डॉ अम्बेडकर ने जब आरक्षण की अवधारणा सामने रखी थी तो उनका उद्देश्य महज सबको समान स्तर पर लाना था l जिसके लिए शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए सरकारी नौकरी देकर समान स्तर पर लाना था l
इसी आधार पर संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की गई l स्वतंत्रता से पहले और बाद में जिस तरह की विकट परिस्थिति थी उसके लिए जरूरी भी था कि शोषित वर्ग को कुछ विशेषाधिकार दिया जाए ताकि देश के निर्माण में उनका भी योगदान रहें l हालाकि डॉ अम्बेडकर ने दस साल बाद इसके समीक्षा की भी बात कही थी मगर ये लगातार राजनीति के भेट चढ़ता रहा l आरक्षण के चलते शोषित वर्ग को लाभ तो जरूर मिला मगर इनकी संख्या गिनी चुनी हैं l जिन्होनें उच्च शिक्षा और नौकरी हासिल किया.. पीढ़ी दर पीढ़ी उन्हीं को लाभ मिलता आ रहा है l जबकि अम्बेडकर जी का उद्देश्य तो सभी को समान स्तर पर लाना था l आज़ादी के इतने सालों बाद भी उनका सपना अधूरा ही है, वजह इसकी समीक्षा न होना और राजनीति का शिकार होना हैं l गाँवों में आज भी बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं जिनका शिक्षा और आरक्षण से कोई वास्ता नहीं है और न ही जिम्मेदारजन उन्हें जागरूक करने और आगे बढ़ाने की कोई कोशिश करते हैं l एक तरह से देखा जाए तो खुद आरक्षित वर्ग अपने ही लोगों के अधिकारों का शोषण कर रहा है l एक आरक्षित जाति से जुड़े अधिकारी के बच्चे, नेता और मंत्री के बच्चे, बिज़नेसमैन के बच्चे आरक्षण के अंतर्गत नहीं आने चाहिए क्यू कि उद्देश्य तो समान स्तर पर लाना था और उद्देश्य पूरा हो जाने के बाद उन्हें इस लाभ को छोड़ना था l मगर न तो ऐसी कोई व्यक्तिगत पहल हुई और न ही राजनैतिक l
क्रीमी लेयर तय करके अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के सभी वंचित लोगों तक लाभ पहुंचा कर उनका स्तर सुधारना था l जिसके लिए शिक्षा के साथ साथ आर्थिक मज़बूती प्रदान करने के लिए नौकरी के अवसर प्रदान करना था l वैसे तो शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का प्रावधान बिल्कुल उचित था, क्यू कि शिक्षा व्यक्ति का मानसिक स्तर सुधारता है और नौकरी उनके उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाता है, लेकिन ये सुधार भी सीमित ही रहा l
अब जबकि आरक्षित वर्ग और आरक्षण के नाम पर ही राजनीति शुरू हो गई है l कुछ राजनीतिक दल इनके खेवनगार बनकर केवल अपना ही उद्दार करने में लगे हैं तो फिर राजनेताओं से तो उम्मीद करना भी बेमानी ही होगी l हम हर वर्ष अम्बेडकर जयंती तो धूमधाम से मना लेते हैं मगर अम्बेडकर जी का सपना, सबको समान स्तर प्रदान करना पर कोई भी चर्चा होती दिखती नहीं है l अब इस संबध में माननीय कोर्ट को ही आरक्षित वर्ग पर क्रीमी लेयर तय करके अभी मूल सुविधाओं से वंचित लोगों को जीवनधारा में लाने का प्रयास करना होगा l तभी वास्तविक अर्थों में देश में समानता आएगी और अभी इस उद्देश्य को पूरा करने में दशकों लग जायेगे वो भी तब जब प्रयास ईमानदारी से किया जाए और राजनीतिक भेट न चढ़े तो l
