Saturday, April 2, 2016

रिश्ते


हमने लिव इन जैसी पाश्चात्य सभ्यता ग्रहण तो कर ली, लेकिन भारतीय मूल्यों में लपेट कर, हम बड़ी हस्तियों और फिल्मी दुनिया को छोड़ दे तो ऐसे रिश्ते दोस्ती से शुरू होते हैं और आपसी समझ से शादी का कमिटमेंट पर लिव इन पर आते हैं। यदि इनमे से कोई एक निकलना चाहे तो परिस्थितियां गंभीर हो जाती हैं। ऐसे रिश्तों में हम ऐसी डगर में चल पड़ते हैं कि दोस्त छूट जाते हैं और शादी ना होने पर सामाजिक और पारिवारिक प्रताड़ना झेलने का डर धीरे धीरे अवसाद में धकेलता हैं और हम लाइव इन पार्टनर को वापस पाने की कोशिश में मानसिक रूप से टूटने लगने हैं और ऐसी स्थिति में व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है, अगर दोस्त और परिवार का साथ मिल जाये तो ठीक.... नहीं तो क्षण क्षण मरता एक इंसान आखिर में आत्महत्या का सहारा लेता हैं। दीर्घकालिक परिस्थितियों से उपजी पीड़ा का क्षण भर में निदान हैं आत्महत्या।
जैसा मीडिया में आया कि प्रत्युषा बनर्जी की व्हाट्स एप्प स्टेटस उसकी बुरी स्थिति दर्शा रहा था, फिर भी किसी भी दोस्त और परिवार का ना ध्यान देना बताता हैं कि रिश्तों में कितना स्वार्थ आ गया हैं।
##दुखद घटना##

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