जब से madiaon से सम्बंधित सूचना दी हैं, तीन बार कॉल आ चुकी है, जानकारी के लिए। माना कि शुरू की दो कॉल पर ठीक से ना सुना, ना जवाब दिया फिर भी देर से ही सही जागे तो। हमें लगता हैं कि हर किसी को जिम्मेदार नागरिक की तरह अपना फर्ज अदा करना चाहिए और कुछ गलत होने पर सूचित करना चाहिए। तो हो सकता है कि समाज से कुछ बुराई कम की जा सकें। पुलिस को समाज की सेवा में तत्पर होना चाहिए और समय के भीतर समस्या का निवारण करना चाहिए।
Saturday, April 23, 2016
Friday, April 22, 2016
up पुलिस
देर आये दुरुस्त आये....
स्थान... madiaon ऑटो स्टैंड, निकट madiaon थाना, लखनऊ
कुछ सज्जन( मुस्टंडे) लोग खड़े थे, जैसे ही कोई टैक्सी भरती, झट ड्राइविंग सीट पर बैठकर कर कहते थाने चलो और सारी सवारी उतार देते। दोपहर का बारह बजे का समय, तेज धूप वैसे ही लोगो को परेशान कर रही थी, ऊपर से ये सघन चेकिंग अभियान। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात इस सघन चेकिंग अभियान में ना तो कोई वर्दीधारी पुलिस, ना ही यातायात पुलिस और ना ही RTO ऑफिसर। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये क़ानूनी रूप से सही है कि दूर खड़े होकर देखो, सवारी भरते ही खाली करवाओ और पुलिस स्टेशन के बहाने टैक्सी को एक गली में ले जाओ?? क्या इसकी परमिशन है? अगर कोई अभियान था मौजूदा अधिकारी कहा थे? ये नौंटकी पुलिस स्टेशन से 50 मीटर की दूरी पर हो रही थी। सब् की तरह मैं शिकार हुई, एक में बैठी, उतार दी गयी, दूसरी में बैठी उतार दी गयी और फिर मैंने पूछा ये क्या नौटंकी है? जवाब मिला पेट्रोल टैक्सी को रोकना है, अरे भाई रोकना है तो खाली टैक्सी को रोको, पैसेंजर को क्यों परेशान कर रहे हो। उन्होंने कहा पीछे वाली में बैठ जाओ वो जायेगी, और हद तो तब हो गयी जब उसे भी रोक कर सवारी उतारने लगे, अब सहनशक्ति जवाब दे चुकी थी, मैंने कहा कोई नहीं उतरेगा मैं पुलिस को बुलाती हूँ और 100 डायल किया, 100 का नाम सुनते ही बोले कि मैडम के टैक्सी को जाने दो और बताया कि ये RTO ऑफिसर जो .....। खैर हमारा टैक्सी आगे बढ़ गयी और कुछ देर बाद 100 par बात हुई और मैंने सारी डिटेल दी। सेण्टर पहुची बच्चे जा चुके थे मूड बहुत अपसेट था , मैंने फिर से 100 पर डायल किया इस बार मैम ने उठाया, फिर से डिटेल पूछी, फिर कहा सर से बात करे, मैंने फिर से कहानी कही और पूछा कि बिना पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और RTO के कौन सा अभियान चल रहा था और पैसेंजर को क्यों परेशान किया जा रहा था, जवाब मिला वो शायद पेट्रोल वाली गाड़ी की चेकिंग थी, मैने पूछा जिम्मेदार अधिकारी कहाँ थे, उन्होंने कहा दिख्वाते हैं मैंने कहा कि ये न्यूज़ पब्लिश करवाउंगी, जवाब मिला बिलकुल करवाये। खैर दो घंटे बात कंप्लेंट no मिला गया और कॉल आई कि आप कहा पर हैं मैंने कहा ऑफिस में, कंप्लेन के वक्त वही थी, थोड़ा बहुत जवाब दिया मैंने, बिजी थी सो बात नहीं कर पायी।
1.. सवाल ये उठता है कि तीसरी बार में कंप्लेन नंबर क्यों मिला, पहली बार में क्यों नहीं?
2.. एक बार सारी डिटेल बताने के बाद बार बार क्यों पूछना, क्या मै अपराधी हूँ?
3... इंतना सुस्ता एक्शन क्यों जबकि बहुत नजदीक हैं पुलिस स्टेशन?
4. जब उस रास्ते से निकली वापस तो एक बाइक पर पुलिस खड़ी थी।
तो दोस्तों क्या कहाँ जाये देर आये दुरुस्त आये, जब राजधानी का ये हाल हैं तो गांव का क्या होगा??
Thursday, April 21, 2016
ग्रुप फ़ोटो
अब हमारे जॉब प्रोफाइल में एक नया एक्सपीरियंस ऐड हुआ सिलाई टीचर। कहते हैं कि सीखी हुई चीज कभी बेकार नहीं जाती, जब 12th पास आउट हुई माँ ने अड्मिशन करा दिया , क्योंकि उन्हें इसका बहुत शौक था, पापा से लड़ कर हम बहनों को भेजना शुरू किया, पापा नहीं चाहते थे कि हम ये सीखे, हम भी दीदी के साथ खेलते कूदते पूरा कोर्स सीख गए, फिर काफी कुछ सिला भी। वक्त और आगे की पढ़ाई के साथ आगे बढ़ गए। इसको पता था कि आज ये सीखा हुआ काम आएगा, क्योंकि इतनी दूर गांव में, भीषण गर्मी में कोई जाने को तैयार नहीं, सो हम ही उतर गए जंग में, बच्चे बहुत खुश हैं, क्योंकि उनको उनके गांव में ही सुविधा मिल रही हैं, धीरे धीरे बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है।
वार्तालाप
शक्तिस्वरूपा सिलाई केंद्र में बात करने से पता चला कि इन बच्चियों के भी बहुत सपनों हैं, बहुत सारी डिमांड की हैं सबने, देखते हैं कितनी पूरी कर पाते हैं, लेकिन परिवार और समाज की बेढ़ियाँ अभी भी जबर्दश्त तरीके से बंधी हैं, हमने घर घर जाकर बोला है तो लड़कियां आना शुरू हुई हैं, बहुत जरुरी हैं इनको समाज की मुख्य धारा से जौड़ना और आश्चर्य की बात ये हैं कि अभी भी कुछ लोग अशिक्षित हैं, जबकि गांव में ही 8th तक सरकारी स्कूल है जहा सारी सुविधाएँ हैं, और मिड डे मील भी अच्छे से बनता हैं, स्कूल में खूब साफ सफाई है, खेलने के लिए प्ले ग्राउंड हैं। हमने उन अशक्षित बच्चों के लिए एक "अनोखी पाठशाला" सोची है, जल्द ही शुरू करेंगे। हमने आज इन्हें कानून, पुलिस 100, और 1090 की जानकारी दी, जो किसी को पता तक ना थी और सरकारी योजनाओं के बारे में भी बात की।
रीता शर्मा
शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान
सरैया, रामपुर बक्शी का तालाब, लखनऊ
Tuesday, April 19, 2016
Friday, April 15, 2016
Thursday, April 14, 2016
samaj
आज का समाज इतना दूषित हो चूका हैं कि हमारे मन साफ़ रखने से कुछ नहीं होगा। चाहे वो स्त्री हो या पुरुष। हम सिर्फ ये कह कर नहीं छोड़ सकते हैं कि वो बड़ा हैं, क्योंकि ये वहशी, दरिंदे बड़े ही होते हैं, बच्चों के केस तो काम ही दिखते हैं। जीरो टॉलरेंस पर हम सब को रहना चाहिए, कानून तो पहले से ही मौजूद हैं। एक किस्सा बताती हूँ एक दिन एक स्कूल बच्ची हमारे साथ ऑटो में बैठी और एक बेहद ही बुजुर्ग सज्जन पहले से थे, बच्ची उनके बगल में बैठी, उन्होंने बच्ची के पैरों पर हाथ रखा, जब तक मैं बोलती, वो चिल्ला पड़ी...... ये क्या बदतमीज़ी है.... मैंने तो ये देख लिया था, सज्जन बोले बद्तमीज़ लड़की चुप कर... मैंने क्या किया है और साथ में पुरुष सज्जन भी बोले बहुत बदतमीज़ है बड़ों से बोलने की तमीज़ नहीं.... अब बारी मेरी थी.... 100 no डायल किया और पास के पुलिस स्टेशन पर ऑटो रुकवा लिया और बोली चलो ... बताते हैं बड़ों से बात करने की तमीज़.... बुजुर्ग सज्जन भाग लिए। तो ये तर्क बिलकुल ना दे कि वो बड़ा है जाने दो.....
Tuesday, April 12, 2016
Sunday, April 10, 2016
Thursday, April 7, 2016
सरकार का उत्तम प्रयास
सरकार के सराहनीय कदम और दूसरों को इनसे सबक-------
उत्तर प्रदेश---- सरकार का बेहतरीन और सराहनीय पहल और उम्मीद से ज्यादा सफल रही, 1090 वीमेन पॉवर लाइन। अनचाहे कॉल और sms से परेशान लड़कियों से शुरू किया गया इस प्रयास अब नए आयाम तय कर रहा हैं। अब घरेलू झगड़ा, राह चलते किसी का तंग करना, कोई सलाह, कोई पुलिस अधिकारी का नंबर.... सबका एक सोलुशन...1090। बेहतरीन पहल लेकिन और प्रयास की जरुरत। अन्य प्रदेश को इस बारे में विचार करना चाहिए।
बिहार...... बिहार में पूर्णतया शराबबंदी पिछड़े कहे जाने वाले राज्य का अग्रणी कदम। बहुत सारे अपराध और परेशानियों पर नियंत्रण, लेकिन इसका तोड़ भी निकाला जा रहा होगा। प्रशंशनीय कदम, अन्य प्रदेश को सोचना चाहिए इस बारे में।
दिल्ली..... देश राजधानी दिल्ली, एक केंद्र शासित प्रदेश, माननीय केजरीवाल जी की पहल.... मोहल्ला क्लीनिक एक उत्तम प्रयास। जिसकी प्रशंसा यूनाइटेड एस्टेट ने भी की हैं। पहल अच्छी है, बहुतों को मदद मिलेगी, बशर्ते सही से लागू हो,अन्य प्रदेश को सबक लेना चाहियें
Wednesday, April 6, 2016
ध्यान
मनुष्य एक नायाब तोहफा है, परमात्मा का इस धरती पर। उसे सर्वसमर्थ और बुद्धिमान बना के भेजा है, ताकि वो उत्तम सृष्टि की रचना कर सकें। मनुष्य (स्त्री और पुरुष) को परमात्मा ने सारे गुणो से नवाजा हैं-- प्रेम, त्याग, तपस्या, समर्पण, जनकल्याण और इन सब के साथ ही अहंकार, स्वार्थ, लोभ, मोह। ताकि इन सबसे एक उत्तम सृष्टि की रचना कर सकें, लेकिन अब परमात्मा प्रदत्त सृष्टि में मनुष्य स्वार्थी हो चला है, वो सभी गुणों को अपने हित के लिए ही साध रहा हैं।
अब मनुष्य एक रोग हो चला है, अब जरुरत आन पड़ी इस रोग को पहचानने और इसके चिकित्सा की। इस "मनुष्य" नामक रोग दो तरीके से हो रहा हैं--1-- बाहरी 2--- आतंरिक। औषधि से हम बाहरी रोग का निवारण कर रहे हैं और नित नए उपाय भी खोजे जा रहे हैं। आतंरिक रोग का निवारण "ध्यान" है और निशुल्क भी। समाज में फैल रहा जहर इस गंभीर बीमारी का घोतक है। उस परमात्मा को याद करे कुछ क्षण, एक अद्भुत, अलौकिक आनंद की प्राप्ति होगी, ये स्वार्थ, लोभ, मोह, छल, अहंकार का स्वत हो जायेगा और हम स्व की प्राप्ति करेंगे, ये"स्व" परहित की भावना लिए हुए होगा। तो चले आधात्मिक शांति और आतंरिक रोग समाप्त करने के लिए ध्यान की ओर.....
##चलो ध्यान की और##
Tuesday, April 5, 2016
रिश्तों के बदलते हुए आयाम
रिश्तों के बदलते हुए आयाम
रिश्ते समाज को चलाने के लिए बहुत जरुरी होते हैं। पति-पत्नी, बच्चों से परिवार और परिवार से समाज का निर्माण होता हैं। एक अच्छा समाज ही एक अच्छे देश का निर्माण कर सकता है। परिवार समाज और देश की धुरी है। अच्छे व्यक्ति के निर्माण के लिये अच्छे आचार, विचार, संस्कार, शिक्षा-दीक्षा का होना जरुरी हैं, ताकि वह परिवार का, समाज का और देश का दायित्व निर्वाह कर सकें।
वर्तमान समय में रिश्तों के मायने बदल रहे हैं। युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता को अपना रही है और माननीय न्यायालय ने युवाओं के हक़ में बहुत सारे कानून भी बना दिये हैं। ये सारे अधिकार और स्वछँदता उन्हें उनकी तरक्की के लिए दिये गए हैं, लेकिन उसके दुष्परिणाम निकल कर सामने आ रहे हैं। युवा कैरियर को पाने, रिश्तों की उधेड़बुन,आगे बढ़ने की अंधाधुंध दौड़ में चल रही है, जिसमे वो सही और गलत का फर्क भूल जाते हैं और मनवांछित परिणाम ना आने पर डिप्रेशन, अवसाद, मानसिक रोग, आत्महत्या, मर्डर जैसे गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं, युवा पीढ़ी में आत्म- संयम, आत्म-नियन्त्रण, सहनशीलता, धैर्य खत्म हो चुका हैं, जोकि हर इंसान के सफल और संतुष्टि प्रद जीवन के लिए बहुत जरुरी है। कैरियर की असफलता, रिश्तों का टूटना और कडुवाहट के चलते गलत कदम उठा रहे हैं, इससे उनका दर्द तो खत्म हो जा रहा है, लेकिन परिवार और समाज के लिए असहनीय दर्द छोड़ जाते हैं।
आज के परिदृष्य में माँ-पिता का दोस्ताना व्यवहार, कोई परेशानी होने पर counsellor और doctor से सलाह लेना जरुरी हो गया है, समय पर समस्या का निदान हो सकता हैं। युवाओं की गला-काट दौड़ में माता-पिता का ये दायित्व बन चुका हैं कि बच्चों की परेशानियों में काउंसलर बनकर मदद करें, ताकि वो गुमराह होने से बचे, क्योंकि युवा पीढ़ी पर ही देश का दारोमदार टिका हुआ हैं।
Saturday, April 2, 2016
रिश्ते
हमने लिव इन जैसी पाश्चात्य सभ्यता ग्रहण तो कर ली, लेकिन भारतीय मूल्यों में लपेट कर, हम बड़ी हस्तियों और फिल्मी दुनिया को छोड़ दे तो ऐसे रिश्ते दोस्ती से शुरू होते हैं और आपसी समझ से शादी का कमिटमेंट पर लिव इन पर आते हैं। यदि इनमे से कोई एक निकलना चाहे तो परिस्थितियां गंभीर हो जाती हैं। ऐसे रिश्तों में हम ऐसी डगर में चल पड़ते हैं कि दोस्त छूट जाते हैं और शादी ना होने पर सामाजिक और पारिवारिक प्रताड़ना झेलने का डर धीरे धीरे अवसाद में धकेलता हैं और हम लाइव इन पार्टनर को वापस पाने की कोशिश में मानसिक रूप से टूटने लगने हैं और ऐसी स्थिति में व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है, अगर दोस्त और परिवार का साथ मिल जाये तो ठीक.... नहीं तो क्षण क्षण मरता एक इंसान आखिर में आत्महत्या का सहारा लेता हैं। दीर्घकालिक परिस्थितियों से उपजी पीड़ा का क्षण भर में निदान हैं आत्महत्या।
जैसा मीडिया में आया कि प्रत्युषा बनर्जी की व्हाट्स एप्प स्टेटस उसकी बुरी स्थिति दर्शा रहा था, फिर भी किसी भी दोस्त और परिवार का ना ध्यान देना बताता हैं कि रिश्तों में कितना स्वार्थ आ गया हैं।
##दुखद घटना##
Friday, April 1, 2016
कानून में बदलाव
जयपुर में 12 साल की बच्ची के साथ अन्नाय में सहभागी बन रही हैं, पुलिस पर पत्रकार संघ, समाज सेवक और सोशल मीडिया के दवाब के चलते दोषी ACP को suspend करके नया अधिकारी लाया गया है और फिर से जाँच चल रही हैं और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया गया हैं। मगर ये क्या ये नैतिक रूप से गलत नहीं है कि बच्ची फिर से सवालों का जवाब दे, ये मानसिक पीड़ा देना नाबालिग बच्ची को, क्या कानून इज़ाज़त देता है? अगर देता है तो बदले ऐसा कानून, दोषी कोई और, पेशी बार बार भुक्तभोगी की।
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