WHO के एक अनुमान के अनुसार, 2020 तक भारत की लगभग 20% आबादी किसी न किसी मानसिक रोग से ग्रस्त होगी.
मानसिक बीमारी शारीरिक बीमारियों की तरह दिखाई नहीं देती है तो लोग न तो इसके बारें में जानते हैं न ही इलाज कराते हैं. किसी भी तरह के व्यवहार में परिवर्तन पर कोई ध्यान नहीं देता और मनोवैज्ञानिक के पास जाने से भी कतराते है. इसकी वज़ह समाज में फैला एक मिथ ये भी है कि हमें कोई मनोचिकित्सक के पास जाता दिखता है तो हम उसे पागल समझते हैं.
किसी भी तरह की उलझन, परेशानी, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन हमारे व्यक्तित्व विकास में भी बाधक बनता है. आज कल की दौड़भाग भरी जिंदगी में अकेलापन भी मानसिक अस्वस्थ्यता एक बडा कारण है. पढ़ाई, नौकरी या कुछ बड़ा करने की चाहत में हम घर से बाहर जाते हैं और रोज रोज की भागमभाग में खुद पर ध्यान देना ही भूल जाते हैं.
अगर समय से हम मनोचिकित्सक, सलाहकार के पास जाए तो ऐसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं
भारत में युवा आबादी का एक बड़ा वर्ग ऐसी छोटी छोटी मानसिक समस्याओं से जूझता है. कभी कैरियर, कभी कोई पारिवारिक समस्या और कभी ब्रेकअप हो जाने पर मानसिक समस्याओं के चपेट में आ जाती है. घरेलु महिलाए जो ज्यादा सामाजिक नहीं है, घर के बुजुर्ग भी मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाते हैं
हम क्या खा रहे हैं इससे हमारा शारीरिक स्वास्थ्य निर्धारित होता है और क्या सोच रहे हैं? किन किन विचारों के बीच हमारा रहना होता है? इससे मानसिक स्वास्थ्य तय होता है. अच्छे सकारात्मक विचार वालों के बीच रहने से हमारा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा हो सकता है. इसके साथ ही कई बार अचानक घटित हुई कोई घटना पर ज्यादा सोच विचार विचार करने लगते हैं इससे भी तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, उलझन होने लगती है और अगर बहुत समय ऐसा चलने लगे तो डिप्रेशन में आने लगते हैं.
मानसिक समस्याएं अदृश्य किन्तु घातक होती है, ये व्यवहार में परिवर्तन लाने के साथ साथ कई बार उग्र भी बना देती है.. इससे निपटने के लिए हमें जागरूक होने की जरूरत है और जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक /काउंसलर की भी मदद लेने के लिए तैयार रहना चाहिए..
आइए आज अन्तर्राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वस्थ्य रहने के लिए कुछ जरूरी बातों पर गौर करते हैं...
अच्छा सुने और अच्छा सोचे, सकारात्मक रहे..
अगर कुछ ऐसा घटित हो रहा है कि आप परेशान, बैचैन रहते हैं तो इसकी वज़ह ढूंढ कर उसे खत्म करें. जरूरत पड़ने पर परिवार, दोस्तों या मनोचिकित्सक की मदद ले.
अच्छा और घर का पका हुआ खाना खाए. कहते भी हैं कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है. मौसमी सब्जी, फल खाने में शामिल करें. जंक फूड का सेवन एक तय सीमा में ही करें.
पर्याप्त नीद ले कम से कम 6 घंटे. जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डाले.
मन को शांत रखने के लिए योग, ध्यान और व्यायाम करें. कुछ समय खुली हवा में प्रकृति के बीच रहे.
दिमागी खुराक के लिए कुछ गेम खेले या किताब पढ़े. कुछ समय अपने शौक को पूरा करने में भी दे.
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