CRPH जवानों को माओवादियों से छुड़ाने वाले बीजापुर तेजतर्रार पत्रकार मुकेश चंद्राकर बीते एक जनवरी की रात से लापता हो गए और मोबाइल भी बंद आ रहा था, इस पर परिवार वालों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर अपने न्यूज चैनल चलाने के साथ साथ NDTV , बंसल न्यूज , News18 आदि के लिए खबरें लिखा करते थे। 28 वर्षीय पत्रकार जब एक जनवरी से लापता हुए तो परिवार की सूचना पर उनका मोबाइल सर्विलांस पर डाला गया तो उनकी लास्ट लोकेशन ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के घर के पास मिली और छानबीन में पत्रकार का शव सैप्टिक टैंक में चुना हुआ मिला, उन्हें मारकर उनका शव सैप्टिक टैंक में सीमेंट से जड़ दिया गया था ताकि किसी को भनक भी न लगे। शव की बरामदगी हो चुकी हैं, पत्रकार समाज में रोष व्याप्त है और ठेकेदार का पूरा परिवार गायब हैं। बताते चले कि बीते दिनों पत्रकार मुकेश ने सड़क निर्माण भ्रष्टाचार के खिलाफ एनडीटीवी के लिए 24 दिसंबर को खबर की थी जिसका निर्माण ठेकेदार सुरेश चंद्राकर कर रहे थे। इस रिपोर्ट के छपने के बाद जगदलपुर लोक निर्माण विभाग ने एक जांच कमिटी गठित की थी। इस रिपोर्ट में बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा का भी बयान छापा गया था। कलेक्टर ने PWD को गुणवत्तापूर्ण काम करने का आदेश दिया था। आरोप है कि सड़क जिसकी लागत 56 करोड़ लगभग थी वह काम 120 करोड़ का दिखाया गया है.।
भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पत्रकारों की हत्याएं
भ्रष्टाचार उजागर करने या स्थानीय स्तर पर पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की हत्या की सूची लगातार बड़ी होती जा रही है.
• मुकेश की तरह पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की भी हत्या कर दी गई थी, जिनकी हत्या के दोषी राम रहीम जेल में सज़ा काट रहे हैं. उनकी हत्या के 17 साल बाद उन्हें इंसाफ़ मिल पाया था.
• मध्य प्रदेश में 35 साल के पत्रकार संदीप शर्मा की हत्या रेत माफियाओं ने की थी. उन पर डंपर ट्रक चढ़ा दिया गया था.
• उत्तर प्रदेश में शुभम मणि त्रिपाठी की हत्या भी रेत माफ़िया ने की. उन्होंने तो पहले ही फ़ेसबुक पोस्ट लिख कर अपनी जान को ख़तरा बताया था.
• इसी तरह, बिहार के सुभाष कुमार महतो की भी हत्या गोली मारकर बेगूसराय जिले के साखो गांव में उनके घर के पास कर दी गई, क्योंकि उन्होंने इलाके में स्थानीय गिरोहों पर रिपोर्टिंग की थी.
• महाराष्ट्र के पत्रकार शशिकांत वारिश की हत्या भी क्रूरता से की गयी थी. रत्नागिरी में सेंट्रल रिफाइनरी परियोजना के खिलाफ वह प्रदर्शन कर रहे थे, तभी उन पर गाड़ी चढ़ा दी गई थी.
लेखक रीता शर्मा
सोर्स इन्टरनेट
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