Friday, March 20, 2020

10 टिप्स से मोबाइल फोन को रखे Corona Virus से दूर

corona virus हेल्थ टिप्स
#coronavirus: इन 10 टिप्स के जरिए कोरोना वायरस को रखें स्मार्टफोन से दूर
इस समय जब कोरोना वाइरस के चलते स्कूल, कॉलेज, माॅल तक बंद कर दिए गए हैं और सोशल डिस्टेंस मेनटेन करने को कहा जा रहा है
रीटा | March 19, 2020
 

इस समय जब कोरोना वायरस के चलते स्कूल, कॉलेज, माॅल तक बंद कर दिए गए हैं और सोशल डिसटेंस मेनटेन करने को कहा जा रहा है. समय समय पर हाथों को साफ रखने की बात की जा रही है तो जरूरत हमें अपनी साफ सफाई के साथ इस्तेमाल करने वाली वस्तुओं को भी सैनेटाइज करने की है .

डॉक्टर्स की माने तो किसी भी वस्तु को छूने के बाद हाथों को साफ करें या सेनेटाइजर इस्तेमाल करें. मगर सबसे ज्यादा तो हम अपना स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और हर समय साथ रहते हैं l फिर भी हमारा ध्यान अभी तक मोबाइल को साफ करने की ओर नहीं जा रहा है जबकि सबसे ज्यादा संक्रमण फैलने का डर फोन से ही होता है तो जरूरत इसे साफ सुथरा रखने की है l एक स्टडीज दावा करती है कि टायलेट सीट से ज्यादा कीटाणु मोबाइल फोन पर पाए जाते हैं . क्यू कि हम खाने खाने से लेकर टायलेट जाने तक मोबाइल फोन साथ रखते हैं .


नॉर्मल दिनों में मोबाइल स्क्रीन साफ करने वाले जेल की दो बूंदे डालकर कपड़े से साफ रख सकते हैं .मगर इस समय जब कोरोना वायरस फैलने की बात बात कही जा रही है और बार बार हाथों को सैनेटाइज करने की सलाह दी जा रही है तो इस समय अल्कोहल आधारित सेनेटाइजर ही बेहतर होगा. मोबाइल फोन को भी साफ करने के लिए.
2. सैनेटाइजर की दो बूंदे मोबाइल पर डालें और कॉटन से उसे पूरे फोन पर लगाए दिन में दो से तीन बार इसी तरह मोबाइल को साफ करें.

3. खासकर जब बाहर से घर आए तो सबसे पहला काम मोबाइल को साफ करने का ही करें.

4. इस समय छोटे बच्चों को मोबाइल न दे.

5. इसके अलावा किसी और का भी फोन न इस्तेमाल करें.. न छुए.

6. जिनको सैनेटाइजर नहीं मिल रहा है वो डेटॉल की कुछ बूंदें कॉटन में लेकर मोबाइल पर लगा ले और फिर किसी साफ कपड़े से पोंछ ले.. इससे भी संक्रमण खत्म हो जाएगा..

7. अगर मोबाइल की जरूरत न हो तो उसे डेस्क और टेबल पर हर जगह रखने के बजाय पॉकेट या पर्स में ही रहने दें.


8. खाते समय फोन को दूर रखे और रात को भी बिस्तर पर मोबाइल रखने के बजाय टेबल पर रखें.

9. अलार्म क्लाक भी घड़ी में ही लगा ले तो बे‍हतर होगा.

10. खुद अपना मोबाइल फोन तो साफ करें ही साथ ही घर के बड़े बुजुर्गों का मोबाइल भी समय समय पर सैनेटाइज करते रहे.

कुल मिलाकर मोबाइल को साफ सुथरा रखें और कम इस्तेमाल करें.

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Tuesday, March 17, 2020

जानिए चुकंदर खाने के मजेदार तरीक़े



हेल्थ टिप्स

जानिए, चुकंदर खाने के क्या है फायदे

चुकंदर को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं. रोज एक चुकंदर खाने से एनिमिया जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.
रीटा | February 7, 2020
 

इन दिनों चुकंदर खूब मिलता है, हम रोज एक चुकंदर खा सकते हैं. इसमें मौजूद विटामिन , खनिज, सोडियम, पोटैशियम, फौस्फोरस, कैल्शियम, सल्फर, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन, विटामिन बी1, बी2 अन्य आदि तत्व पाए जाते है, जो शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं. इसलिए चुकंदर को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं. रोज एक चुकंदर खाने से एनिमिया जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.चुकंदर खाकर कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखा जा सकता है. इतने सारे फायदे के बावजूद हमें इसे खाना अच्छा नहीं लगता..

ये है कुछ नए तरीके जिससे न केवल इसे खाना अच्छा लगेगा बल्कि आपके खाने का भी स्वाद बढ़ जाएगा.

1- चुकंदर को कद्दूकस करके उसमें पतली पतली हरी मिर्च और धनिया, कुछ बूंदे नीबू की और स्वादानुसार नमक मिलाकर खाए.. खाने का स्वाद बढ़ जाएगा.

2- चुकंदर, टमाटर, प्याज, मूली को बारीक बारीक काट कर उसमें चाट मसाला मिलाकर खा सकते हैं.. चाहे तो नीबू भी मिला ले.

3- चुकंदर की एकदम पतली पतली slice काटकर प्लेट में सजा ले और ऊपर से नमक, काली मिर्च छिड़ककर खा सकते हैं.

ये भी पढ़ें- फाइब्राइड: महिलाओं में बढ़ती उम्र की गंभीर बीमारी

4- चुकंदर का हलवा भी बना सकते हैं गाजर की तरह. चुकंदर को छिल के धुल लें और फिर कद्दू कस करके उसे कढ़ाई में पकाये. पकाते समय ही उसमें दूध भी डाल दें तो बाद में खोए की जरूरत नहीं पड़ेगी. जब पक जाए तो ऊपर से ड्राई फ्रूट डाल ले. ये आपके लिए गाजर के हलवे से ज्यादा सेहतमंद और स्वादिष्ट लगेगा. खासकर बच्चों को के लिए.. एक दिन बनाकर कई टाइम खिला सकती है..

इन सभी तरह से खाकर खुद और पूरे परिवार को सेहतमंद कर सकती हैं.

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आखिर क्यों बना सरोगेसी का कानून, जानें अहम बातें

आखिर क्यों बना सरोगेसी का कानून, जानें अहम बातें

जापान के कपल का केस था जिसमें वो सरोगेट करने के लिए भारत आए और यहां की एक महिला की कोख को किराये पर लिया लेकिन बच्चे के जन्म के एक महीने पहले ही इस कपल का ब्रेक अप हो गया.

Reeta | February 29, 2020

सरोगेसी उस अरेंजमेंट को कहा जाता है जिसमें कोई भी शादीशुदा कपल बच्चे पैदा करने के लिए किसी महिला की कोख किराए पर लेता है. इसकी कई वजहें हो सकती हैं. जैसे कि अगर कपल बच्चे पैदा करने में अक्षम है, या फिर महिला को जान का खतरा हो बच्चे पैदा करने में. जो औरत अपनी कोख में दूसरों का बच्चा पालती, वो सरोगेट मदर कहलाती है.

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क्यों बना आखिर कानून?

साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट के पास एक मामला आया बेबी मांजी यामादा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया. ये जापान के कपल का केस था जिसमें वो सरोगेट करने के लिए भारत आए और यहां की एक महिला की कोख को किराये पर लिया लेकिन बच्चे के जन्म के एक महीने पहले ही इस कपल का ब्रेक अप हो गया. अब बच्चे का पिता बच्चे को अपने साथ जापान ले जाना चाहता था मगर न तो भारत और न ही जापान की तरफ से उसको इजाजत मिल रही थी. सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बच्चे को उसकी दादी को सौंपा गया और साथ ही सरोगेट को लेकर एक बहस छिड़ गई. 2009 में लाॅ कमीशन ऑफ इंडिया ने पाया कि भारत में सरोगेसी की सुविधा का विदेशी लाभ उठा रहे हैं तो इसे बंद करने की सलाह दी गई.


लोकसभा ने 19 दिसम्बर 2018 को “सरोगेसी रेग्युलेशन बिल 2016” पास कर दिया. इस कानून के कुछ अहम बिंदु है – –

1- कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. अब केवल परिवार के सदस्यों या करीबियों में ही कोई सरोगेट बन सकेगी और वो भी NRI या फाॅरेनर नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पैसे की लेन देन नहीं होगी. प्रेग्नेंसी के समय खाने पीने और दवा के लिए जरूरत के पैसे ही दिए जा सकते हैं ताकि बच्चे की बेहतर देखभाल हो सकें.

2- सरोगेट माँ की उम्र 25-35 साल के बीच ही हो सकती है. वो खुद भी शादी शुदा होनी चाहिए और कम से कम एक बच्चा उसका अपना हो.

3- शादी शुदा दंपति को ही सरोगेसी की सुविधा मिलेगी और उनकी शादी के भी कम से कम पांच साल पूरे होने चाहिए.

लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल, सिंगल या समलैंगिक को सरोगेसी करने की इजाजत नहीं है.

4 – इस नियम को तोड़ने पर 5 से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है. सारे रिकार्ड क्लिनिक को भी 25 साल तक रखने होंगे.

फिल्मी दुनिया में सरोगेसी का एक ट्रेंड ही बन चुका था..


इस नियम के लागू होने से पहले ही करण जौहर सरोगेसी से तीन बच्चों के पिता बन चुके हैं.. जबकि वो शादी शुदा नहीं है.. उन्हें समलैंगिक माना जाता है जबकि उन्होंने कभी ये बात स्वीकार नहीं की है. इसके अलावा तुषार कपूर, शाहरुख खान, आमिर खान आदि भी पहले ही सरोगेसी से बच्चों का जन्म करा चुके हैं लेकिन कानून के आने के अब नियम शर्तों का पालन करना जरूरी हो गया है.

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सिर्फ बेटी ही नहीं बेटों की परवरिश पर भी दे खास ध्यान

लाइफ स्टाइल परिवार

सिर्फ बेटी ही नहीं बेटों की परवरिश पर भी दे खास ध्यान 

अगर हम अपने अपने घर के लड़कों/पुरुषों को महिलाओं के साथ कैसे पेश आया जाए ये सिखा दें तो अपराध में खुद ही कमी आएगी.
रीटा | March 17, 2020
 
बदलते समय के साथ माता पिता को बेटी के साथ बेटों को संस्कार सिखाये जाने की पहल शुरू कर देनी चाहिए. वजह अब चाहे बेटा हो या बेटी, सबको समान शिक्षा, फिर नौकरी और जीवन की भागदौड़ करनी पड़ती है. जहां परिवार में बेटा-बेटी, बहू-दामाद सभी को बाहर के साथ घर के भी काम करने पड़ते हैं और अगर ये बचपन से ही सीखा दिए जाए तो खुद उनके लिए और उनके लाइफ पार्टनर के सुकून भरा होता है.
बचपन में जो भी सीखा दिया जाता है वो जिंदगी भर साथ देता है. खुद घर में पुरुष को भी कुछ न कुछ घर के काम में हाथ बंटाना चाहिए तो बेटे स्वतः ही सीखने लग जाएंगे. केवल घर के काम ही नहीं बल्कि घर में बड़ों की इज्जत करना, बहनों के साथ प्यार से पेश आना और महिलाओं के प्रति संवेदनशील और गरिमामयी सोच रखना भी सिखाये.

महिला अपराध की एक बड़ी वजह भी यही है कि पुरुष महिलाओं के लिए न तो अच्छी सोच रखते हैं और न ही संवेदनशील होते हैं. उन्हें कई बार तो आभास तक नहीं होता है कि उनकी किसी भी हरकत जो मजे, मस्ती के लिए की गई है. वो लड़कियों के मन पर कितना बुरा प्रभाव डालती है. कई बार छोटी ही उम्र में किसी बुरे अनुभव से गुजरने के बाद लड़कियां जिंदगी भर उस तकलीफ से मुक्त नहीं हो पाती है. केवल किसी भी छेड़छाड़ या अपराध की सजा दे देने भर से अपराध नहीं थमने वाला है. इसके लिए परवरिश पर भी ध्यान देना होगा.
लड़कों को स्कूल से ही लड़कियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए, ये बताया जाना चाहिए और साथ ही घर में माता पिता को महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना, उनसे अच्छा व्यवहार करना सिखाया जाना चाहिए. ये शिक्षा हर दिन के साथ दी जानी चाहिए. समाज में अच्छा-बुरा जो भी दिख रहा हो उसे उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए चर्चा करनी चाहिए.
अब लड़कों को भी लड़कियों की तरह घर के काम में हाथ बटाना सिखाया जाना चाहिए. घर में केवल बेटियों से ही काम न कराकर बेटे बेटियों दोनों को काम बांट दें. आगे चलकर जब बच्चे बाहर जाएंगे तो ये काम करने की आदत और काम करने का तरीका पता होने से खुद उनके लिए भी सुकून भरा होगा, क्योंकि हर समय हम मेड के सहारे नहीं रह सकते हैं.
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बेटों को अपने महिला मित्र, बहन से बात करते वक़्त जरूर ध्यान दे कि उनका लहजा और व्यवहार का तरीका कैसा है? कुछ ठीक न लगे तो उसी वक़्त टोककर समझाये.
खुद माता पिता को भी ये ध्यान रखना चाहिए कि आपस में उनका व्यवहार और बातचीत करने का तरीका अच्छा होना चाहिए क्यू कि घर में जो भी कुछ अच्छा/बुरा होता है बच्चे भी वही सीखते हैं.
देखा गया है कि जिस घर में घरेलू हिंसा और महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव होता है वहाँ लड़के भी वही सोच के साथ बड़े होते हैं वही आगे चलकर अपनी बहन /पत्नी या अन्य महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव और हिंसा करते हैं.
लड़कों में महिलाओं के प्रति संवेदना का पाठ पढ़ाया जाना जरूरी है. उन्हें पता होना चाहिए कि कोई भी महिला गलत सहने और बर्दाश्त करने के लिए नहीं होती है और उनके पास ठीक वैसी ही भावनाएं और इच्छाएं है जैसी लड़कों के पास हैं. अब वो भी बाहर निकलना, घूमना, फिरना चाहती है जो उनका हक है. तो ऐसे में रात में भी और सुनसान जगहों पर भी लड़कियां दिखेंगी जिसे देखकर उन्हें ये नहीं सोचना है कि रात में लड़की आखिर कर क्या रही है?
लड़कियों के लिए असुरक्षित माहौल में हम बेटियों को निडर रहना, आत्मरक्षा के तरीके तो सीखा रहे हैं लेकिन केवल इससे ही लड़कियां सुरक्षित नहीं रह सकती है, लड़कों को भी उनकी सीमा और लड़कियों के साथ मर्यादा में रहकर बातचीत का तरीका सिखाया जाना चाहिए. अगर हम अपने अपने घर के लड़कों/पुरुषों को महिलाओं के साथ कैसे पेश आया जाए ये सिखा दें तो अपराध में खुद ही कमी आएगी और बेटियों के लिए माहौल सुरक्षित हो जाएगा.

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