन ज्योतिरादित्य सिंधिया तेरी रगाें में जीवाजीराव का खून है, जिसने बुंदेलखंड की बेटी झांसी की रानी का खून किया था, अगर उपकाशी हटा में प्रवेश कर इस धरती को अपवित्र करने की कोशिश की तो गोली मार दूंगा। लुहारी में ही, या तो मेरी मौत होगी या तेरी।"







ख़ुद उमा देवी ने इस संबंध में एतराज जताया है और कहा कि "इस तरह का पोस्ट लिखा जाना दुर्भाग्य पूर्ण है, ज्योतिरादित्य सिंधिया एक सांसद है उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए l"

Tuesday, September 4, 2018

मॉब लिचिंग पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट और गाइडलाइन जारी करने के लिए दिए निर्देश


सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में भीड़ तंत्र और उनके हमले को रोकने के लिए एक ढाचा तैयार किया l राज्य सरकार से उन सभी लोगों की सूची तैयार करने को कहा है, जो घृणित भाषा का इस्तेमाल करते हैं, नकली खबर फैला कर हिंसा को उत्तेजित करने की प्रवृत्ति रखते हैं l ये सभी जानकारी एकत्र करने के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त होंगे l

पिछले साल राज्य में मॉब लिचिंग की 168 शिकायतें दर्ज हुई थी l उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिला प्रशासनों से उन गांवों की पहचान करने को कहा है, जहां पिछले पांच सालों में हिंसा और मॉब लिचिंग की घटनाए हुई है l अगर ये मॉब लिचिंग सोशल मीडिया पर डाले गए किसी भी पोस्ट के बाद हुई है तो उस पर IPC की धारा 153 A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव को बाधित करना) के तहत कार्यवाही की जाएगी l





इस तरह की हिंसा और मॉब लिचिंग के शिकार पीड़ित परिवार को मुआवजा, नौकरी और क्षतिपूर्ति की जाएगी l
हालाकि कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है कि इस तरह सरकार इसको अपने आलोचकों के खिलाफ भी इस्तेमाल कर सकती है l
इस पर तहसीन पुनावाला ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि, "आप सरकार से निष्पक्षता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं, जिन्होनें अपने मुख्यमंत्री के खिलाफ नफरत के भाषण के मामले को वापस लेने का फैसला किया है?"

Monday, September 3, 2018

बीजेपी विरोधी नारा लगाने पर तुतीकोरिन एयरपोर्ट से छात्रा गिरफ्तार


28 वर्षीय PhD स्कालर सूफिया को तुतीकोरिन एयरपोर्ट से सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया, उसका दोष इतना था कि उसने फ्लाइट में ही तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष तमिलिसई  सुंदरराजन को देखकर एक नारा लगा दिया "fascist BJP government down, down”l

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “तमिलिसई की ओर से एयरपोर्ट पुलिस को शिकायत दी गई थी। सोफिया को उसी के आधार पर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।” वहीं, सोफिया के वकील ई.अथिसाया कुमार ने कहा, उन्हें गिरफ्तार कर 15 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पेट दर्द की शिकायत के चलते बाद में उनको अस्पताल ले जाया गया l तुतीकोरिन में अखिल महिला पुलिस स्टेशन द्वारा मामला संभाला जा रहा था। अधिकारी ने कहा, "आईपीसी धारा 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान), 2 9 0 (सार्वजनिक उपद्रव) और तमिलनाडु शहर पुलिस अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया हैं।


सोफिया के पिता डॉ (रिटायर्ड) ए.ए.सामी ने कहा कि मैं और मेरी पत्नी माधुरी बेटी को लेने चेन्नई हवाई अड्डे पर पहुचें और वहां से तुतीकोरिन के लिए फ्लाइट लिया और उतरने के बाद सोफिया ने भाजपा नेता को देखा और कहा कि 'फासीवादी बीजेपी सरकार नीचे, नीचे'। उसने इसके अलावा एक शब्द नहीं कहा। लेकिन जब हम टर्मिनल पहुंचे, तमिलिसई और हवाईअड्डे पर उन्हें प्राप्त करने वाले कुछ 10 लोगों ने हमें घेर लिया और मेरी बेटी को अपमानजनक शब्दों से धमकाया। उन्होंने मौत की धमकी जारी की। अंत में, हवाईअड्डा पुलिस हमारी मदद के लिए आई और हमें एक कमरे में ले गयी l जहां पुलिस ने हमें बताया कि सोफिया के खिलाफ शिकायत हुई है और पुलिस स्टेशन चलने को कहा, वादा किया कि हमें जमानत मिल जाएगी l मगर किसी उच्च अधिकारी का फोन आने पर सोफिया को जेल में डाल दिया l"

कहा जा रहा है कि सोफिया एक लेखक हैं और उन्होंने बड़े पैमाने पर स्टरलाइट मुद्दे और चेन्नई-सेलम जो कि 8 लेन वाली राजमार्ग परियोजना को कवर किया है। इस एयरपोर्ट विवाद के संबंध में एक Vedio भी जारी हुई है जिसमें बीजेपी अध्यध उक्त छात्रा से बहस करती दिख रही है और पूछ रही है कि "How can you shout like this"? उन्होनें इस छात्रा के तार किसी खतरनाक संगठन से होने के आसार जताए हैं l
तस्वीर - - साभार "इंडियन एक्सप्रेस"

सवाल ये उठता है कि क्या किसी छात्रा/छात्र के नारे लगाने भर से वो अपराधी हो जाता है और तुरंत उसे जेल भेज दिया जाता है l पुलिस बल अति सक्रियता दिखाते हुए अपना काम करता है और कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है, पर क्या यही प्रजातंत्र हैं? अगर जनता किसी भी नेता या शासन से असहमत होती है तो विरोध के स्वर भी निकलते हैं मगर क्या हर बार जेल में ठूसना प्रजातंत्र के खिलाफ नहीं है? अगर यही पुलिस बल को जनता के हित में सक्रियता दिखाने के आदेश दिए जाए तो न तो किसी निर्दोष की हत्या होगी और न ही असंतोष पनपेगा l

और एक साथ ही एक बड़ा सवाल है कि क्या कानून और उसके प्रयोग के अधिकार केवल राजनीतिक दल के पास सुरक्षित हो गए हैं? जब कोई नेता जनता/महिला के खिलाफ बयान देता है या उसकी कही कोई संलिप्तता नज़र आती है तो यही कानून और पुलिस बल लाचार क्यू दिखने लगता है? ये सरासर प्रजातंत्र का गला घोंटने वाला कदम और निरंकुश तंत्र स्थापित करने की एक कोशिश है l

"आर्थिक मंदी के लिए जिम्मेदार रघुराम राजन" - नीति आयोग अध्यक्ष



चालू वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो कि 3 साल में उच्चतम स्तर पर है। इस अवसर पर नीति आयोग के अध्यक्ष श्री राजीव कुमार ने कहा कि देश में विकास दर गिरने की वजह नोटबंदी नहीं एनपीए (NPA) है और इसके लिए उन्होनें UPA सरकार और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को जिम्मेदार ठहराया l उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं कि जो बताए कि नोटबंदी और विकास दर गिरावट के बीच कोई संबंध है।




नोटबंदी के चलते विकास दर में गिरावट की आरोप गलत है, उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान को भी पूरी तरह से खारिज किया l

उन्होनें कहा कि यदि आप विकास दर के आंकड़ों को देखेंगे तो पाएंगे कि यह नोटबंदी की वजह से नीचे नहीं आया, बल्कि छह तिमाही से यह लगातार नीचे जा रहा था, जिसकी शुरुआत 2015-16 की दूसरी तिमाही में हुई थी, जब विकास दर 9.2 फीसदी थी। इसके बाद हर तिमाही में विकास दर गिरती गई। यह एक ट्रेंड का हिस्सा था, नोटबंदी का झटका नहीं।

राजीव कुमार ने कहा कि रघुराम राजन की नीतियों के कारण ही सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगातार नीचे गिरती गयी, उन्होनें कमजोर और नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स की पहचान करने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की, जिस कारण से बैंकों ने उद्योगों को उधार देना बंद कर दिया l 2014 में जब नई सरकार आई, तो ये आंकड़े लगभग 4 लाख करोड़ रुपए थे। 2017 के मध्य तक यह 10.5 लाख करोड़ रुपए हो गया। NPA बढ़ने और लोन न मिलने की वजह से उसका असर छोटे और मझोले उद्योगों की विकास गति नकारात्मक रही और वहीं बड़े उद्योगों पर भी 2-2.5% तक पड़ा l जिसके चलते ही भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली l

Saturday, September 1, 2018

प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की शुरुआत हुई

आज 1 सितंबर 2018 प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा "इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक" (IPPB) की शुरुआत नई दिल्ली से हुई l


https://www.ippbonline.com

आईपीपीबी ग्राहकों को उनके दरवाजे पर बैंकिंग की सुविधा मिलेगी और इसके लिए चार्ज प्रति लेनदेन 15-35 रूपये रखा जाएगा और अधिकतम सीमा 10,000 रूपये होगी l

आईपीपीबी चालू और बचत खाता (current and saving account), धन हस्तांतरण (money transfer), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (direct benefit transfer), बिल और उपयोगिता भुगतान (bill and utility payment), उद्यम और व्यापारी भुगतान (enterprise and merchant payment) जैसे उत्पादों की एक श्रंखला पेश करेगा l


राजधानी में तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित समारोह में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, "आईपीपीबी देश की आर्थिक, सामाजिक स्थिति में एक बड़ा बदलाव लाने जा रहा है और देश के हर नुक्कड़ और कोने तक पहुंच जाएगा। यह भुगतान बैंक बैंकिंग में क्रांतिकारी बदलाव करेगा और डिजिटल भुगतान। एमएफबीवाई (पीएम की फसल बीमा योजना) जैसे किसानों और योजनाओं के लिए आईपीपीबी भी बहुत मददगार होगा, इससे इससे अधिक ताकत मिलेगी। क्षेत्र में बढ़ती गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) या बुरे ऋणों पर भी बात की और पिछली यूपीए सरकार को गड़बड़ी के लिए दोषी ठहराया।"

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) भारत सरकार की 100 प्रतिशत इक्विटी के साथ संचार और मंत्रालय के संचार विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शासित है।

सरकार का लक्ष्य दिसम्बर 2018 तक सभी 1.55 लाख डाकघरों को भारत पोस्ट पेमेंट बैंक से जोड़ना है l ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगभग 11,000 पोस्टमैन दरवाजे पर बैंकिंग सर्विस देंगे l आईपीपीबी ग्रामीण स्तर पर देश के लिए सबसे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क बनाएगा l

इस परियोजना में शामिल कुल व्यय 800 करोड़ रुपये है। सभी नागरिक, विशेष रूप से देश की औपचारिक बैंकिंग के दायरे से बाहर देश की आबादी का 40% इस परियोजना से लाभान्वित होंगे। यह परियोजना पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी। आईपीपीबी को अपने खातों के साथ 17 करोड़ डाक बचत बैंक खातों को जोड़ने की अनुमति दी गई है। आईपीपीबी तीन प्रकार के बचत खाते प्रदान करता है: नियमित बचत खाते, डिजिटल बचत खाते और मूल बचत खाते। सभी तीनों पर वार्षिक ब्याज दरें 4 प्रतिशत पर तय की गई हैं।

30 जनवरी, 2017 को रायपुर और रांची में दो पायलट आईपीपीबी शाखाओं का उद्घाटन किया गया था । सुरेश सेठी आईपीपीबी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी है l

आइए, सायबर संसार में तैर रहे शब्द NOTA के बारें में कुछ जानते हैं


नोटा क्या है और कब चलन में आया?

 'नोटा' (None of the above) विकल्‍प का विचार सर्व प्रथम 1976 में हुआ जब इस्ला विस्टा नगर सलाहकार परिषद ने संयुक्त राज्य अमेरिका में सांता बारबरा, कैलिफोर्निया के काउंटी में आधिकारिक चुनावी मतपत्र में इस विकल्प को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। वाल्टर विल्सन और मैथ्यू लैंडी स्टीन, तब परिषद के मंत्रियों ने चुनाव के लिए मतपत्र प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने के लिए एक कानूनी प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 1978 में, नेवादा राज्य द्वारा मतपत्र में पहली बार 'उपर्युक्त में से कोई नहीं' (NOTA) विकल्प पेश किया गया था।

भारत में People's Union for Civil Liberties (PUCL) द्वारा एक याचिका दायर की गई थी और उसकी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि "हम चुनाव आयोग को मतपत्रों / ईवीएम में आवश्यक प्रावधान प्रदान करने के लिए निर्देशित करते हैं और ईवीएम में" उपरोक्त में से कोई भी नहीं "(NOTA) नामक एक अन्य बटन प्रदान किया जा सकता है ताकि मतदाता, जो भी उम्मीदवार के लिए मतदान न करने का फैसला करते हैं, वे गोपनीयता के अधिकार को बनाए रखते हुए वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग करने में सक्षम हैं।
 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश देने पर नोटा ईवीएम पर उपलब्ध कराया गया और इस चिन्ह का डिज़ाइन "नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन" अहमदाबाद द्वारा तैयार किया गया l इसे ईवीएम मशीन और बैलेट पेपर में सबसे अंतिम में शामिल किया गया l इस आदेश के बाद भारत नकारात्मक मतदान का विकल्प उपलब्ध कराने वाला विश्व का एक और देश बन गया।



भारत के अलावा और कौन से देश में नोटा मान्य हैं?

कोलंबिया, यूक्रेन, ब्राजील, बांग्लादेश, फिनलैंड, स्पेन, स्वीडन, चिली, फ्रांस, बेल्जियम और ग्रीस अपने मतदाताओं को नोटा वोट डालने की अनुमति देते हैं। अमेरिका इसे कुछ मामलों में भी अनुमति देता है।



नोटा का प्रयोग भारत में कब हुआ?

2013 में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नोटा को उपलब्ध कराया गया l इससे पहले अगर कोई वोटर किसी उम्मीदवार को अपना वोट नहीं देना चाहता था, तो उसे अलग से एक फॉर्म भरना होता था और अपनी पहचान बतानी होती थी। वहीं, अब ईवीएम में 'नोटा' विकल्प होने से पहचान भी जाहिर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।



नोटा को चुनने पर अगर ज्यादा वोट नोटा को ही मिले हो तो उस संबंध में क्या होगा?

अगर उपलब्ध प्रत्याशियों से ज्यादा वोट नोटा को मिले हो तो दोबारा इलेक्शन होने जैसा या अन्य कोई भी प्रावधान नहीं है l
नोटा को छोड़कर जिस भी प्रत्याशी को ज्यादा वोट मिले होंगे उसे ही विजय घोषित किया जाएगा परंतु इससे जनता को उम्मीदवार को नकारने का हक मिल गया और साथ ही राजनीतिक दलों पर भी अच्छे उम्मीदवार देने का प्रेशर पड़ता है l नोटा का उदेश्य राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों के रूप में उम्मीदवारों को स्वच्छ पृष्ठभूमि के साथ पेश करने के लिए मजबूर करना था हालाकि इतने समय इस विकल्प का कोई खास असर पड़ता दिख नहीं रहा है l




Source  - इंटरनेट

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