Saturday, March 26, 2016

संघर्ष

 वो स्याह काली रात थी, शायद जिंदगी की भी काली रात जब सब कुछ लुट गया था उसका, पति जो नयी दुल्हन ले आया था, अब दो मासूम बच्चों के साथ कहा जाये कुछ सूझ नहीं रहा था पति ने तो धक्के मारकर दरवाजा बंद कर लिया था। मायके वाले भी इतने अमीर ना थे कि उनसे सहारा मांगती, यही सब सोचते सोचते रात हो गयी, बच्चे तो भूखे पेट सो चुके थे। भोर होने के साथ वो हिम्मत के साथ उठ खड़ी हुई कि हार नहीं मानेगी और किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएगी। उसकी पोटली में माँ के दिए कुछ गहने थे, उसने उसे बेच कर एक किराये पर छोटा सा कोठरी नुमा घर लिया और घर घर जाकर काम माँगा, जिससे उसे कुछ अच्छी जगह पर काम मिल गया, दिन रात मेहनत करके बच्चों का स्कूल में एडमिशन करवाया। अब सब कुछ ठीक होने लगा था। बच्चे बड़े होने लगे, एक बेटा और एक बेटी दोनों ही उसके जान थे। अब बस उनकी पढ़ाई ख़त्म होने और नौकरी लगने का इंतज़ार कर रही थी, फिर वो घर में ही रह कर आराम करेगी बहुत काम कर लिया, अब शरीर साथ ना दे रहा था। ये सब सोच ही रही थी कि तभी बेटा मिठाई लेकर माँ माँ चिल्लाता हुआ अंदर आया। उसने कहा क्या हुआ क्यू चीख रहा हैं। अरे माँ..... तुम्हे पता हैं कि तुम्हारे इस बेटे ने इंजीनियरिंग टॉप की हैं। माँ के मुँह में मिठाई खिलाते हुए बोला, तभी बेटी मुँह लटकाकर अंदर आई तो भाई ने कहा इसे क्या हुआ? उसने कहा मुझे अमेरिका की एक कंपनी से कॉल लेटर आया है, तो भाई ख़ुशी से चीखा और बोला ये तो ख़ुशी की बात हैं। उसने कहा कि मुझे तुम लोगों से इतनी दूर  नहीं जाना। माँ के ख़ुशी से आंसू निकल पड़े कि इतनी मेहनत और संघर्ष आखिर रंग लायी अब जल्दी से दोनों का व्याह कर तीर्थ यात्रा पर निकल जाउंगी और उठ पड़ी भगवान के आगे दीपक जलाने।

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