28 वर्षीय PhD स्कालर सूफिया को तुतीकोरिन एयरपोर्ट से सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया, उसका दोष इतना था कि उसने फ्लाइट में ही तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष तमिलिसई सुंदरराजन को देखकर एक नारा लगा दिया "fascist BJP government down, down”l
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “तमिलिसई की ओर से एयरपोर्ट पुलिस को शिकायत दी गई थी। सोफिया को उसी के आधार पर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।” वहीं, सोफिया के वकील ई.अथिसाया कुमार ने कहा, उन्हें गिरफ्तार कर 15 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पेट दर्द की शिकायत के चलते बाद में उनको अस्पताल ले जाया गया l तुतीकोरिन में अखिल महिला पुलिस स्टेशन द्वारा मामला संभाला जा रहा था। अधिकारी ने कहा, "आईपीसी धारा 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान), 2 9 0 (सार्वजनिक उपद्रव) और तमिलनाडु शहर पुलिस अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया हैं।
सोफिया के पिता डॉ (रिटायर्ड) ए.ए.सामी ने कहा कि मैं और मेरी पत्नी माधुरी बेटी को लेने चेन्नई हवाई अड्डे पर पहुचें और वहां से तुतीकोरिन के लिए फ्लाइट लिया और उतरने के बाद सोफिया ने भाजपा नेता को देखा और कहा कि 'फासीवादी बीजेपी सरकार नीचे, नीचे'। उसने इसके अलावा एक शब्द नहीं कहा। लेकिन जब हम टर्मिनल पहुंचे, तमिलिसई और हवाईअड्डे पर उन्हें प्राप्त करने वाले कुछ 10 लोगों ने हमें घेर लिया और मेरी बेटी को अपमानजनक शब्दों से धमकाया। उन्होंने मौत की धमकी जारी की। अंत में, हवाईअड्डा पुलिस हमारी मदद के लिए आई और हमें एक कमरे में ले गयी l जहां पुलिस ने हमें बताया कि सोफिया के खिलाफ शिकायत हुई है और पुलिस स्टेशन चलने को कहा, वादा किया कि हमें जमानत मिल जाएगी l मगर किसी उच्च अधिकारी का फोन आने पर सोफिया को जेल में डाल दिया l"
कहा जा रहा है कि सोफिया एक लेखक हैं और उन्होंने बड़े पैमाने पर स्टरलाइट मुद्दे और चेन्नई-सेलम जो कि 8 लेन वाली राजमार्ग परियोजना को कवर किया है। इस एयरपोर्ट विवाद के संबंध में एक Vedio भी जारी हुई है जिसमें बीजेपी अध्यध उक्त छात्रा से बहस करती दिख रही है और पूछ रही है कि "How can you shout like this"? उन्होनें इस छात्रा के तार किसी खतरनाक संगठन से होने के आसार जताए हैं l
तस्वीर - - साभार "इंडियन एक्सप्रेस"
सवाल ये उठता है कि क्या किसी छात्रा/छात्र के नारे लगाने भर से वो अपराधी हो जाता है और तुरंत उसे जेल भेज दिया जाता है l पुलिस बल अति सक्रियता दिखाते हुए अपना काम करता है और कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है, पर क्या यही प्रजातंत्र हैं? अगर जनता किसी भी नेता या शासन से असहमत होती है तो विरोध के स्वर भी निकलते हैं मगर क्या हर बार जेल में ठूसना प्रजातंत्र के खिलाफ नहीं है? अगर यही पुलिस बल को जनता के हित में सक्रियता दिखाने के आदेश दिए जाए तो न तो किसी निर्दोष की हत्या होगी और न ही असंतोष पनपेगा l
और एक साथ ही एक बड़ा सवाल है कि क्या कानून और उसके प्रयोग के अधिकार केवल राजनीतिक दल के पास सुरक्षित हो गए हैं? जब कोई नेता जनता/महिला के खिलाफ बयान देता है या उसकी कही कोई संलिप्तता नज़र आती है तो यही कानून और पुलिस बल लाचार क्यू दिखने लगता है? ये सरासर प्रजातंत्र का गला घोंटने वाला कदम और निरंकुश तंत्र स्थापित करने की एक कोशिश है l

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