चालू वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो कि 3 साल में उच्चतम स्तर पर है। इस अवसर पर नीति आयोग के अध्यक्ष श्री राजीव कुमार ने कहा कि देश में विकास दर गिरने की वजह नोटबंदी नहीं एनपीए (NPA) है और इसके लिए उन्होनें UPA सरकार और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को जिम्मेदार ठहराया l उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं कि जो बताए कि नोटबंदी और विकास दर गिरावट के बीच कोई संबंध है।
नोटबंदी के चलते विकास दर में गिरावट की आरोप गलत है, उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान को भी पूरी तरह से खारिज किया l
उन्होनें कहा कि यदि आप विकास दर के आंकड़ों को देखेंगे तो पाएंगे कि यह नोटबंदी की वजह से नीचे नहीं आया, बल्कि छह तिमाही से यह लगातार नीचे जा रहा था, जिसकी शुरुआत 2015-16 की दूसरी तिमाही में हुई थी, जब विकास दर 9.2 फीसदी थी। इसके बाद हर तिमाही में विकास दर गिरती गई। यह एक ट्रेंड का हिस्सा था, नोटबंदी का झटका नहीं।
राजीव कुमार ने कहा कि रघुराम राजन की नीतियों के कारण ही सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगातार नीचे गिरती गयी, उन्होनें कमजोर और नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स की पहचान करने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की, जिस कारण से बैंकों ने उद्योगों को उधार देना बंद कर दिया l 2014 में जब नई सरकार आई, तो ये आंकड़े लगभग 4 लाख करोड़ रुपए थे। 2017 के मध्य तक यह 10.5 लाख करोड़ रुपए हो गया। NPA बढ़ने और लोन न मिलने की वजह से उसका असर छोटे और मझोले उद्योगों की विकास गति नकारात्मक रही और वहीं बड़े उद्योगों पर भी 2-2.5% तक पड़ा l जिसके चलते ही भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली l


No comments:
Post a Comment