Friday, April 22, 2016

up पुलिस


देर आये दुरुस्त आये....
स्थान... madiaon ऑटो स्टैंड, निकट madiaon थाना, लखनऊ
कुछ सज्जन( मुस्टंडे) लोग खड़े थे, जैसे ही कोई टैक्सी भरती, झट ड्राइविंग सीट पर बैठकर कर कहते थाने चलो और सारी सवारी उतार देते। दोपहर का बारह बजे का समय, तेज धूप वैसे ही लोगो को परेशान कर रही थी, ऊपर से ये सघन चेकिंग अभियान। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात इस सघन चेकिंग अभियान में ना तो कोई वर्दीधारी पुलिस, ना ही यातायात पुलिस और ना ही RTO ऑफिसर। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये क़ानूनी रूप से सही है कि दूर खड़े होकर देखो, सवारी भरते ही खाली करवाओ और पुलिस स्टेशन के बहाने टैक्सी को एक गली में ले जाओ?? क्या इसकी परमिशन है? अगर कोई अभियान था मौजूदा अधिकारी कहा थे? ये नौंटकी पुलिस स्टेशन से 50 मीटर की दूरी पर हो रही थी। सब् की तरह मैं शिकार हुई, एक में बैठी, उतार दी गयी, दूसरी में बैठी उतार दी गयी और फिर मैंने पूछा ये क्या नौटंकी है? जवाब मिला पेट्रोल टैक्सी को रोकना है, अरे भाई रोकना है तो खाली टैक्सी को रोको, पैसेंजर को क्यों परेशान कर रहे हो। उन्होंने कहा पीछे वाली में बैठ जाओ वो जायेगी, और हद तो तब हो गयी जब उसे भी रोक कर सवारी उतारने लगे, अब सहनशक्ति जवाब दे चुकी थी, मैंने कहा कोई नहीं उतरेगा मैं पुलिस को बुलाती हूँ और 100 डायल किया, 100 का नाम सुनते ही बोले कि मैडम के टैक्सी को जाने दो और बताया कि ये RTO ऑफिसर जो .....। खैर हमारा टैक्सी आगे बढ़ गयी और कुछ देर बाद 100 par बात हुई और मैंने सारी डिटेल दी। सेण्टर पहुची बच्चे जा चुके थे मूड बहुत अपसेट था , मैंने फिर से 100 पर डायल किया इस बार मैम ने उठाया, फिर से डिटेल पूछी, फिर कहा सर से बात करे, मैंने फिर से कहानी कही और पूछा कि बिना पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और RTO के कौन सा अभियान चल रहा था और पैसेंजर को क्यों परेशान किया जा रहा था, जवाब मिला वो शायद पेट्रोल वाली गाड़ी की चेकिंग थी, मैने पूछा जिम्मेदार अधिकारी कहाँ थे, उन्होंने कहा दिख्वाते हैं मैंने कहा कि ये न्यूज़ पब्लिश करवाउंगी, जवाब मिला बिलकुल करवाये। खैर दो घंटे बात कंप्लेंट no मिला गया और कॉल आई कि आप कहा पर हैं मैंने कहा ऑफिस में, कंप्लेन के वक्त वही थी, थोड़ा बहुत जवाब दिया मैंने, बिजी थी सो बात  नहीं कर पायी।
1.. सवाल ये उठता है कि तीसरी बार में कंप्लेन नंबर क्यों मिला, पहली बार में क्यों नहीं?
2.. एक बार सारी डिटेल बताने के बाद बार बार क्यों पूछना, क्या मै अपराधी हूँ?
3... इंतना सुस्ता एक्शन क्यों जबकि बहुत नजदीक हैं पुलिस स्टेशन?
4. जब उस रास्ते से निकली वापस तो एक बाइक पर पुलिस खड़ी थी।
तो दोस्तों क्या कहाँ जाये देर आये दुरुस्त आये, जब राजधानी का ये हाल हैं तो गांव का क्या होगा??

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