Wednesday, March 30, 2016

warning


एक किस्सा आज का.... एक पुलिस भाई साहेब, कल हमने उनको टैग किया था, जयपुर वाले न्यूज़ पर जिसमें पुलिस की आलोचना थी। इनको बुरा लगा बस फिर क्या था....... शुरू बकवास msg, हम बोले देखो भाई वर्दी में ये शोभा नहीं दे रहा है और जरा हमारा प्रोफाइल तो देखो, बोले क्या कर लोगी, जल्दी करो, गिरफ्तार करवायो, हम इन्तज़ार में हैं, ड्यूटी जाने में देर हो रही है.... और हम भी कोई कम थोड़े ये सब रोज की ही बात हैं, कर दिया कंप्लेन, देखते है क्या होता है .......
पेश है उनकी कुछ बानगी......
Kisme complain krogi ji
Complain kr ke usko meri photo de dena,kis ko bhej rhi ho arrest krane ke leye,Bhejo yr jaldi buejo fir mai duty ja rha hu nhi milunga ,Kya hua bolo yr kaha chali gayi ji

करने को तो ब्लाक कर सकते थे लेकिन हम देखना चाहते हैं कि ये लोग क्या क्या सद्भावना वाले काम करते हैं

Tuesday, March 29, 2016

इंसाफ की दरकार


पुलिस प्रशासन द्वारा इंसानियत हुई शर्मसार

जयपुर(राजस्थान) के एक गाँव में सौतेली माँ के बुलाये गए कुछ लोगों ने एक 12 साल की मासूम बच्ची के साथ यौन दुव्र्यवहार(sexual harrasment) जैसी घिनौनी हरकत पर कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही हैं। ये बात नवंबर दिसंबर 2015 की है। तीन मासूम बच्चे अकेले हैं, माँ गुजर चुकी है और पिता जेल में हैं तो पीठ पीछे सौतेली माँ ने ये कांड रचाया। पिता के मित्र द्वारा खाना पीना मिल जाता है बस, केस वापस लेने के लिए बच्चों पर दबाव बनाया जा रहा हैं। एक पत्रकार राशिद जी द्वारा मिली सुचना पर मैंने खुद बात की, शैतानों द्वारा सताई गयी बच्ची के भाई जो खुद 16 साल का नाबालिग बच्चा है, का कहना हैं" लोग फ़ोन करके गालिया देते हैं, केस वापस लेने के लिए धमका रहे हैं, स्थानीय पुलिस केस वापस लेने के लिए दबाव डाल रही हैं, पुलिस कहती हैं कि लड़की झूठ बोल रही हैं और भाई को भी 2-3 दिन जेल में रखा हैं।" ये बच्चा सबसे मदद की गुहार कर रहा हैं, मीडिया में खबर आई थी मगर कन्हैया और ओवैसी जैसी प्राथमिकता मिलती तो शायद इंसाफ मिल चूका होता। मैंने इन बच्चों के लिए women and child right Department jaipur बात की और डिटेल भेजी है, देखते है कि यहाँ कोई सुनवाई है या महज दिखावे के लिए ही है। " जब कानून के रखवाले कानून का गला घोटे,अपराधियों को सुरक्षा दे, तो उस समाज का भविष्य क्या होगा?? समझ नहीं आता कि पुलिस अपने आप को क्या साबित करना चाहती है? मीडिया से प्रार्थना हैं कि एक जुट होकर इन बच्चों को न्याय दिलवाये इससे पहले कि कोई अनहोनी हो, बच्चे बहुत दहशत में हैं।

Sunday, March 27, 2016

जिम्मेदारी

अभी कुछ दिन पहले एक सरकारी बिल्डिंग मैं हज़रतगंज जैसे एरिया में बिल्डिंग के बाहर एक जुड़ा पार्क बिना गेट का, नो एंट्री। पांच कॉलेज गोइंग बच्चे वहा बैठ कर गुजरती हुइ गर्ल्स पर कमेंट्स कर रहे थे। पुलिस शिकायत पर पता चला कि वे मंत्रियों के बच्चे थे। ना मैन एंट्री पर गॉर्ड को पता ना ही बिल्डिंग में बने ऑफिस वालो को। कितना असुरक्षित है हमारा समाज कि किसी रेस्ट्रिक्टिएड एरिया में कोई बैठा है हमें पता ही नहीं।।

सभ्यता

बेहद ही भीड़भाड़ वाले जगह से होकर निकल रही थी, रिक्शा पर थी। ट्रैफ़िक ज़ाम था, रिक्शा वाला निकलने की पूरी कोशिश मे था, तभी एक कार वाले भाई साहेब जोर जोर से हॉर्न देने लगे, जबकि आगे जाने की जगह नहीं थी, मुझे और उन्हें दोनों को दिख रहा था। मैं पीछे को पलटे तो देखा भाई साहेब बहुत गुस्से में हॉर्न दिए जा रहे थे और साथ ही लिप्सिंग कर रहे थे.. बेवकूफ बेवकूफ। क्योंकि उन्हें वही पार्क करनी थी जहा रिक्शा वाला खड़ा था। अरे भाई जगह खाली होगी तब न आगे जायेगा ये रोब कहे का......

मंज़िल


जिंदगी का कटु सत्य, जब कुछ नैक करने घर से निकले,
राहो में सबने रोड़ा अटकाया,
मुश्किले हजार खड़ी की,
लेकिन मज़बूत इरादों ने डिगने ना दिया,
हम चलते रहे मंज़िल पाने की ओर।।

रिश्ते


ये रिश्तों का खोखलापन ना प्यार ना मधुरता,
बस निभाने की कवायद साथ चलने की मजबूरी।
दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है नया जमाना आ गया है,
रिश्तों के मायने बदल गए है क्योंकि सब एडवांस हो गए है।।

कलह


गाँव में रास्ते से गुजर रही थी मंज़िल की तरफ। आज प्रोग्राम था हमारा प्राइमरी स्कूल में। तभी अचानक चलते चलते पाव रुक गए, एक ग्रामीण महिला ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी, क्योंकि उसका पति उसे हाथों औऱ पैरों से मार रहा था और गलियां भी दे रहा था, वो स्त्री भी अपने पति के माँ, बहनों को गाली दे रही थी। शायद कोई पारिवारिक झगड़ा था। लोग इकट्ठा हो रहा था। मेरा मन कर रहा था जाकर कहू कि मार क्यों रहे हो, कोई दिक्कत है तो आपस में बातें करो। तभी उसने पास से एक हरी डंडी उठाकर और ज़ोर जोर से मारने लगा, सभी तमाशा देख रहे थे कोई कुछ नहीं कह रहा था। महिला पर इस तरह से सरेआम हिंसा और हमारा कानून कहाँ किन किताबों में छुपा हुआ हैं, कौन करेगा ऐसे लोगों के साथ इंसाफ़। उस स्त्री को तो शायद ये भी पता नहीं था कि महिलाओं पर हिंसा करना कानूनन अपराध हैं। तभी एक सज्जन बोले तो दुर्जन वृद्ध बाइक से निकले, कुछ देर तमाशा देखा फिर बोले "डंडे से नहीं हाथों और पैरों से ही मारो"। मैंने वहां से हटना उचित समझा, क्योकि कई बार ऐसे मौके पर विरोध कर, पुलिस बुलाकर मैं बहुत चर्चित हो चुकी हूँ। मैं अपने गंतव्य की तरफ बढ़ गयी। पर सोचती रही कि ऐसी घरेलू हिंसा को बस महिलाओ को जागरूक करके, कानून बताकर ख़त्म की जा सकती हैं।

स्त्री माँ हैं, पालिका हैं
गृहलक्ष्मी हैं, बेटी है, बहन है।
फिर ये दुर्दशा क्यों, भूल गयी हो क्या तुम
ऐ नारी अपना ये रूप, सबला से अबला कैसे।
तोड़ो समाज की बेड़ियाँ, बनाओ खुद को सशक्त इतना कि हो नारी होने पर अभिमान।।

Nari shakti


हम दुर्गा हैं, हम काली हैं,
हम झांसी की रानी और रजिया सुल्ताना हैं।
किस से डरना, जिसे जन्म हमने दिया,
वो हम पर ही अत्याचार करे।
ना ना ये ना होगा, क्या नारी तूने कोई अपराध किया।
क्यों सुनती हैं, क्यों सहती हैं
खुद की तू पहचान कर,
हक़ से जीने का अधिकार मांग।।

Justice for Dr Narang & his family


डॉ नारंग की हत्या देश की राजधानी में इससे पता चलता हैं कि अपराधी कितने बेखौफ हो गए है, उनका मनोबल कितना बड़ गया हैं । किसी कॉलोनी में घुस के कोई इस तरह पीट पीट कर मार देता है एक व्यक्ति को छोटी सी बात पर, ये दर्शाता है कि लोग कितने असहनशील और निर्दय प्रवत्ति के हो रहे है, दूसरी बात एक एरिया में बाहर से कुछ लोग आते है हिंसा फैलाने कोई विरोध नहीं करता, इंसानियत एक बार फिर से शर्मसार हुई हैं वरना क्या मजाल की कोई हाथ भी लगा दे, जब कोई हादसा अपने साथ होता है तो हम कहते है कि पब्लिक को साथ देना चाहिए और जब कुछ गलत होते देखते है तो मौन? ये कैसा पहलू है इंसानियत का, बेहद ही शर्मनाक।
खैर जो होना था, हो गया अब इंसाफ की दरकार है सरकार से, बालिग हो या नाबालिग सजा मिलनी चाहिए और पीड़ित परिवार को मुआवजा, बच्चे की पढ़ाई का खर्चा सरकार उठाये, सरकारी नौकरी दे और किसी सुरक्षित स्थान पर रहने की जगह। और एक बात इस बार नाबालिग के नाम पर किसी को नया नाम और सिलाई मशीन नहीं मिलनी चाहिए। ये नाबालिग अपराध बढ़ता ही जा रहा हैं, इस पर सख्त कार्यवाही की जरुरत हैं, वरना देश का भविष्य अपराधियों के नाम होगा।
##Justice for Dr. Narang & his family##

Saturday, March 26, 2016

संघर्ष

 वो स्याह काली रात थी, शायद जिंदगी की भी काली रात जब सब कुछ लुट गया था उसका, पति जो नयी दुल्हन ले आया था, अब दो मासूम बच्चों के साथ कहा जाये कुछ सूझ नहीं रहा था पति ने तो धक्के मारकर दरवाजा बंद कर लिया था। मायके वाले भी इतने अमीर ना थे कि उनसे सहारा मांगती, यही सब सोचते सोचते रात हो गयी, बच्चे तो भूखे पेट सो चुके थे। भोर होने के साथ वो हिम्मत के साथ उठ खड़ी हुई कि हार नहीं मानेगी और किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएगी। उसकी पोटली में माँ के दिए कुछ गहने थे, उसने उसे बेच कर एक किराये पर छोटा सा कोठरी नुमा घर लिया और घर घर जाकर काम माँगा, जिससे उसे कुछ अच्छी जगह पर काम मिल गया, दिन रात मेहनत करके बच्चों का स्कूल में एडमिशन करवाया। अब सब कुछ ठीक होने लगा था। बच्चे बड़े होने लगे, एक बेटा और एक बेटी दोनों ही उसके जान थे। अब बस उनकी पढ़ाई ख़त्म होने और नौकरी लगने का इंतज़ार कर रही थी, फिर वो घर में ही रह कर आराम करेगी बहुत काम कर लिया, अब शरीर साथ ना दे रहा था। ये सब सोच ही रही थी कि तभी बेटा मिठाई लेकर माँ माँ चिल्लाता हुआ अंदर आया। उसने कहा क्या हुआ क्यू चीख रहा हैं। अरे माँ..... तुम्हे पता हैं कि तुम्हारे इस बेटे ने इंजीनियरिंग टॉप की हैं। माँ के मुँह में मिठाई खिलाते हुए बोला, तभी बेटी मुँह लटकाकर अंदर आई तो भाई ने कहा इसे क्या हुआ? उसने कहा मुझे अमेरिका की एक कंपनी से कॉल लेटर आया है, तो भाई ख़ुशी से चीखा और बोला ये तो ख़ुशी की बात हैं। उसने कहा कि मुझे तुम लोगों से इतनी दूर  नहीं जाना। माँ के ख़ुशी से आंसू निकल पड़े कि इतनी मेहनत और संघर्ष आखिर रंग लायी अब जल्दी से दोनों का व्याह कर तीर्थ यात्रा पर निकल जाउंगी और उठ पड़ी भगवान के आगे दीपक जलाने।

हास्य व्यंग


हास्य व्यंग्य

हमें समझ कभी नहीं आया कि इ लोगे इत्ती जल्दी केएस तरक्की पाये गए जरूर कौनो फिक्सिंग होइहैं, यहाँ हम डिग्री लेकर आज तक किसी कंपनी के सीईओ न बन पाये और बताओ कि चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन गया और तो और अभीन अभी न सुनने में आया था कि smirti जी होटल में बर्तन धुलती थी अब तो भैया कौनो जुगाड़ करके उ होटल का पता दे दो ताकि वही जाइ के बर्तन धूल कर कम से कम शिक्षामंत्री तो बन ही सकी

देशभक्ति

गुलामी की जंजीरों में है इस बार भी, लेकिन इस ये विदेशी नहीं देश की अंदरुनी ताकत है, जिसे हम नाम राजनीति का देते है, जिसमे कन्हैया और रेप के दरिंदगे बचाये जाते हैं, कभी नाबालिग कह कर और कभी अभिव्यक्ति की आजादी, ये जवाब दे सकते हैं माननीय मोदी और माननीय केजरीवाल की जिस पर हैं देशद्रोह का अपराध और जो जमानत पर है, वो कैसे संबोधित करता हैं इलाहाबाद की यूनिवर्सिटी, कब कहा गयी वो नेता जिन्होंने रोक था आगे बढ़ कर किसी को , जवाब दे केजरीवाल जी कि हम अपने देश में अपनी नहीं तो क्या विदेशी जीत की ख़ुशी मनाये, अब कहा गयी अभिव्यक्ति की आजादी।।

Friday, March 25, 2016

murder's of doctordoctor family


आज समाज बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है, बात बात पर राजनीति, अपराधियो को शरण और आम आदमी तो गाजर मूली की काटे जा रहे है, अब तो देश की राजधानी तक ना सुरक्षित रही हैं। ये बहुत ही निंदनीय वक्त है, इस पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। अब वक्त आ गया है कि आम जन खड़ा होकर अधिकारों की , सुरक्षा की न्याय की मांग करे और देश के ठेकेदारों को ये बात याद दिलाये कि वो देश के सेवक हैं, समाज की जिम्मेदारी है उन पर, अपने कर्तव्यों का पालन करें।
Dehli me huwe dukhad gahatna par shok aur unke liye shanti ki prarthana.

Monday, March 21, 2016


जीवनसाथी

दोनों अपनी ही अपनी बोले जा रहे थे, कोई सुनने को ना तैयार था, झगड़ा बढ़ता ही जा रहा था, अचानक पति बोला-" तलाक दे दो", पत्नी ने कहा सही कह कह रहे हो मैं भी यही सोच रही थी। फिर दोनों अपने अपने कमरें में चले गए। रीना बेटे के पास बैठ गयी और सोचने लगी कि अब तो मैं अच्छा कमाने लगी हूँ, अलग होने पर कोई दिक्कत नहीं आएगी, बस अब बर्दाश्त नहीं करुँगी। सारा दिन घर, ऑफिस, बच्चा और ऊपर से रिश्तेदार, सब कुछ निभाते निभाते मशीन बन गयी हूँ, फिर भी पति के पास 5 मिनट नहीं है मेरे लिए और ना प्यार के शब्द। एक वो समय था कि बस प्यार ही प्यार, वक्त ही वक्त समय भी कितना जल्दी बदलता हैं। अचानक बेटा उठ बैठा--- अरे! माँ रो क्यों रही हो? पापा ने फिर कुछ कहा क्या? अभी बात करता हूँ, उठने लगा.....। रीना हाथ पकड़ कर बैठाते हुए बेटा कुछ नहीं हुआ.... हँसते हुए । फिर सोचने लगी कि कृष्णा समय से पहले ही बड़ा हो रहा है, उसके मानसिक विकास पर असर पड़ेगा। जल्दी ही कोई फैसला लेगी।
उधर शांतनु सोच रहा था कि अब उसे रोज रोज की किच किच से मुक्ति चाहिए कुछ भी हो। सारा दिन ऑफिस की टे न्शन, टारगेट, बॉस की फटकार और फिर घर आते ही-- ये करो वो करो, मार्केट जाऊ, ये भी कोई जिंदगी हैं कही सुकुन नहीं। अब तलाक ही हल हैं इस कलह से मुक्ति का, बस खर्च ही उठाना पड़ेगा, अब तो अच्छा कमाने लगा हूँ।
नन्हा सा बच्चा कृष्णा सोने का बहाना करते हुए रो रहा था क्योंकि उसने माँ पापा की बात सुन ली थी। अगर माँ पापा अलग होते हैं तो फिर वो माँ के पास.... या पापा....। एक को छोड़ना, एक के साथ रहना... नहीं नहीं मुझे दोनों चाहिए। क्या माँ पापा मेरे लिए मैनेज नहीं कर सकते है? मुझे माँ पापा का पैसा, गिफ्ट नहीं चाहिए, प्यार चाहिए......।

रीता शर्मा