अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर से न्याय व्यवस्था पर कोई खास फर्क़ नहीं पड़ा है वो तो हमेशा ही प्रभावी लोगों के लिए प्रभावित होती दिखती ही है. अगर लोगों के आरोप सही है कि ये प्लांड एंकाउनटर था तो खाकी जरूर धूमिल होती नजर आ रही है सत्ता द्वारा
बस इस एंकाउनटर से सीख लेने की जरूरत है अब युवाओं को. विकास दुबे के पिछले सभी अपराधों को छोड़ भी दिया जाए तो आठ पुलिस कर्मियों को गोली मारकर भागना ही काफी था उसे फांसी की सजा देने के लिए. अगर वो जिंदा रहता तो सुबूतों देता ऐसा सोचना कुछ ज्यादा ही बेमानी सा लग रहा है.. इससे पहले जब STF ने गिरफतार किया था तब भी मिले थे सुबूत.. क्या हुआ कुछ? वो सुबूत तो अब भी होंगे क्यू नहीं एक्शन लिया जा रहा है? जब कल उसे मंदिर से गिरफ्तार किया गया तो भी STF ने पूछताछ की है वहाँ भी मिले होंगे सुबूत.. सुबूतों से कुछ नहीं होता है उस पर कार्यवाही के लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति चाहिए होती है जो कि किसी भी दल में नहीं है. विकास दुबे का कनेक्शन तो सपा से लेकर भाजपा तक सबमें वायरल होती तस्वीरों से दिख चुका है. विकास दुबे से हटकर भी देख सकते हैं कि कांग्रेस, बीजेपी, सपा, बसपा सभी ने अपने अपने समय में खुद अपराध, अपराधियों को पाला पोसा है. तो ऐसे में इनसे कार्यवाही की उम्मीद करना ठीक नहीं है.
सवाल तो ये है कि राजनीति और अपराध का कनेक्शन है ही क्यू? जब तक ये मजबूत कनेक्शन खत्म नहीं होगा तो एक अपराधी जाएगा तो दूसरा तैयार होकर खड़ा हो जाएगा. जरूरत हमे इस पर बात करने की है कि कैसे राजनीति का अपराधीकरण रोका जाए? सत्ता पर काबिज होने के साफ सुथरी छवि की दरकार होनी चाहिए न कि खून में सने हुए व्यक्ति की...
युवा वर्ग हमेशा ही जल्दी प्रेरित होता है अच्छे, बुरे दोनों काम के लिए. अगर हर अपराध करने, अपराध का साथ देने से पीछे हटने लगे तो स्थिति बदल सकती है. युवाओं के जोश, जज्बे का खूब फायदा उठाया जाता है.. विकास दुबे को भी खुंखार अपराधी बनाया गया है वो जन्मजात नहीं था. जब पहला अपराध किया और वही सजा मिल जाती तो कदम इतने आगे न बढ़ते. उसका इतिहास खंगाला जाए तो उसे बचाने में किसी न किसी नेता का हाथ ही होगा जिसने उसे अपने फायदे के लिए कानून की पकड से बाहर रखा.. मगर क्या हम उनकी बात कर रहे हैं आज? क्या विकास दुबे के एनकाउंटर से उनको कोई नुकसान पहुंचा है? नहीं.. उनकी तरफ उंगली उठती उससे पहले ही हाथ काट दिया गया...
हमें यहां सबक लेने की जरूरत है कि किसी के लाभ के लिए खुद का इस्तेमाल न होने दे. नेताओं के काले करतूतों में उनका साथ न दे.. वोट के समय उनका बहिष्कार करें.. नेता वर्ग न तो कभी खुद हत्या, दंगा करता है और न ही कभी पुलिस के डंडे खाने के लिए सड़क पर आता है.. ये सब काम उनके लिए युवा वर्ग ही करता है.. काम निकल जाने के बाद उन्हें बड़े आराम ये कुटिल नेता बाहर फेंक देते हैं.
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