Tuesday, April 5, 2016

रिश्तों के बदलते हुए आयाम


रिश्तों के बदलते हुए आयाम
रिश्ते समाज को चलाने के लिए बहुत जरुरी होते हैं। पति-पत्नी, बच्चों से परिवार और परिवार से समाज का निर्माण होता हैं। एक अच्छा समाज ही एक अच्छे देश का निर्माण कर सकता है। परिवार समाज और देश की धुरी है। अच्छे व्यक्ति के निर्माण के लिये अच्छे आचार, विचार, संस्कार, शिक्षा-दीक्षा का होना जरुरी हैं, ताकि वह परिवार का, समाज का और देश का दायित्व निर्वाह कर सकें।
वर्तमान समय में रिश्तों के मायने बदल रहे हैं। युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता को अपना रही है और माननीय न्यायालय ने युवाओं के हक़ में बहुत सारे कानून भी बना दिये हैं। ये सारे अधिकार और स्वछँदता उन्हें उनकी तरक्की के लिए दिये गए हैं, लेकिन उसके दुष्परिणाम निकल कर सामने आ रहे हैं। युवा कैरियर को पाने, रिश्तों की उधेड़बुन,आगे बढ़ने की अंधाधुंध दौड़ में चल रही है, जिसमे वो सही और गलत का फर्क भूल जाते हैं और मनवांछित परिणाम ना आने पर डिप्रेशन, अवसाद, मानसिक रोग, आत्महत्या, मर्डर जैसे गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं, युवा पीढ़ी में आत्म- संयम, आत्म-नियन्त्रण, सहनशीलता, धैर्य खत्म हो चुका हैं, जोकि हर इंसान के सफल और संतुष्टि प्रद जीवन के लिए बहुत जरुरी है। कैरियर की असफलता, रिश्तों का टूटना और कडुवाहट के चलते गलत कदम उठा रहे हैं, इससे उनका दर्द तो खत्म हो जा रहा है, लेकिन परिवार और समाज के लिए असहनीय दर्द छोड़ जाते हैं।
आज के परिदृष्य में माँ-पिता का दोस्ताना व्यवहार, कोई परेशानी होने पर counsellor और doctor से सलाह लेना जरुरी हो गया है, समय पर समस्या का निदान हो सकता हैं। युवाओं की गला-काट दौड़ में माता-पिता का ये दायित्व बन चुका हैं कि बच्चों की परेशानियों में काउंसलर बनकर मदद करें, ताकि वो गुमराह होने से बचे, क्योंकि युवा पीढ़ी पर ही देश का दारोमदार टिका हुआ हैं।

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