कल श्याम को लौटते हुए काफी रात हो गईं थी, लगभग बारह से ऊपर हो रहा था और वो बाइक से था। सुनसान सड़के, लंबे लंबे युकलिपटिस के पेड़, चारों तरफ फैले उसके सूखे पत्ते। कोई गिलहरी भी उस पर गुजरती तो बड़े ज़ोर की आवाज आती और वो बाइक की स्पीड और बढ़ा लेता। बस ऊपर वाले से दुआ कर रहा था कि जल्दी से ये जंगल खत्म हो और मन ही मन प्रण भी कर रहा था कि आगे से शाम होने के बाद कभी इधर से नहीं निकलेगा।
सोचते सोचते, डरते डरते बाइक चला ही रहा था तभी अचानक से उसके बाइक के आगे एक बूढ़ा व्यक्ति ने हाथ दे कर रोकने के लिए इशारा किया वो, खुले खुले बड़े बड़े बाल, लुंगी पहले हुए था , किसी गांव देहात का लग रहा था। इतनी रात अचानक बीच जंगल में कोई बूढ़ा कैसे आ जायेगा, ये सोच कर श्याम ने बाइक और तेज कर ली। तभी अचानक से दूर खड़ा हुआ बूढ़ा उसके बाइक के आगे आ गया और बाइक खुद ही बंद हों गई।
बूढ़ा व्यक्ति –" क्या शहरी बाबू एक बूढ़े गरीब आदमी को जंगल पार भी नहीं छोड़ सकते हो क्या "
श्याम –"नही, नही, ऐसा नही है, मैं बस थोड़ा जल्दी में था"
तभी लपक कर बूढ़ा आदमी उसके बाइक पर बैठ गया और कहा कि चलो शहरी बाबू....
श्याम ने बाइक स्टार्ट की तो ऐसा लगा कि बाइक पर उसने कुछ बहुत भारी सामान रख लिया है, बहुत वजन है... जबकि बूढ़ा दुबला पतला ही था।
रास्ते भर वो बजरंगबली हनुमान का नाम लेता रहा और अपने प्राणों की दुहाई देता रहा।
जैसे ही जंगल पार हुआ उसने बाइक रोक दी और कहा, उतरिए बाबा... जंगल खत्म हो गया.... दो तीन बार बोला तो कोई जवाब न पाकर उसने पीछे मुडकर देखा तो एक बहुत सुंदर सी ल़डकी बैठी हुईं थीं बाइक पर...
उसने डर के मारे इतनी ज़ोर से चीख मारा कि बाइक समेत दोनों लोग नीचे गिर पड़े....
क्रमश:
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