Monday, November 9, 2020

एक स्वतंत्रता संग्राम की फिर जरूरत है

स्त्री स्वतंत्रता/ सुरक्षा के लिए..
फिर से एक स्वतंत्रता आन्दोलन की जरूरत है..
फिर से एक भगत सिंह को आना होगा..
फिर से एक सुभाष चंद्र बोस को आना होगा..
लड़नी होगी हिंसक, अहिंसक दोनों ही लड़ाइयां
इस स्वतंत्रता संग्राम में दुश्मन अंग्रेज नहीं
बल्कि घर में छुपे हुए वो पुरुष वर्ग है,
जो मौका पाते ही स्त्री को लूटना चाहता है,
उसे नोचना चाहता है..
ये लोग बड़े शातिर है..
इन्हें पहचानना भी मुश्किल है..
ये सामने से वार नहीं करते हैं..
ये छुपकर किसी अकेली स्त्री का इंतजार कर रहे होते हैं ये आपके सामने बैठकर ही..
दिमाग में Rape के ख़यालात बना रहे होते हैं..
बस मौका मिलते ही टूट पड़ते हैं..
इनके खात्मे के लिए स्त्री को भगत सिंह बनना होगा..
सुभाष चंद्र बोस बनना होगा ..
करना होगा इनसे सामना..
रोकना होगा इन्हें..
चढ़ाना होगा इनको सूली पर..
ये लड़ाई घर से भी होगी और बाहर भी..
बनना होगा हर स्त्री को मजबूत..
भागने के बजाय सामना करना ही होगा
बलात्कारी मानसिकता से और..
इनसे आंख से आंख मिलाकर..
इन्हें इनकी गलती बतानी होगी..
इन्हें मजबूर करना होगा बदलने के लिए..
वर्ना हर दिन बेटियाँ ऐसे ही मरती रहेंगी..
और हम उनके कब्र पर फूल चढ़ाते रहेंगे...

रीटा शर्मा 

Friday, October 16, 2020

Rape घटना है या बिछाया हुआ जाल


1️⃣ - क्या अब भी आपको यही लगता है कि , बलात्कार मात्र छोटे कपड़े , वासना , बदले की भावना से होते हैं ?

2️⃣ - क्या अब भी आपको यही लगता है कि एक महिला का बलात्कार मात्र उसकी आबरू का विषय है ? उसके आसपास कोई काॅबवेब नहीं है?

1️⃣ -  क्या अब भी आपको यही लगता है कि , बलात्कार मात्र छोटे कपड़े , वासना , बदले की भावना से होते हैं ?

जवाब.... 1- सारे कारण है अलग अलग स्थिति में.. उदाहरण से समझते हैं दिल्ली की निर्भया का Rape वासना के साथ मानसिक विकृति थी, हाथरस की वज़ह दुश्मन दिख रही है, लोग कहते हैं कि छोटे कपड़े लेकिन छोटी कपड़े वालियाँ बहुत तेज होती और उन्हें छुना भी किसी के बस की बात नहीं है.. दिल्ली के माल, क्लब, जाती लड़कियां और फिल्म Actress छोटे कपड़े में विभिन्न मौके पर दिख जाएंगी लेकिन यही Actress जब ED के दफ्तर पूछताछ के लिए बुलायी गयी तो सूट में थी. तो ऐसे लोगों की फोटो देखकर आंख सेक कर दिमाग में नोचने के तरीके रखकर किसी लड़की का Rape किया जाता है. छोटे कपड़े से कहीं ज्यादा उत्तेजक चीजे वीडियो YouTube पर और अब Facebook के वीडियो Section में मिल जाएंगी.. जब Facebook के नयी सेटिंग तब अपने आप खुल जाती है जब आप अपनी या किसी और की वॉल पर जानकारी भरी वीडियो देख रहे होते. जैसे ही आपकी वीडियो खत्म होगी तो दूसरी नग्नता भरी वीडियो खुद ही स्टार्ट हो जाएगी. ऐसा एक बार मेरे साथ भी हुआ तो जो दूसरी वीडियो आयी थी उसमें दिखाया गया कि एक Plumber जब बुलाने पर घर जाता है तो पहले बेटी और फिर उसकी माँ बारी बारी से अलग अलग कमरे में ले जाकर सेक्स करती है और ऐसा करते हुए उनकी बहु देख लेती है तो फिर अगले दिन अपने bathroom को ठीक करने के बहाने वो भी बुला कर sex करने की planning करती है.. ये वही Facebook है जो कि आपराधिक और दर्द भरी वीडियो, फोटो को हिंसक दिखाकर पॉलिसी के तहत कवर करता है... तो फिर Rape करने के बहाने न खोज कर अपने गंदे दिमाग का इलाज कराना सीखे 

2️⃣ - क्या अब भी आपको यही लगता है कि एक महिला का बलात्कार मात्र उसकी आबरू का विषय है ? उसके आसपास कोई काॅबवेब नहीं है?

जवाब.... 2-.. ये सही है ये Rape में इज्जत का concept पुरुष समाज द्वारा फैलाया गया जाल ही है ऐसा हमेशा बताया गया है कि एक लड़की और उसके पूरे परिवार, खासकर बड़े भाइयों की इज्जत केवल लड़की की योनि में ही है और वो योनि केवल पति के हाथ में हो तो इज्जत बनी रहती है.

 ऐसा पुरुषों ने ही बनाया है लेकिन ये जिम्मा लड़की के हाथो में दिया गया है वो कैसे भी करें पर्दा करें, नकाब पहने, साड़ी लपेटे, सूट पहन ले खुद को घर में कैद रखे, आफिस में एकदम मुँह बनाकर रहे, किसी लड़के से हंसे बोले नहीं, लड़कों को दोस्त न बनाए, उनके साथ मूवी न देखे, रात को न जाए, लड़के से प्यार न करें.. इनमे से कुछ भी माहौल के हिसाब से पालन करके अपनी योनि सुरक्षित रखे क्यू कि बाप, भाई की इज्जत वही है.. लेकिन लड़कों को पूरा अधिकार है उन पर हमला कर Rape करने का.. लड़के का Rape करना, दस बीस लड़कियों के साथ Sex करना, दस बीस ल़डकियों को Girl फ्रेंड बना कर sex करना उनके दोस्तों के बीच गर्व का विषय होता है.. ये जाल ही बिछाया गया है मर्दों द्वारा.. क्यू कि अगर Sexual Part के साथ इज्जत जुड़ी होती तो लड़के का पेनिस भी इज्जत का विषय होना चाहिए था और अगर ये नियम बना दिया जाता तो लड़के अपने Sexual Part संभालते और लड़की अपना.. फिर Rape तो दूर असुरक्षित सेक्स, शादी से पहले सेक्स, शादी से पहले Pregnengy जैसी कोई भी समस्या होती ही नहीं और मार्केट में Unwanted Pill नहीं लाया जाता...
इससे इतना तो साफ हो गया कि ये सब पुरुषों द्वारा षडयंत्र स्वरुप रामायण, महाभारत काल से पहले ही ये सब गढ़ दिया गया था अलग अलग तरह के ग्रंथो, रचनाओं के माध्यम से सभी धर्मों में (केवल हिन्दू धर्म न समझे) धर्म के जानकार मेरी बात के हिसाब से बताये कि किस किताब में कहाँ कहाँ ऐसा वर्णन है और ध्यान दीजियेगा कि इसमे रचनाकार पुरुष ही होगा जो उस समय उस समाज उस धर्म में खूब पुज्य भी होगा.
लेकिन ऊपर लिखी गई बातों का ये मतलब नहीं है कि लड़की के इर्द-गिर्द Rape के साथ इज्जत न जोड़ा जाए तो उसे ज़बरदस्ती सेक्स, Rape पर तकलीफ नहीं होगी.. होगी और साथ ही इज्जत जाने की फिलिंग भी आएगी क्यू कि हम हमारे शरीर के मालिक होते हैं और हमारी मर्जी के खिलाफ कोई उसे छुए भी तो लंबे समय तक दर्द सताता है.. साथ ही आपके मन पर कोई चोट पहुचा दे तो लगता है कि हमारा मान सम्मान पर आंच आयी.. ये केवल लड़की के साथ नहीं है, पुरुष के साथ और यहां तक कि माननीय कोर्ट के साथ भी ऐसा एहसास जुड़ा हुआ है. सब को याद होगा कि सीनियर Advocate प्रशांत भूषण के ट्वीट भर से कोर्ट की प्रतिष्ठा को आंच पहुंचीं थी.. लड़कियों के साथ भी वही वाली इज्जत जुड़ी हुई है.. कोई उसकी योनि न भी छुएं , Rape न भी करें  तब भी उसकी इज्जत जा सकती है..इज्जत तो लड़कों की भी जा सकती है मगर उनका माइंड सेट ऐसा बनाया नहीं गया.. उनके साथ अगर लड़की ज़बर्दस्ती सेक्स कर भी ले तो उन्हें शिकायत नहीं होगी (अपवाद छोड़कर) क्यू कि न तो उनका प्राइवेट पार्ट उनकी इज्जत है और दूसरा उनका माइंड सेट ये भी है कि सेक्स केवल मजे की चीज़ है जितना मिले, जिससे मिले सब लेते जाओ.. इन पुरुषों का माइंड सेट इतना हाई लेवल का है कि ये कहते हैं कि "मर्द कभी बुढ़ा नहीं होता" और जब कोई ये कहे तो जरा उनके Facial Expression रीड करिये.. उतरते चढ़ते भाव बता रहे होंगे कि बोलते वक्त सेक्स की कल्पना कर चुके है.. जो जरूर किसी वीडियो या Movie के सीन जैसा होगा. 50-60 साल में खुद को 16 साल सा गबरू जवान मानकर अपनी बेटी बराबर लड़कियों को Girl Friend बनने का ऑफर देते हैं, सेक्स के ख्वाब सजोते है... इसके दो कारण उनके पास होते हैं एक तो खुद को जवान मान रहे हैं, दूसरा इज्जत आने जाने का ठेका उनके पास है नहीं.. और अगर ऐसी बाते खुलती हैं तो वो खुद और पूरा मर्दों का समाज लड़की को रंडी, बदचलन बोलेगा,उक्त पुरुष पर सवाल नहीं उठेगा. 

इतनी सारे जाल बिछाये जाने के बावजूद कानून ने लड़कियों की सुनी है और समाज के ये सारे षडयंत्र समझते हुए लड़की के हक में कानून बना दिए हैं... निर्भया केस के बाद बनी वर्मा कमेटी के सुझावों पर अमल करते हुए IPC में बदलाव करके उसी बहादुर बेटी को समर्पित करते हुए कानून बनाया गया है कि 20 Sec देखने भर को छेड़छाड़ और सेक्स की कोशिश में कोई Object Vagina को डालने भर को Rape मानकर Case दर्ज होगा..Rape तो काफी दूर की चीज़ हो गयी.. कानून के मजबूती का एहसास यूपी के हाथरस घटना से कर सकते हैं.. रिपोर्ट बदलने की कोशिश की गई, देर में मेडिकल कराया, ADG L & O खूब चिल्लाएं पागलों की तरह कि Rape नहीं हुआ है,लिखने वालों पर कार्रवाई करने की धमकी दी, खूब पुलिस के साथ गुंडों ने धमकी दी, बेटी का दाह संस्कार रात को आनन फानन में कर दिया कि दोबारा पोस्टमार्टम न हो...

फिर भी....

फिर भी...

ADG L & O से कोर्ट में पूछा गया कि आपको कैसे पता है कि Rape नहीं हुआ.. क्यू कि लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में Veginal एंजरी लिखी है और लड़की का बयान के आधार पर Rape / Gang Rape मानकर ही सुनवाई होगी..
अब हाथरस केस में Rape की सुनवाई में खुद CM, PM भी नहीं रोक सकते हैं.. देखिए जरा कि एक बेटी की मृत आत्मा में कितनी शक्ति है कि इतने बड़े बड़े पिशाच पूरा सिस्टम खुद की तरफ करके भी कुछ न कर पाए..

बस यही जाल जो बुना हुआ है उसे तोड़ना है हमे.. बात करनी है इस पर.. बेटियों सहित बेटों से भी खुलकर चर्चा करनी है.. उन्हें साफ साफ बता देना है कि कुछ भी करने पर कानूनन सजा मिलेगी कोई भी नहीं बचा सकता है फिर.. ये तो कहानी उस बेटी की शक्ति की जो चली गई लेकिन जिंदा रही बेटियों को भी उनकी शक्ति का एहसास कराए.. उन्हें आत्मविश्वास दे, बोलना सिखाए

सवाल - Aryavrat Tripathi 
जवाब -  रीटाशर्मा

Tuesday, October 13, 2020

पहचान ढूंढती स्त्री

स्त्रियों को कहीं चैन नहीं मिलता है. कभी मर्डर, कभी Rape, कभी खुद ही जलकर मरने की कोशिश करती हैं. पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों की जगह बनाई ही नहीं गयी. पुरुषों ने अपने सुविधा के अनुसार नियम बनाकर महिलाओं को मर्यादा जैसे शब्द में बांध दिया. स्त्रियों के लिए सभ्य, सुशील, संस्कारी जैसे शब्द गढ़ दिए गए और पुरुषों के आगे सलाम ठोकने वाली महिलाओं को ये उपाधियां दी जाने लगी. आदेश का पालन करते करते स्त्रियां इतनी अभ्यस्त हो चुकी है कि जो इन नियमों से बाहर जाने की कोशिश करता है उन्हें घर की स्त्रियां बदचलन बना देती है. बदचलन भी केवल स्त्रियां ही होती है. कई कई शादी करके, पांच दस अफेयर रखकर भी ये आदमी नाम की जाति Cool Dude कहलाती है. चाहे आज प्रजातंत्र की बात की जाए, चाहे धार्मिक युग की.. छली गई सीता, द्रौपदी भी थी और छली जा रही है आज की स्त्री भी. कोई अन्तर नहीं आया इतने लंबे समय में भी. एक और ग़ज़ब की बात है कि सीता को बचाया राम ने था और द्रौपदी को कृष्ण ने.. ये भी पुरुषों की ही साजिश रही है कि स्त्री कोमल, नाजुक, असमर्थ हैं तो उसे बचाने के लिए पुरुषों की ही गुहार लगानी है. वही माइंड सेट आज भी है कि एक स्त्री अपने हक, सुविधा, अधिकार, सुरक्षा के लिए हमेशा पुरुष की ओर ही देखती है.. घर से बाहर निकल कर कमाने की बात इसलिए की गई थी कि स्त्री आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर अपने हक की आवाज बुलंद करेगी. मगर स्त्री खुद मानसिकता को बदल ही न पायी वो अपने Workplace पर भी असुरक्षित बनी हुई है और चाहती है कि सुरक्षा उसे ऑफिस के पुरुष ही प्रदान करें. ऐसी गुलामी की मानसिकता जब तक खत्म नहीं होगी तब तक स्त्री अपराध, शोषण, हिंसा कम नहीं होगा. जिस तरह से जब कोई पुरुष तकलीफ में होता है तो वो अपने ही पुरुष मित्र से मदद मांग कर अपनी तकलीफ कम करता है तो वैसे एक स्त्री दूसरी स्त्री की मदद क्यू नहीं कर पाती है उसे परेशानी खत्म करने में. ये सब मंथन का विषय है और जब तक स्त्री इस पर खुद नहीं विचार नहीं करेगी.. पुरुष सत्ता की सोच से बाहर नहीं आयेंगी.. कोई भी नियम, कानून, कड़ी से कड़ी सजा भी अपराध/प्रताड़ना को नहीं रोक पाएगा.

आज लखनऊ में बीजेपी आफिस के सामने एक स्त्री ने खुद को आग के हवाले किया, उसे कुछ न कुछ गंभीर परेशानी रही होगी और इस सभ्य समाज में उसे घर से लेकर बाहर तक कोई सुनने, समझने वाला नहीं मिला.

Saturday, October 10, 2020

मानसिक स्वास्थ्यता जरूरी है



WHO के एक अनुमान के अनुसार, 2020 तक भारत की लगभग 20% आबादी किसी न किसी मानसिक रोग से ग्रस्त होगी.
मानसिक बीमारी शारीरिक बीमारियों की तरह दिखाई नहीं देती है तो लोग न तो इसके बारें में जानते हैं न ही इलाज कराते हैं. किसी भी तरह के व्यवहार में परिवर्तन पर कोई ध्यान नहीं देता और मनोवैज्ञानिक के पास जाने से भी कतराते है. इसकी वज़ह समाज में फैला एक मिथ ये भी है कि हमें कोई मनोचिकित्सक के पास जाता दिखता है तो हम उसे पागल समझते हैं.
किसी भी तरह की उलझन, परेशानी, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन हमारे व्यक्तित्व विकास में भी बाधक बनता है. आज कल की दौड़भाग भरी जिंदगी में अकेलापन भी मानसिक अस्वस्थ्यता एक बडा कारण है. पढ़ाई, नौकरी या कुछ बड़ा करने की चाहत में हम घर से बाहर जाते हैं और रोज रोज की भागमभाग में खुद पर ध्यान देना ही भूल जाते हैं. 
अगर समय से हम मनोचिकित्सक, सलाहकार के पास जाए तो ऐसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं
भारत में युवा आबादी का एक बड़ा वर्ग ऐसी छोटी छोटी मानसिक समस्याओं से जूझता है. कभी कैरियर, कभी कोई पारिवारिक समस्या और कभी ब्रेकअप हो जाने पर मानसिक समस्याओं के चपेट में आ जाती है. घरेलु महिलाए जो ज्यादा सामाजिक नहीं है, घर के बुजुर्ग भी मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाते हैं
हम क्या खा रहे हैं इससे हमारा शारीरिक स्वास्थ्य निर्धारित होता है और क्या सोच रहे हैं? किन किन विचारों के बीच हमारा रहना होता है? इससे मानसिक स्वास्थ्य तय होता है. अच्छे सकारात्मक विचार वालों के बीच रहने से हमारा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा हो सकता है. इसके साथ ही कई बार अचानक घटित हुई कोई घटना पर ज्यादा सोच विचार विचार करने लगते हैं इससे भी तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, उलझन होने लगती है और अगर बहुत समय ऐसा चलने लगे तो डिप्रेशन में आने लगते हैं.
 मानसिक समस्याएं अदृश्य किन्तु घातक होती है, ये व्यवहार में परिवर्तन लाने के साथ साथ कई बार उग्र भी बना देती है.. इससे निपटने के लिए हमें जागरूक होने की जरूरत है और जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक /काउंसलर की भी मदद लेने के लिए तैयार रहना चाहिए..
आइए आज अन्तर्राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वस्थ्य रहने के लिए कुछ जरूरी बातों पर गौर करते हैं... 


अच्छा सुने और अच्छा सोचे, सकारात्मक रहे..

अगर कुछ ऐसा घटित हो रहा है कि आप परेशान, बैचैन रहते हैं तो इसकी वज़ह ढूंढ कर उसे खत्म करें. जरूरत पड़ने पर परिवार, दोस्तों या मनोचिकित्सक की मदद ले.

 अच्छा और घर का पका हुआ खाना खाए. कहते भी हैं कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है. मौसमी सब्जी, फल खाने में शामिल करें. जंक फूड का सेवन एक तय सीमा में ही करें.

पर्याप्त नीद ले कम से कम 6 घंटे. जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डाले. 

मन को शांत रखने के लिए योग, ध्यान और व्यायाम करें. कुछ समय खुली हवा में प्रकृति के बीच रहे.

दिमागी खुराक के लिए कुछ गेम खेले या किताब पढ़े. कुछ समय अपने शौक को पूरा करने में भी दे.

उठो बेटियाँ

#यूपी
#महिलाअपराध
#रेपमर्डर 

आज राम भी शर्माता होगा
देख देख ये धरती का हाल
जहां स्त्री के सम्मान के लिए
उन्होंने सारी लंका जला दी
वही उनके नाम लेकर 
रावणों की एक लंका बस गयी
एक अपराधी को बचाने के लिए
सारी राम रूपी लंका एक हो गयी
दे दनादन लाठी डंडा, धक्का मुक्की
और चिल्लाना खेले उन्होंने सारे पैंतरे
हर रोज सीताओं की आवाज दबायी
दिन दहाड़े हैवानों ने बेटियों को नोच डाला
कभी जाति धर्म का दांव खेलकर
न्याय की सीमा परिभाषित की 
बेटियों का भी बटवारा दिया
लंका में रावण की बंदी सीता ने भी
 हनुमान से वार्ता की थी
लेकिन राम रूपी रावण राज्य में
शोषित बेटियों की परीक्षा होगी
अपराधी तो अट्टहास करेगा
बेटियों से सुबूत मांगेगा
.......................
फिर क्या कोई राम आएगा?
रावण को जो सबक सिखाएगा?
है बेटियाँ यही पूछती....
इस पर सीता द्रवित हो गयी..
बेटियों से फिर वो बोली..
सुनो बेटियों तुम खुद खड़ी हो
अब किसी की राह न तो..
पापियों से न डरों तुम
है तुम भी असीम शक्ति
बस उसका एहसास करो अब
कर दो उन लोगों का नाश
जिन्होंने स्त्रीत्व को संकट में डाला
बदलों अब स्त्रीत्व की परिभाषा को
जिसने गरिमा को संकट में डाला
कर दो उसका समूचा नाश ll

रीटा शर्मा

Friday, October 9, 2020

बदलाव


हमेशा से ही भारतीय समाज में कोई न कोई सामाजिक समस्या/बुराई /अंधविश्वास /सामाजिक कुरीतियां/अपराध रहा है और उसे खत्म करने के लिए उसी समाज के लोगों ने प्रयास किए है. वही स्थिति अब भी है, केवल एक दूसरे को कोसने से और ये कहने से कि ज़माना बहुत खराब है.. कुछ बदलाव नहीं होने वाला.
समाज में जो कुरीतियां विभिन्न धर्म/जातियों में प्रचलित है उसे खत्म करने के हमे प्रयास करने होंगे. युवा वर्ग को ही इसके लिए खड़ा होना होगा. ऐसी समस्याएं भी दो स्तर पर खत्म की जा सकती है एक तो सामाजिक पहल जिसके लिए विमर्श, जागरुकता फैलायी जाए और दूसरा कानूनी स्तर पर.. जब कोई हमें/आपको जबरन कुछ करने के लिए बाध्य कर रहा हो तो कानूनी सहायता ली जाए.
दोनों ही तरीकों पर जब तक पूरी तरह से अमल नहीं किया जाएगा बदलाव नहीं होने वाला. बदलाव करने के लिए कोई क्रांति नहीं करनी है, कोई प्रदर्शन नहीं करना है. बस प्रतिदिन अपने आसपास हो रही सभी अच्छे - बुरी चीजों पर नजर रखनी है और कुछ अनुचित दिखने पर टोक देना है.. अगर कोई नुकसान पहुंचाने वाला अपराध, कृत्य नहीं है तो बस टोकना ही पर्याप्त है. बस इसके लिए केवल आपको संवेदनशील होना है और "हमसे क्या मतलब है? " वाले एटीट्यूड को छोड़कर "हमे अपने समाज को बेहतर बनाना है" वाली सोच रखनी है. जब आपकी सोच बेहतरी के लिए बदलाव पर होगी तो बहुत आसान होगा कि आप किसी को अनुचित देखकर टोके.
जब हम किसी को ये बताते हैं कि जो ये आप कर रहे हैं वो गलत है तो पहला रिएक्शन हमें बुरा ही मिलेगा.. लेकिन बार बार कहने पर सामने वाले पर असर पड़ेगा और यही से बदलाव होने लगेगा.. मसलन आपने किसी एक को बोला और उसने समझ लिया तो वो दस और लोगों को बोलेगा.. इस तरह बदलाव की कड़ी जुड़ती जाएगी. 😃



इसे उदाहरण से समझ सकते हैं.. आप रोज शाम को वाॅक करने जा रहे हैं और आपको रास्ते में या पार्क में 15-17 साल के लड़कों का एक ग्रुप दिखता है जो केवल लड़कियों पर कमेन्ट करने के इरादे से खड़े होते हैं.. आपने उन्हें टोका तो शायद उन्हें बहुत बुरा लगेगा.. हो सकता है कि कुछ बहस भी करें.. ये नए जवान होते बच्चे है इन्हें तो अच्छे - बुरे की भी समझ नहीं होती है मगर आपको पता है कि अगर ऐसे ही इन्हें छूट मिलती रही तो आगे चलकर कुछ बड़ा अपराध भी कर सकते हैं तो अभी उन्हें रोकना उनके ही हित में है.. उन्हें टोकने से पहले आप अपने साथ दो चार और लोगों को ले ले तो बेहतर रहेगा.. कई बार बोलने पर ये बच्चे खुद ही ऐसी हरकते बंद कर देंगे और जैसे ही इनके दिमाग में ये आएगा कि ये कमेन्ट पास करना आपराधिक कृत्य है इस पर लगाम लगने लगेगा. ऐसे बातेँ होने की एक बहुत बड़ी वज़ह है कि हम बच्चों से अच्छे - बुरे चीजों पर बात नहीं करते. केवल महंगे स्कूल, कॉलेज में प्रवेश दिला देने से उनके व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास नहीं होगा.

दूसरा उदाहरण भी ले सकते हैं कि आपकी कॉलोनी, मोहल्ले में कुछ लोग सड़क पर कूड़ा डाल देते हैं, अपनी छत से फेक देते हैं.. आप देखते ही इन्हें मना करें. शुरू में एक दो दिन बुरा लगेगा फिर ऐसा करना बंद कर देंगे और आपका एरिया साफ, सुथरा, बीमारी मुक्त होगा.

Wednesday, September 9, 2020

कंगना की तरह बेटियों को मुखर होना चाहिए

पुरुष प्रधान प्राचीन भारतीय समाज में स्त्रियां हमेशा से चुप रही है. सही हो या गलत उन्हें बोलने का अधिकार दिया नहीं गया और खुद स्त्रियों ने कभी अपने अधिकार लेने भी नहीं चाहिए. इस तरह से उनके अधिकारों और इच्छाओं का दोहन होता रहा. बहुत कम ही और संभ्रांत परिवार में ही स्त्रियां शिक्षित होती थी, शिक्षा के अभाव के चलते भी वो जागरूक नहीं हो पायी.

अब जब कि बेटियां शिक्षित हो रही है.. घर से बाहर जाती है तो पुरुषों के बराबर का अधिकार भी हासिल करने की कोशिश करती हैं. समान अधिकार और समान रूप से काम करने के लिए कई बार कई जगह उन्हें खूब संघर्ष भी करना पड़ता है, क्यू कि भले ही स्त्रियां शिक्षित होकर घर से बाहर जा रही है लेकिन अब भी समाज में पुरुष वादी सोच ही चल रही है जो बिल्कुल भी नहीं चाहते कि कोई भी स्त्री काम में उनसे आगे निकल जाए, उनसे सवाल पूछे और कुछ गलत देख कर रोके. इस तरह के लोगों के सामने ऐसी स्थिति आए तो वो तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं उस स्त्री के चरित्र का हनन करके. अगर ऐसी ही स्थिति लाने वाला कोई पुरुष ही पुरुष के सामने होता है तो क्या उसे भी प्रतिक्रिया स्वरुप चरित्र हनन करते हैं? शायद नहीं...वज़ह भी साफ है कि पुरुष अपनी पहचान की वज़ह अपने काम से निर्धारित करता है, जब कि स्त्री कितना भी आगे क्यू न बढ़ जाए, कुछ भी हासिल कर ले मगर उसकी पहचान उसके चरित्र से होती है. अगर स्त्री शराब, सिगरेट, रात की पार्टी में जाए, छोटे कपड़े पहन ले तो वो "समाज घोषित चरित्रहीन " बन जाती है. जब कि पुरुष से आदिकाल से ही नशे का सेवन करता आया है (पहले शुद्ध भांग, घर में बनी शराब) और शायद इसे वो अपना मौलिक अधिकार भी मानता होगा...लड़की देखते ही फब्तियां कसना भी बहुत साधारण बात होती है उनके लिए...

 कंगना का शिव सेना से सवाल जवाब और उठा पटक पूरी तरह से स्त्री - पुरुष के पहचान की जंग लग रही है, मगर चर्चा में उसका चरित्र है... उसके पुराने फोटो शूट जिसमें उसने बिकनी पहना हुआ है और सिगरेट पीते हुए फोटो वायरल करके उसे चुप कराने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं.. बिकनी में फोटो शूट तो उसके काम का हिस्सा है और अगर ये शूट केवल Fun के लिए होता तब भी आप सवाल खड़े नहीं कर सकते हैं... संजय राउत की धमकी के बाद उसको Y सिक्युरिटी दिया जाना भी लोगों को बहुत अखर रहा है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.. शिव सेना के तौर तरीके सबको पता है और कंगना को मुंबई में परेशान किया जा सकता था इसलिए सुरक्षा दिया जाना एक सही कदम है.
इस पर बेहूदे सवाल न खड़े करिए..
"हमारे टैक्स के पैसे से सुरक्षा दी जा रही है तो क्या आपको लगता है कि अगर ये सुरक्षा नहीं दी जाती तो आपकी सैलरी बढ़ जाती?"
"कंगना का बीजेपी की तरफ झुकाव देखकर आप कंगना का विरोध बीजेपी समझकर बिल्कुल नहीं करें.. भले ही एक व्यक्ति किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थक क्यू न हो, उसकी सुरक्षा के लिए सरकार ही उत्तरदायी होती है "
" आप ये भी न बोले कि देश में इतनी बेटियों के साथ अपराध हो रहा है और सुरक्षा कंगना को दी जा रही है.. बेटियों के साथ अपराध हो क्यू रहा है? उनको आवाज ऊंची करना क्यू नहीं सीखाते है? कंगना ने अपनी आवाज बुलंद की है तो ही उसको सुरक्षा दी गयी है.. धमकी तो पहले दीपिका पादुकोण को भी दी गयी थी मगर उसने कंगना की तरह मुखर होकर उत्तर नहीं दिया था.. देश की हर बेटियों को अपनी सरकार से सुरक्षा पर बात करनी चाहिए और हासिल भी करनी चाहिए "

कंगना का विरोध बीजेपी विरोध समझकर न करें. देश की हर बेटी को सरकार से अपनी सुरक्षा पर बात करनी चाहिए भले ही वो किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित हो. कंगना का मुखर होकर बोलना पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर एक चोट है.. बेटियों के अधिकार के लिए खुद बेटियों को सामने आना चाहिए और हम सबको साथ देना चाहिए. अगर कंगना ने कोई भी गैर कानूनी तरीके से काम किया हो तो उस पर कानून के अनुसार कार्यवाही जरूर होनी चाहिए. 

Friday, July 10, 2020

विकास दुबे का एंकाउनटर हो जाना ही बेहतर था

अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर से न्याय व्यवस्था पर कोई खास फर्क़ नहीं पड़ा है वो तो हमेशा ही प्रभावी लोगों के लिए प्रभावित होती दिखती ही है. अगर लोगों के आरोप सही है कि ये प्लांड एंकाउनटर था तो खाकी जरूर धूमिल होती नजर आ रही है सत्ता द्वारा 
बस इस एंकाउनटर से सीख लेने की जरूरत है अब युवाओं को. विकास दुबे के पिछले सभी अपराधों को छोड़ भी दिया जाए तो आठ पुलिस कर्मियों को गोली मारकर भागना ही काफी था उसे फांसी की सजा देने के लिए. अगर वो जिंदा रहता तो सुबूतों देता ऐसा सोचना कुछ ज्यादा ही बेमानी सा लग रहा है.. इससे पहले जब STF ने गिरफतार किया था तब भी मिले थे सुबूत.. क्या हुआ कुछ? वो सुबूत तो अब भी होंगे क्यू नहीं एक्शन लिया जा रहा है? जब कल उसे मंदिर से गिरफ्तार किया गया तो भी STF ने पूछताछ की है वहाँ भी मिले होंगे सुबूत.. सुबूतों से कुछ नहीं होता है उस पर कार्यवाही के लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति चाहिए होती है जो कि किसी भी दल में नहीं है. विकास दुबे का कनेक्शन तो सपा से लेकर भाजपा तक सबमें वायरल होती तस्वीरों से दिख चुका है. विकास दुबे से हटकर भी देख सकते हैं कि कांग्रेस, बीजेपी, सपा, बसपा सभी ने अपने अपने समय में खुद अपराध, अपराधियों को पाला पोसा है. तो ऐसे में इनसे कार्यवाही की उम्मीद करना ठीक नहीं है.
सवाल तो ये है कि राजनीति और अपराध का कनेक्शन है ही क्यू? जब तक ये मजबूत कनेक्शन खत्म नहीं होगा तो एक अपराधी जाएगा तो दूसरा तैयार होकर खड़ा हो जाएगा. जरूरत हमे इस पर बात करने की है कि कैसे राजनीति का अपराधीकरण रोका जाए? सत्ता पर काबिज होने के साफ सुथरी छवि की दरकार होनी चाहिए न कि खून में सने हुए व्यक्ति की...
युवा वर्ग हमेशा ही जल्दी प्रेरित होता है अच्छे, बुरे दोनों काम के लिए. अगर हर अपराध करने, अपराध का साथ देने से पीछे हटने लगे तो स्थिति बदल सकती है. युवाओं के जोश, जज्बे का खूब फायदा उठाया जाता है.. विकास दुबे को भी खुंखार अपराधी बनाया गया है वो जन्मजात नहीं था. जब पहला अपराध किया और वही सजा मिल जाती तो कदम इतने आगे न बढ़ते. उसका इतिहास खंगाला जाए तो उसे बचाने में किसी न किसी नेता का हाथ ही होगा जिसने उसे अपने फायदे के लिए कानून की पकड से बाहर रखा.. मगर क्या हम उनकी बात कर रहे हैं आज? क्या विकास दुबे के एनकाउंटर से उनको कोई नुकसान पहुंचा है? नहीं.. उनकी तरफ उंगली उठती उससे पहले ही हाथ काट दिया गया...
हमें यहां सबक लेने की जरूरत है कि किसी के लाभ के लिए खुद का इस्तेमाल न होने दे. नेताओं के काले करतूतों में उनका साथ न दे.. वोट के समय उनका बहिष्कार करें.. नेता वर्ग न तो कभी खुद हत्या, दंगा करता है और न ही कभी पुलिस के डंडे खाने के लिए सड़क पर आता है.. ये सब काम उनके लिए युवा वर्ग ही करता है.. काम निकल जाने के बाद उन्हें बड़े आराम ये कुटिल नेता बाहर फेंक देते हैं.

Thursday, June 11, 2020

मास्क चुनते समय कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें

कोरोना महामारी के प्रकोप से बचने के लिए फेस मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है. अब मार्केट में भी तरह तरह के मास्क आ गए हैं. मास्क खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखे -

1- आप किस तरह का काम करते हैं? अगर पब्लिक में ज्यादा बातचीत हो रही है तो N95 का चुनाव ही बेहतर होगा. और वैसे आप काटन का रियूजेबल मास्क ही ले ताकि हर बार धुल कर पहना जा सकें.

2- सिंगल यूज मास्क को खरीदने से बचे. सर्जिकल मास्क की तरह दिखने वाले ये बेहद हल्के और सस्ते होते हैं. एक बार इस्तेमाल के बाद इसे आप कूड़े में डालेंगे तो इससे प्रदूषण और संक्रमण दोनों ही फैलने की संभावना है. क्यू कि WHO के अनुसार माइल्ड Symptoms पेशंट ज्यादा है और उनके संक्रमण का पता उन्हें खुद ही देर से पता चल पाता है. ऐसे में मास्क के इस्तेमाल के बाद उसे तरीके से विस्तारित किया जाना जरूरी है यू ही डस्टबिन और कूड़े के ढेर पर डालना सही नहीं है तो बे‍हतर है कि कपड़े का रियूजेबल मास्क ही ले. हर इस्तेमाल के बाद धोकर सूखा ले.

3- अपने पास दो मास्क रखे.. एक बार इस्तेमाल करके जब उतारे तो धोने के बाद ही इस्तेमाल करें. उतारते या पहनते समय मास्क को अंदर की तरफ से न छुए और अगर इस्तेमाल के बाद उतार रहे हैं तो तुरंत हाथ धुले. इस्तेमाल किए हुए मास्क को साबुन, पानी से तुरंत धो ले. काॅटन का भिगो कर छोड़ सकते हैं मगर N95 को भिगोना नहीं है.

 4- मास्क दो या तीन लेयर का लेना ही बे‍हतर होगा. गर्मी के मौसम को देखते हुए काॅटन का ज्यादा ठीक होगा क्यू कि ये पसीना सोख सकता है और पसीना आने पर आपको बार बार नीचे नहीं करना होगा.

 5- ऑफिस या काम के बीच जब कुछ खाना पीना हो तो मास्क हटाते समय ये जरूर ध्यान रखना है कि मास्क के अंदर का हिस्सा को नहीं छूना है.

 6- इस समय काफी लोग मास्क बांट भी रहे हैं उस समय भी ध्यान रखना है कि मास्क हमें खुले हाथों से और खुला मास्क नहीं देना है. आप जहां से मास्क ले रहे हैं उनसे ही पैकिंग जरूर कराए. मास्क को खुला रखने से या मास्क को खुला बांटने से संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है.

छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करिए.

Friday, June 5, 2020

लॉकडाउन में मिली छूट के बाद बाहर जाते समय किन बातों का रखें विशेष ध्यान

लॉकडाउन में मिली छूट के बाद बाहर जाते समय किन बातों का रखें विशेष ध्यान
खाने के बाद थोड़ा गर्म पानी जरूर पिये और इसका इंतज़ाम ऑफिस में ही करवा ले. कहीं गर्म पानी पीने से वायरस के खत्म होने की बात हो रही है तो कुछ इसे झुठला रहे हैं.
Rita Sharma | May 26, 2020


 लंबे समय तक पूरी तरह से बंदी के बाद अब शर्तों के साथ बाहर निकलने और काम करने की छूट दी जा रही है. वायरस के संक्रमण के चलते और लंबे समय से घर पर रहने के बाद अब हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क को ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है. संक्रमण के वजह से बहुत ज्यादा समय तक घर पर रहना संभव नहीं है तो बाहर जाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें –


1- पहला काम हमें खुद को साफ – सुथरा और संक्रमण रहित रहना है. इसके लिए ऑफिस में माइल्ड सोप या लिक्विड और सेनिटाइजर को जरूर रखना है. बार बार हाथ धोना है तो हाथों की नमी बरकरार रखने के लिए माइल्ड सोप/लिक्विड ही ले. जहां संभव हो वहाँ हाथ ही धो ले और बाकी समय पर सेनिटाइजर इस्तेमाल करें.

2- हाथों को धोना और सेनिटाइजर का इस्तेमाल लंबे समय तक करना है तो ये जरूर ध्यान रखना पड़ेगा कि इसका इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा नहीं करना हैं. इस समय सेनिटाइजर/डिस्फंक्शन बनाने वाली कंपनियां अपने लुभावने प्रचार में दिखा रही है कि हर एक वस्तु को/खाने के पैकेट पर भी disinfect इस्तेमाल करें जो कि गलत हैं. खाने के किसी भी पैकेट पर कभी भी सेनिटाइजर या डिसइन्फेक्ट नहीं डालना है. इसमें मौजूद केमिकल आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं स्किन और साँस संबंधी या अन्य दिक्कत हो सकती है. बे‍हतर होगा कि खाने की सभी चीज़े घर से लेकर जाए और अगर ऑफिस में मंगा रहे हैं तो खाने से दो तीन घंटे पहले मंगा ले और उसको खुला छोड़ दे.. Virus की existence केवल प्लास्टिक और मेटल पर ही चार पांच घंटे और विशेष परिस्थितियों में ही 24 घंटे या ज्यादा की होती है. प्लास्टिक पैक को ठीक से हटाकर हाथ धुल ले.

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https://www.grihshobha.in/health/keep-in-mind-while-going-out-after-the-relaxation-of-lockdown

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BoisLockerRoom में चल रही चर्चा और हमारे सामने उठते यक्षप्रश्न

#BoisLockerRoom एक Instagram का पेज है जिसे दिल्ली के कुछ लड़कों ने बनाया था. इस ग्रुप को चलाने वाले लड़कों की उम्र 16-18 वर्ष हैं. ये सभी लड़के इस ग्रुप में लड़कियों की फोटो डालते थे जिसे वो Instagram या किसी और माध्यम से लेते थे. यहां लड़कियों के बारे में अश्लील बातें की जाती है और ग्रुप सदस्यों ने उन लड़कियों के साथ गैंग रेप की भी planning भी की जिनकी फोटो डाली थी… जिन्हें ये व्यक्तिगत रूप से जानते भी थे .दोस्तों का आपस में खुला डिस्कशन था कब कैसे क्या करना है?

जांच में पता चला है कि इस ग्रुप में एडमिन सहित 21 लोग थे जिनमें से तीन चार दक्षिणी दिल्ली के एक स्कूल के हैं. कुछ छात्रों ने पुलिस की पूछताछ में कहा है कि ये लोग ग्रुप में थे जरूर मगर कोई कंटेंट नहीं शेयर किया है.
मामला तब सामने आता है जब इन्हीं के ग्रुप से एक लड़का एक लड़की का कॉमन फ्रेंड होता है जिनकी फोटो शेयर की जा रही थी. वो लड़का उस लड़की को स्क्रीन शॉट दे देता है. देख कर लड़की बहुत सकते में आ जाती है और दोस्तों को बताती है, उसे डर था कि घर वाले उसे ही गलत कहेंगे. लेकिन दोस्तों की सलाह पर वो घर वालों को बताती है. वही स्क्रीन शॉट वायरल हो जाने पर दिल्ली पुलिस स्वतः संज्ञान लेती है. तब से लोग फेसबुक और ट्विटर पर इसे लेकर बहुत लिख रहे हैं.
ये लड़कों यही नहीं रुकते है.. वो “BoisLockerRoom 2.0” से एक नया ग्रुप बना लेते हैं जिसमें साफ साफ instruction होता है एडमिन की तरफ से कि इस बार Original ID का इस्तेमाल नहीं करना है और इस ग्रुप में कुछ लड़कियों को भी एड किया जाता है. इस संबंध में पुलिस की जांच और कारवाई चल रही है मगर अब ये चर्चा का विषय बन चुका है कि आखिर किशोर आयु के बच्चे को इसकी जरूरत पड़ी ही क्यू? कमी कहाँ रह गयी है?
 ऐसा नहीं कि ये सब पहली बार हुआ है बस ये इन्टरनेट पर हो रहा है ये पहली बार है. हम देखते आए हैं कि जब लड़के और लड़कियां बड़े होने लगते हैं और उनमें शारीरिक बदलाव आने लगते हैं. इसके साथ ही उनका विपरित लिंग के प्रति आकर्षण भी बढ़ जाता है. लेकिन उनके शारीरिक बदलाव और विपरीत लिंग के प्रति उनके आकर्षण के बारें में न तो स्कूल और न ही घर पर कोई बात की जाती है. ऐसे में वो इधर उधर से जानकारी हासिल करना शुरू करते हैं जो कि बहुत हानिकारक होती है. अगर उन्हें माता पिता और टीचर द्वारा उनके विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और मन में उठ रहे सभी सवालों पर बात की जाए तो वो सहज रह सकेंगे और उन्हें गलत कामों से बचाया जा सकेगा. इस Instagram पेज पर जो भी कुछ हो रहा था अगर ये समय से बाहर नहीं आता तो कोई बेहद ही बुरा परिणाम हो सकता था.. वो लड़की जिसके बारें में सामूहिक रेप की बातें की जा रही थी.. अगर पेरेंट्स द्वारा समय पर सहारा देकर इस परेशानी को नहीं समझा जाता तो उसके कदम घातक हो सकते थे. हालाकि ये सभी लड़कियां जिनकी फोटो यहां डाली जा रही थी अभी भी डर और सकते में है.
इस तरह की घटना सामने आने के बाद ये तो नहीं जा सकता है कि लड़कियां Instagram न इस्तेमाल करें या वो लड़कों से बात न करें बल्कि चर्चा इस पर होनी चाहिए कि बच्चे से युवा होते लड़के – लड़कियों को कैसे सेक्स एजुकेशन दी जाए.. उन्हें उनके शारीरिक बदलाव के बारें में बताया जाए और क्या सही है और क्या गलत है इस पर स्पष्ट रूप से बात की जाए. ऐसी जिम्मेदारी माता पिता के साथ साथ स्कूलों की होनी चाहिए.
* Rita Sharma is Lucknow based Social Activist.

http://marginalised.in/2020/05/08/boislockerroom-discussion-among-new-delhi-school-students-and-questions-related-to-sex-education-in-india/

रोटी, दवा, सुरक्षा जरूरी है या पुष्प वर्षा ?

ऐसे समय जबकि हम “कोरोना महामारी” से जूझ रहे हैं और 21 मार्च से लगातार देश बंदी के चलते श्रमिक वर्ग, प्राइवेट नौकरी पेशा, ट्रांसपोर्ट से संबंधित और अन्य विभागों में सभी लोगों का काम पूरी तरह से बंद हो चुका है. और इनमें भी सबसे ज्यादा मार देश बंदी की दिहाड़ी पर काम करने वाले पर पड़ी है. उनके रहने और खाने दोनों की ही समस्या हो गयी है, सेना द्वारा सम्मान पुष्प वर्षा करने पर सवाल उठना लाजमी है. .. अच्छा लगना और अच्छा महसूस करने से ज्यादा जरूरी पेट भरना और इलाज़ है.

सैकड़ों किलोमीटर पैदल, साइकिल से चलते हुए मजदूर घर पहुंच रहे हैं. घर पहुँचने की आस लिए कई मजदूरों की रस्ते में ही मौत हो गयी. घर पहुंचने के बाद भी मजदूर अपने घर नहीं रह पाए और उन्हें एक पखवारे के लिए क्वारनटीन रहना पड़ रहा है. अपने गांव-घर पहुँच कर भी वे उपेक्षित हैं. बिहार में एक स्थान पर तो उन्हें एक भवन में ठूंसने के बाद ताला बंद कर दिया गया. मजदूर मिन्नत कर रहे थे कि उन्हें घर जाने दिया जाए.

कोविड-19 महामारी को नियंत्रित करने के लिए डब्ल्यूएचओ का साफ साफ निर्देश था कि एक मीटर की दूरी ( सोशल डिस्टेंसिंग) बनाकर रखे लेकिन थाली बजने के आह्वान में इसकी अनदेखी कर दी गयी. थाली बजते हुए लोग खूब एकत्र हुए. एक जिले में डीएम-एसपी सड़क पर जुलूस की शक्ल में चलते दिखे.

ताली, थाली के बाद आज ये “पुष्प वर्षा” बहुत अजीब फैसला है. आज जब हम महामारी के शिकंजे में है और महामारी को रोकने के लिए किये गये लाकडाउन के कारण भुखमरी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ गयी है, ऐसे में पुष्प वर्षा पर खर्च करना कितना उचित है ? जहां तक सम्मान करने की बात है तो हम संकट से उबरने के बाद भी ये सब कुछ कर सकते हैं लेकिन बीमारी और भुखमरी तो इंतजार नहीं करती है. समय के साथ समस्या गंभीर रूप लेगी. वैसे भी आए दिन खुद चिकित्सक सुरक्षा उपकरण न होने की शिकायत करते रहते हैं और ये बड़ी दुखद स्थिति है कि सुरक्षा उपकरणों के अभाव में हमारे कोरोना वारियर्स पुलिस, सैनिक, डाक्टर संक्रमित हो रहे हैं और सरकार इस विषय की गंभीरता पर न सोचते हुए उनके सम्मान का एक इवेंट कर मीडिया में सुर्खियां बटोरना चाहती हैं.

इस पुष्प वर्षा और सेना द्वारा बैंड बजाने का आइडिया जहाँ से भी आया हो, क्या यह पता नहीं है कि अस्पताल के आसपास तेज आवाज प्रतिबंधित होती है. आइडिया के बाद इसे धरातल पर लाने के लिए तैयारी के बीच क्या किसी को ये ख्याल नहीं आया ? या लोगों को केवल आदेश पालन के लिए ही प्रतिबंधित कर दिया गया है ?

नोटबंदी, जीएसटी के बाद महामारी रोकने के लिए जल्दीबाजी और बिना किसी योजना के देशबंदी की गयी. लाकडाउन के बाद भी कोविड-19 के केस बढ़ते जा रहे हैं. महामारी पर हम अंततः विजय पा ही लेंगे लेकिन उस बीच की पीड़ा क्या हम भुला पाएंगे ? ये हमारे लिए याद रखने वाली बात है कि बिहार सरकार लोगों को वापस बुलाने से मना कर देती है और बस या ट्रेन से लाये गए मजदूरों से टिकट का पैसा लिया जा रहा है.

(रीता शर्मा फ्रीलांस पत्रकार और महिला मुद्दों पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं)

https://samkaleenjanmat.in/food-medicine-saftey-or-pushp-varsha/

#coronavirus: ये कोरोना-वोरोना कुछ नहीं होता

#coronavirus: ये कोरोना-वोरोना कुछ नहीं होता
आज नेहा बहुत खुश हैं क्यू कि उसका बचपन का ख्वाब जो पूरा होने जा रहा है.. शादी के बाद वो पहली बार इटली जा रही थी..
Rita Sharma | March 25, 2020



आज नेहा बहुत खुश हैं क्यू कि उसका बचपन का ख्वाब जो पूरा होने जा रहा है.. शादी के बाद वो पहली बार इटली जा रही थी.. उसके सास ससुर ने मुंह दिखाई में इटली घूमने और हनीमून मनाने के लिए टिकट बुक किया था. वैसे तो वो कई बार पापा के साथ बिजनेस ट्रिप पर विदेश गयी थी मगर शेड्यूल टाइट होने से अपनी मन की शॉपिंग और घूमना फिरना नहीं हो पाया था. ये बात जब उसने मंगनी के बाद सृजन को बतायी तो झट से उसने उसे विदेश घुमाने, शॉपिंग कराने और खूब मस्ती करने के लिए प्रॉमिस कर डाली. वो जब धूमधाम से शादी के बाद ससुराल आई तो उसे मुंह दिखाई में ही सरप्राइज मिल गया.

अगले दिन से ही उसने पैकिंग करनी शुरू कर दी.. उसने अपनी सारी मनपसंद ड्रेस पैक कर ली ताकि वो अच्छी अच्छी फोटो भी ले सकें और उसे अपने दोस्तों को दिखाकर, सोशल मीडिया पर डालकर तारीफ बटोर सकें.. अगले ही दिन की फ्लाइट थी.. उन्होंने समय से निकल तो लिया था एयरपोर्ट के लिए, मगर ट्रैफिक जाम के चलते फ्लाइट टेक ऑफ होने से आधा घंटा पहले ही पहुंचे… उनको एयरपोर्ट पर चेक इन करने में वक़्त लग रहा था क्यू कि लैगेज ज्यादा था.. सृजन बार बार काउन्टर पर जल्दी करने को दबाव डाल रहा था.. जबकि स्टाफ उससे कोआपरेट करने को कह रहा था.. इस बीच उसने सभी को नौकरी से बाहर कराने की धमकी भी दे डाली.. जैसे तैसे दोनों अपनी अपनी सीट पर पहुँच गए. सृजन बहुत गुस्से में था और उसने नेहा को बोला “देखना तुम, मैं इनकी नौकरी ले कर रहूँगा.. इन्हें कम से कम हमारा स्टैंडर्ड देखकर तो काम करना चाहिए था”.

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इस पर नेहा बोली कि “नियम तो सब पर लागू होते हैं न.. वो हमारा सामान पहले कैसे चेक कर सकते थे जबकि पहले से लोग लाइन में थे”.

सृजन ने भड़कते हुए कहा कि “तो फिर क्या जरूरत थी इतनी जांच की? हम कोई बम लेकर थोड़े ही जा रहे हैं.. आखिर पैसे वालों की इज्जत भी करनी चाहिए न “?

इस पर नेहा ने चुप रहने में ही भलाई समझी और बाहर की ओर देखने लगी.

फ्लाइट लैंड होते ही वो बाहर निकले तो टैक्सी उन्हें इंतजार करते मिली तो सृजन ने लंबी साँस लेकर कहा कि” Thank God! इसने इंतज़ार नहीं कराया .. और बातें करते दोनों होटल पहुँच गए.. वहां पर काउन्टर पर फारमेल्टी करने के बाद जब सर्विस बॉय उनका लैगेज ले जा रहा था तो उसने यू ही पूछ लिया कि “Sir! Why you have carry heavy language? Every one on trip should carry…” बात पूरी करने से पहले ही नेहा जोर से चिल्ला पड़ी.. “Mind your business”..

सर्विस बाॅय Sorry Madam.. कहकर चुप हो गया.

दोनों ने अपने हनीमून ट्रिप को खूब इंजॉय किया.. आखिरी दिन जब वो खाना खाने प्रसिद्ध रेस्त्रां जा रहे थे तो होटल से उन्हें कॉल आई कि “कृपया करके आप होटल में ही रहे और वापस जाने तक कहीं बाहर न निकले.. क्यू कि इस समय कोई रहस्मय बीमारी फैल रही है जिससे जान जाने का खतरा है और डाक्टर अभी तक बीमारी का न तो नाम जानते हैं और न ही इसका इलाज़..” मगर भला दोनों कहाँ किसी की बात मानने वाले थे.. दोनों को जैसे सभी नियम तोड़ने की जिद्द थी.. खाना खाने के बाद सारा दिन खूब मस्ती की.. मगर आज हर जगह लोग उन्हें कम दिखाई दिए रोज की अपेक्षा…

अगले दिन वो अपने शहर वापस बैंगलोर वापस आ गए.. एयरपोर्ट पर भी कुछ डॉक्टर्स लोगों की जांच कर रहे थे और पूछ रहे थे कि किसी को सर्दी जुकाम तो नहीं है.. सृजन उन्हें अनदेखा करते हुए साइड से निकलने लगा तो एक डॉक्टर ने रोक लिया.. हालांकि सृजन को हल्का बुखार था फिर भी उसने कहा कि वो दोनों स्वस्थ्य है.. दोनों को एक पेपर दिया गया.. जिस पर उसी रहस्मय बीमारी के जिक्र के साथ लक्षण लिखे थे और 14 दिन तक परिवार से अलग रहकर जांच कराने की बात लिखी थी… नेहा ने पढ़ते ही कहा कि “ये तो वही बीमारी लिखी है जिसका जिक्र इटली के होटल में किया गया था और बाहर न जाने की सलाह दी थी.. और तुम्हें बुखार के साथ जुकाम भी है तो तुमने एयरपोर्ट पर मना क्यू किया?”

सृजन ने पेपर छीनकर विंडों से बाहर फेंकते हुए कहा कि “डार्लिंग ये सर्दी जुकाम तो लगा रहता है और तुम भी किन छोटे लोगों की बातों में आती हो? मैं इन लोगों को मुंह नहीं लगाता ”

दोनों सीधे ही अपने फ्लैट में गए जिसे नेहा के पिता ने शादी में दहेज में दिया था.. उनके आने से पहले ही अच्छे से फ्लैट को सजा दिया गया था…

दो दिन ही बीते थे कि सृजन को आज सुबह से ही तेज बुखार के साथ खांसी भी आने लगी.. उसने अपने पास रखी कुछ दवा खा ली और फोन पर ऑफिस की अपडेट लेने लगा तो बातों ही बातों में उसने अपने मैनेजर को बताया कि उसे कई दिनों से सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार आ रहा है और आज नेहा को भी हल्का बुखार है.. इस पर मैनेजर ने उसे डॉक्टर के पास जाने को कहा और उसी रहस्मय बीमारी के बारें में बताया तो सृजन झल्ला पड़ा.. “तुम भी क्या उन लोगों की तरह अनाप शनाप बोलने लगे.. ये सब बीमारी मुझे नहीं हो सकती है” कहकर फोन रख दिया.. और जाने के लिए तैयार होने लगा.. कुछ ही देर बाद डोर बैल बजी.. दरवाजे खोलते ही वो हक्का बक्का रह गया.. क्यू कि मैनेजर और डाक्टर दोनों ही मास्क पहने खड़े थे.. वो आग बबूला होने लगा.. डाक्टर की तेज आवाज पर उसे अंदर आना पड़ा.. थोड़े देर की पूछताछ के बाद ही डॉक्टर ने कॉल करके एम्बुलेंस लाने को बोला.. इससे पहले कि वो, नेहा कुछ समझ पाते…उसे और नेहा को मास्क लगाने को कहा गया और सृजन को दो कवर्ड लोगों ने एम्बुलेंस में बैठने को कहा.. सुनकर नेहा रोने लगी और डॉक्टर की सख्ती के आगे सृजन का रौब न काम आया और उसे एम्बुलेंस में लेकर डॉक्टर चले गए.. साथ आई टीम ने नेहा को उस बीमारी के बारें में बताया और कुछ दवाईयां खाने के लिए दी और साथ ही बताया कि वो 14 दिन तक होम क्वेरेनटाइन (Quarantine) में रहेगी और जांच के बाद स्वस्थ्य पायी गयी तो वो कहीं भी जा सकती है.. जब तक उसे बाहर नहीं निकलना है.. उसका फ्लैट बंद रहेगा.. समय समय पर नर्स आएगी और उसे कोई जरूरत होगी तो बता सकती है या फोन पर बात कर सकती है… इतना बताने के बाद टीम चली गई और नेहा का फ्लैट बाहर से बंद कर दिया गया.

उनके जाते ही नेहा ने अपने पापा को कॉल लगायी और रोते हुए बताया.. आधी अधूरी बात सुनकर वो भावुक हो गए और बेटी को चुपचाप घर आने को कह दिया.. उन्होंने खुद ही नेहा के लिए बंगलौर से दिल्ली तक कि फ्लाइट और दिल्ली से मथुरा तक की बस बुक करा दी और कहा कि रात होते ही चुपचाप पीछे के दरवाजे से निकल कर रात आठ बजे की फ्लाइट पकड़ ले.. नेहा की मां ने आज ही ख़बर देखी थी इस बीमारी को लेकर जिसे डॉक्टर ” कोरोना वायरस” कह रहे थे.. बात सुनते ही वो बीच में बोल पड़ी कि अगर 14 दिन अलग रहने को बोला गया है तो रह ले.. डॉक्टरों ने कुछ सोच कर ही बोला होगा और इटली से आए भी है जहां ये बीमारी फैल रही है.. उसने आज ही न्यूज सुनी है.. इस पर नेहा के पिता बात करते वक्त ही चिल्ला पड़े कि अपने काम से मतलब रखों बस..

नेहा चुपचाप फ्लाइट से होती हुई बस पकड़ कर मथुरा पहुँच गई.. रास्ते में उसे खांसी और छींक भी आ रही थी.. बस में पास बैठी महिला ने टोका तो बोली तो उसने रूखे अंदाज में कहा कि अपनी सीट बदल ले.. अगली सुबह वो अपने पिता के घर थी और जब मेडिकल टीम उसका चेक अप करने घर पहुंची तो उन्हें नेहा नहीं मिली.. उधर सृजन की रिपोर्ट आ चुकी थी और वो इस बीमारी “कोरोना” से संक्रमित था.. सृजन से पूछताछ पर पता चला कि नेहा अपने पिता के घर मथुरा जा सकती है.. सृजन की रिपोर्ट पाॅजिटिव आने के बाद नेहा के भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ रही थी..

ये एक ऐसी बीमारी थी जिसकी शुरुआत सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार से हो रही थी और साँस लेने में तकलीफ के साथ लोगों की मृत्यु हो जा रही थी.. ये एक वायरस से फैल रहा था जिसे नोबेल कोरोना covid 19 नाम दिया गया था और डाक्टर अभी तक इसका इलाज़ ढूंढ नहीं पाए थे.. WHO ने मेडिकल इमर्जेंसी घोषित कर दी थी और इसे महामारी का नाम दिया गया था.. भारत में अभी तक इसका संक्रमण नहीं फैला था.. लेकिन विदेश से वापस लौटे लोगों के संक्रमित होने के चलते धीरे धीरे संख्या बढ़ रही थी.. अब विदेश से आने वाले लोगों की जांच की जा रही थी.. स्टाफ और डाक्टर कम पड़ रहे थे और कुछ लोग अपने रसूख दिखा कर बिना जांच निकल रहे थे..

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उधर नेहा के घर पर पूछताछ के लिए लोकल पुलिस गई तो उनके पिता ने सीधे तौर पर इंकार कर दिया कि नेहा से उनकी कोई बात तक नहीं हुई है और इंस्पेक्टर पर धौंस जमाते हुए उनकी शिकायत SP से करने को कहा.. मगर गेट के बाहर आते ही उसने गॉर्ड से पूछा तो उसने बताया कि “आज बिटिया सवेरे ही अकेली ही आई है.. दामाद जी साथ नहीं थे तो इंस्पेक्टर ने फौरन मेडिकल टीम को सूचित किया.. और एसपी ने शहर में अलर्ट जारी किया क्यू कि अगर नेहा संक्रमित पायी गयी तो उसका परिवार और जिनके भी नजदीकी संपर्क में आई होगी सभी संक्रमित हो सकते हैं.. मेडिकल टीम को भी उसके पिता नेहा को सौपने के लिए तैयार न थे.. टीम ने उन्हें विश्वास में लेने की बहुत कोशिश की.. जबकि नेहा की हालत खराब हो रही थी.. उन्हें न जाने किस बात का डर सता रहा था.. एसपी के हस्तक्षेप करने के बाद जबरन मेडिकल टीम उसे जांच के लिए अस्पताल ले गई और उसके माता पिता को भी अकेले रहने (isolation) और बाहर न जाने की सलाह दी.. साथ ही 14 दिन मानिटर करने को कहा.. जांच में नेहा भी संक्रमित निकली.. उसके माता पिता के भी संक्रमित होने की संभावना है और साथ ही नेहा की लापरवाही के चलते फ्लाइट में, बस में उसके संपर्क में आए लोगों के भी संक्रमित होने की संभावना है.. इस तरह डॉक्टर की सलाह न मानकर.. जांच न कराकर.. संक्रमित लोगों के भीड़ में जाने से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है.. सरकार ने स्पष्ट गाइड लाइन जारी कर दी है लेकिन इसी बीच एक दूसरे शहर में अमेरिका से आयी बालीवुड स्टार के बिना जांच निकलने और आते ही पार्टी आयोजित करने के बाद उसके “कोरोना वायरस के संक्रमण” होने की ख़बर आते ही शहर में डर का माहौल है.. उनके पार्टी में शहर के नामचीन हस्तियों, नेता के आगमन के बाद उनका संसद में प्रवेश से इसके काफी लोगों के बीच पहुंचने का अंदेशा है.. ये तो पढ़े लिखे और पैसे की रौब ज़माने वाले का हाल है.. अभी मेडिकल टीम छोटे छोटे शहर, गाँव और कस्बों में पहुंची ही नहीं है.. सरकार और सभी जिम्मेदार लोग सोशल डिस्टेंस मेनटेन करने की अपील कर रहे हैं क्यू कि डॉक्टर, दवा, मास्क की मात्रा बहुत ही कम मात्रा में है….

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#coronavirus से जंग: जानें क्या है Quarantine, isolation और Social Distancing, ऐसे बरतें सावधानी

#coronavirus से जंग: जानें क्या है Quarantine, isolation और Social Distancing, ऐसे बरतें सावधानी

कोविड-19 या कोरोना वायरस को मात देने के लिए आइए जानते हैं कि क्या है क्वॉरेंटाइन, आइसोलेशन, सोशल डिस्टेंसिंग और पैंडेमिक और इसमें कैसे बरतें सावधानी.

March 23, 2020

लेखक- रीता शर्मा

कोरोना संक्रमण के चलते पहले प्रधानमन्त्री जी की अपील के साथ “जनता कर्फ्यू” और उसके बाद यूपी के 15 जिलों में 25 मार्च तक लौक डाउन, दिल्ली/राजस्थान में 31 जिलों में पूरी तरह बंद कर दिया गया है जबकि सभी इमर्जेंसी सर्विस और दूध/किराने की दुकान खुले रखने के आदेश हैं ताकि लोगों की जरूरतें पूरी होती रहे. अभी विशेषज्ञ आइसोलेशन, क्वॉरेंटाइन और सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दे रहे हैं.. साथ ही कुछ और भी शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं तो इस सलाह पर अमल करने से पहले जानना जरूरी है कि क्वॉरेंटाइन आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग, पैंडेमिक (महामारी) का मतलब क्या है और इसे कैसे मेनटेन करना है?

पैंडेमिक

कोरोना वायरस को SARS Covid नाम के जाना जाता है.. इसे Covid – 19 इसलिए लिखा जा रहा है क्यू कि इसका पहला केस 2019 में दर्ज किया गया था. WHO ने इसे पैंडेमिक यानी की महामारी घोषित कर दिया है.. कोई भी बीमारी जब  किसी एक देश या क्षेत्र से निकल कर वैश्विक स्तर पर फैल जाए और उसे काबू में लाना बहुत मुश्किल हो रहा हो तभी पैंडेमिक या महामारी शब्द का इस्तेमाल करते हैं.

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क्वॉरेंटाइन

कैंब्रिज डिक्शनरी के अनुसार “क्वॉरेंटाइन का मतलब वो नियत समय है जहां किसी भी बीमारी या उसके फैलने से रोकने के लिए सभी व्यक्ति/पशु को एक दूसरे से अलग अलग रखा जाता है.”

क्वॉरेंटाइन का मतलब 14 दिन अकेले रहना भी होता है स्वास्थ्य लाभ के लिए, अभी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सभी को 14 दिन के होम क्वॉरेंटाइन की सलाह दे रहा है ताकि वायरस से होने वाले संक्रमण के कैरियर को तोड़ा जा सकें.. 14 दिन में खत्म/कम हो जाएगा ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्यू कि Covid – 19 की संक्रमण अवधि 14 दिन की ही होती है.. इस बीच लोग एक दूसरे से नहीं मिले तो संक्रमित लोगों के ठीक होने के साथ ही खत्म हो जाएगा और नए फैल न पाने से खत्म हो जाएगा.. चीन ने इसी तरह इस महामारी को लगभग मात दे दी है और अब वो इटली की मदद में लग गया है तो यहां जरूरी है कि हम सभी इस बात की गंभीरता समझते हुए खुद और देश के हित में इसका कड़ाई से पालन करें.

आइसोलेशन

आइसोलेशन भी क्वॉरेंटाइन से मिलता जुलता ही है.. लेकिन यहां संक्रमित व्यक्तियों को स्वस्थ व्यक्तियों से अलग रखने को कहा जा रहा है.. जैसा कि TB होने पर रोगी को आइसोलेट करने की बात की जाती है, जहां रोगी के उपयोग की सभी वस्तुएं अलग कर दी जाती है और उसे समय समय निर्देशानुसार संक्रमित रहित यानी की केमिकल से साफ किया जाता है और रोगी के पास से निकलने वाला कचरा भी निर्देशानुसार ही नष्ट किया जाता है.. इसकी जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाइट पर भी दी गई है l

अभी सुनने में भी आया था कि सेलिब्रिटी कनिका कपूर के पॉजिटिव आने के बाद उनसे मिलने गए नेता दुष्यंत सिंह ने खुद को आइसोलेट कर लिया था..

सोशल डिस्टेंसिंग

हम सभी के मोबाइल फोन पर भी कौलर ट्यून तक बता रही है कि सभी को 1 मीटर की दूरी रखकर रहना चाहिए और दूसरों से मिलने से परहेज करें.. कोई इमर्जेंसी होने पर एक मीटर की दूरी बनाकर बाहर जाए और बात करें. हर सर्दी, खांसी, जुकाम कोरोना नहीं हो सकता है लेकिन फिर भी मास्क का इस्तेमाल करें.. अगर हाथ का इस्तेमाल किया है तो तुरंत इसे अच्छे से साबुन से 20 मिनट तक रगड़ कर साफ पानी से धो ले और अगर धो नहीं सकते तो सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें. सर्दी जुकाम होने पर अपने डॉक्टर से जरूर बात करें या दिए गए हेल्प लाइन नंबर पर भी सलाह ली जा सकती है.. नंबर प्रदेश के अनुसार अलग अलग है जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाइट पर सभी को मिल जाएंगे. कोई भी सर्दी, खांसी, जुकाम पीड़ित कोरोना से ग्रसित नहीं हो सकता है लेकिन फिर भी एतिहात रखते हुए प्राइवेट, सरकारी अस्पताल या हेल्प लाइन नंबर पर सलाह जरूर ले.. सावधानी ही इसका बचाव भी है.

ये भी पढें- #coronavirus: भारत सरकार की इस वेबसाइट से ले जानकारी और अफवाहों से रहें दूर

US CDC ( Center for Disease Control and Prevention) के अनुसार स्पैनिश फ्लू जैसी महामारी के चलते 1918-19 में आइसोलेशन और क्वॉरेंटाइन का इस्तेमाल किया गया था. अमेरिकी संविधान के अनुसार “सरकार किसी भी महामारी को रोकने के लिए आइसोलेशन और क्वॉरेंटाइन का इस्तेमाल कर सकती है और इसको न मानने वाले पर जुर्माने का भी प्रावधान है.”

भारत में भी स्थिति की विकटता को देखते हुए राज्य सरकारों द्वारा कुछ समय के लिए लाॅक डाउन किया जा रहा है और सेल्फ क्वॉरेंटाइन आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दी जा रही है.. इससे डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. हम सबको मिलकर इसका पालन करना चाहिए ताकि वायरस का कैरियर टूट जाए और स्थिति जल्दी सामान्य हो जाए.



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Friday, May 8, 2020

Corona Virus#coronavirus: मैट्रो में सफर करने वाले जान लें ये guidelines


Corona Virus
#coronavirus: मैट्रो में सफर करने वाले जान लें ये guidelines
19 मार्च के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी लोगों से हर जरूरी उपाय करने, संक्रमण से बचने और "जनता कर्फ्यू" की अपील की है.
March 21, 2020

लेखक- रीता शर्मा

देश भर में कोरोना वायरस के संक्रमण से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. अब तक लगभग 195 केस आ चुके हैं और इसे महामारी भी घोषित किया जा चुका है. संक्रमण और न फैले इसके लिए सभी प्रयास शुरू कर दिए गए हैं.

19 मार्च के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी लोगों से हर जरूरी उपाय करने, संक्रमण से बचने और “जनता कर्फ्यू” की अपील की है.

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण को लेकर काफी सावधानी रखी जा रही है. दिल्ली की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली दिल्ली मेट्रो में भी इस महामारी से निपटने के सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए हैं. दिल्ली मेट्रो (DMRC) ने इसको लेकर एक एडवाइजरी जारी की है जिसे आज से लागू कर दिया गया है.. आइए घर से निकलने से पहले इसकी जानकारी कर लेते हैं –

1- एडवाइजरी में साफ साफ कहा गया है कि बहुत जरूरी होने पर ही मेट्रो में सफर के लिए निकले. इस दौरान सोशल डिसटेंस मेनटेन करें, लोगों से हाथ मिलाने, गले लगने और किसी भी वस्तु को छूने से बचे.

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2- मेट्रो यात्रियों को एक सीट छोड़ छोड़ कर बैठना होगा.

3- मेट्रो में, स्टेशन पर या यात्रियों को आपस में भी एक मीटर की दूरी बनाई रखनी होगी.

4- मेट्रो में सफर कर रहे यात्रियों की सभी स्टेशन पर रेंडम थर्मल स्क्रीनिंग होगी. कोई भी बुखार से पीड़ित मिला तो उसे चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा जाएगा. और यदि कोरोना पाजिटिव निकला तो क्वारनटाईन (Quarantine) के लिए भेजा जाएगा, मतलब जब तक वो ठीक नहीं हो जाता है उसे अलग अकेले कमरे में रखा जाएगा और इस दौरान दवाईयां, खाने पीने की सभी जरूरी चीजे दी जाएगी.

5- इसके अलावा एडवाइजरी में ये भी कहा गया कि जिस स्टेशन पर ज्यादा भीड़ होगी और एक मीटर की दूरी रखना संभव नहीं होगा, वहाँ मेट्रो नहीं रुकेगी.

6- साथ ही जन अपील में ये भी कहा गया कि जो भी सर्दी, खांसी, जुकाम या कोरोना से सम्भावित पीड़ित हो सकते हैं वो यात्रा से बचे. इस वैश्विक महामारी के संकट के समय में सबको सहयोग करने और इसके प्रसार को रोकने के लिए सभी एतिहात बरतने की जन अपील की गई.

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय समय समय कोरोना वायरस से बचने के लिए समय समय पर एडवाइजरी जारी कर रहा है.. मेट्रो परिसर में रहने के दौरान सभी को उनका पालन करना होगा. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन इससे पैनिक होने की जरूरत नहीं है बस इसका पालन करते रहने से जल्दी ही संक्रमण खत्म हो सकता है और इसके लिए हम सबको सहयोग करने की जरूरत है बस.


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#coronavirus: भारत सरकार की इस वेबसाइट से ले जानकारी और अफवाहों से रहें दूर

Corona Virus
#coronavirus: भारत सरकार की इस वेबसाइट से ले जानकारी और अफवाहों से रहें दूर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट https://mohfw.gov.in पर सभी जरूरी advisory जारी कर रही है और लगातार इसे अपडेट भी किया जा रहा है.
March 21, 2020


लेखक- रीता शर्मा

 
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सभी जरूरी उपायों को अपनाए और डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट https://mohfw.gov.in पर सभी जरूरी advisory जारी कर रही है और लगातार इसे अपडेट भी किया जा रहा है.

Whatsapp पर भ्रामक जानकारी के आदान प्रदान से बेहतर है कि आप इस साइट पर जाकर जानकारी हासिल करें और सही जानकारी का आदान प्रदान करें. ताकि कोरोना जैसी महामारी को रोकने में आपका भी योगदान शामिल हो. खासकर जो छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग हैं उनके बीच बिल्कुल भी जागरुकता नहीं है और न ही वो कोई बचाव कर रहे हैं.. ऐसे लोगों से अगर फोन पर संपर्क हो सकता है या आप आसान भाषा में साइट पर दी गई जानकारी को साझा कर सकते हैं तो जरूर करें. मगर ध्यान रहे कि कोई अफवाह न फैले.

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सभी प्रदेशों के हेल्प लाइन नंबर Mention किए गए हैं.. ताकि अपनी जरूरत मुताबिक हम contact कर सकें, वही एक सेंट्रल हेल्प लाइन नंबर +91-11-23978046 भी है.

हेल्प लाइन नंबर, सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर संक्रमित डेड बॉडी को कैसे मैनेज करना है, तक सभी कुछ PDF फाइल में हैं जिसे डाउनलोड करके जब चाहे दोबारा जानकारी ले सकते हैं या किसी को बता सकते हैं. Covid 19 के पेशेंट्स और उसमें ठीक होने वालों की संख्या को भी अपडेट किया जा रहा है ताकि भ्रम की स्थिति न बने.

वेबसाइट पर FAQ की भी एक लिंक है, क्लिक करने पर PDF फाइल में ही सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब दिए गए हैं.

“बताया गया है कि Covid 19 की शुरुआत खांसी, जुकाम और साँस लेने में तकलीफ से ही शुरू होती है. अगर आपको इसमें से कुछ भी दिक्कत हो तो नजदीकी अस्पताल जाए.. डाक्टर ही आपसे बातचीत करके तय करेगा कि आपकी Covid 19 टेस्ट होना है या नहीं. अगर आप कहीं विदेश से आए हैं या किसी आने वाले व्यक्ति के संपर्क में आए तो आपकी जांच करानी जरूरी होगी. मंत्रालय और WHO बस बचने के तरीकों पर जोर दे रहा है. इसके लिए साफ सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग ही बेहतर तरीका नज़र आ रहा है.


 
वही WHO ने भी एक whatsapp नम्बर +41 79 893 18 92 जारी किया है जिसे आप अपने मोबाइल में सेव कर सकते हैं. Save करने के बाद हैलो टाइप करके सेंड कर दे, सेंड करते ही एक लिस्ट आ जाएगी, आप जिस बारें में जानकारी चाहते हैं उस नंबर को टाइप करके सेंड कर दे.. आपको जानकारी मिल जाएगी. लिस्ट कुछ इस तरह की होगी .

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सरसों के तेल के हैं अनेक फायदें,जानें यहां

सरसों के तेल के हैं अनेक फायदें,जानें यहां

सरसों के तेल से मसाज"सरसों के तेल से मसाज करने से ज़मी डेड स्किन बाहर आती है और रूखी त्वचा भी नर्म हो जाती है. मगर हम तेल इसलिए नहीं इस्तेमाल करना चाहते हैं
रीटा | March 20, 2020


जाती हुई सर्दी और गर्मियों की दस्तक के साथ ही एक बहुत सामान्य सी समस्या हमारे स्किन की रहती है.. इस समय की तेज हवाएं स्किन को और बेज़ान बना देता है और कई कई बार माश्चराइजर लगाने के बाद भी डेड स्किन पपड़ी बनकर निकलने लगती है जिससे नहाने के बाद खुजली भी होने लगती है l केवल माश्चराइजर लगाने से इस समस्या का हल नहीं मिलता.

इस समस्या से जल्दी छुटकारा पाने और त्वचा को नर्म और चमकदार बनाने के लिए बहुत बेहतर उपाय है – “सरसों के तेल से मसाज”सरसों के तेल से मसाज करने से ज़मी डेड स्किन बाहर आती है और रूखी त्वचा भी नर्म हो जाती है. मगर हम तेल इसलिए नहीं इस्तेमाल करना चाहते हैं क्यू कि इसमें चिपचिपाट ज्यादा होती है, इसलिए इसको नहाने से पहले लगाना बेहतर रहता है.

ये भी पढ़ें-स्मार्टफोन को कैसे दूर रखे कोरोना वायरस से, जानें यहां

सरसों के तेल को पूरे शरीर पर अच्छे से मल ले और आधे घंटे बाद फिर अपनी जरूरत और पसंद के हिसाब गुनगुने या ठंडे पानी से नहा ले..वैसे तो केवल पानी से नहाकर साफ तौलिये या मुलायम कॉटन के कपड़े से रगड़ कर पोछना बेहतर रहता है.. इससे डेड स्किन भी हट जाती है और स्किन मुलायम और चमकदार दिखती है..

लेकिन आप सोप से नहाना चाहते हो तो भी कोई दिक्कत नहीं है.. आप सोप इस्तेमाल कर सकते हैं.. बस ध्यान रखे कि मसाज करने के आधे घंटे बाद ही नहाए ताकि तेल स्किन अच्छे से आब्जर्व कर ले.
ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करने से महीने भर के अंदर ही इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. ये खासकर सूखी त्वचा के लिए तो बहुत ही बेहतर उपाय है..


संभव हो तो हाथ और पैरों में रोज ही नहाने से 10 मिनट पहले हल्का सा तेल लेकर भी मसाज कर सकती हैं क्यू कि खुले अंगों पर ज्यादा सूखापन दिखता है. मगर तेल सरसों का ही होना चाहिए.. अगर घर का शुद्ध तेल है तो बहुत अच्छा नहीं तो बाजार से खरीद कर भी इस्तेमाल करना ठीक रहेगा.

https://www.sarita.in/health-tips/musturd-oil-is-healthy-for-our-skin

हमारी मौत

Friday, March 20, 2020

10 टिप्स से मोबाइल फोन को रखे Corona Virus से दूर

corona virus हेल्थ टिप्स
#coronavirus: इन 10 टिप्स के जरिए कोरोना वायरस को रखें स्मार्टफोन से दूर
इस समय जब कोरोना वाइरस के चलते स्कूल, कॉलेज, माॅल तक बंद कर दिए गए हैं और सोशल डिस्टेंस मेनटेन करने को कहा जा रहा है
रीटा | March 19, 2020
 

इस समय जब कोरोना वायरस के चलते स्कूल, कॉलेज, माॅल तक बंद कर दिए गए हैं और सोशल डिसटेंस मेनटेन करने को कहा जा रहा है. समय समय पर हाथों को साफ रखने की बात की जा रही है तो जरूरत हमें अपनी साफ सफाई के साथ इस्तेमाल करने वाली वस्तुओं को भी सैनेटाइज करने की है .

डॉक्टर्स की माने तो किसी भी वस्तु को छूने के बाद हाथों को साफ करें या सेनेटाइजर इस्तेमाल करें. मगर सबसे ज्यादा तो हम अपना स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और हर समय साथ रहते हैं l फिर भी हमारा ध्यान अभी तक मोबाइल को साफ करने की ओर नहीं जा रहा है जबकि सबसे ज्यादा संक्रमण फैलने का डर फोन से ही होता है तो जरूरत इसे साफ सुथरा रखने की है l एक स्टडीज दावा करती है कि टायलेट सीट से ज्यादा कीटाणु मोबाइल फोन पर पाए जाते हैं . क्यू कि हम खाने खाने से लेकर टायलेट जाने तक मोबाइल फोन साथ रखते हैं .


नॉर्मल दिनों में मोबाइल स्क्रीन साफ करने वाले जेल की दो बूंदे डालकर कपड़े से साफ रख सकते हैं .मगर इस समय जब कोरोना वायरस फैलने की बात बात कही जा रही है और बार बार हाथों को सैनेटाइज करने की सलाह दी जा रही है तो इस समय अल्कोहल आधारित सेनेटाइजर ही बेहतर होगा. मोबाइल फोन को भी साफ करने के लिए.
2. सैनेटाइजर की दो बूंदे मोबाइल पर डालें और कॉटन से उसे पूरे फोन पर लगाए दिन में दो से तीन बार इसी तरह मोबाइल को साफ करें.

3. खासकर जब बाहर से घर आए तो सबसे पहला काम मोबाइल को साफ करने का ही करें.

4. इस समय छोटे बच्चों को मोबाइल न दे.

5. इसके अलावा किसी और का भी फोन न इस्तेमाल करें.. न छुए.

6. जिनको सैनेटाइजर नहीं मिल रहा है वो डेटॉल की कुछ बूंदें कॉटन में लेकर मोबाइल पर लगा ले और फिर किसी साफ कपड़े से पोंछ ले.. इससे भी संक्रमण खत्म हो जाएगा..

7. अगर मोबाइल की जरूरत न हो तो उसे डेस्क और टेबल पर हर जगह रखने के बजाय पॉकेट या पर्स में ही रहने दें.


8. खाते समय फोन को दूर रखे और रात को भी बिस्तर पर मोबाइल रखने के बजाय टेबल पर रखें.

9. अलार्म क्लाक भी घड़ी में ही लगा ले तो बे‍हतर होगा.

10. खुद अपना मोबाइल फोन तो साफ करें ही साथ ही घर के बड़े बुजुर्गों का मोबाइल भी समय समय पर सैनेटाइज करते रहे.

कुल मिलाकर मोबाइल को साफ सुथरा रखें और कम इस्तेमाल करें.

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Tuesday, March 17, 2020

जानिए चुकंदर खाने के मजेदार तरीक़े



हेल्थ टिप्स

जानिए, चुकंदर खाने के क्या है फायदे

चुकंदर को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं. रोज एक चुकंदर खाने से एनिमिया जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.
रीटा | February 7, 2020
 

इन दिनों चुकंदर खूब मिलता है, हम रोज एक चुकंदर खा सकते हैं. इसमें मौजूद विटामिन , खनिज, सोडियम, पोटैशियम, फौस्फोरस, कैल्शियम, सल्फर, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन, विटामिन बी1, बी2 अन्य आदि तत्व पाए जाते है, जो शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं. इसलिए चुकंदर को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं. रोज एक चुकंदर खाने से एनिमिया जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.चुकंदर खाकर कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखा जा सकता है. इतने सारे फायदे के बावजूद हमें इसे खाना अच्छा नहीं लगता..

ये है कुछ नए तरीके जिससे न केवल इसे खाना अच्छा लगेगा बल्कि आपके खाने का भी स्वाद बढ़ जाएगा.

1- चुकंदर को कद्दूकस करके उसमें पतली पतली हरी मिर्च और धनिया, कुछ बूंदे नीबू की और स्वादानुसार नमक मिलाकर खाए.. खाने का स्वाद बढ़ जाएगा.

2- चुकंदर, टमाटर, प्याज, मूली को बारीक बारीक काट कर उसमें चाट मसाला मिलाकर खा सकते हैं.. चाहे तो नीबू भी मिला ले.

3- चुकंदर की एकदम पतली पतली slice काटकर प्लेट में सजा ले और ऊपर से नमक, काली मिर्च छिड़ककर खा सकते हैं.

ये भी पढ़ें- फाइब्राइड: महिलाओं में बढ़ती उम्र की गंभीर बीमारी

4- चुकंदर का हलवा भी बना सकते हैं गाजर की तरह. चुकंदर को छिल के धुल लें और फिर कद्दू कस करके उसे कढ़ाई में पकाये. पकाते समय ही उसमें दूध भी डाल दें तो बाद में खोए की जरूरत नहीं पड़ेगी. जब पक जाए तो ऊपर से ड्राई फ्रूट डाल ले. ये आपके लिए गाजर के हलवे से ज्यादा सेहतमंद और स्वादिष्ट लगेगा. खासकर बच्चों को के लिए.. एक दिन बनाकर कई टाइम खिला सकती है..

इन सभी तरह से खाकर खुद और पूरे परिवार को सेहतमंद कर सकती हैं.

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आखिर क्यों बना सरोगेसी का कानून, जानें अहम बातें

आखिर क्यों बना सरोगेसी का कानून, जानें अहम बातें

जापान के कपल का केस था जिसमें वो सरोगेट करने के लिए भारत आए और यहां की एक महिला की कोख को किराये पर लिया लेकिन बच्चे के जन्म के एक महीने पहले ही इस कपल का ब्रेक अप हो गया.

Reeta | February 29, 2020

सरोगेसी उस अरेंजमेंट को कहा जाता है जिसमें कोई भी शादीशुदा कपल बच्चे पैदा करने के लिए किसी महिला की कोख किराए पर लेता है. इसकी कई वजहें हो सकती हैं. जैसे कि अगर कपल बच्चे पैदा करने में अक्षम है, या फिर महिला को जान का खतरा हो बच्चे पैदा करने में. जो औरत अपनी कोख में दूसरों का बच्चा पालती, वो सरोगेट मदर कहलाती है.

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क्यों बना आखिर कानून?

साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट के पास एक मामला आया बेबी मांजी यामादा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया. ये जापान के कपल का केस था जिसमें वो सरोगेट करने के लिए भारत आए और यहां की एक महिला की कोख को किराये पर लिया लेकिन बच्चे के जन्म के एक महीने पहले ही इस कपल का ब्रेक अप हो गया. अब बच्चे का पिता बच्चे को अपने साथ जापान ले जाना चाहता था मगर न तो भारत और न ही जापान की तरफ से उसको इजाजत मिल रही थी. सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बच्चे को उसकी दादी को सौंपा गया और साथ ही सरोगेट को लेकर एक बहस छिड़ गई. 2009 में लाॅ कमीशन ऑफ इंडिया ने पाया कि भारत में सरोगेसी की सुविधा का विदेशी लाभ उठा रहे हैं तो इसे बंद करने की सलाह दी गई.


लोकसभा ने 19 दिसम्बर 2018 को “सरोगेसी रेग्युलेशन बिल 2016” पास कर दिया. इस कानून के कुछ अहम बिंदु है – –

1- कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. अब केवल परिवार के सदस्यों या करीबियों में ही कोई सरोगेट बन सकेगी और वो भी NRI या फाॅरेनर नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पैसे की लेन देन नहीं होगी. प्रेग्नेंसी के समय खाने पीने और दवा के लिए जरूरत के पैसे ही दिए जा सकते हैं ताकि बच्चे की बेहतर देखभाल हो सकें.

2- सरोगेट माँ की उम्र 25-35 साल के बीच ही हो सकती है. वो खुद भी शादी शुदा होनी चाहिए और कम से कम एक बच्चा उसका अपना हो.

3- शादी शुदा दंपति को ही सरोगेसी की सुविधा मिलेगी और उनकी शादी के भी कम से कम पांच साल पूरे होने चाहिए.

लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल, सिंगल या समलैंगिक को सरोगेसी करने की इजाजत नहीं है.

4 – इस नियम को तोड़ने पर 5 से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है. सारे रिकार्ड क्लिनिक को भी 25 साल तक रखने होंगे.

फिल्मी दुनिया में सरोगेसी का एक ट्रेंड ही बन चुका था..


इस नियम के लागू होने से पहले ही करण जौहर सरोगेसी से तीन बच्चों के पिता बन चुके हैं.. जबकि वो शादी शुदा नहीं है.. उन्हें समलैंगिक माना जाता है जबकि उन्होंने कभी ये बात स्वीकार नहीं की है. इसके अलावा तुषार कपूर, शाहरुख खान, आमिर खान आदि भी पहले ही सरोगेसी से बच्चों का जन्म करा चुके हैं लेकिन कानून के आने के अब नियम शर्तों का पालन करना जरूरी हो गया है.

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सिर्फ बेटी ही नहीं बेटों की परवरिश पर भी दे खास ध्यान

लाइफ स्टाइल परिवार

सिर्फ बेटी ही नहीं बेटों की परवरिश पर भी दे खास ध्यान 

अगर हम अपने अपने घर के लड़कों/पुरुषों को महिलाओं के साथ कैसे पेश आया जाए ये सिखा दें तो अपराध में खुद ही कमी आएगी.
रीटा | March 17, 2020
 
बदलते समय के साथ माता पिता को बेटी के साथ बेटों को संस्कार सिखाये जाने की पहल शुरू कर देनी चाहिए. वजह अब चाहे बेटा हो या बेटी, सबको समान शिक्षा, फिर नौकरी और जीवन की भागदौड़ करनी पड़ती है. जहां परिवार में बेटा-बेटी, बहू-दामाद सभी को बाहर के साथ घर के भी काम करने पड़ते हैं और अगर ये बचपन से ही सीखा दिए जाए तो खुद उनके लिए और उनके लाइफ पार्टनर के सुकून भरा होता है.
बचपन में जो भी सीखा दिया जाता है वो जिंदगी भर साथ देता है. खुद घर में पुरुष को भी कुछ न कुछ घर के काम में हाथ बंटाना चाहिए तो बेटे स्वतः ही सीखने लग जाएंगे. केवल घर के काम ही नहीं बल्कि घर में बड़ों की इज्जत करना, बहनों के साथ प्यार से पेश आना और महिलाओं के प्रति संवेदनशील और गरिमामयी सोच रखना भी सिखाये.

महिला अपराध की एक बड़ी वजह भी यही है कि पुरुष महिलाओं के लिए न तो अच्छी सोच रखते हैं और न ही संवेदनशील होते हैं. उन्हें कई बार तो आभास तक नहीं होता है कि उनकी किसी भी हरकत जो मजे, मस्ती के लिए की गई है. वो लड़कियों के मन पर कितना बुरा प्रभाव डालती है. कई बार छोटी ही उम्र में किसी बुरे अनुभव से गुजरने के बाद लड़कियां जिंदगी भर उस तकलीफ से मुक्त नहीं हो पाती है. केवल किसी भी छेड़छाड़ या अपराध की सजा दे देने भर से अपराध नहीं थमने वाला है. इसके लिए परवरिश पर भी ध्यान देना होगा.
लड़कों को स्कूल से ही लड़कियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए, ये बताया जाना चाहिए और साथ ही घर में माता पिता को महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना, उनसे अच्छा व्यवहार करना सिखाया जाना चाहिए. ये शिक्षा हर दिन के साथ दी जानी चाहिए. समाज में अच्छा-बुरा जो भी दिख रहा हो उसे उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए चर्चा करनी चाहिए.
अब लड़कों को भी लड़कियों की तरह घर के काम में हाथ बटाना सिखाया जाना चाहिए. घर में केवल बेटियों से ही काम न कराकर बेटे बेटियों दोनों को काम बांट दें. आगे चलकर जब बच्चे बाहर जाएंगे तो ये काम करने की आदत और काम करने का तरीका पता होने से खुद उनके लिए भी सुकून भरा होगा, क्योंकि हर समय हम मेड के सहारे नहीं रह सकते हैं.
ये भी पढ़ें- कौन-सा गिफ्ट है बच्चों के लिए परफेक्ट
बेटों को अपने महिला मित्र, बहन से बात करते वक़्त जरूर ध्यान दे कि उनका लहजा और व्यवहार का तरीका कैसा है? कुछ ठीक न लगे तो उसी वक़्त टोककर समझाये.
खुद माता पिता को भी ये ध्यान रखना चाहिए कि आपस में उनका व्यवहार और बातचीत करने का तरीका अच्छा होना चाहिए क्यू कि घर में जो भी कुछ अच्छा/बुरा होता है बच्चे भी वही सीखते हैं.
देखा गया है कि जिस घर में घरेलू हिंसा और महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव होता है वहाँ लड़के भी वही सोच के साथ बड़े होते हैं वही आगे चलकर अपनी बहन /पत्नी या अन्य महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव और हिंसा करते हैं.
लड़कों में महिलाओं के प्रति संवेदना का पाठ पढ़ाया जाना जरूरी है. उन्हें पता होना चाहिए कि कोई भी महिला गलत सहने और बर्दाश्त करने के लिए नहीं होती है और उनके पास ठीक वैसी ही भावनाएं और इच्छाएं है जैसी लड़कों के पास हैं. अब वो भी बाहर निकलना, घूमना, फिरना चाहती है जो उनका हक है. तो ऐसे में रात में भी और सुनसान जगहों पर भी लड़कियां दिखेंगी जिसे देखकर उन्हें ये नहीं सोचना है कि रात में लड़की आखिर कर क्या रही है?
लड़कियों के लिए असुरक्षित माहौल में हम बेटियों को निडर रहना, आत्मरक्षा के तरीके तो सीखा रहे हैं लेकिन केवल इससे ही लड़कियां सुरक्षित नहीं रह सकती है, लड़कों को भी उनकी सीमा और लड़कियों के साथ मर्यादा में रहकर बातचीत का तरीका सिखाया जाना चाहिए. अगर हम अपने अपने घर के लड़कों/पुरुषों को महिलाओं के साथ कैसे पेश आया जाए ये सिखा दें तो अपराध में खुद ही कमी आएगी और बेटियों के लिए माहौल सुरक्षित हो जाएगा.

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Monday, January 27, 2020

बातचीत को प्रभावी कैसे बनाया जाए



लाइफ स्टाइल
प्रभावी बातचीत के लिए जरूर अपनाएं ये 5 तरीके
किसी की कमी बताना और सुधारना अच्छी बात है लेकिन एक ही बात को बार बार न कहें. अगर कोई वाकई सुधरना चाहता है और आपकी बात को ध्यान से सुन रहा है तो खुद में सुधार अवश्य लाएगा.  
रीटा | January 25, 2020
 


कभी कभी ऐसा होता है कि हम कहीं जाते हैं और किसी से मिलते हैं तो उनसे हुई बातचीत हम बहुत प्रभावित करती है और लंबे समय तक उसे याद रखते हैं. बातचीत करते समय शब्दों के साथ साथ शरीर के हाव भाव दोनों पर ही ध्यान देना होता है.
आइए बातचीत करने के कुछ खास तरिकों के बारे में यहां जानते हैं -

1. ज्यादा निंदा /आलोचना से बचें – किसी की कमी बताना और सुधारना अच्छी बात है लेकिन एक ही बात को बार बार न कहें. अगर कोई वाकई सुधरना चाहता है और आपकी बात को ध्यान से सुन रहा है तो खुद में सुधार अवश्य लाएगा. दो तीन कहने पर भी आपको कोई अन्तर नहीं दिखता तो उसे उसके हालत पर छोड़ देना चाहिए, चाहे घर हो या औफिस..

2. प्रशंसा सबके बीच में करें मगर आलोचना अकेले में – अगर किसी की तारीफ करनी है तो सबके सामने करें. इससे उस व्यक्ति में आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. लेकिन जब उसे किसी बात पर टोकना हो तो अकेले में बुलाकर बोले. भले ही आप औफिस में बौस क्यों न हो. कई बार सामने की डांट इतनी चुभ जाती है कि लोग सालों साल नहीं भूल पाते हैं और कहीं कहीं कलीग भी मजाक बनाते हैं. इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें.

3. बात करते समय सकारात्मक रहें – औफिस हो या घर, जब भी किसी इशू /समस्या पर डिस्कशन चल रहा है तो समस्या और उसकी वजह पर बात करते समय सकारात्मक रहे और समस्या के निदान पर जरूर चर्चा करें. आप की सकारात्मकता दूसरों को भी प्रेरणा देगी और जल्दी ही समस्या से भी मुक्ति मिल जाएगी.

4. बौडी लैंग्वेज पर ध्यान दें– बोलते समय हाव भाव और बौडी लैंग्वेज, आई कानटेक्ट का ध्यान रखे. जब आप किसी से बात कर रहे हैं तो उस समय आपके हावभाव ठीक होने चाहिए. साथ ही आई कानटेक्ट भी होना चाहिए ताकि सामने वाले को भी लगे कि आप उन्हें जानने, समझने में interested है और साथ ही आपका भी अच्छा इम्पैक्ट उस पर जाता है.

ये भी पढ़ें- शादी से पहले बेटी को जरूर शिक्षा दें माता-पिता

5. बातचीत ध्यान सुने – जब भी कोई आपसे कुछ कह रहा हैं तो उसे ध्यान से सुने, इससे न केवल आप अच्छे listener साबित होंगे बल्कि आपको कुछ न कुछ नया जानने को मिलता रहेगा और हमेशा गुड स्पीकर बनने के लिए गुड Listener होना जरूरी होता है.

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मन बड़ा व्याकुल सा है

मन बड़ा व्याकुल सा है..
अच्छा कम बुरा ज्यादा हैं,
हम जितना हक अधिकार की मांगें करते हैं
उतना ही डाका पड़ जाता है,
ये है कौन जो नज़रे जमा कर बैठा है?
ये है कौन.? जो बात बात पर डंडे चलवाता है?
कानून के रखवालों के हाथ ही
कानून को शर्मसार करवाता है,
शांति की एक सभा में कुछ उदंडो को बुलवाता है
वो आते हैं, कुछ नारे लगाते हैं, कुछ हुड़दंग मचाते है,
कभी आग लगवाते है तो कभी कुछ पत्थर चलवाते है
और फिर शुरू हो जाता है दमन का खेल,
हम नहीं है उस भीड़ के साथ जो हर वक़्त
भूखे भेड़िये सी मौके पर नजरे जमाए रहता है,
फिर भी थाने हमें खींचकर उन्हें छोड़ दिया जाता है
अच्छा, आखिर ये है कौन जो हमें नाच नचा रहा है,
हम क्यू नहीं इनकी पहचान करते हैं
इन्हें भीड़ से अलग करके, आईना दिखाते हैं 
क्यू नहीं हम कोशिशों से अच्छा समाज बनाते हैं..
मन बड़ा व्याकुल सा है
अच्छा कम बुरा ज्यादा हैं l




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रीटा शर्मा

Saturday, January 18, 2020

जाने NCRB की रिपोर्ट के अनुसार अपराध का स्तर

https://www.sarita.in/society/national-crime-records-bureau


जानें, राष्ट्रीय आपराधिक रिकार्ड ब्यूरो

NCRB की ताजा रिपोर्ट 9 जनवरी 2020 को आई है, जिसमें आकड़े चौंकाने वाले हैं.

रीटा | January 18, 2020

बाल अपराध – रिपोर्ट कहती हैं कि 2018 में 1 लाख 40 हजार से ज्यादा अपराध हुए हैं. अगर इसे प्रतिदिन के हिसाब से देखे 388 अपराध हर दिन हुए है जो कि बहुत अफसोस जनक है .

CRY ( Child Right and You) NRCB की रिपोर्ट पर अपने अध्ययन में कहती हैं कि बाल अपराध में सबसे ज्यादा मामले अपहरण और जोर ज़बरदस्ती के है जो पिछले साल की तुलना में लगभग 16% बढ़े हैं.  वही पास्को ( Protection of child from Sexual Offences) के अंतर्गत दूसरे सबसे ज्यादा अपराध 39,827 मामलें दर्ज हुए हैं जिसमें 9312 केस रेप के दर्ज हुए हैं.

 पॉलिसी रिसर्च की डायरेक्टर प्रीति मेहरा का कहना है कि “जहां एक तरफ बाल अपराध की संख्या में वृद्धि हुई है वही दूसरी इन मामलों में रिपोर्ट का दर्ज होना ये दर्शाता है कि खुद लोग और सरकार इन आपराधिक मामलों में सचेत हुई है l”

 बाल अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार का नाम सबसे ऊपर है जहां 51% अपराध होते हैं और इन सभी प्रदेशों में उत्तर प्रदेश का नाम सबसे ऊपर आता है l

महिला अपराध – NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक हर 15 मिनट में एक रेप का मामला देश में दर्ज हो रहा है l 2018 में लगभग 34,000 रेप के मामले सामने आए, पिछले वर्ष की तुलना में अपराध में वृद्धि हुई है l

महिला अपराध में बढ़ोतरी की एक वजह पुलिस और कानून का सख्त न होना भी है l जैसा कि पिछले साल कुलदीप सिंह सेंगर का रेप केस सामने आने पर पुलिस ने पीड़ित के ही परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था l

किसानों की आत्महत्याएं.. रिपोर्ट के मुताबिक 10,349 किसानों ने आत्महत्या की है.. फसल खराब होने, बढ़ते कर्ज या अन्य कारणों के चलते

 साम्प्रदायिक/ जातीय दंगे – पिछले कुछ महीनों में प्रोटेस्ट और उस दौरान हिंसा भी सामने आ रही है जो कि एक गलत शुरुआत है l जातीय और साम्प्रदायिक दंगे पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज हुए हैं l

 मेट्रो शहरों में अपराध में बढ़ोतरी – रिपोर्ट के मुताबिक मेट्रो शहरों में अपराध के मामलों में दिल्ली सबसे ऊपर है जहां दिल्ली में 29.6 प्रतिशत है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और विशेष व स्थानीय कानून (एसएलएल) शामिल हैं l

NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक साल दर साल अपराध, हिंसा में बढ़ोतरी ही हो रही है l सरकार को इस पर अध्ययन कर अपराध के कारण और रोकथाम के उपाय को लागू की जरूरत है और साथ ही पुलिस प्रशासन को आपराधिक मामलों में सचेत रहने और संवेदनशील होने की जरूरत है.. ताकि हर अपराध record हो सकें और FastTrack कोर्ट के माध्यम से एक समय सीमा के अंदर न्याय मिलने से कहीं न कहीं अपराध में कमी आएगी l 2012 का दिल्ली का सबसे क्रूरतम अपराध गैंगरेप पर अब 7 साल बाद फांसी की सजा तय की गई l न्याय में विलंब और अपराध को छुपाया/दबाया जाना भी अपराध होने की वजह है l हम सबको अपराधी का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए भले ही वो किसी भी परिवार या तबके से आता है.. राजनीति में भी आपराधिक व्यक्तियों का बहिष्कार जरूरी है.. वोट देते समय जांच पड़ताल जरूर करनी चाहिए ताकि अपराधी को भी अपराध करते समय सामाजिक बहिष्कार का डर सताये l


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