Friday, October 9, 2020

बदलाव


हमेशा से ही भारतीय समाज में कोई न कोई सामाजिक समस्या/बुराई /अंधविश्वास /सामाजिक कुरीतियां/अपराध रहा है और उसे खत्म करने के लिए उसी समाज के लोगों ने प्रयास किए है. वही स्थिति अब भी है, केवल एक दूसरे को कोसने से और ये कहने से कि ज़माना बहुत खराब है.. कुछ बदलाव नहीं होने वाला.
समाज में जो कुरीतियां विभिन्न धर्म/जातियों में प्रचलित है उसे खत्म करने के हमे प्रयास करने होंगे. युवा वर्ग को ही इसके लिए खड़ा होना होगा. ऐसी समस्याएं भी दो स्तर पर खत्म की जा सकती है एक तो सामाजिक पहल जिसके लिए विमर्श, जागरुकता फैलायी जाए और दूसरा कानूनी स्तर पर.. जब कोई हमें/आपको जबरन कुछ करने के लिए बाध्य कर रहा हो तो कानूनी सहायता ली जाए.
दोनों ही तरीकों पर जब तक पूरी तरह से अमल नहीं किया जाएगा बदलाव नहीं होने वाला. बदलाव करने के लिए कोई क्रांति नहीं करनी है, कोई प्रदर्शन नहीं करना है. बस प्रतिदिन अपने आसपास हो रही सभी अच्छे - बुरी चीजों पर नजर रखनी है और कुछ अनुचित दिखने पर टोक देना है.. अगर कोई नुकसान पहुंचाने वाला अपराध, कृत्य नहीं है तो बस टोकना ही पर्याप्त है. बस इसके लिए केवल आपको संवेदनशील होना है और "हमसे क्या मतलब है? " वाले एटीट्यूड को छोड़कर "हमे अपने समाज को बेहतर बनाना है" वाली सोच रखनी है. जब आपकी सोच बेहतरी के लिए बदलाव पर होगी तो बहुत आसान होगा कि आप किसी को अनुचित देखकर टोके.
जब हम किसी को ये बताते हैं कि जो ये आप कर रहे हैं वो गलत है तो पहला रिएक्शन हमें बुरा ही मिलेगा.. लेकिन बार बार कहने पर सामने वाले पर असर पड़ेगा और यही से बदलाव होने लगेगा.. मसलन आपने किसी एक को बोला और उसने समझ लिया तो वो दस और लोगों को बोलेगा.. इस तरह बदलाव की कड़ी जुड़ती जाएगी. 😃



इसे उदाहरण से समझ सकते हैं.. आप रोज शाम को वाॅक करने जा रहे हैं और आपको रास्ते में या पार्क में 15-17 साल के लड़कों का एक ग्रुप दिखता है जो केवल लड़कियों पर कमेन्ट करने के इरादे से खड़े होते हैं.. आपने उन्हें टोका तो शायद उन्हें बहुत बुरा लगेगा.. हो सकता है कि कुछ बहस भी करें.. ये नए जवान होते बच्चे है इन्हें तो अच्छे - बुरे की भी समझ नहीं होती है मगर आपको पता है कि अगर ऐसे ही इन्हें छूट मिलती रही तो आगे चलकर कुछ बड़ा अपराध भी कर सकते हैं तो अभी उन्हें रोकना उनके ही हित में है.. उन्हें टोकने से पहले आप अपने साथ दो चार और लोगों को ले ले तो बेहतर रहेगा.. कई बार बोलने पर ये बच्चे खुद ही ऐसी हरकते बंद कर देंगे और जैसे ही इनके दिमाग में ये आएगा कि ये कमेन्ट पास करना आपराधिक कृत्य है इस पर लगाम लगने लगेगा. ऐसे बातेँ होने की एक बहुत बड़ी वज़ह है कि हम बच्चों से अच्छे - बुरे चीजों पर बात नहीं करते. केवल महंगे स्कूल, कॉलेज में प्रवेश दिला देने से उनके व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास नहीं होगा.

दूसरा उदाहरण भी ले सकते हैं कि आपकी कॉलोनी, मोहल्ले में कुछ लोग सड़क पर कूड़ा डाल देते हैं, अपनी छत से फेक देते हैं.. आप देखते ही इन्हें मना करें. शुरू में एक दो दिन बुरा लगेगा फिर ऐसा करना बंद कर देंगे और आपका एरिया साफ, सुथरा, बीमारी मुक्त होगा.

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