जांच में पता चला है कि इस ग्रुप में एडमिन सहित 21 लोग थे जिनमें से तीन चार दक्षिणी दिल्ली के एक स्कूल के हैं. कुछ छात्रों ने पुलिस की पूछताछ में कहा है कि ये लोग ग्रुप में थे जरूर मगर कोई कंटेंट नहीं शेयर किया है.
मामला तब सामने आता है जब इन्हीं के ग्रुप से एक लड़का एक लड़की का कॉमन फ्रेंड होता है जिनकी फोटो शेयर की जा रही थी. वो लड़का उस लड़की को स्क्रीन शॉट दे देता है. देख कर लड़की बहुत सकते में आ जाती है और दोस्तों को बताती है, उसे डर था कि घर वाले उसे ही गलत कहेंगे. लेकिन दोस्तों की सलाह पर वो घर वालों को बताती है. वही स्क्रीन शॉट वायरल हो जाने पर दिल्ली पुलिस स्वतः संज्ञान लेती है. तब से लोग फेसबुक और ट्विटर पर इसे लेकर बहुत लिख रहे हैं.
ये लड़कों यही नहीं रुकते है.. वो “BoisLockerRoom 2.0” से एक नया ग्रुप बना लेते हैं जिसमें साफ साफ instruction होता है एडमिन की तरफ से कि इस बार Original ID का इस्तेमाल नहीं करना है और इस ग्रुप में कुछ लड़कियों को भी एड किया जाता है. इस संबंध में पुलिस की जांच और कारवाई चल रही है मगर अब ये चर्चा का विषय बन चुका है कि आखिर किशोर आयु के बच्चे को इसकी जरूरत पड़ी ही क्यू? कमी कहाँ रह गयी है?
ऐसा नहीं कि ये सब पहली बार हुआ है बस ये इन्टरनेट पर हो रहा है ये पहली बार है. हम देखते आए हैं कि जब लड़के और लड़कियां बड़े होने लगते हैं और उनमें शारीरिक बदलाव आने लगते हैं. इसके साथ ही उनका विपरित लिंग के प्रति आकर्षण भी बढ़ जाता है. लेकिन उनके शारीरिक बदलाव और विपरीत लिंग के प्रति उनके आकर्षण के बारें में न तो स्कूल और न ही घर पर कोई बात की जाती है. ऐसे में वो इधर उधर से जानकारी हासिल करना शुरू करते हैं जो कि बहुत हानिकारक होती है. अगर उन्हें माता पिता और टीचर द्वारा उनके विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और मन में उठ रहे सभी सवालों पर बात की जाए तो वो सहज रह सकेंगे और उन्हें गलत कामों से बचाया जा सकेगा. इस Instagram पेज पर जो भी कुछ हो रहा था अगर ये समय से बाहर नहीं आता तो कोई बेहद ही बुरा परिणाम हो सकता था.. वो लड़की जिसके बारें में सामूहिक रेप की बातें की जा रही थी.. अगर पेरेंट्स द्वारा समय पर सहारा देकर इस परेशानी को नहीं समझा जाता तो उसके कदम घातक हो सकते थे. हालाकि ये सभी लड़कियां जिनकी फोटो यहां डाली जा रही थी अभी भी डर और सकते में है.
इस तरह की घटना सामने आने के बाद ये तो नहीं जा सकता है कि लड़कियां Instagram न इस्तेमाल करें या वो लड़कों से बात न करें बल्कि चर्चा इस पर होनी चाहिए कि बच्चे से युवा होते लड़के – लड़कियों को कैसे सेक्स एजुकेशन दी जाए.. उन्हें उनके शारीरिक बदलाव के बारें में बताया जाए और क्या सही है और क्या गलत है इस पर स्पष्ट रूप से बात की जाए. ऐसी जिम्मेदारी माता पिता के साथ साथ स्कूलों की होनी चाहिए.
* Rita Sharma is Lucknow based Social Activist.
http://marginalised.in/2020/05/08/boislockerroom-discussion-among-new-delhi-school-students-and-questions-related-to-sex-education-in-india/
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