आज जब सुनिधि सज धज के करवा चौथ की पूजा के लिए तैयार हुई तो उसकी मां (सास) ने देखकर झट बलाए ली और सदा सुहागवती और खुश रहने का आशीर्वाद दिया.. ये वही माँ थी जो पहले उसे बिल्कुल पसंद न करती थी... जब सुहास ने उसे कोर्ट में शादी की और घर लाया तो माँ ने उसे खूब कोसा था कि उसने उनके बेटे को बहला फुसला कर शादी की है.. वो जब तब कुछ न कुछ कहती सुनती रहती.. लेकिन सुनिधि कुछ न बोलती.. एक दिन मां कुछ काम कर रही थी कि अचानक से गिर पड़ी.. सुनिधि ने दौड़ कर किसी तरह उन्हें बेड पर लिटाया.. वो बेहोश थी तो सुहास को फोन किया और झटपट गाड़ी निकल कर पड़ोस की आंटी की मदद से अस्पताल ले गयी, वही सुहास भी आ गया.. l डॉक्टर ने बताया कि मां जी की दोनों किडनी खराब हो चुकी है और प्रत्यारोपण की जरूरत है.. इसके लिए वो किसी को तैयार करे जो स्वस्थ्य हो और किडनी देने को तैयार हो l
सुहास को कुछ स्वास्थ्य की दिक्कत रहती थी इसलिए वो तो दे नहीं सकता था, डॉक्टर की बात सुनकर चुप हो गया तभी पास खड़ी सुनिधि बोल पड़ी कि वो किडनी देने को तैयार है.. डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी करें.. सुहास ने उसे कृतज्ञता भरी आँखों से देखा.. वो कुछ बोल भी नहीं पा रहा था क्यू कि उसने अपनी मां का सुनिधि के प्रति खराब व्यवहार देखा था... l
अगले दिन ही सुनिधि की किडनी माँ को ट्रांसप्लाट कर दी गई और एक हफ्ते बाद दोनों अस्पताल से घर आ गयी.. सुनिधि तो स्वस्थ्य थी मगर माँ को अभी आराम करना था l एक महीने सुनिधि ने मां का पूरा ख्याल रखा.. अचानक एक दिन मां ने उसे अपने पास बुलाया और अपने बुरे व्यवहार के लिए माफी मांगते हुए पूछा कि - "इतने बुरे व्यवहार के बाद भी उसने क्यू किडनी दी?" सुनिधि ने मां का हाथ पकड़ते हुए कहा कि "आप मेरी माँ है तो अपने फर्ज से भला कैसे पीछे हटती?"
तबसे आज तक जब भी वो तैयार होकर निकलती है तो माँ उससे ऐसे ही बलाए लेकर आशीर्वाद देती है और खूब प्यार करती है.. उनको अब सुनिधि न तो परायी नज़र आती है और न ही बेटे को छीनते हुए दिखती है l
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