Saturday, October 27, 2018

करवाचौथ


आज जब सुनिधि सज धज के करवा चौथ की पूजा के लिए तैयार हुई तो उसकी मां (सास) ने देखकर झट बलाए ली और सदा सुहागवती और खुश रहने का आशीर्वाद दिया.. ये वही माँ थी जो पहले उसे बिल्कुल पसंद न करती थी... जब सुहास ने उसे कोर्ट में शादी की और घर लाया तो माँ ने उसे खूब कोसा था कि उसने उनके बेटे को बहला फुसला कर शादी की है.. वो जब तब कुछ न कुछ कहती सुनती रहती.. लेकिन सुनिधि कुछ न बोलती.. एक दिन मां  कुछ काम कर रही थी कि अचानक से गिर पड़ी.. सुनिधि ने दौड़ कर किसी तरह उन्हें बेड पर लिटाया.. वो बेहोश थी तो सुहास को फोन किया और झटपट गाड़ी निकल कर पड़ोस की आंटी की मदद से अस्पताल ले गयी, वही सुहास भी आ गया.. l डॉक्टर ने बताया कि मां जी की दोनों किडनी खराब हो चुकी है और प्रत्यारोपण की जरूरत है.. इसके लिए वो किसी को तैयार करे जो स्वस्थ्य हो और किडनी देने को तैयार हो l
सुहास को कुछ स्वास्थ्य की दिक्कत रहती थी इसलिए वो तो दे नहीं सकता था, डॉक्टर की बात सुनकर चुप हो गया तभी पास खड़ी सुनिधि बोल पड़ी कि वो किडनी देने को तैयार है.. डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी करें.. सुहास ने उसे कृतज्ञता भरी आँखों से देखा.. वो कुछ बोल भी नहीं पा रहा था क्यू कि उसने अपनी मां का सुनिधि के प्रति खराब व्यवहार देखा था... l
अगले दिन ही सुनिधि की किडनी माँ को ट्रांसप्लाट कर दी गई और एक हफ्ते बाद दोनों अस्पताल से घर आ गयी.. सुनिधि तो स्वस्थ्य थी मगर माँ को अभी आराम करना था l एक महीने सुनिधि ने मां का पूरा ख्याल रखा.. अचानक एक दिन मां ने उसे अपने पास बुलाया और अपने बुरे व्यवहार के लिए माफी मांगते हुए पूछा कि - "इतने बुरे व्यवहार के बाद भी उसने क्यू किडनी दी?" सुनिधि ने मां का हाथ पकड़ते हुए कहा कि "आप मेरी माँ है तो अपने फर्ज से भला कैसे पीछे हटती?"


तबसे आज तक जब भी वो तैयार होकर निकलती है तो माँ उससे ऐसे ही बलाए लेकर आशीर्वाद देती है और खूब प्यार करती है.. उनको अब सुनिधि न तो परायी नज़र आती है और न ही बेटे को छीनते हुए दिखती है l


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Monday, October 22, 2018

ट्रेन हादसा


आज सुबह से ही घर में चहल पहल थी, बच्चों की छुट्टियां जो थी l सबने जिद की रावण दहन करने की और तभी पड़ोस से मनकू भी आ गया l मनकू ने बताया कि पास रेलवे लाइन के उस पार शानदार रावण दहन हो रहा है और वह जा रहा है   इस पर मुन्नी पूछ बैठी कि जाओगे कैसे.. लाइन के इस पार तो दीवार है उसे कैसे फादेगे?

मनकू बोला कि अरे फादना नहीं है.. इस तरफ रेलवे लाइन के बीच बड़ी सी TV लगा रहे हैं जिसमें सब कुछ दिखेगा जो भी उधर हो रहा है.. हमें तो बस रेलवे लाइन पर खड़े होकर देखना है.. बच्चों से कहाँ कि शाम को तुम सब तैयार रहना.. और भाई, भाभी तुम भी..

मुन्नी बोल पड़ी.. नहीं.. नहीं.. ये ठीक नहीं होगा कि रेलवे लाइन पर खड़े होकर देखे.. अगर ट्रेन आ गयी तो.. इस पर मनकू छाती फुलाकर बोला कि आयोजक (नेता जी) के आदमी आए थे बताने... और कह रहे थे कि इतनी भीड़ होगी कि रेलवे वाले की हिम्मत न होगी उधर से ट्रेन निकालने की.. l

अब शाम होने को आई तो बच्चे जिद करने लगे.. मुन्नी को ठीक नहीं लग रहा था मगर कल्लू (बच्चो के पिता) को जाते देखकर बच्चे भी तैयार हो गए.. तभी मनकू भी आ गया अपनी बीबी के साथ.. नयी नयी शादी हुई थी.. दोनों बहुत खुश रहते थे.. उन्हें देख कर मुन्नी खुश हो जाती थी.. बस्ती के सभी लोग जा रहे थे..l
रेलवे लाइन से थोड़ा दूर कच्ची सरकारी जमीन पर सभी ने उसके गाँव से आकर झोपड़ी बनायी थी और आसपास के घरों में काम करके अच्छा कमा लेते थे.. बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ रहे थे.. l


तस्वीर साभार 

सब जा रहे थे.. मगर मुन्नी नहीं गयी.. वो बाहर आई तो देखा कि आसपास सब सुनसान हो गया था बस इक्का दुक्का औरते घर में कुछ काम के चलते नहीं गयी थी.. वो अंदर आ गयी और मेम साहब की साड़ी में फाल लगाने बैठ गयी.. l
करीब आधे घंटे हो गए थे और अंधेरा हो रहा था.. वो बल्ब जलाने उठी तो बाहर से कुछ रोने की आवाज़ आई.. दौड़कर बाहर आई तो देखा कि जहां सभी रावण दहन देखने गए थे उधर से लोग रोते पीटते आ रहे हैं.. वो पागलों की तरह बदहवाश होकर दौड़ी.. और रेलवे लाइन पर पहुचते ही.. हर तरफ खून खून.. जगह जगह खोपड़ी.. कटे हुए हाथ पैर पड़े थे.. वो चिल्ला कर.. सोनू.. मोनू.. राधा.. मनकू.. राधा के बाबू.. चिल्लाते चिल्लाते.. कटे हुए हाथ पैर उठाती और मिला मिला कर पहचानने की कोशिश करती... l


Written by Rita Sharma
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Thursday, September 6, 2018

चेहरे पर झुर्रियों के लिए क्या करें?

चेहरा पर आम तौर से देखभाल न करने पर 30 की उम्र पार करने पर झुर्रियों (wrinkles) का दिखना आम बात है और केवल चेहरा ही नहीं इसका असर हाथ, पैरों तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर भी दिखता है l झुरियों की वजह कई बार खान पान का सही न होना, कोई बीमारी या फिर त्वचा का सही मॉइश्चराइज ना (नमी की कमी) करना होता है l

ये कुछ टिप्स अपनाकर आप अपने चेहरे और बाकी त्वचा को झूरियाँ मुक्त रखे


1-नारियल का तेल

माथे पर झुर्रियों को दूर करने के लिए थोड़ा नारियल तेल चेहरे पर लगाए और फिर क्लॉक और एंटी क्लॉक वाइज़ मसाज करें lइसे 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर एक नैपकिन से वाइप कर ले l
नारियल का तेल प्राकृतिक नमी बरकरार रखता है l



2- गुलाब जल

गुलाब जल को कॉटन में लेकर उससे चेहरे, गर्दन को हल्के हाथों से पोछे l गुलाब जल क्लीनजिंग का भी काम करता है l गर्मियों में इसका आइस क्यूब बना कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं l


3- जैतून का तेल (ऑलिव ऑयल)

जैतून का तेल हाथों में लेकर इसे चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें और चेहरे पर लाइंस पर ज्यादा ध्यान दे, चाहे तो थोड़ा नारियल तेल भी मिला सकते हैं l


4- नीबू का रस -

आप चाहे तो नीबू, नारंगी और अंगूर का रस मिक्स कर सकते हैं या फिर केवल नीबू का रस ले सकते हैं l अगर स्किन सेंसिटिव है तो थोड़ा पानी मिला ले l इसे कॉटन से पूरे चेहरे और गर्दन पर लगाए और सूखने पर धूल ले l

विटामिन सी युक्‍त फल भी त्वचा को तरोताज़ा रखते हैं l सभी खट्टे फल और मौसमी फल खाने से भी त्वचा स्वस्थ्य और सुंदर दिखेगी l इसके साथ ही व्यायाम और योगा भी शरीर और मन दोनों को ही स्वस्थ्य रखता है l

समलैंगिकता अब अपराध नहीं - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धारा 377 को गैरकानूनी करार दिया है। इसके बाद अब समलैंगिकता अपराध नहीं रहेगा। इसके बाद से ही देश भर में ही एलजीबीटी कम्यूनिटी इसका जश्न मना रही है।

आइए जानते हैं कि और किन किन देशों में ये कानूनी तौर पर मान्य है - -

वर्ष 2000 में नीदरलैंड्स दुनिया का पहला ऐसा देश बना था जहां पर सेम सेक्‍स के कपल्‍स को शादी करने, तलाक लेने और बच्‍चों को गोद लेने कानूनी वैधता हासिल हैं l नीदरलैंड्स में 82 प्रतिशत लोग गे मैरिज का समर्थन करते हैं और किसी भी यूरोपियन यूनियन के देश में यह सर्वोच्‍च स्‍तर है।

बेल्जियम में संसद ने जब गे मैरिज को कानूनी जामा पहनाया तो काफी विरोध हुआ। ग्‍लोबल कैंपेन के बाद भी आज तक यहां पर इसे कानूनी मान्‍यता मिली हुई है।

अमेरिका के सिर्फ 14 राज्‍यों में सेम सेक्‍स या गे सेक्‍स मैरिज को कानूनी वैधता मिली हुई है।


साउथ अफ्रीका की कोर्ट ने वर्ष 2005 में एक आदेश पारित किया जिसके तहत उसने गे मैरिज को रोकना या फिर इसका विरोध करने को देश के संविधान के खिलाफ बताया गया। इसके अगले साल संसद की ओर से इस कानून को पास कर दिया गया और इस तरह से यहां पर गे या सेम सेक्‍स मैरिज कानून के तहत आ गई।

कनाडा में दो वर्ष तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद गे मैरिज को वैधता हासिल हुई।

आइसलैंड की 49 सदस्‍यों वाली संसद ने वर्ष 2010 में इसे कानून की मान्‍यता दी थी। इस कानून के पास होने के बाद आईसलैंड की प्रधानमंत्री जोहाना सिगुरदारडोट्टीर से शादी कर ली थी।

वर्ष 2009 में नॉर्वे की सरकार ने सेम सेक्‍स मैरिज को कानूनी वैधता दी थी। इसी वर्ष नॉर्वे की ही तरह स्‍वीडन में भी वर्ष 2009 में संसद की ओर से गे कपल्‍स को पूरी तरह से शादी करने का अधिकार दिया था। स्‍वीडन की संसद में बड़े बहुमत के साथ इस कानून को पास किया गया था।


पुर्तगाल की रुढ़‍िवादी विचारधारा वाली राष्‍ट्रपति अनीबाल कावाको सिल्‍वा ने देश के पहले गे मैरिज पर दस्‍तख्‍त किए और साथ ही देश की सर्वोच्‍च अदालत से इस बिल का रिव्‍यू करने को कहा था। वर्ष 2010 में पुर्तगाल में सेम सेक्‍स मैरिज कानून पास हो गया। हालांकि यहां पर अभी बच्‍चों को गोद लेने की मंजूरी नहीं है।


अर्जेंटीना दुनिया का पहला लैटिन अमेरिकी देश बना जिसने गे मैरिस को कानूनी मान्यता दी थी। इस बिल को उस समय पोप फ्रांसिस ने भगवान की योजनाओं का खात्‍मा करने वाला बताया था।


फ्रांस की राष्‍ट्रीय संसद ने हजारों विरोध प्रदर्शनकारियों के बीच वर्ष 2013 में इस कानून को पास किया था। 29 मई 2013 को फ्रांस में पहली गे मैरिज हुई थी। फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद इसी वर्ष ब्राजील की नेशनल काउंसिल ऑफ जस्टिस ने देश में सेम सेक्‍स मैरिज को कानूनी दर्जा दिया था।


डेनमार्क ने 80 के दशक में नागरिक संगठनों में सेम सेक्‍स पार्टनर्स को मंजूरी देकर दुनिया में एक नया इतिहास रचा था। इसके बाद वर्ष 2012 में यहां पर सेम सेक्‍स मैरिज को पूरी तरह से कानूनी वैधता दी गई। यहां पर सेम सेक्‍स कपल्‍स चर्च में शादी कर सकते हैं और बच्‍चों को गोद ले सकते हैं।

29 मार्च 2014 को यूनाइटेड किंगड में सेम सेक्‍स मैरिज को कानूनी दर्जा मिला था।


साभार - - इंटरनेट 

Wednesday, September 5, 2018

सवर्णों ने आरक्षण के विरोध में किया आज भारत बंद का एलान

आरक्षण और एससी, एसटी एक्ट के विरोध में विभिन्न संगठनों द्वारा आज भारत बंद का आह्वान किया गया है l उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा समेत उत्तर भारत में इसका असर देखने को मिल रहा है l

मध्य प्रदेश में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है l आरक्षण के विरोध में केंद्रीय मंत्रीयों को घेरने के अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को काला झंडा दिखाए जाने, गाड़ी पर पथराव और जूते फेकने जैसी घटनाएं हुई हैं l यहां पर पेट्रोल पंप, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं l एमपी के 11 जिलों में धारा 144 लगा दी गई है और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है क्यू कि 2 अप्रैल को बंद के दौरान यहां हिंसा और मौत भी हुई थी l



संभावित सभी जगह हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था के इंतज़ाम किए गए हैं l

ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी विधायक के बेटे ने दी जान से मारने की धमकी




फेसबुक पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने बीजेपी विधायक उमा देवी के 19 वर्षीय पुत्र प्रिंसदीप को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। उमा देवी दमोह जिले की हटा विधानसभा सीट से बीजेपी की विधायक हैं।
गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया सिंधिया पांच सितंबर को अपने प्रचार अभियान के तहत हटा जिले में एक जनसभा को संबोधित करने वालें हैं और खटिक की पोस्ट को इसी जनसभा से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रिंस को एसडीएम कोर्ट ने 11 सितंबर तक के लिए जेल भेज दिया है। प्रिंस द्वारा फेसबुक पर  विवादास्पद पोस्ट करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले उन्होंने मंदसौर गोलीकांड के समय सीएम के उपवास पर बैठने को लेकर भी एक विवादित पोस्ट फेसबुक पर डाली थी। कांग्रेस ने पुलिस को प्रिंसदीप खटीक की फेसबुक अकाउंट के स्क्रीन शाट एवं शिकायती आवेदन सौंपा। प्रिंस ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि..."सुन ज्योतिरादित्य सिंधिया तेरी रगाें में जीवाजीराव का खून है, जिसने बुंदेलखंड की बेटी झांसी की रानी का खून किया था, अगर उपकाशी हटा में प्रवेश कर इस धरती को अपवित्र करने की कोशिश की तो गोली मार दूंगा। लुहारी में ही, या तो मेरी मौत होगी या तेरी।"







ख़ुद उमा देवी ने इस संबंध में एतराज जताया है और कहा कि "इस तरह का पोस्ट लिखा जाना दुर्भाग्य पूर्ण है, ज्योतिरादित्य सिंधिया एक सांसद है उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए l"

Tuesday, September 4, 2018

मॉब लिचिंग पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट और गाइडलाइन जारी करने के लिए दिए निर्देश


सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में भीड़ तंत्र और उनके हमले को रोकने के लिए एक ढाचा तैयार किया l राज्य सरकार से उन सभी लोगों की सूची तैयार करने को कहा है, जो घृणित भाषा का इस्तेमाल करते हैं, नकली खबर फैला कर हिंसा को उत्तेजित करने की प्रवृत्ति रखते हैं l ये सभी जानकारी एकत्र करने के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त होंगे l

पिछले साल राज्य में मॉब लिचिंग की 168 शिकायतें दर्ज हुई थी l उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिला प्रशासनों से उन गांवों की पहचान करने को कहा है, जहां पिछले पांच सालों में हिंसा और मॉब लिचिंग की घटनाए हुई है l अगर ये मॉब लिचिंग सोशल मीडिया पर डाले गए किसी भी पोस्ट के बाद हुई है तो उस पर IPC की धारा 153 A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव को बाधित करना) के तहत कार्यवाही की जाएगी l





इस तरह की हिंसा और मॉब लिचिंग के शिकार पीड़ित परिवार को मुआवजा, नौकरी और क्षतिपूर्ति की जाएगी l
हालाकि कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है कि इस तरह सरकार इसको अपने आलोचकों के खिलाफ भी इस्तेमाल कर सकती है l
इस पर तहसीन पुनावाला ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि, "आप सरकार से निष्पक्षता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं, जिन्होनें अपने मुख्यमंत्री के खिलाफ नफरत के भाषण के मामले को वापस लेने का फैसला किया है?"

Monday, September 3, 2018

बीजेपी विरोधी नारा लगाने पर तुतीकोरिन एयरपोर्ट से छात्रा गिरफ्तार


28 वर्षीय PhD स्कालर सूफिया को तुतीकोरिन एयरपोर्ट से सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया, उसका दोष इतना था कि उसने फ्लाइट में ही तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष तमिलिसई  सुंदरराजन को देखकर एक नारा लगा दिया "fascist BJP government down, down”l

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “तमिलिसई की ओर से एयरपोर्ट पुलिस को शिकायत दी गई थी। सोफिया को उसी के आधार पर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।” वहीं, सोफिया के वकील ई.अथिसाया कुमार ने कहा, उन्हें गिरफ्तार कर 15 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पेट दर्द की शिकायत के चलते बाद में उनको अस्पताल ले जाया गया l तुतीकोरिन में अखिल महिला पुलिस स्टेशन द्वारा मामला संभाला जा रहा था। अधिकारी ने कहा, "आईपीसी धारा 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान), 2 9 0 (सार्वजनिक उपद्रव) और तमिलनाडु शहर पुलिस अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया हैं।


सोफिया के पिता डॉ (रिटायर्ड) ए.ए.सामी ने कहा कि मैं और मेरी पत्नी माधुरी बेटी को लेने चेन्नई हवाई अड्डे पर पहुचें और वहां से तुतीकोरिन के लिए फ्लाइट लिया और उतरने के बाद सोफिया ने भाजपा नेता को देखा और कहा कि 'फासीवादी बीजेपी सरकार नीचे, नीचे'। उसने इसके अलावा एक शब्द नहीं कहा। लेकिन जब हम टर्मिनल पहुंचे, तमिलिसई और हवाईअड्डे पर उन्हें प्राप्त करने वाले कुछ 10 लोगों ने हमें घेर लिया और मेरी बेटी को अपमानजनक शब्दों से धमकाया। उन्होंने मौत की धमकी जारी की। अंत में, हवाईअड्डा पुलिस हमारी मदद के लिए आई और हमें एक कमरे में ले गयी l जहां पुलिस ने हमें बताया कि सोफिया के खिलाफ शिकायत हुई है और पुलिस स्टेशन चलने को कहा, वादा किया कि हमें जमानत मिल जाएगी l मगर किसी उच्च अधिकारी का फोन आने पर सोफिया को जेल में डाल दिया l"

कहा जा रहा है कि सोफिया एक लेखक हैं और उन्होंने बड़े पैमाने पर स्टरलाइट मुद्दे और चेन्नई-सेलम जो कि 8 लेन वाली राजमार्ग परियोजना को कवर किया है। इस एयरपोर्ट विवाद के संबंध में एक Vedio भी जारी हुई है जिसमें बीजेपी अध्यध उक्त छात्रा से बहस करती दिख रही है और पूछ रही है कि "How can you shout like this"? उन्होनें इस छात्रा के तार किसी खतरनाक संगठन से होने के आसार जताए हैं l
तस्वीर - - साभार "इंडियन एक्सप्रेस"

सवाल ये उठता है कि क्या किसी छात्रा/छात्र के नारे लगाने भर से वो अपराधी हो जाता है और तुरंत उसे जेल भेज दिया जाता है l पुलिस बल अति सक्रियता दिखाते हुए अपना काम करता है और कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है, पर क्या यही प्रजातंत्र हैं? अगर जनता किसी भी नेता या शासन से असहमत होती है तो विरोध के स्वर भी निकलते हैं मगर क्या हर बार जेल में ठूसना प्रजातंत्र के खिलाफ नहीं है? अगर यही पुलिस बल को जनता के हित में सक्रियता दिखाने के आदेश दिए जाए तो न तो किसी निर्दोष की हत्या होगी और न ही असंतोष पनपेगा l

और एक साथ ही एक बड़ा सवाल है कि क्या कानून और उसके प्रयोग के अधिकार केवल राजनीतिक दल के पास सुरक्षित हो गए हैं? जब कोई नेता जनता/महिला के खिलाफ बयान देता है या उसकी कही कोई संलिप्तता नज़र आती है तो यही कानून और पुलिस बल लाचार क्यू दिखने लगता है? ये सरासर प्रजातंत्र का गला घोंटने वाला कदम और निरंकुश तंत्र स्थापित करने की एक कोशिश है l

"आर्थिक मंदी के लिए जिम्मेदार रघुराम राजन" - नीति आयोग अध्यक्ष



चालू वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो कि 3 साल में उच्चतम स्तर पर है। इस अवसर पर नीति आयोग के अध्यक्ष श्री राजीव कुमार ने कहा कि देश में विकास दर गिरने की वजह नोटबंदी नहीं एनपीए (NPA) है और इसके लिए उन्होनें UPA सरकार और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को जिम्मेदार ठहराया l उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं कि जो बताए कि नोटबंदी और विकास दर गिरावट के बीच कोई संबंध है।




नोटबंदी के चलते विकास दर में गिरावट की आरोप गलत है, उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान को भी पूरी तरह से खारिज किया l

उन्होनें कहा कि यदि आप विकास दर के आंकड़ों को देखेंगे तो पाएंगे कि यह नोटबंदी की वजह से नीचे नहीं आया, बल्कि छह तिमाही से यह लगातार नीचे जा रहा था, जिसकी शुरुआत 2015-16 की दूसरी तिमाही में हुई थी, जब विकास दर 9.2 फीसदी थी। इसके बाद हर तिमाही में विकास दर गिरती गई। यह एक ट्रेंड का हिस्सा था, नोटबंदी का झटका नहीं।

राजीव कुमार ने कहा कि रघुराम राजन की नीतियों के कारण ही सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगातार नीचे गिरती गयी, उन्होनें कमजोर और नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स की पहचान करने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की, जिस कारण से बैंकों ने उद्योगों को उधार देना बंद कर दिया l 2014 में जब नई सरकार आई, तो ये आंकड़े लगभग 4 लाख करोड़ रुपए थे। 2017 के मध्य तक यह 10.5 लाख करोड़ रुपए हो गया। NPA बढ़ने और लोन न मिलने की वजह से उसका असर छोटे और मझोले उद्योगों की विकास गति नकारात्मक रही और वहीं बड़े उद्योगों पर भी 2-2.5% तक पड़ा l जिसके चलते ही भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली l

Saturday, September 1, 2018

प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की शुरुआत हुई

आज 1 सितंबर 2018 प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा "इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक" (IPPB) की शुरुआत नई दिल्ली से हुई l


https://www.ippbonline.com

आईपीपीबी ग्राहकों को उनके दरवाजे पर बैंकिंग की सुविधा मिलेगी और इसके लिए चार्ज प्रति लेनदेन 15-35 रूपये रखा जाएगा और अधिकतम सीमा 10,000 रूपये होगी l

आईपीपीबी चालू और बचत खाता (current and saving account), धन हस्तांतरण (money transfer), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (direct benefit transfer), बिल और उपयोगिता भुगतान (bill and utility payment), उद्यम और व्यापारी भुगतान (enterprise and merchant payment) जैसे उत्पादों की एक श्रंखला पेश करेगा l


राजधानी में तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित समारोह में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, "आईपीपीबी देश की आर्थिक, सामाजिक स्थिति में एक बड़ा बदलाव लाने जा रहा है और देश के हर नुक्कड़ और कोने तक पहुंच जाएगा। यह भुगतान बैंक बैंकिंग में क्रांतिकारी बदलाव करेगा और डिजिटल भुगतान। एमएफबीवाई (पीएम की फसल बीमा योजना) जैसे किसानों और योजनाओं के लिए आईपीपीबी भी बहुत मददगार होगा, इससे इससे अधिक ताकत मिलेगी। क्षेत्र में बढ़ती गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) या बुरे ऋणों पर भी बात की और पिछली यूपीए सरकार को गड़बड़ी के लिए दोषी ठहराया।"

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) भारत सरकार की 100 प्रतिशत इक्विटी के साथ संचार और मंत्रालय के संचार विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शासित है।

सरकार का लक्ष्य दिसम्बर 2018 तक सभी 1.55 लाख डाकघरों को भारत पोस्ट पेमेंट बैंक से जोड़ना है l ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगभग 11,000 पोस्टमैन दरवाजे पर बैंकिंग सर्विस देंगे l आईपीपीबी ग्रामीण स्तर पर देश के लिए सबसे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क बनाएगा l

इस परियोजना में शामिल कुल व्यय 800 करोड़ रुपये है। सभी नागरिक, विशेष रूप से देश की औपचारिक बैंकिंग के दायरे से बाहर देश की आबादी का 40% इस परियोजना से लाभान्वित होंगे। यह परियोजना पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी। आईपीपीबी को अपने खातों के साथ 17 करोड़ डाक बचत बैंक खातों को जोड़ने की अनुमति दी गई है। आईपीपीबी तीन प्रकार के बचत खाते प्रदान करता है: नियमित बचत खाते, डिजिटल बचत खाते और मूल बचत खाते। सभी तीनों पर वार्षिक ब्याज दरें 4 प्रतिशत पर तय की गई हैं।

30 जनवरी, 2017 को रायपुर और रांची में दो पायलट आईपीपीबी शाखाओं का उद्घाटन किया गया था । सुरेश सेठी आईपीपीबी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी है l

आइए, सायबर संसार में तैर रहे शब्द NOTA के बारें में कुछ जानते हैं


नोटा क्या है और कब चलन में आया?

 'नोटा' (None of the above) विकल्‍प का विचार सर्व प्रथम 1976 में हुआ जब इस्ला विस्टा नगर सलाहकार परिषद ने संयुक्त राज्य अमेरिका में सांता बारबरा, कैलिफोर्निया के काउंटी में आधिकारिक चुनावी मतपत्र में इस विकल्प को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। वाल्टर विल्सन और मैथ्यू लैंडी स्टीन, तब परिषद के मंत्रियों ने चुनाव के लिए मतपत्र प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने के लिए एक कानूनी प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 1978 में, नेवादा राज्य द्वारा मतपत्र में पहली बार 'उपर्युक्त में से कोई नहीं' (NOTA) विकल्प पेश किया गया था।

भारत में People's Union for Civil Liberties (PUCL) द्वारा एक याचिका दायर की गई थी और उसकी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि "हम चुनाव आयोग को मतपत्रों / ईवीएम में आवश्यक प्रावधान प्रदान करने के लिए निर्देशित करते हैं और ईवीएम में" उपरोक्त में से कोई भी नहीं "(NOTA) नामक एक अन्य बटन प्रदान किया जा सकता है ताकि मतदाता, जो भी उम्मीदवार के लिए मतदान न करने का फैसला करते हैं, वे गोपनीयता के अधिकार को बनाए रखते हुए वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग करने में सक्षम हैं।
 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश देने पर नोटा ईवीएम पर उपलब्ध कराया गया और इस चिन्ह का डिज़ाइन "नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन" अहमदाबाद द्वारा तैयार किया गया l इसे ईवीएम मशीन और बैलेट पेपर में सबसे अंतिम में शामिल किया गया l इस आदेश के बाद भारत नकारात्मक मतदान का विकल्प उपलब्ध कराने वाला विश्व का एक और देश बन गया।



भारत के अलावा और कौन से देश में नोटा मान्य हैं?

कोलंबिया, यूक्रेन, ब्राजील, बांग्लादेश, फिनलैंड, स्पेन, स्वीडन, चिली, फ्रांस, बेल्जियम और ग्रीस अपने मतदाताओं को नोटा वोट डालने की अनुमति देते हैं। अमेरिका इसे कुछ मामलों में भी अनुमति देता है।



नोटा का प्रयोग भारत में कब हुआ?

2013 में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नोटा को उपलब्ध कराया गया l इससे पहले अगर कोई वोटर किसी उम्मीदवार को अपना वोट नहीं देना चाहता था, तो उसे अलग से एक फॉर्म भरना होता था और अपनी पहचान बतानी होती थी। वहीं, अब ईवीएम में 'नोटा' विकल्प होने से पहचान भी जाहिर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।



नोटा को चुनने पर अगर ज्यादा वोट नोटा को ही मिले हो तो उस संबंध में क्या होगा?

अगर उपलब्ध प्रत्याशियों से ज्यादा वोट नोटा को मिले हो तो दोबारा इलेक्शन होने जैसा या अन्य कोई भी प्रावधान नहीं है l
नोटा को छोड़कर जिस भी प्रत्याशी को ज्यादा वोट मिले होंगे उसे ही विजय घोषित किया जाएगा परंतु इससे जनता को उम्मीदवार को नकारने का हक मिल गया और साथ ही राजनीतिक दलों पर भी अच्छे उम्मीदवार देने का प्रेशर पड़ता है l नोटा का उदेश्य राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों के रूप में उम्मीदवारों को स्वच्छ पृष्ठभूमि के साथ पेश करने के लिए मजबूर करना था हालाकि इतने समय इस विकल्प का कोई खास असर पड़ता दिख नहीं रहा है l




Source  - इंटरनेट

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Thursday, August 30, 2018

पायलट ने चलती प्लेन से पूरा किया kiki challenge

Kiki challenge के जुनून से पायलट भी पीछे न रह पाए l पायलट Alejandra Manriquez और उनकी attendant ने चलते हुए प्लेन से जंप करके kiki challenge को पूरा किया l इसकी Vedio Alejandra ने ट्विटर अकाउंट @aviationdailyy पर अपलोड की l



Vedio की शुरुआत में पायलट प्लेन में दिखती है और control panel को सेट करके वो boarding point पर आती है और अपनी attendant के साथ moving plane के साथ चलते चलते "kiki do you love me"  पर dance करती है l
अब तक इस Vedio को 65, 000 से ज्यादा लोग देख चुके हैं l

जिस पर यूजर्स ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है l
किसी ने पूछा है कि क्या अभी तक उनके पास पायलट license है?



वही कुछ लोगों ने इसे fake बोला है और कहा है कि प्लेन मूव नहीं कर रहा है l

Vedio देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 

Wednesday, August 29, 2018

Google पर "idiot" लिखने पर क्यू आती है trump की तस्वीर

Google सर्च इंजन पर "idiot" लिखने पर अमेरिकी राष्ट्रपति trump की तस्वीर दिखती है l इस पर trump ने गूगल पर अपनी नाराज़गी जताई l



सिर्फ ट्रंप ही नहीं, गूगल पर इडियट सर्च करने पर वैज्ञानिक न्यूटन की तस्वीर भी दिखाई देती है। क्योंकि demonofmarketing.com नाम की वेबसाइट ने The Difference Between a Genius and an Idiot नाम के आर्टिकल में न्यूटन की फोटो लगाई है।

गूगल की-वर्ड और एल्गोरिदम पर काम करता है। माने, गूगल सबसे पहले उन तस्वीरों को दिखाता है, जिनमें उन तस्वीरों जुड़े की-वर्ड का इस्तेमाल किया गया हो।

इससे पहले 'टॉप 10 क्रिमिनल्स' सर्च करने पर नरेंद्र मोदी का नाम आ रहा था। तब भारत सरकार ने गूगल को चेतावनी दी थी। 


अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने गूगल पर अपनी छवि खराब करने का आरोप लगाया और साथ ही ये भी कहा कि जब से वे राष्ट्रपति बने हैं मीडिया उनके खिलाफ केवल नकारात्मक खबरें दिखा रहा है l





On the Google search engine, writing "idiot" shows a picture of the American President trump. on this, trump has expressed his heartburn on Google.


Not only Trump, Scientist Newton's picture is also seen on search of idiots on Google. Because the website named demonofmarketing.com has posted Newton's photo in the article entitled The Difference Between a Genius and an Idiot.

Works on Google's keywords and algorithms. Well, Google first shows those pictures in which the associated key-word has been used.

Previously, Narendra Modi's name was coming to search 'Top 10 Criminals'. Then the Indian government warned Google.


American President Donald Trump accused Google of spoiling his image and also said that since the media he has been president, only the negative news is being displayed against him.

Tuesday, August 28, 2018

मनोरंजन के नए नए तरीके


जब से "जियो" ने सस्ते इंटरनेट पैक उपलब्ध कराए हैं और फिर प्रतिस्पर्धा में बाकियों ने रेट कम किए तब से मोबाइल पर मनोरंजन की दुनिया हर छोटे बड़े के हाथ में आ गई है l

जहां एक ओर कुछ नकारात्मक परिणाम भी आए हैं.. मसलन पोर्न Vedio का बहुतायत में देखा जाना और यौन हिंसा का बढ़ना, भड़काऊ Vedio बनाकर वायरल करना जिसके चलते खून खराबा होना और बच्चों का पढ़ाई छोड़ कर मोबाइल पर ज्यादा ध्यान देना l


दूसरी तरफ नेट रेट सस्ते होने के कारण नये नये गाने और डांसिंग के ऐप लांच हुए जिसमें आप अपनी आवाज़ में गा सकते हैं और अपनी खुद की गाते, डांस करते हुए की Vedio बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकते हैं और मोबाइल में शानदार एडिटिंग के भी feature दे दिए गए हैं जिसके चलते अब गाने, नाचने के शौक आसानी से पूरे हो जाते हैं l

कुछ तो इतने मज़ेदार Vedio वायरल हो रहे हैं कि आप बिना हँसे और मुस्कराए नहीं रह सकते हैं l
देखते हैं ऐसे ही कुछ Vedio 👇










Yes, I am a woman


Yes i am a woman,
Mother, wife, sister and daughter
I am the only one on every side
Jaganjani, Jagpilika Nevertheless,
Helpless, yes I am a woman,


To say that half the population,
Still do not say any of your own,
All day long rising from morning to morning,
Still not counting in the count,
I'm a non-earning work sticker,
Yes i am a woman,


I am the simbal of Mamta,
Still go astray because I am a woman,
Respects every household decision,
But I did not know anything at all,
The family was happy, it's my happiness,
I understand family progress to mine,
Yes i am a woman,


Nine days of worshiping the house, becoming a Goddess,
In reality, the stigma of humilition,
Junk Axis, Finding Identity,
In every form ... bound in the border,
Even by reading and doing ... Ignorance is called inferiority,
Yes i am a woman,


Family, at the request of society,
Taking the locks on the mouth..I,
I am a living awakening puppet,
Yes i am a woman....


Written by Mrs Durga Devi

Translated by Rita Sharma






हाँ मैं एक नारी हूं, नर से भारी,
माँ, पत्नी, बहन और बेटी,
हर तरफ मैं ही मैं हूं,
जगजननी, जगपालिका फिर भी,
लाचार हूं, हाँ मैं एक नारी हूं,
कहने को तो आधी आबादी,
फिर भी अपना कोई मत नहीं,
सुबह से उठती दिन भर खटती,
फिर भी गिनती नहीं कमाई में,
मैं बिन कमाई वाली काम धारी हूं,
हाँ मैं एक नारी हूं, नर से भारी,
मैं ममता की मूरत, मान-मर्यादा का जिम्मा लिए,
फिर भी छली जाती हूं क्योंकि मैं एक नारी हूं,
घर के हर फैसले का सम्मान करती,
पर किसी में मेरी सहमति ना जानी जाती,
परिवार की ख़ुशी से खुश होती,
उसे ही अपनी तरक्की समझती,
हाँ मैं एक नारी हूं, नर से भारी,
नौ दिन पूजी जाती घर घर देवी बनकर,
यथार्थ में अपमान का दंश झेलती,
जग धुरी, पर पहचान ढूढती,
हर रूप में...सीमा में बंधती,
पढ़-लिखकर कर भी...बुद्धि हीन कहलाती,
हाँ मैं एक नारी हूं, नर से भारी,
परिवार, समाज की दुहाई पर,
मुँह पर ताले जड़कर..मैं,
जीती जागती कठपुतली हूं,
हाँ मैं एक नारी हूं, नर से भारी।।

Tuesday, August 21, 2018

एकल परिवार और बढ़ते बाल अपराध

रोज रोज परिवार के बुजुर्ग के साथ बुरा बर्ताव और उपेक्षा ये सोचने पर मजबूर करती है कि क्या  वाकई अब परिवार में वृद्ध हो चुके माता पिता की कोई जरूरत नहीं?




यहीं माता पिता बच्चों के पालन पोषण के लिए बहुत सारे समझौते करते हैं और हर तरह से उनको आत्म निर्भर करते हैं l बच्चों के आत्म निर्भर होने के साथ यही माता पिता वृद्ध होते हैं और बच्चों पर निर्भर हो जाते हैं l जैसे ही बच्चों का अपना परिवार बनता है तो माता पिता बोझ लगने लगते हैं और एक बार फिर लौट ये बच्चे ही माता पिता बनकर वृद्ध होकर कष्ट भोगते हैं l अब ये संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में आता जा रहा है l


ये सामाजिक व्यवस्था का हनन है और ये भी दर्शाता है कि माननीय संवेदना ख़त्म होती जा रही है l जो बच्चे अपने परिवार में केवल माता पिता और भाई बहन को ही देखते हैं और माता पिता द्वारा दादा - दादी और अन्य बुजुर्गों की उपेक्षा देखते हैं तो उनमें वैसे ही संस्कार आने लगते हैं l फिर यही बच्चे समय आने पर अपने माता पिता के साथ भी ऐसा ही करते हैं l


 ब च्चों का प्रथम स्कूल परिवार ही होता है और यहां से सीखी गई हर चीज़ उनके जीवन में, आचार विचार और काम में दिखाई पड़ती है l बढ़ती महंगाई और जिम्मेदारी से बचने के लिए माता पिता का वृद्धा आश्रम छोड़ने का जो चलन शुरू हो गया है वो सामाजिक संरचना के लिए नितांत घातक है l


एक परिवार में अपनी और बच्चे की हर जरूरत पूरी करने के लिए पति पत्नी दोनों का नौकरी करना और बच्चे का घर पर अकेला रहना एक बहुत बड़ा कारण है बाल अपराध बढ़ने का l अकेले रहने पर बच्चे टीवी, इंटरनेट और दोस्तों के साथ अपनी मर्जी का कुछ भी सीखते हैं और उनको गलत सही का पहचान कराने वाला कोई नहीं होता l घर में बड़े बुजुर्ग के होने पर ऐसी समस्या से निपटा जा सकता है l


कुछ बातों पर ध्यान देकर हर व्यक्ति एक अच्छा और खुशहाल जीवन जी सकता है - - -



* हर माता पिता को खुद घर के बड़े बुजुर्ग की देखभाल करनी चाहिए और बच्चों को भी सिखाना चाहिए क्यू कि एक समय हर व्यक्ति इसी अवस्था में होगा और बच्चे जो माता पिता को करते देखेंगे, वही कल खुद भी करेंगे l

* बढ़ती महंगाई से जिंदगी जीना मुश्किल जरूर होता जा रहा है l हर व्यक्ति को अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अपने आगे आने वाली जिंदगी के लिए बचा कर रखना चाहिए ताकि बच्चों पर वो आर्थिक रूप से न निर्भर हो l

* अपने और स्वास्थ्य के प्रति युवावस्था से ही सोचना शुरू कर देना चाहिए ताकि बुढ़ापा अच्छा और निरोगी रहे और इस तरह बच्चों पर भार भी नहीं बनेगे l

*अच्छे अच्छे दोस्त अपने आसपास रखने चाहिए और उनसे अपने सुख दुख बाट कर अपने को खुश रखिये और जरूरत आने पर एक दूसरे का ख्याल भी रखे, सिर्फ परिवार पर ही निर्भर न रहे l

   

                       "है चार पल की जिंदगी,
                       आ जी ले सब मिलकर हंसी खुशी"

Saturday, August 18, 2018

केरल में बाढ़ पीड़ितों के लिए लिखी गई कविता


अटल बिहारी वाजपेयी जी व्याकुल होकर मीडिया को संबोधित करते हुए - - -

मत करो मेरा विलाप,
मैं आया था जाने के लिए,
जी भर जीया और जी कर गया,
देखो, संभालो उनको जो अकाल मृत्यु पा रहे हैं,
सुनो सभी कैमरा थामे बंधु...बात पहुंचा देना मेरी,
कहता हूँ जरा, ध्यान से सुनना,

"ओ, प्रियवर मेरे, मैं था मानव... मानव ही रहने दो,
ना गवाओं समय अब, देखो जरा तुम उस ओर,
केवल पानी ही पानी दिखता है,
ना जाने दो किसी को अकाल मृत्यु में,
तुम बढ़ाओ हाथ, सब साथ चलो,
मिलजुल कर सब इस संकट में,
साथ रहना और उनको भी जीने देना,
बढ़कर आगे तुम संकट में अटल रहना,
अटल रहकर तो मृत्यु भी टल जाती है,
अब समय आ गया है कि परिभाषित करो मुझको,
प्रियवर, कुछ काम करो, तुम काम करों ll"

Rita Sharma


Atal Bihari Vajpayee, who is distraught while addressing the media - - -

Do not moan me,
I came to go,
Fully lived and lived,
Look, take care of those who are suffering from a famine,
Listen, all the cameras are there ... delivering the message to me,
Just say, listen carefully,

"O, my beloved, I was human ... let alone human beings,
No time now, look at you, on the other side,
Only water looks water,
Do not let anyone know of sudden death,
You raise hands, come all along,
Together all in this crisis,
Living together and letting them live,
Increasingly, you remain firm in crisis,
Staying indefinitely, death also disappears,
Now the time has come to define me,
Dear, do some work, you'll work "

Friday, August 17, 2018

मृत्यु अटल है, निश्चित है


मृत्यु अटल है, निश्चित है,
उसे सहज ही रहने दो,
जी भर जी लेने के बाद,
अब मुझे जाने दो,
हैं पुनर्जन्म में यकीन
तो वापस भी आने दो,
न बनाओं देवता
वापस आने का रास्ता खुला रहने दो,
जिया अपनी मर्जी और आदर्शों के साथ,
जाते वक्त भी आदर्श ले जाने दो ll

मृत्यु अटल है, निश्चित है,
अब शांति से जाने दो,
ना करो आखिरी क्षणों का बाजारीकरण,
मैं सादगी पसंद था, सादगी से ही जाने दो,
गर कुछ लेना है मुझसे तो,
मेरे जीने के तरीके और आदर्श ले लो,
और संपत्ति न थी मेरे पास,
खाली हाथ आया था,
खाली ही जाने दो ll

मृत्यु अटल है, निश्चित है,
चाहिए अभी और भी अटल,
आओ बनकर पथ पर अटल,
संभालो मेरी विरासत को,
और कुछ नहीं रहा देने को,
एक इंसा था और इंसा ही रहने दो,
न करो मृत्यु का बाजारीकरण,
मुझे अब शांति से जाने दो,
पूरा भारत मेरा गाँव था,
सबको मेरे पास आने दो ll

मृत्यु अटल है, निश्चित है,
अब शांति से जाने दो ll



नोट - - व्याकुल मन से निकले शब्द

Wednesday, August 8, 2018

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के विवाद गर्म होने पर मंत्री मंजू वर्मा ने दिया इस्तीफा और मेनका गांधी ने निर्देश दिया कि देश भर के सभी आश्रय गृह का सोशल ऑडिट कराया जाए


आज बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री श्री मती मंजू वर्मा ने विपक्ष के दबाव के चलते आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया l मामले की जांच CBI कर रही है और ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इसकी आंच मंत्री के पति श्री चंद्रेश्वर वर्मा तक पहुंच सकती है l बृजेश ठाकुर के सीडीआर से खुलासा हुआ है कि जनवरी से अब तक समाज कल्याण मंत्री से 17 बार बात हुई है l इसके लिए वो पहले ही सफाई दे चुकी है कि काम के सिलसिले में उनसे कई बार बात हो चुकी है और साथ ही विपक्ष के बार - बार इस्तीफे की मांग को लेकर नीतीश कुमार ने कहा कि किसी से भी अकारण इस्तीफा कैसे ले सकते हैं और अगर कोई संलिप्तता आती है तो इस्तीफा लेने में देर भी नहीं करेंगे l

इस्तीफा देने के बाद मंत्री मंजू वर्मा ने कहा कि विपक्ष और मीडिया ने भ्रम पैदा कर दिया था l मुझे CBI और न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है, सच्चाई सामने आएगी और मेरे पति पर लगे सारे आरोप हट जाएंगे l साथ ही उन्होने आरोपी बृजेश ठाकुर के सीडीआर को सार्वजनिक करने की मांग की l



वही आरोपी बृजेश ठाकुर के आज बुधवार को कोर्ट में पेशी के वक्त सुरक्षा के बीच भी प्रदर्शनकारियों ने स्याही फेक कर अपना गुस्सा निकाला l उन पर कालिख पोतने की नाकाम कोशिश भी की गई l विपक्ष लगातार बृजेश ठाकुर पर राज्य सरकार का संरक्षण होने का आरोप लगाता रहा है l इस केस को लेकर सियासत पूरी तरह से गरम हो चुकी है और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी हो चुका है l



दरअसल काफी समय से प्रदेश सरकार द्वारा चलायी जा रही बालिका गृह की शिकायतें सामने आ रही थी तो उसका ऑडिट मुंबई की प्रतिष्ठित संस्था "टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साईंसेज (TISS)" के द्वारा सोशल ऑडिट सितंबर 2017 में कराया गया और उस समय अनियमितताएं सामने आई थी मगर कोई एक्शन नहीं लिया गया था l

टीआईएसएस ने 7 महीनों तक 38 जिलों के 110 संस्थानों का सर्वेक्षण किया. इस सर्वेक्षण में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि शोषण की शिकार हुई सभी बच्चियां 18 साल से कम उम्र की हैं. इनमें भी ज्यादातर की उम्र 13 से 14 साल के बीच है. इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुए यौन उत्पीड़न में  बाल कल्याण समिति के सदस्य और संगठन के प्रमुख भी बच्चियों के शोषण में शामिल थे.

TISS की रिपोर्ट में साफ साफ यौन शोषण, उन्हें खाना न देने, नशे की दवा/इंजेक्शन देने, मार पीट (शरीर पर जले, कटे के निशान) और उनके शिक्षा के व्यवस्था न होने की बात कहीं गयी l इसी रिपोर्ट के आधार पर सेवा संकल्प समिति बाल गृह के कर्ता धर्ता बृजेश ठाकुर और पदाधिकारियों पर FIR की गयी थी l 24 जुलाई को रेड पड़ने पर 44 लड़कियां इस शेल्टर होम से छुड़ायी गयी थी और 42 की मेडिकल हुई जिनमें से 29 लड़कियों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई थी और बाकी रिपोर्ट आने पर ये संख्या बढ़कर 34 हो गई l 34 लड़कियों के साथ रेप के मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर के साथ 10 लोगों को गिरफ्तार किया और जांच CBI के हाथ में आ गई l CBI ने बिहार पुलिस और प्रशासन और TISS से सुबूत लिए और आगे की कार्रवाई चल रही है l


वही आरोपी की पत्नी के अपने facebook पोस्ट में सभी रेप पीड़ित बच्चियों के नाम उजागर करने पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने  स्वतः सख्त संज्ञान लिया और बिहार सरकार को इन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया l Justice मदन बी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान facebook पर विक्टिम के नाम उजागर करने को गंभीर बताते हुए तुरंत पोस्ट हटाने को कहा और साथ ही देश भर में रेप के किसी भी मामले में नाबालिग पीड़ित के इंटरव्यू और उसे किसी भी तरह से दिखाने पर रोक लगा दी है l

कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को आदेश दिया था कि वो बच्चियों का न तो इंटरव्यू लें और न ही तस्वीर दिखाएं, अस्पष्ट तरीके से भी तस्वीर दिखाने पर रोक लगा दी l



कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और राज्य कमीशन रेप पीड़ित से बात कर सकते है, बशर्ते उनके साथ मनोवैज्ञानिक हो l

हर तरफ किरकिरी के बाद केंद्र सरकार भी हरकत में आई है और देश भर में मौजूद 9,000 संस्थानों को जहां ऐसे बच्चे, बच्चियां हैं सोशल ऑडिट के आदेश दिए l ऑडिट की रिपोर्ट 60 दिनों के अंदर देनी हैं l महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि मैंने खुद ऑडिट के लिए प्रोफार्मा तैयार कर लिया है जहां न केवल बच्चों की संख्या, सुविधा और अन्य चीजें देखी जाएंगी बल्कि इन बाल गृह को चलाए जाने वाले की पृष्ठभूमि और बच्चों की हालत का जायजा लिया जाएगा l उन्होने देश भर में चल रहे ऐसे आश्रय गृह के केंद्रीयकरण पर जोर दिया ताकि समय समय पर जांच की जा सकें l


Tuesday, August 7, 2018

हरदोई के "आयशा ग्रामोद्योग" NGO का फर्जीवाड़ा सामने आया, दो के नाम 21 का अनुदान लेते रहे


यूपी के देवरिया जिले में संचालित "विंध्यवासिनी NGO" द्वारा यौन शोषण का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा सभी जिलों में संचालित महिला एवं बाल संरक्षण गृह के जांच के आदेश के बाद हरदोई जिले के बेनीगंज इलाके में पीड़ित, प्रताड़ित एवं निराश्रित महिलाओं के लिए   "आयशा ग्रामोद्योग समिति, लोहानी, पिहानी" द्वारा संचालित स्वाधार गृह का औचक निरीक्षण जिलाधिकारी पुलकित खरे ने किया।


निरीक्षण में जिलाधिकारी को अधीक्षिका द्वारा बताया गया कि स्वाधार गृह में 21 महिलायें है, जबकि मौके पर दो ही महिलायें पायी गयीं। पूछताछ पर बताया कि 15 महिलाएं दवा लेने गई हैं और चार मंदिर गईं, लेकिन लिखापढ़ी कोई नहीं थी l



कड़ी पूछताछ पर सच सामने आया कि अधीक्षिका गलत बोल रहीं थी। जो महिलाएं मिलीं उन्होंने खुद पोल खोली कि केवल दो महिलाएं ही रुकती हैं, बाकी कागजों पर ही पंजीकृत हैं। डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संस्था पर कार्रवाई के साथ अनुदान रोकने का आदेश दिया है। साथ ही निरीक्षण में जिलाधिकारी को यहां पर्याप्त कमरे, बर्तन और बाकी सामानों की व्यवस्था भी नहीं मिली।

 एक किराए के मकान में चलने वाला आयशा ग्रामोद्योग में रजिस्टर में तो 21 महिलाएं दर्ज है और इन पीड़ित महिलाओं को खाना - नाश्ता के साथ ही सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटीशियन आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रति माह कुछ रुपये भी दिए जाते हैं। दिन में आती है और शाम को वो चली जाती है जबकि रजिस्टर में 21 दर्ज करके उनके नाम पर अनुदान लिया जा रहा है l

प्रदर्शन के संबंध में देखे कानूनी पहलू



@  आखिर प्रदर्शन पर पिटाई क्यू?



@. क्या ये गैर संवैधानिक है?


आइए इस संबंध में कानून देखते हैं..?


नागरिकों का अधिकार - -
संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों में स्वतंत्रता का अधिकार के अंतर्गत - -
"अनुच्छेद 19 (ब) कहता है कि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से और बिना हथियारों के सम्मेलन करने और जुलूस निकालने का अधिकार है l जो सार्वजानिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था के हित की मांग को लेकर हो l"



@@  अगर पिछले सभी प्रदर्शन पर नज़र डाली जाए तो किसी न किसी देश हित/ नागरिक हित की मांग को लेकर ही था l




प्रशासन/पुलिस बल को मिले अधिकार

वही पुलिस द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए IPC की धारा 141 लगायी जा सकती है l

" धारा 141 तभी लगायी जाती है जब  विधि विरुद्ध सभा (unlawfull assembly) का अंदेशा हो l जहां पांच या उससे अधिक लोग इकट्ठा हो रहे हो (या कोई प्रदर्शन हो रहा हो जो विधि विरुद्ध हो)"


"सीआरपीसी की धारा 129 में यह अधिकार है कि किसी विधि विरुद्ध जमाव या पांच से अधिक व्यक्तियों के जमाव को जिससे लोक शांति को खतरा है तितर बितर होने का समादेश दे सकता है उसे लाठीचार्ज करने के लिए उच्चाधिकारियों से आदेश लेना पड़ेगा। बिना आदेश लाठी चार्ज गैर कानूनी होगा l "

वही धारा 130 के अनुसार" अगर किसी विधि विरुद्ध जमाव है तो लोक सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि उसको तितर-बितर किया जाए तो भी शर्त यह है कि उस समय उच्चतर पंक्ति का कार्यपालक मजिस्ट्रेट वहां उपस्थित हो। उसी समय सशस्त्र बल द्वारा लोगों को तितर-बितर किया जा सकता है। ऐसे किसी अधिकारी से जो सशस्त्र बल के व्यक्तियों की किसी टुकड़ी का समादेशन कर रहा है उससे अपेक्षा कर सकता है कि वह अपने समादेशाधीन सशस्त्र बल की मदद से तितर-बितर करे या विधि के अनुसार दण्ड देने के लिए गिरफ्तार या परिरुद्ध करने की अपेक्षा भी कर सकता है। किंतु ऐसे बल प्रयोग में किसी भी व्यक्ति के शरीर एवं संपत्ति का सिर्फ उतना ही नुकसान पहुंचाएगा जितना उस जमाव को तितर-बितर करने में आवश्यक हो।"


जबकि इसका स्पष्ट उल्लंघन सभी प्रदर्शनों में देखा जा रहा है.. लाठी चार्ज के दौरान बुरी तरह से प्रदर्शनकारी को जख्मी किया जा रहा है और सीधे वार सर पर ही किया जा रहा है.. और पुरुष पुलिस बल द्वारा महिलाओं को बाल पकड़ कर घसीटना और डंडों से पीटना ब्रिटिश हुकूमत की याद दिलाता है जहां उद्देश्य किसी भी प्रदर्शन को पूरी तरह से कुचलना होता था l

वही शहर के हालात बिगड़ने के अंदेशे पर धारा 144 भी लगायी जा सकती है
"सीआरपीसी के तहत आने वाली धारा-144 शांति व्यवस्था कायम करने के लिए लगाई जाती है. इस धारा को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी जिलाधिकारी एक नोटिफिकेशन जारी करता है. और जिस जगह भी यह धारा लगाई जाती है, वहां चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते हैं. इस धारा को लागू किए जाने के बाद उस स्थान पर हथियारों के लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी जाती है.  धारा-144 का उल्लंघन करने वाले या इस धारा का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है. उस व्यक्ति की गिरफ्तारी धारा-107 या फिर धारा-151 के तहत की जा सकती है.  इस धारा का उल्लंघन करने वाले या पालन नहीं करने के आरोपी को एक साल कैद की सजा भी हो सकती है. वैसे यह एक जमानती अपराध है, इसमें जमानत हो जाती है l"

मगर इन सभी धाराओ को लागू करने का उद्देश्य गैर राजनीतिक हो और संविधान के मूल अधिकारों की अवहेलना भी न हो रही हो l


भारतीय संविधान हमें अपनी आवाज़ उठाने और प्रदर्शन का अधिकार तो देता है, मगर ये प्रदर्शन विधि सम्मत नहीं है और जहां शांति भंग होने की संभावना है वहां पुलिस को भी उचित तरीके से उसे तितर बितर करने और जरूरत पड़ने पर उचित बल प्रयोग का  अधिकार देता है न कि पीटने का और सर फोड़ने का जैसा कि उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के प्रदर्शन में वायरल हो रही Vedio में देखा जा रहा है l

ये नितांत सोचनीय तथ्य है कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है
.. प्रदर्शन को उग्रता से दबाने के चलते अब लोग भी हिंसक हो कर प्रदर्शन और तोड़ फोड़ करते हैं.. इस तरह से तो समाज एक विस्फोटक स्थिति में आ जाएगा.. जबकि कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका बनाने और संविधान को बनाने का मकसद ही एक स्वस्थ्य और सुरक्षित समाज का निर्माण करना था  लेकिन अभी की व्यवस्था से तो ब्रिटिशवादी शासन की ही याद आती है और लगता है कि हम प्रजातंत्र से दूर हो रहे हैं.. यहां शासन, प्रशासन और नागरिक सभी का ये कर्तव्य बनता है कि देश में संविधान और उसकी मूल आत्मा को जिंदा रखा जाए और अपने व्यक्तिगत हित या इच्छा के लिए प्रजातांत्रिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाया जाए l

रीटा शर्मा
सोशल एक्टिविस्ट

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एसिड अटैक जैसी भयावह स्थिति में क्या हो प्राथमिक उपचार - - आइए जाने



अगर एसिड अटैक जैसी कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो जाती है तो प्राथमिक चिकत्सा मिलने से पहले हमें क्या करना चाहिए कि स्किन और आँखों पर उसका कम से कम असर पड़े, इस सम्बन्ध में हमने बात की “तलवार स्किन इंस्टिट्यूट” के स्किन स्पेशलिस्ट ” डॉ अंकुर तलवार” से। पेश है बातचीत के कुछ अंश…



रीटा – अगर कोई अचानक से एसिड अटैक कर देता है..जिससे चेहरा और बाल सभी कुछ बहुत हद तक जल जाता है और चेहरा कुरूप हो जाता है और कई बार आँखों की रौशनी भी चली जाती है। अगर ऐसा हो जाता है तो क्या कोई उपाय है कि प्राथमिक उपचार मिलने से पहले चेहरा और स्किन को बचाया जा सके?


डॉ अंकुर तलवार – (1) एसिड अटैक के तुरंत बाद सादे और स्वच्छ पानी से 5 से 10 मिनट तक लगातार चेहरा धुलना चाहिए, अगर कच्चा दूध मिल सके तो उसका भी प्रयोग कर सकते है, साबुन का इस्तेमाल ना करें, चेहरे को रगड़े नहीं, priliminary bandage का प्रयोग करें ताकि कोई बाहरी गंदगी और इन्फेक्शन से बचा जा सके ये सभी मेडिकल स्टोर पर आराम से मिल जायेगा। एंटीबायोटिक क्रीम या गोली का भी इस्तेमाल कर सकते है।


(2) आँखों को भी ज्यादा से ज्यादा धुले, artifical tears drop का इस्तेमाल करे, ये भी आसानी से मेडिकल स्टोर पर मिल जाता है, अगर एसिड आँखों में जाता है तो नमी सूखने लगती है और आँखों के चिपकने का डर होता है, artifical tears drops आँखों में नमी बरकरार रखेगा जिससे काफी नुकसान से बचा जा सकता है। जितने जल्दी हो सके पास के सरकारी या निजी अस्पताल पहुचने की कोशिश करें।




रीटा – एसिड अटैक, ट्रीटमेंट और सर्जरी के बाद क्या क्या देखभाल करनी होती है?

डॉ अंकुर तलवार – (1) पोस्ट सर्जरी के बाद सारी देखभाल चिकित्सक के निर्देशानुसार करना चाहिए, जब तक घाव नहीं भरे बेड रेस्ट करें।

(2) त्वचा नार्मल होने के बाद gentle soap, antibyotic cream और sunscreen का इस्तेमाल कर सकते है। त्वचा का अच्छे से देखभाल करे और कोई दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे।




रीटा – अगर एसिड अटैक से पीड़ित किसी लड़की की शादी होती है तो उसका ख़राब हो चुकी स्कीन का असर उसकी आने वाली पीढ़ी पर होने के चांस होते है क्या?


डॉ अंकुर तलवार – एसिड अटैक एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, इससे उनका बाहरी शारीरिक हिस्सा जख्मी होता है लेकिन कोई जीन में गड़बड़ी नहीं आती। आजकल के युवाओं को आगे बढ़कर निश्चिन्त होकर शादी करके एक पुनीत कार्य करें इससे आने वाली पीढ़ी पर कोई असर नहीं होगा, ये महज़ एक घटना होती है समाज में फैले बीमार मानसिकता वाले व्यक्तियो के चलते।


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जाने क्या है #kiki challenge और क्यू गवां रहे हैं लोग जान?

ब्लू ह्वेल गेम जिसने कई सारे बच्चों की जान ली थी,  ठीक उसी तरह इस समय #kiki challenge ट्रेंड कर रहा है l सोशल मीडिया पर हॉलीवुड, बॉलीवुड के सितारें अपने Vedio बनाकर डाल रहे हैं जिससे चलते आम लोगों में भी इसका जबर्दस्त क्रेज बढ़ता जा रहा है l ये kiki challenge पुलिस के लिए सर दर्द बनता जा रहा है l



क्या है kiki challenge?


Kiki challenge एक कैनेडियन रैप सिन्गर का गाना है जिसे यूट्यूब पर अब तक 8 करोड़ से ज्यादा views मिले हैं l ये चर्चा में तब आया जब एक कॉमेडियन "शिगी" ने चलती गाड़ी में Vedio शूट करके इस चैलेंज की शुरुआत की #kiki challenge l

इसमें एक व्यक्ति गाड़ी में होता है जो गाड़ी चलाने के साथ साथ Vedio शूट करता है और चैलेंज लेने वाला गाड़ी का दरवाजा खोल कर के चलती गाड़ी के साथ सड़क पर डांस करता है और डांस पूरा होना के बाद उसी व्यक्ति को कूदकर चलती गाड़ी में बैठना होता है और इस तरह ये challenge पूरा होता है l



हॉलीवुड, बॉलीवुड और आम जन में चढ़ा इसका बुखार



Kiki challenge को लेकर Hollywood के सितारों ने अपने Vedio डाले और bollywood सितारों ने भी इस चैलेंज को लेते Vedio बनाकर डाली जिसमें नोरा फतेह अली ने लाल साड़ी में Vedio डाली, अदा शर्मा ने इसे नागिन अवतार कपड़ों में इस चैलेंज को लेते हुए Vedio डाली मगर उनकी गाड़ी चल नहीं रही थी, रागिनी एमएमएस फेम करिश्मा शर्मा ने भी Vedio डाली l

इस Hollywood और bollywood को देखते हुए अब लोगों में भी इसका बुखार सर चढ़ कर बोल रहा है और हर स्कूल, कॉलेज और दोस्तों के बीच kiki ही चल रहा है l



पुलिस ने किया kiki challenge से अलर्ट


चलती गाड़ी और चलती रोड kiki Vedio शूट करने की वजह से ये पुलिस के लिए सर दर्द बन चुका है और पुलिस इसे चैलेंज को "life challenge" करार देते हुए इसे न करने का सुझाव दे रही है.. इससे देश ही विदेश की भी पुलिस बुरी तरह परेशान हैं l

केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य देशों में रहने वाले लोग भी दुर्घटना का शिकार हुए हैं। कई वीडियो तो सोशल मीडिया पर ऐसे भी वायरल हुए हैं जिनमें लोग इस चैलेंज को करते करते सड़क पर गिर जाते हैं या गाड़ी में बैठने के दौरान गिर जाते हैं। साथ ही इस चैलेंज ने कई लोगों की जान भी ले ली है।

इस चैलेंज और होने वाली दुर्घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए UP पुलिस ने 30 जुलाई को ट्वीट  किया है l



वही दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर कहा है कि डांस फ्लोर पर किया जाता है न कि रोड पर l


इसी तरह सावधान रहने का संदेश मुंबई और चंडीगढ़ पुलिस ने भी दिया है l इस चैलेंज के खतरों से लोगों को बचाने के लिए अमेरिका, मलेशिया, स्पेन और यूएई की पुलिस ने भी लोगों को सतर्क किया है।


Kiki challenge भी अब ब्लू ह्वेल गेम की तरह लोगों के लिए खतरा बनता जा रहा है और हर कोई इसका दीवाना भी होता है और ये चैलेंज सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा है lजिंदगी को सहज और सरल बनाने वाली टेक्नोलॉजी किस तरह से लोगों को खतरे में डाल देता है ये सोचनीय विषय हैl खुद सिंगर और चैलेंज देने वाले कॉमेडियन भी इस तरह के खतरे और जुनून से शायद अंजान हो l




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Writer Rita Sharma

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के बाद अब देवरिया का खुलासा, क्या केवल बलात्कारी और अपराधी ही जिम्मेदार की भूमिका में हैं?


मुजफ्फरपुर शेल्टर होम (NGO द्वारा संचालित) की जांच अभी पूरी हुई भी नहीं थी कि यूपी के देवरिया जिले से एक NGO द्वारा संचालित बालिका गृह, माँ विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान से भागकर एक बच्ची थाने पहुंचती है और समझ के आधार पर बताती हैं कि "दीदी लोग को रात में लाल और काली कार में कहीं भेजा जाता है और सुबह वो रोती हुई वापस आती है और पूछने पर कुछ बताती भी नहीं l हमसे पोछा लगवाया जाता है और नौकरों की तरह रखा जाता है l"

लड़की के इस बयान के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई और बच्ची की counseling कराकर बयान के आधार पर बालिका गृह पर रात में छापा मारा और कुल 42 लड़कियों में से 24 को मुक्‍त कराया और 18 अभी लापता हैं l इस NGO की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि उनकी बेटी कंचन लता अभी फरार है l उक्‍त संस्था को सील कर दिया गया है l वैसे इस संस्था पर पहले से ही अनियमितता के आरोप हैं, पिछले साल ही इसे बंद और लड़कियों, बच्चों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के आदेश दिए गए थे लेकिन उसका पालन नहीं हुआ l



फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया के डीएम सुजीत कुमार को हटाने का आदेश दे दिया है। रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने जांच के लिए दो सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति को देवरिया भेजा है। वे सोमवार को वहां रहेंगे और रिपोर्ट जमा करेंगे, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।




पहले मुजफ्फरपुर और फिर देवरिया.. NGO द्वारा संचालित बालिका गृह पर भी सवाल उठने लगे हैं और साथ ही बार बार लड़कियों के साथ यौन हिंसा और रेप ये भी साबित करता है कि लड़कियां कहीं भी सुरक्षित नहीं है l

घर से स्कूल जाते वक्त, स्कूल में, कॉलेज में, ऑफिस में, रास्ते में कभी भी कुछ भी घटित हो सकता है और छोटे बच्चों और लड़कियों को तो हम किसी भी तरह का दोष भी नहीं दे सकते हैं वे इस तरह के किसी भी खतरे से अनजान रहते हैं और घटना होने के बाद भी उन्हें पता नहीं होता है.. कभी कभी तो महीनो और सालों बाद ये बातें बाहर आती है l

सवाल उठता है कि कैसे माहौल को सुरक्षित किया जाए और इन छोटे बच्चों को किसी भी खतरा आने का अहसास कैसे कराया जाए?

NGO या सरकार द्वारा संचालित सभी बालिका गृह या अनाथ आश्रम की समय समय पर जांच करायी जाये और कुछ भी गलत दिखने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए और साथ अपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने पर कठोर दंड के प्रावधान रखे जाए l

अगर वे बच्चे जिन पर माँ बाप का साया नहीं है और उन्हें बचपन से ही ऐसी अपराधिक गतिविधियों में लिप्त कर दिया जाए तो फिर बड़े होने पर उनसे स्वस्थ्य और बे‍हतर समाज बनाने की कल्पना कैसे कर सकते हैं? जिसने गलत देखा, सहा वो आगे चलकर गलत ही करेगा और इस तरह से अपराधिक समाज ही निरंतर बनेगा l

साथ ही ये बेहद ही दुखद स्थिति है कि इन दोनों घटनाओं में पूरा परिवार शामिल हैं इससे पारिवारिक संस्था पर ही सवाल खड़े होते हैं l अगर परिवार से कोई एक कुछ गलत कर रहा होता है तो बाकियों को उसे रोकने की कोशिश करनी चाहिए l इसे परिवार नामक संस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं.. जिस घर में पति पत्नी, बच्चे होते हैं वहां दूसरे बच्चे का यौन शोषण किन परिस्थितियों में होता होगा या बच्चे अच्छे और बुरे का सवाल न करते होंगे या सभी को आरंभ से गलत करने की ही शिक्षा दी गयी है?

सभी बच्चों को घर में भी और स्कूल में विशेषज्ञ द्वारा बचपन से अच्छे और बुरे का अहसास और तुरंत प्रतिक्रिया करना सिखाया जाए और साथ ही ऐसी ट्रेनिंग सभी अनाथ आश्रम और बालिका गृह में दी जाए l

समय समय न केवल बालिका गृह बल्कि स्कूल और कॉलेज में भी inspection कराया जाए और कुछ भी गलत होने पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की जाए और जो भी व्यक्ति या संस्था गलत चीजों में लिप्त दिखे उस पर कानूनी कार्रवाई के साथ आजीवन प्रतिबंध लगा दिया जाए l

कुछ हेल्पलाइन (1090 के तर्ज पर) नंबर रखे जाए जिस पर कोई भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था हो और पहचान गोपनीय रखी जाए l ये नंबर सभी जगह उपलब्ध कराए जाए, अमूमन ऐसा देखा गया है कि कुछ लोगों को पहले से ही आभास होता है मगर डर से बोलते नहीं हैं वहां इस तरह के हेल्पलाइन नंबर होने से स्थिति बिगड़ने से पहले सुधारी जा सकती है l

बच्चे जो देश का भविष्य है, उन्हें सजाने, सवारने, बे‍हतर शिक्षा और माहौल देने की जरूरत है तभी आगे चलकर वो स्वस्थ समाज बना सकते हैं l इसके लिए हर एक नागरिक के सजग और सक्रिय होने की जरूरत है l

Monday, June 25, 2018

पुस्तक समीक्षा "हैशटैग आशिकी"


हफीज किदवई, जो कि आम भाषा में गंभीर समस्याओं को बड़ी आसानी से लिख देने की कला में माहिर हैं l उनकी लिखी किताब "हैशटैग आशिकी" एक बार फिर से उनकी सरल, सहज लेखनी को परिभाषित करती है l

हैशटैग आशिकी में कुल 89 अध्याय हैं.. छोटे छोटे ये अध्याय हमें जीवन को बड़ी पास से दिखाते हुए गंभीर विषयों पर सोचने को विवश करते हैं l

शुरुआत उन्होनें नाम के मुताबिक ही आशिकी से ही की है जिसे पढ़ के लगता है कि ये हम से ही होकर गुजरा है.. चीजों को बारीकी से देखना और उसे खूबसूरत शब्दों में पिरो देने में माहिर होने के चलते ही उनके खुद के बड़ी संख्या में पाठक है l
किताब की शुरुआत इश्क़, मोहब्बत से करते हुए वो आगे गंभीर विषयों पर लिखते हुए आगे बढ़ते हैं l गंभीर विषय जब तक आपके दिमाग को झकझोर कर सीख देते हैं और जैसे ही आप किताब को रखकर बाद में पढ़ने की सोचते हुए अगला पन्ना पलटएंगे तो फिर ये इश्क़ का एक खुशनुमा अध्याय लिख कर वो दिमाग को ताज़ा करने वाला तड़का लगा देते हैं l



 माँ अध्याय में मां पर कैसे लिखे ये पूछते हुए बहुत कुछ लिख जाते हैं.. "मेरी माँ मेरे सामने दुनिया छोड़े न कि उसके सामने मैं l मरना सभी को है, मगर मैं नहीं चाहता एक माँ अपने बेटे के मरने का दर्द सहे l" इससे उन्होने माँ की पीड़ा को बखूबी समझा और लिखा है l
"दामाद" अध्याय से उन्होंने वर्तमान स्थिति पर तंज किया है कि हमें कमी निकालने के बजाय बेटों को तरह अपने देश को ठीक करने में सहयोग देना चाहिए l
 "नफरत, बक्श दो, आतंक के खिलाफ, नासूर, जिस्‍म, कश्मीर, महात्मा गांधी, वहशी, मज़हब नमक है, ये भी तो हैं" अध्यायों से देश की समस्याओं को बड़ी आसानी से खूबसूरत शब्दों में बयां किया है जो सोचने को मजबूर करता है और इन सबके बीच इश्क़ का तड़का लगता रहा है l इस तरह पूरी किताब पाठक को पूरी तरह से बांधे रखती है l आखिरी पन्नो में" शादी शादी" से अभी युवाओं की बेवक्त बुलायी समस्या भी लिख ही डाली है और बीच बीच नवाबों और जमीदारों के कहानी, किस्से बखूबी गढ़े गए हैं l

कुल मिलाकर ये युवाओं से बुजुर्गों तक सभी वर्गों और धर्मों के पढ़ने लायक किताब है, यहां बुजुर्ग पढ़ते हुए इससे अपने वक़्त को याद करेंगे तो युवा वर्ग कहेगा कि "Yes it's happening". सभी को इसे पढ़ना चाहिए और उसके बाद संभाल कर  बुक सेल्फ में रख देना चाहिए ताकि वक्त मिलने पर फिर पढ़ सकें क्यू कि ये कभी भी बासी और उबाऊ नहीं लगेगी l

Sunday, June 24, 2018

ट्विटर की अपील से तीन भारतीय दोहा कतर ambassy की मदद से मुक्‍त हुए


11 मई  2018 को शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान के डाइरेक्टर  रीटा शर्मा को सूचना मिली कि मोहम्मद शाहिद नाम का व्यक्ति Qutar दोहा में शेख नसीर के यहां रसोइया की नौकरी के लिए गया था लेकिन कुछ ही दिन बाद उसने अपने पत्नी को बताया कि वो शेख उसे मारता, पीटता है और खाना नहीं देता, साथ ही उसने जो Vedio भेजी उससे पता चलता है कि वो मज़दूरी का काम कर रहा था l इस संबंध में मोहम्मद शाहिद की पत्नी ने embassy दोहा सहित सभी जगह लेटर भेजकर मदद मांगी और कोई जवाब न मिलने पर बहुत मायूस हो गयी तभी किसी से बात करने पर उन्होने संस्था तक पहुंचायी और उसके बाद शाहिद के परिवार की परेशानी सोशल मीडिया पर अपडेट की गयी , साथ ही दोहा ambassy और सुषमा स्वराज जी, मोदी जी के साथ कई जिम्मेदार लोगों को ट्वीट और मेल किया l


इसके बाद सोशल मीडिया से ही कुछ दोस्तों ने मुहिम आगे बढ़ायी l जिसमें Sujeet Gupta दोहा Qutar  embassy से लगातार coordinate करते रहे और साथ Manoj Nishad जी, ओम सोनी जी ट्वीट और retweet करते रहे l

और 14 मई को embassy Doha ने जवाब दिया कि उन्होनें उक्त व्यक्ति शाहिद के साथ मौजूद दो और इंडियन्स को मुक्त करा लिया है और कानूनी कार्रवाई के बाद वो इंडिया भेजेंगे l





 07 जून को embassy से जवाब आया कि सभी कार्यवाही पूरी कर ली गयी है और 15 जून तक शाहिद सहित दोनों भारतीय भारत आ जाएंगे और ये खबर मिलते ही उक्त परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी और पवित्र रमजान और आने वाली ईद की खुशी दोगुनी हो गई सबके लिए l



साथ ही 13 जून को उक्‍त परिवार द्वारा संस्था को बताया गया कि सभी लोग सुरक्षित वापस आ गए हैं l
संस्था द्वारा बताया गया कि पहली बार कोई मामला संस्था द्वारा ट्विटर और मेल, फोन के माध्यम से पूरी तरह हल कर लिया गया जो कि अत्यंत खुशी की बात है l

Sunday, January 28, 2018

बेरोजगारी का विकराल रूप.. हिंसक भीड़तंत्र


बस एक ग्रुप बनाकर कानून को अपने हाथ में लेकर न्याय लेने और देने का जो भयंकर रूप सामने आ रहा है वो सामाजिक विघटन का परिचायक है l अभी हाल में ही चंदन गुप्ता की हिंसा में गोली से मौत और मुहम्मद अकरम का गंभीर रूप से घायल होना तथा पिछले दिनों शंभू रेगर द्वारा एक मुस्लिम मज़दूर  की निर्मम हत्या और फिर उसकी Vedio बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देना, अपने बचाव में तर्क देना और हत्या को सही ठहराना ये बताना ये जाहिर करता है कि हम कानून में आस्था नहीं रखते और हर मुद्दों पर अपनी मर्जी से खुद ही न्याय कर लेंगे l कासगंज की घटना में भीड़ का उग्र होना और एक दूसरे पर वार करना कई बात सोचने पर मजबूर करता है जैसे कि तिरंगा यात्रा और झंडा रोहण के बीच पत्थर और गोली बम कहां से आ गए और इसके भनक इन लोगों या आसपास के लोगों को क्यू नहीं लगी और गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस की सुरक्षा क्यू नहीं थी? दूसरी तरफ देखे तो बांग्लादेशी की हत्या के बाद उसकी Vedio इतनी वायरल कैसे हुई? क्या वो इतना चर्चित था और क्या वो ऐसा आदर्शवादी व्यक्ति था? कि जिसके समर्थन में लोग हाई कोर्ट में भी बवाल करने से पीछे न हटे?
इससे एक बात तो साफ नज़र आती है कि हमारे तंत्र में कुछ लोग हर मौके को भुनाने, उसे जाति का रंग देने और दंगा करने मे माहिर हैं और मौके की तलाश में रहते हैंl


एक छोटी सी बात पर बहस और फिर एक दूसरे के खून के प्यासे होना क्या एक वाकई प्रजातंत्र की निशानी है और माहौल बिगड़ता देखकर आखिर कोई उसे संभालने की कोशिश क्यू नहीं करता? ना बड़े बुजुर्ग और न ही पुलिस.. तिरंगा यात्रा और ध्वजा रोहण के बीच गोलीबारी कैसे और क्यों हुई इस पर सख्त छानबीन और कार्यवाही होनी चाहिए वही शंभू रेगर के केस में जब असलियत सामने आयी है तो वो जलालत भरी थी .. शंभू की Vedio को वायरल करने वाले, उसकी जयकार करने वाले, उसके अकाउंट में पैसा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई तुरंत होनी चाहिए वरना ये सामाजिक जहर एक एक करके पूरी व्यवस्था को लील जाएगा l पिछले साल की ही बात है कि शक के आधार पर अखलाक की हत्या करना कौन से कानून में आता है? अगर ये बात सच थी भी तो किसी की हत्या का अधिकार क्या हमें है? हम कुछ गलत देखने पर पुलिस को रिपोर्ट क्यू नहीं करते? शायद हमारा विश्वास नहीं है कुछ लोगों के ले देकर कानून का उल्लंघन करने के चलते l इस पर एक व्यापक चर्चा और जागरुकता हर पुलिस अधिकारी को अपने स्तर पर करनी चाहिए ताकि जनता दंगाइयों से न जुड़ कर कानून के साथ खड़ी हो और भीड़तंत्र द्वारा हो हिंसक हमले पर रोक लग सके l


समाज की एक बड़ी समस्या बेरोजगारी और उसका फायदा कुछ लोगों द्वारा उठाकर तरह तरह के संगठन बनाकर उल जुलूल मांग और हिंसा करना बेहद ही शर्मनाक है.. लेकिन इसमें एक सोचने लायक बात यह भी है कि सड़को पर हिंसा करने वाले, बस पर पत्थर फेंकने और आगजनी करने वाले ये लोग कहां से आ रहे हैं और इनको संचालित कौन कर रहा है?  ये ठीक कश्मीर के पत्थर बाज़ो की तरह एक भटके हुए बेरोजगार युवा है जिन्हें कुछ पैसे और प्रसिद्धि के लालच में तैयार किया जाता है, बिना ये सोचे कि आगे इनका भविष्‍य क्या होगा?
अब तो ये एक फ़ैशन सा चल पड़ा है.. एक थोड़ा पढ़ा लिखा और बोलने में माहिर व्यक्ति नेता बन एक संगठन बनाता है उसमें लालच देकर बेरोजगार युवा को शामिल करता है.. फिर जगह जगह उपद्रव और आगजनी के बाद News channel में प्रमुखता से दिखाया जाता है और कुछ ही दिनों में हीरो बनकर चैनल के स्टूडियो में बैठ कर अपने संघठन पर विस्तार से चर्चा कर अपने को advertise करता है और फिर असामाजिक तत्वों से पैसे मिलना शुरू होता है और कुछ ही दिनों में सड़क पर धूल फाकने वाला व्यक्ति एक luxury जीवन जीने लगता है और देर सवेर राजनीति की ओर रुख कर लेता है l हम अपने आसपास नज़र घुमा कर देखे तो ऐसे अनगिनत मामले मिल जाएंगे l
 ये समाज के लिए अत्यंत घातक ज़हर है l प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी ऐसे अपराधिक और उपद्रवी व्यक्तियों के बुलाने पर प्रतिबंध लगाया जाए जिस पर कोई अपराधिक मुकदमा या हिंसा के आरोप हो l बात तो राजनीति में भी अपराधिक व्यक्तियों के चुनाव न लड़ने की हो रही थी मगर अभी उससे मुद्दा भीड़तंत्र का उभर कर आ रहा है l हिंसा करने, कराने और सोशल मीडिया पर उसे फैलाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था की जाए l सोशल मीडिया या समाज में हो रहे ऐसे भड़काववादी गतिविधियों की रिपोर्ट करने वालों का मनोबल बढ़ाया जाए ताकि हम निश्चित होकर पुलिस को इत्तिला कर सके क्यूकि कई बार हम डर से भी अपनी आंखे बंद किए रहते हैंl