पुरुष प्रधान प्राचीन भारतीय समाज में स्त्रियां हमेशा से चुप रही है. सही हो या गलत उन्हें बोलने का अधिकार दिया नहीं गया और खुद स्त्रियों ने कभी अपने अधिकार लेने भी नहीं चाहिए. इस तरह से उनके अधिकारों और इच्छाओं का दोहन होता रहा. बहुत कम ही और संभ्रांत परिवार में ही स्त्रियां शिक्षित होती थी, शिक्षा के अभाव के चलते भी वो जागरूक नहीं हो पायी.
अब जब कि बेटियां शिक्षित हो रही है.. घर से बाहर जाती है तो पुरुषों के बराबर का अधिकार भी हासिल करने की कोशिश करती हैं. समान अधिकार और समान रूप से काम करने के लिए कई बार कई जगह उन्हें खूब संघर्ष भी करना पड़ता है, क्यू कि भले ही स्त्रियां शिक्षित होकर घर से बाहर जा रही है लेकिन अब भी समाज में पुरुष वादी सोच ही चल रही है जो बिल्कुल भी नहीं चाहते कि कोई भी स्त्री काम में उनसे आगे निकल जाए, उनसे सवाल पूछे और कुछ गलत देख कर रोके. इस तरह के लोगों के सामने ऐसी स्थिति आए तो वो तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं उस स्त्री के चरित्र का हनन करके. अगर ऐसी ही स्थिति लाने वाला कोई पुरुष ही पुरुष के सामने होता है तो क्या उसे भी प्रतिक्रिया स्वरुप चरित्र हनन करते हैं? शायद नहीं...वज़ह भी साफ है कि पुरुष अपनी पहचान की वज़ह अपने काम से निर्धारित करता है, जब कि स्त्री कितना भी आगे क्यू न बढ़ जाए, कुछ भी हासिल कर ले मगर उसकी पहचान उसके चरित्र से होती है. अगर स्त्री शराब, सिगरेट, रात की पार्टी में जाए, छोटे कपड़े पहन ले तो वो "समाज घोषित चरित्रहीन " बन जाती है. जब कि पुरुष से आदिकाल से ही नशे का सेवन करता आया है (पहले शुद्ध भांग, घर में बनी शराब) और शायद इसे वो अपना मौलिक अधिकार भी मानता होगा...लड़की देखते ही फब्तियां कसना भी बहुत साधारण बात होती है उनके लिए...
कंगना का शिव सेना से सवाल जवाब और उठा पटक पूरी तरह से स्त्री - पुरुष के पहचान की जंग लग रही है, मगर चर्चा में उसका चरित्र है... उसके पुराने फोटो शूट जिसमें उसने बिकनी पहना हुआ है और सिगरेट पीते हुए फोटो वायरल करके उसे चुप कराने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं.. बिकनी में फोटो शूट तो उसके काम का हिस्सा है और अगर ये शूट केवल Fun के लिए होता तब भी आप सवाल खड़े नहीं कर सकते हैं... संजय राउत की धमकी के बाद उसको Y सिक्युरिटी दिया जाना भी लोगों को बहुत अखर रहा है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.. शिव सेना के तौर तरीके सबको पता है और कंगना को मुंबई में परेशान किया जा सकता था इसलिए सुरक्षा दिया जाना एक सही कदम है.
इस पर बेहूदे सवाल न खड़े करिए..
"हमारे टैक्स के पैसे से सुरक्षा दी जा रही है तो क्या आपको लगता है कि अगर ये सुरक्षा नहीं दी जाती तो आपकी सैलरी बढ़ जाती?"
"कंगना का बीजेपी की तरफ झुकाव देखकर आप कंगना का विरोध बीजेपी समझकर बिल्कुल नहीं करें.. भले ही एक व्यक्ति किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थक क्यू न हो, उसकी सुरक्षा के लिए सरकार ही उत्तरदायी होती है "
" आप ये भी न बोले कि देश में इतनी बेटियों के साथ अपराध हो रहा है और सुरक्षा कंगना को दी जा रही है.. बेटियों के साथ अपराध हो क्यू रहा है? उनको आवाज ऊंची करना क्यू नहीं सीखाते है? कंगना ने अपनी आवाज बुलंद की है तो ही उसको सुरक्षा दी गयी है.. धमकी तो पहले दीपिका पादुकोण को भी दी गयी थी मगर उसने कंगना की तरह मुखर होकर उत्तर नहीं दिया था.. देश की हर बेटियों को अपनी सरकार से सुरक्षा पर बात करनी चाहिए और हासिल भी करनी चाहिए "
कंगना का विरोध बीजेपी विरोध समझकर न करें. देश की हर बेटी को सरकार से अपनी सुरक्षा पर बात करनी चाहिए भले ही वो किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित हो. कंगना का मुखर होकर बोलना पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर एक चोट है.. बेटियों के अधिकार के लिए खुद बेटियों को सामने आना चाहिए और हम सबको साथ देना चाहिए. अगर कंगना ने कोई भी गैर कानूनी तरीके से काम किया हो तो उस पर कानून के अनुसार कार्यवाही जरूर होनी चाहिए.