Monday, November 9, 2020
एक स्वतंत्रता संग्राम की फिर जरूरत है
Friday, October 16, 2020
Rape घटना है या बिछाया हुआ जाल
Tuesday, October 13, 2020
पहचान ढूंढती स्त्री
Saturday, October 10, 2020
मानसिक स्वास्थ्यता जरूरी है
उठो बेटियाँ
Friday, October 9, 2020
बदलाव
हमेशा से ही भारतीय समाज में कोई न कोई सामाजिक समस्या/बुराई /अंधविश्वास /सामाजिक कुरीतियां/अपराध रहा है और उसे खत्म करने के लिए उसी समाज के लोगों ने प्रयास किए है. वही स्थिति अब भी है, केवल एक दूसरे को कोसने से और ये कहने से कि ज़माना बहुत खराब है.. कुछ बदलाव नहीं होने वाला.
समाज में जो कुरीतियां विभिन्न धर्म/जातियों में प्रचलित है उसे खत्म करने के हमे प्रयास करने होंगे. युवा वर्ग को ही इसके लिए खड़ा होना होगा. ऐसी समस्याएं भी दो स्तर पर खत्म की जा सकती है एक तो सामाजिक पहल जिसके लिए विमर्श, जागरुकता फैलायी जाए और दूसरा कानूनी स्तर पर.. जब कोई हमें/आपको जबरन कुछ करने के लिए बाध्य कर रहा हो तो कानूनी सहायता ली जाए.
दोनों ही तरीकों पर जब तक पूरी तरह से अमल नहीं किया जाएगा बदलाव नहीं होने वाला. बदलाव करने के लिए कोई क्रांति नहीं करनी है, कोई प्रदर्शन नहीं करना है. बस प्रतिदिन अपने आसपास हो रही सभी अच्छे - बुरी चीजों पर नजर रखनी है और कुछ अनुचित दिखने पर टोक देना है.. अगर कोई नुकसान पहुंचाने वाला अपराध, कृत्य नहीं है तो बस टोकना ही पर्याप्त है. बस इसके लिए केवल आपको संवेदनशील होना है और "हमसे क्या मतलब है? " वाले एटीट्यूड को छोड़कर "हमे अपने समाज को बेहतर बनाना है" वाली सोच रखनी है. जब आपकी सोच बेहतरी के लिए बदलाव पर होगी तो बहुत आसान होगा कि आप किसी को अनुचित देखकर टोके.
जब हम किसी को ये बताते हैं कि जो ये आप कर रहे हैं वो गलत है तो पहला रिएक्शन हमें बुरा ही मिलेगा.. लेकिन बार बार कहने पर सामने वाले पर असर पड़ेगा और यही से बदलाव होने लगेगा.. मसलन आपने किसी एक को बोला और उसने समझ लिया तो वो दस और लोगों को बोलेगा.. इस तरह बदलाव की कड़ी जुड़ती जाएगी. 😃
इसे उदाहरण से समझ सकते हैं.. आप रोज शाम को वाॅक करने जा रहे हैं और आपको रास्ते में या पार्क में 15-17 साल के लड़कों का एक ग्रुप दिखता है जो केवल लड़कियों पर कमेन्ट करने के इरादे से खड़े होते हैं.. आपने उन्हें टोका तो शायद उन्हें बहुत बुरा लगेगा.. हो सकता है कि कुछ बहस भी करें.. ये नए जवान होते बच्चे है इन्हें तो अच्छे - बुरे की भी समझ नहीं होती है मगर आपको पता है कि अगर ऐसे ही इन्हें छूट मिलती रही तो आगे चलकर कुछ बड़ा अपराध भी कर सकते हैं तो अभी उन्हें रोकना उनके ही हित में है.. उन्हें टोकने से पहले आप अपने साथ दो चार और लोगों को ले ले तो बेहतर रहेगा.. कई बार बोलने पर ये बच्चे खुद ही ऐसी हरकते बंद कर देंगे और जैसे ही इनके दिमाग में ये आएगा कि ये कमेन्ट पास करना आपराधिक कृत्य है इस पर लगाम लगने लगेगा. ऐसे बातेँ होने की एक बहुत बड़ी वज़ह है कि हम बच्चों से अच्छे - बुरे चीजों पर बात नहीं करते. केवल महंगे स्कूल, कॉलेज में प्रवेश दिला देने से उनके व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास नहीं होगा.
दूसरा उदाहरण भी ले सकते हैं कि आपकी कॉलोनी, मोहल्ले में कुछ लोग सड़क पर कूड़ा डाल देते हैं, अपनी छत से फेक देते हैं.. आप देखते ही इन्हें मना करें. शुरू में एक दो दिन बुरा लगेगा फिर ऐसा करना बंद कर देंगे और आपका एरिया साफ, सुथरा, बीमारी मुक्त होगा.
Wednesday, September 9, 2020
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Friday, July 10, 2020
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Friday, June 5, 2020
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कोविड-19 या कोरोना वायरस को मात देने के लिए आइए जानते हैं कि क्या है क्वॉरेंटाइन, आइसोलेशन, सोशल डिस्टेंसिंग और पैंडेमिक और इसमें कैसे बरतें सावधानी.
लेखक- रीता शर्मा
कोरोना संक्रमण के चलते पहले प्रधानमन्त्री जी की अपील के साथ “जनता कर्फ्यू” और उसके बाद यूपी के 15 जिलों में 25 मार्च तक लौक डाउन, दिल्ली/राजस्थान में 31 जिलों में पूरी तरह बंद कर दिया गया है जबकि सभी इमर्जेंसी सर्विस और दूध/किराने की दुकान खुले रखने के आदेश हैं ताकि लोगों की जरूरतें पूरी होती रहे. अभी विशेषज्ञ आइसोलेशन, क्वॉरेंटाइन और सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दे रहे हैं.. साथ ही कुछ और भी शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं तो इस सलाह पर अमल करने से पहले जानना जरूरी है कि क्वॉरेंटाइन आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग, पैंडेमिक (महामारी) का मतलब क्या है और इसे कैसे मेनटेन करना है?
पैंडेमिक
कोरोना वायरस को SARS Covid नाम के जाना जाता है.. इसे Covid – 19 इसलिए लिखा जा रहा है क्यू कि इसका पहला केस 2019 में दर्ज किया गया था. WHO ने इसे पैंडेमिक यानी की महामारी घोषित कर दिया है.. कोई भी बीमारी जब किसी एक देश या क्षेत्र से निकल कर वैश्विक स्तर पर फैल जाए और उसे काबू में लाना बहुत मुश्किल हो रहा हो तभी पैंडेमिक या महामारी शब्द का इस्तेमाल करते हैं.
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क्वॉरेंटाइन
कैंब्रिज डिक्शनरी के अनुसार “क्वॉरेंटाइन का मतलब वो नियत समय है जहां किसी भी बीमारी या उसके फैलने से रोकने के लिए सभी व्यक्ति/पशु को एक दूसरे से अलग अलग रखा जाता है.”
क्वॉरेंटाइन का मतलब 14 दिन अकेले रहना भी होता है स्वास्थ्य लाभ के लिए, अभी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सभी को 14 दिन के होम क्वॉरेंटाइन की सलाह दे रहा है ताकि वायरस से होने वाले संक्रमण के कैरियर को तोड़ा जा सकें.. 14 दिन में खत्म/कम हो जाएगा ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्यू कि Covid – 19 की संक्रमण अवधि 14 दिन की ही होती है.. इस बीच लोग एक दूसरे से नहीं मिले तो संक्रमित लोगों के ठीक होने के साथ ही खत्म हो जाएगा और नए फैल न पाने से खत्म हो जाएगा.. चीन ने इसी तरह इस महामारी को लगभग मात दे दी है और अब वो इटली की मदद में लग गया है तो यहां जरूरी है कि हम सभी इस बात की गंभीरता समझते हुए खुद और देश के हित में इसका कड़ाई से पालन करें.
आइसोलेशन
आइसोलेशन भी क्वॉरेंटाइन से मिलता जुलता ही है.. लेकिन यहां संक्रमित व्यक्तियों को स्वस्थ व्यक्तियों से अलग रखने को कहा जा रहा है.. जैसा कि TB होने पर रोगी को आइसोलेट करने की बात की जाती है, जहां रोगी के उपयोग की सभी वस्तुएं अलग कर दी जाती है और उसे समय समय निर्देशानुसार संक्रमित रहित यानी की केमिकल से साफ किया जाता है और रोगी के पास से निकलने वाला कचरा भी निर्देशानुसार ही नष्ट किया जाता है.. इसकी जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाइट पर भी दी गई है l
अभी सुनने में भी आया था कि सेलिब्रिटी कनिका कपूर के पॉजिटिव आने के बाद उनसे मिलने गए नेता दुष्यंत सिंह ने खुद को आइसोलेट कर लिया था..
सोशल डिस्टेंसिंग
हम सभी के मोबाइल फोन पर भी कौलर ट्यून तक बता रही है कि सभी को 1 मीटर की दूरी रखकर रहना चाहिए और दूसरों से मिलने से परहेज करें.. कोई इमर्जेंसी होने पर एक मीटर की दूरी बनाकर बाहर जाए और बात करें. हर सर्दी, खांसी, जुकाम कोरोना नहीं हो सकता है लेकिन फिर भी मास्क का इस्तेमाल करें.. अगर हाथ का इस्तेमाल किया है तो तुरंत इसे अच्छे से साबुन से 20 मिनट तक रगड़ कर साफ पानी से धो ले और अगर धो नहीं सकते तो सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें. सर्दी जुकाम होने पर अपने डॉक्टर से जरूर बात करें या दिए गए हेल्प लाइन नंबर पर भी सलाह ली जा सकती है.. नंबर प्रदेश के अनुसार अलग अलग है जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाइट पर सभी को मिल जाएंगे. कोई भी सर्दी, खांसी, जुकाम पीड़ित कोरोना से ग्रसित नहीं हो सकता है लेकिन फिर भी एतिहात रखते हुए प्राइवेट, सरकारी अस्पताल या हेल्प लाइन नंबर पर सलाह जरूर ले.. सावधानी ही इसका बचाव भी है.
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US CDC ( Center for Disease Control and Prevention) के अनुसार स्पैनिश फ्लू जैसी महामारी के चलते 1918-19 में आइसोलेशन और क्वॉरेंटाइन का इस्तेमाल किया गया था. अमेरिकी संविधान के अनुसार “सरकार किसी भी महामारी को रोकने के लिए आइसोलेशन और क्वॉरेंटाइन का इस्तेमाल कर सकती है और इसको न मानने वाले पर जुर्माने का भी प्रावधान है.”
भारत में भी स्थिति की विकटता को देखते हुए राज्य सरकारों द्वारा कुछ समय के लिए लाॅक डाउन किया जा रहा है और सेल्फ क्वॉरेंटाइन आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दी जा रही है.. इससे डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. हम सबको मिलकर इसका पालन करना चाहिए ताकि वायरस का कैरियर टूट जाए और स्थिति जल्दी सामान्य हो जाए.
Published in Grihshobha.in
Friday, May 8, 2020
Corona Virus#coronavirus: मैट्रो में सफर करने वाले जान लें ये guidelines
19 मार्च के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी लोगों से हर जरूरी उपाय करने, संक्रमण से बचने और “जनता कर्फ्यू” की अपील की है.
देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण को लेकर काफी सावधानी रखी जा रही है. दिल्ली की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली दिल्ली मेट्रो में भी इस महामारी से निपटने के सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए हैं. दिल्ली मेट्रो (DMRC) ने इसको लेकर एक एडवाइजरी जारी की है जिसे आज से लागू कर दिया गया है.. आइए घर से निकलने से पहले इसकी जानकारी कर लेते हैं –
1- एडवाइजरी में साफ साफ कहा गया है कि बहुत जरूरी होने पर ही मेट्रो में सफर के लिए निकले. इस दौरान सोशल डिसटेंस मेनटेन करें, लोगों से हाथ मिलाने, गले लगने और किसी भी वस्तु को छूने से बचे.
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2- मेट्रो यात्रियों को एक सीट छोड़ छोड़ कर बैठना होगा.
3- मेट्रो में, स्टेशन पर या यात्रियों को आपस में भी एक मीटर की दूरी बनाई रखनी होगी.
4- मेट्रो में सफर कर रहे यात्रियों की सभी स्टेशन पर रेंडम थर्मल स्क्रीनिंग होगी. कोई भी बुखार से पीड़ित मिला तो उसे चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा जाएगा. और यदि कोरोना पाजिटिव निकला तो क्वारनटाईन (Quarantine) के लिए भेजा जाएगा, मतलब जब तक वो ठीक नहीं हो जाता है उसे अलग अकेले कमरे में रखा जाएगा और इस दौरान दवाईयां, खाने पीने की सभी जरूरी चीजे दी जाएगी.
5- इसके अलावा एडवाइजरी में ये भी कहा गया कि जिस स्टेशन पर ज्यादा भीड़ होगी और एक मीटर की दूरी रखना संभव नहीं होगा, वहाँ मेट्रो नहीं रुकेगी.
6- साथ ही जन अपील में ये भी कहा गया कि जो भी सर्दी, खांसी, जुकाम या कोरोना से सम्भावित पीड़ित हो सकते हैं वो यात्रा से बचे. इस वैश्विक महामारी के संकट के समय में सबको सहयोग करने और इसके प्रसार को रोकने के लिए सभी एतिहात बरतने की जन अपील की गई.
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय समय समय कोरोना वायरस से बचने के लिए समय समय पर एडवाइजरी जारी कर रहा है.. मेट्रो परिसर में रहने के दौरान सभी को उनका पालन करना होगा. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन इससे पैनिक होने की जरूरत नहीं है बस इसका पालन करते रहने से जल्दी ही संक्रमण खत्म हो सकता है और इसके लिए हम सबको सहयोग करने की जरूरत है बस.
Published in https://www.grihshobha.in/corona-virus/delhi-metro-guidelines-on-coronavirus
#coronavirus: भारत सरकार की इस वेबसाइट से ले जानकारी और अफवाहों से रहें दूर
सरसों के तेल के हैं अनेक फायदें,जानें यहां
Friday, March 20, 2020
10 टिप्स से मोबाइल फोन को रखे Corona Virus से दूर
Tuesday, March 17, 2020
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आखिर क्यों बना सरोगेसी का कानून, जानें अहम बातें
आखिर क्यों बना सरोगेसी का कानून, जानें अहम बातें
जापान के कपल का केस था जिसमें वो सरोगेट करने के लिए भारत आए और यहां की एक महिला की कोख को किराये पर लिया लेकिन बच्चे के जन्म के एक महीने पहले ही इस कपल का ब्रेक अप हो गया.

सरोगेसी उस अरेंजमेंट को कहा जाता है जिसमें कोई भी शादीशुदा कपल बच्चे पैदा करने के लिए किसी महिला की कोख किराए पर लेता है. इसकी कई वजहें हो सकती हैं. जैसे कि अगर कपल बच्चे पैदा करने में अक्षम है, या फिर महिला को जान का खतरा हो बच्चे पैदा करने में. जो औरत अपनी कोख में दूसरों का बच्चा पालती, वो सरोगेट मदर कहलाती है.
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क्यों बना आखिर कानून?
साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट के पास एक मामला आया बेबी मांजी यामादा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया. ये जापान के कपल का केस था जिसमें वो सरोगेट करने के लिए भारत आए और यहां की एक महिला की कोख को किराये पर लिया लेकिन बच्चे के जन्म के एक महीने पहले ही इस कपल का ब्रेक अप हो गया. अब बच्चे का पिता बच्चे को अपने साथ जापान ले जाना चाहता था मगर न तो भारत और न ही जापान की तरफ से उसको इजाजत मिल रही थी. सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बच्चे को उसकी दादी को सौंपा गया और साथ ही सरोगेट को लेकर एक बहस छिड़ गई. 2009 में लाॅ कमीशन ऑफ इंडिया ने पाया कि भारत में सरोगेसी की सुविधा का विदेशी लाभ उठा रहे हैं तो इसे बंद करने की सलाह दी गई.
लोकसभा ने 19 दिसम्बर 2018 को “सरोगेसी रेग्युलेशन बिल 2016” पास कर दिया. इस कानून के कुछ अहम बिंदु है – –
1- कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. अब केवल परिवार के सदस्यों या करीबियों में ही कोई सरोगेट बन सकेगी और वो भी NRI या फाॅरेनर नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पैसे की लेन देन नहीं होगी. प्रेग्नेंसी के समय खाने पीने और दवा के लिए जरूरत के पैसे ही दिए जा सकते हैं ताकि बच्चे की बेहतर देखभाल हो सकें.
2- सरोगेट माँ की उम्र 25-35 साल के बीच ही हो सकती है. वो खुद भी शादी शुदा होनी चाहिए और कम से कम एक बच्चा उसका अपना हो.
3- शादी शुदा दंपति को ही सरोगेसी की सुविधा मिलेगी और उनकी शादी के भी कम से कम पांच साल पूरे होने चाहिए.
लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल, सिंगल या समलैंगिक को सरोगेसी करने की इजाजत नहीं है.
4 – इस नियम को तोड़ने पर 5 से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है. सारे रिकार्ड क्लिनिक को भी 25 साल तक रखने होंगे.
फिल्मी दुनिया में सरोगेसी का एक ट्रेंड ही बन चुका था..
इस नियम के लागू होने से पहले ही करण जौहर सरोगेसी से तीन बच्चों के पिता बन चुके हैं.. जबकि वो शादी शुदा नहीं है.. उन्हें समलैंगिक माना जाता है जबकि उन्होंने कभी ये बात स्वीकार नहीं की है. इसके अलावा तुषार कपूर, शाहरुख खान, आमिर खान आदि भी पहले ही सरोगेसी से बच्चों का जन्म करा चुके हैं लेकिन कानून के आने के अब नियम शर्तों का पालन करना जरूरी हो गया है.
सिर्फ बेटी ही नहीं बेटों की परवरिश पर भी दे खास ध्यान
Monday, January 27, 2020
बातचीत को प्रभावी कैसे बनाया जाए
मन बड़ा व्याकुल सा है
Saturday, January 18, 2020
जाने NCRB की रिपोर्ट के अनुसार अपराध का स्तर
जानें, राष्ट्रीय आपराधिक रिकार्ड ब्यूरो
NCRB की ताजा रिपोर्ट 9 जनवरी 2020 को आई है, जिसमें आकड़े चौंकाने वाले हैं.

बाल अपराध – रिपोर्ट कहती हैं कि 2018 में 1 लाख 40 हजार से ज्यादा अपराध हुए हैं. अगर इसे प्रतिदिन के हिसाब से देखे 388 अपराध हर दिन हुए है जो कि बहुत अफसोस जनक है .
CRY ( Child Right and You) NRCB की रिपोर्ट पर अपने अध्ययन में कहती हैं कि बाल अपराध में सबसे ज्यादा मामले अपहरण और जोर ज़बरदस्ती के है जो पिछले साल की तुलना में लगभग 16% बढ़े हैं. वही पास्को ( Protection of child from Sexual Offences) के अंतर्गत दूसरे सबसे ज्यादा अपराध 39,827 मामलें दर्ज हुए हैं जिसमें 9312 केस रेप के दर्ज हुए हैं.
पॉलिसी रिसर्च की डायरेक्टर प्रीति मेहरा का कहना है कि “जहां एक तरफ बाल अपराध की संख्या में वृद्धि हुई है वही दूसरी इन मामलों में रिपोर्ट का दर्ज होना ये दर्शाता है कि खुद लोग और सरकार इन आपराधिक मामलों में सचेत हुई है l”
बाल अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार का नाम सबसे ऊपर है जहां 51% अपराध होते हैं और इन सभी प्रदेशों में उत्तर प्रदेश का नाम सबसे ऊपर आता है l
महिला अपराध – NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक हर 15 मिनट में एक रेप का मामला देश में दर्ज हो रहा है l 2018 में लगभग 34,000 रेप के मामले सामने आए, पिछले वर्ष की तुलना में अपराध में वृद्धि हुई है l
महिला अपराध में बढ़ोतरी की एक वजह पुलिस और कानून का सख्त न होना भी है l जैसा कि पिछले साल कुलदीप सिंह सेंगर का रेप केस सामने आने पर पुलिस ने पीड़ित के ही परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था l
किसानों की आत्महत्याएं.. रिपोर्ट के मुताबिक 10,349 किसानों ने आत्महत्या की है.. फसल खराब होने, बढ़ते कर्ज या अन्य कारणों के चलते
साम्प्रदायिक/ जातीय दंगे – पिछले कुछ महीनों में प्रोटेस्ट और उस दौरान हिंसा भी सामने आ रही है जो कि एक गलत शुरुआत है l जातीय और साम्प्रदायिक दंगे पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज हुए हैं l
मेट्रो शहरों में अपराध में बढ़ोतरी – रिपोर्ट के मुताबिक मेट्रो शहरों में अपराध के मामलों में दिल्ली सबसे ऊपर है जहां दिल्ली में 29.6 प्रतिशत है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और विशेष व स्थानीय कानून (एसएलएल) शामिल हैं l
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक साल दर साल अपराध, हिंसा में बढ़ोतरी ही हो रही है l सरकार को इस पर अध्ययन कर अपराध के कारण और रोकथाम के उपाय को लागू की जरूरत है और साथ ही पुलिस प्रशासन को आपराधिक मामलों में सचेत रहने और संवेदनशील होने की जरूरत है.. ताकि हर अपराध record हो सकें और FastTrack कोर्ट के माध्यम से एक समय सीमा के अंदर न्याय मिलने से कहीं न कहीं अपराध में कमी आएगी l 2012 का दिल्ली का सबसे क्रूरतम अपराध गैंगरेप पर अब 7 साल बाद फांसी की सजा तय की गई l न्याय में विलंब और अपराध को छुपाया/दबाया जाना भी अपराध होने की वजह है l हम सबको अपराधी का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए भले ही वो किसी भी परिवार या तबके से आता है.. राजनीति में भी आपराधिक व्यक्तियों का बहिष्कार जरूरी है.. वोट देते समय जांच पड़ताल जरूर करनी चाहिए ताकि अपराधी को भी अपराध करते समय सामाजिक बहिष्कार का डर सताये l
Published in www.sarita.in