Saturday, September 1, 2018

आइए, सायबर संसार में तैर रहे शब्द NOTA के बारें में कुछ जानते हैं


नोटा क्या है और कब चलन में आया?

 'नोटा' (None of the above) विकल्‍प का विचार सर्व प्रथम 1976 में हुआ जब इस्ला विस्टा नगर सलाहकार परिषद ने संयुक्त राज्य अमेरिका में सांता बारबरा, कैलिफोर्निया के काउंटी में आधिकारिक चुनावी मतपत्र में इस विकल्प को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। वाल्टर विल्सन और मैथ्यू लैंडी स्टीन, तब परिषद के मंत्रियों ने चुनाव के लिए मतपत्र प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने के लिए एक कानूनी प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 1978 में, नेवादा राज्य द्वारा मतपत्र में पहली बार 'उपर्युक्त में से कोई नहीं' (NOTA) विकल्प पेश किया गया था।

भारत में People's Union for Civil Liberties (PUCL) द्वारा एक याचिका दायर की गई थी और उसकी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि "हम चुनाव आयोग को मतपत्रों / ईवीएम में आवश्यक प्रावधान प्रदान करने के लिए निर्देशित करते हैं और ईवीएम में" उपरोक्त में से कोई भी नहीं "(NOTA) नामक एक अन्य बटन प्रदान किया जा सकता है ताकि मतदाता, जो भी उम्मीदवार के लिए मतदान न करने का फैसला करते हैं, वे गोपनीयता के अधिकार को बनाए रखते हुए वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग करने में सक्षम हैं।
 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश देने पर नोटा ईवीएम पर उपलब्ध कराया गया और इस चिन्ह का डिज़ाइन "नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन" अहमदाबाद द्वारा तैयार किया गया l इसे ईवीएम मशीन और बैलेट पेपर में सबसे अंतिम में शामिल किया गया l इस आदेश के बाद भारत नकारात्मक मतदान का विकल्प उपलब्ध कराने वाला विश्व का एक और देश बन गया।



भारत के अलावा और कौन से देश में नोटा मान्य हैं?

कोलंबिया, यूक्रेन, ब्राजील, बांग्लादेश, फिनलैंड, स्पेन, स्वीडन, चिली, फ्रांस, बेल्जियम और ग्रीस अपने मतदाताओं को नोटा वोट डालने की अनुमति देते हैं। अमेरिका इसे कुछ मामलों में भी अनुमति देता है।



नोटा का प्रयोग भारत में कब हुआ?

2013 में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नोटा को उपलब्ध कराया गया l इससे पहले अगर कोई वोटर किसी उम्मीदवार को अपना वोट नहीं देना चाहता था, तो उसे अलग से एक फॉर्म भरना होता था और अपनी पहचान बतानी होती थी। वहीं, अब ईवीएम में 'नोटा' विकल्प होने से पहचान भी जाहिर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।



नोटा को चुनने पर अगर ज्यादा वोट नोटा को ही मिले हो तो उस संबंध में क्या होगा?

अगर उपलब्ध प्रत्याशियों से ज्यादा वोट नोटा को मिले हो तो दोबारा इलेक्शन होने जैसा या अन्य कोई भी प्रावधान नहीं है l
नोटा को छोड़कर जिस भी प्रत्याशी को ज्यादा वोट मिले होंगे उसे ही विजय घोषित किया जाएगा परंतु इससे जनता को उम्मीदवार को नकारने का हक मिल गया और साथ ही राजनीतिक दलों पर भी अच्छे उम्मीदवार देने का प्रेशर पड़ता है l नोटा का उदेश्य राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों के रूप में उम्मीदवारों को स्वच्छ पृष्ठभूमि के साथ पेश करने के लिए मजबूर करना था हालाकि इतने समय इस विकल्प का कोई खास असर पड़ता दिख नहीं रहा है l




Source  - इंटरनेट

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