Tuesday, January 14, 2025

लॉस एंजिल्स में लगी आग: हादसा या साजिश?

लॉस एंजिल्स में लगी आग: हादसा या साजिश?

अमेरिका (United States Of America) के कैलिफोर्निया (California) राज्य का लॉस एंजेलिस (Los Angeles) शहर में इस समय आग फैली हुई है, जिससे हर तरफ़ हाहाकार मचा हुआ है । शहर में कई अमीर लोग तो अपने घरों को बचाने के लिए प्राइवेट फायरब्रिगेड सर्विसेज़ पर हर घंटे करीब 1.7 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं। पिछले 7 दिनों से शहर धधक रहा है, लेकिन अभी भी आग पर काबू पाने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार तक लॉस एंजिलिस में करीब 38,629 एकड़ इलाका जल चुका था। यह लगभग 60 वर्ग मील के बराबर है। परेश शहर 40 वर्ग मील में फैला है। जिसका मतलब है कि आग ने पेरिस से भी ज्यादा बड़े इलाके को जला दिया है। अब तक 12,300 से ज्यादा इमारतें जल गई 
हैं। शुक्रवार को एक रिपोर्ट में, मूडीज ने भी निष्कर्ष निकाला कि यह आग अमेरिकी इतिहास की सबसे महंगी साबित होगी, खासकर इसलिए क्योंकि इसने घनी आबादी वाले क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जहां उच्च-मूल्य वाली संपत्तियां हैं। हालांकि राज्य में बड़ी जंगली आगों से आमतौर पर निपटा जाता है, ये आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में होती हैं, जहां जनसंख्या कम होती है।
लेकिन इस बार स्थिति अलग है, क्योंकि एक बड़ी आग ने पैसिफिक पलिसेड्स और मालिबू जैसे क्षेत्रों में हजारों संपत्तियां नष्ट कर दीं, जो कई हॉलीवुड सितारों और करोड़पति व्यापारियों के घर हैं। पहले ही कई हॉलीवुड सेलिब्रिटीज अपनी संपत्तियां खो चुके हैं, जिसमें पेरिस हिल्टन, बिली क्रिस्टल, ऐडम ब्रूडी, जेम्स वुड्स, एंथनी हॉपकिंस, जॉन गुडमैन, मैंडी मूरे आदि शामिल हैं। इसके अलावा स्टीवन स्पीलबर्ग, डायने कीटन और बेन एफलेक जैसी हस्तियों को अपने घर छोड़कर जाना पड़ा।
AccuWeather द्वारा किए गए एक प्रारंभिक अनुमान में कहा गया है कि अब तक हुए नुकसान और आर्थिक हानि का आंकड़ा 135 बिलियन डॉलर से 150 डॉलर के बीच हो सकता है। तुलना के लिए, AccuWeather ने पिछले साल आए तूफान ‘हेलेन’ के दौरान हुए नुकसान और आर्थिक हानि का अनुमान 225 बिलियन डॉलर से 250 बिलियन डॉलर के बीच लगाया था, जो छह दक्षिण-पूर्वी राज्यों से होकर गुजरा था।

क्या वजह है आग लगने की?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक इस आग की वजह से अब तक कम से कम 16 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 37,000 हेक्टेयर पूरी तरह खाक हो चुका है।

कैसे लगी इतनी भयंकर आग?
लॉस एंजेलिस और कैलिफोर्निया में जंगलों में आग लगने की घटना कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ दशकों में, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते शहरीकरण, और मानव गतिविधियों में बढ़ोतरी के कारण ऐसी घटनाओं की संख्या और तेजी से बढ़ी है। लॉस एंजेलिस प्रशासन और मौसम विभाग ने आग लगने से पहले तेज हवाओं और शुष्क मौसम के बारे में चेतावनी जारी की थी। हालांकि, इतनी भयावह आग की संभावना को सही तरीके से आंका नहीं गया। नेशनल वेदर सर्विस (NWS) ने पहले ही आग की संभावनाओं पर अलर्ट जारी किया था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, आग लगने के संभावित कारणों की जांच जारी है। लॉस एंजेलिस काउंटी के शेरिफ रॉबर्ट लूना ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि आग लगने की हर संभावित कारण को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने मीडिया से कहा है, “जलवायु परिवर्तन, जिसमें बढ़ती गर्मी, लंबा सूखा और शुष्क वातावरण का प्रभाव शामिल है, पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में जंगली आग के जोखिम और विस्तार को बढ़ाने में एक प्रमुख कारण रहा है।”
दक्षिणी कैलिफोर्निया में आग का मौसम सामान्यतः मई से अक्टूबर तक माना जाता है, लेकिन वहां के गवर्नर ने बताया कि आग अब यहां एक स्थायी समस्या बन गई है। उन्होंने कहा था, “यहां कोई आग लगने का मौसम नहीं है, बल्कि यह यह आग लगने का साल है।”


क्या है पिंक फ्लेम?
लॉस एंजिलिस में आग बुझाने के लिए पिंक फ्लेम का उपयोग किया जा रहा है। दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डैनियल मैककरी ने बताया कि पिंक फ्लेम आम तौर पर पानी, अमोनियम फॉस्फेट और आयरन ऑक्साइड का मिश्रण है। लॉस एंजिलिस की वन सेवा का कहना है कि पिंक फ्लेम से आग को ऑक्सीजन नहीं मिलती है। यह वनस्पति और अन्य सतहों को ठंडा करके जलने की दर को धीमा करते हैं। अग्निरोधी पदार्थ की आपूर्ति करने वाली कंपनी पेरीमीटर का कहना है कि फॉस्फेट पौधों में सेल्यूलोज को कम कर देता है और उन्हें गैर-ज्वलनशील बनाता है। इसका रंग इसलिए गुलाबी है ताकि दमकल कर्मियों को यह पता चल सके कि इसका कहां-कहां उपयोग हो चुका है। 
हादसा या साजिश 
इस आग से हुए विनाश को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जो वाकई गंभीर हैं। ऐसे में मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि लॉस एंजेलिस में लगी आग एक हादसा है या साजिश? हालांकि आग जिस तरह से लगी और इससे जो नुकसान हो रहा है, उसने कई तरह की साजिशों और संदेहों को जन्म दिया है।
क्या जानबूझकर लगाई गई आग?
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी का तेज़ी से प्रसार हुआ है । लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या आग का यह पैटर्न जानबूझकर उत्पन्न किया गया है ताकि महंगे प्रॉपर्टी क्षेत्रों को खाली किया जा सके और भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए उन्हें इस्तेमाल किया जा सके। हॉलीवुड स्टार मेल गिब्सन ने सवाल उठाए है। हॉलीवुड स्टार मेल गिब्सन (Mel Gibson) ने भी लॉस एंजेलिस में आग लगने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपनी संपत्ति के जलने के बाद यह माना कि इस बात की पूरी संभावना है कि आग जानबूझकर लगाई गई हो सकती है। उनका कहना है कि इस दौरान पानी की अनुपलब्धता एक अन्य संकेत हो सकता है कि आग को नियंत्रित करने में कुछ गड़बड़ी हुई है।

Sunday, January 12, 2025

ईमानदार पत्रकारिता ने ले ली जान

CRPH जवानों को माओवादियों से छुड़ाने वाले बीजापुर तेजतर्रार पत्रकार मुकेश चंद्राकर बीते एक जनवरी की रात से लापता हो गए और मोबाइल भी बंद आ रहा था, इस पर परिवार वालों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर अपने न्यूज चैनल चलाने के साथ साथ NDTV , बंसल न्यूज , News18 आदि के लिए खबरें लिखा करते थे। 28 वर्षीय पत्रकार जब एक जनवरी से लापता हुए तो परिवार की सूचना पर उनका मोबाइल सर्विलांस पर डाला गया तो उनकी लास्ट लोकेशन ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के घर के पास मिली और छानबीन में पत्रकार का शव सैप्टिक टैंक में चुना हुआ मिला, उन्हें मारकर उनका शव सैप्टिक टैंक में सीमेंट से जड़ दिया गया था ताकि किसी को भनक भी न लगे। शव की बरामदगी हो चुकी हैं, पत्रकार समाज में रोष व्याप्त है और ठेकेदार का पूरा परिवार गायब हैं। बताते चले कि बीते दिनों पत्रकार मुकेश ने सड़क निर्माण भ्रष्टाचार के खिलाफ एनडीटीवी के लिए 24 दिसंबर को खबर की थी जिसका निर्माण ठेकेदार सुरेश चंद्राकर कर रहे थे। इस रिपोर्ट के छपने के बाद जगदलपुर लोक निर्माण विभाग ने एक जांच कमिटी गठित की थी। इस रिपोर्ट में बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा का भी बयान छापा गया था। कलेक्टर ने PWD को गुणवत्तापूर्ण काम करने का आदेश दिया था। आरोप है कि सड़क जिसकी लागत 56 करोड़ लगभग थी वह काम 120 करोड़ का दिखाया गया है.।


भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पत्रकारों की हत्याएं 

भ्रष्टाचार उजागर करने या स्थानीय स्तर पर पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की हत्या की सूची लगातार बड़ी होती जा रही है.
• मुकेश की तरह पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की भी हत्या कर दी गई थी, जिनकी हत्या के दोषी राम रहीम जेल में सज़ा काट रहे हैं. उनकी हत्या के 17 साल बाद उन्हें इंसाफ़ मिल पाया था. 
• मध्य प्रदेश में 35 साल के पत्रकार संदीप शर्मा की हत्या रेत माफियाओं ने की थी. उन पर डंपर ट्रक चढ़ा दिया गया था. 
• उत्तर प्रदेश में शुभम मणि त्रिपाठी की हत्या भी रेत माफ़िया ने की. उन्होंने तो पहले ही फ़ेसबुक पोस्ट लिख कर अपनी जान को ख़तरा बताया था. 
• इसी तरह, बिहार के सुभाष कुमार महतो की भी हत्या गोली मारकर बेगूसराय जिले के साखो गांव में उनके घर के पास कर दी गई, क्योंकि उन्होंने इलाके में स्थानीय गिरोहों पर रिपोर्टिंग की थी. 
• महाराष्ट्र के पत्रकार शशिकांत वारिश की हत्या भी क्रूरता से की गयी थी. रत्नागिरी में सेंट्रल रिफाइनरी परियोजना के खिलाफ वह प्रदर्शन कर रहे थे, तभी उन पर गाड़ी चढ़ा दी गई थी.


लेखक रीता शर्मा 
सोर्स इन्टरनेट