Tuesday, August 7, 2018

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के बाद अब देवरिया का खुलासा, क्या केवल बलात्कारी और अपराधी ही जिम्मेदार की भूमिका में हैं?


मुजफ्फरपुर शेल्टर होम (NGO द्वारा संचालित) की जांच अभी पूरी हुई भी नहीं थी कि यूपी के देवरिया जिले से एक NGO द्वारा संचालित बालिका गृह, माँ विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान से भागकर एक बच्ची थाने पहुंचती है और समझ के आधार पर बताती हैं कि "दीदी लोग को रात में लाल और काली कार में कहीं भेजा जाता है और सुबह वो रोती हुई वापस आती है और पूछने पर कुछ बताती भी नहीं l हमसे पोछा लगवाया जाता है और नौकरों की तरह रखा जाता है l"

लड़की के इस बयान के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई और बच्ची की counseling कराकर बयान के आधार पर बालिका गृह पर रात में छापा मारा और कुल 42 लड़कियों में से 24 को मुक्‍त कराया और 18 अभी लापता हैं l इस NGO की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि उनकी बेटी कंचन लता अभी फरार है l उक्‍त संस्था को सील कर दिया गया है l वैसे इस संस्था पर पहले से ही अनियमितता के आरोप हैं, पिछले साल ही इसे बंद और लड़कियों, बच्चों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के आदेश दिए गए थे लेकिन उसका पालन नहीं हुआ l



फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया के डीएम सुजीत कुमार को हटाने का आदेश दे दिया है। रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने जांच के लिए दो सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति को देवरिया भेजा है। वे सोमवार को वहां रहेंगे और रिपोर्ट जमा करेंगे, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।




पहले मुजफ्फरपुर और फिर देवरिया.. NGO द्वारा संचालित बालिका गृह पर भी सवाल उठने लगे हैं और साथ ही बार बार लड़कियों के साथ यौन हिंसा और रेप ये भी साबित करता है कि लड़कियां कहीं भी सुरक्षित नहीं है l

घर से स्कूल जाते वक्त, स्कूल में, कॉलेज में, ऑफिस में, रास्ते में कभी भी कुछ भी घटित हो सकता है और छोटे बच्चों और लड़कियों को तो हम किसी भी तरह का दोष भी नहीं दे सकते हैं वे इस तरह के किसी भी खतरे से अनजान रहते हैं और घटना होने के बाद भी उन्हें पता नहीं होता है.. कभी कभी तो महीनो और सालों बाद ये बातें बाहर आती है l

सवाल उठता है कि कैसे माहौल को सुरक्षित किया जाए और इन छोटे बच्चों को किसी भी खतरा आने का अहसास कैसे कराया जाए?

NGO या सरकार द्वारा संचालित सभी बालिका गृह या अनाथ आश्रम की समय समय पर जांच करायी जाये और कुछ भी गलत दिखने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए और साथ अपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने पर कठोर दंड के प्रावधान रखे जाए l

अगर वे बच्चे जिन पर माँ बाप का साया नहीं है और उन्हें बचपन से ही ऐसी अपराधिक गतिविधियों में लिप्त कर दिया जाए तो फिर बड़े होने पर उनसे स्वस्थ्य और बे‍हतर समाज बनाने की कल्पना कैसे कर सकते हैं? जिसने गलत देखा, सहा वो आगे चलकर गलत ही करेगा और इस तरह से अपराधिक समाज ही निरंतर बनेगा l

साथ ही ये बेहद ही दुखद स्थिति है कि इन दोनों घटनाओं में पूरा परिवार शामिल हैं इससे पारिवारिक संस्था पर ही सवाल खड़े होते हैं l अगर परिवार से कोई एक कुछ गलत कर रहा होता है तो बाकियों को उसे रोकने की कोशिश करनी चाहिए l इसे परिवार नामक संस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं.. जिस घर में पति पत्नी, बच्चे होते हैं वहां दूसरे बच्चे का यौन शोषण किन परिस्थितियों में होता होगा या बच्चे अच्छे और बुरे का सवाल न करते होंगे या सभी को आरंभ से गलत करने की ही शिक्षा दी गयी है?

सभी बच्चों को घर में भी और स्कूल में विशेषज्ञ द्वारा बचपन से अच्छे और बुरे का अहसास और तुरंत प्रतिक्रिया करना सिखाया जाए और साथ ही ऐसी ट्रेनिंग सभी अनाथ आश्रम और बालिका गृह में दी जाए l

समय समय न केवल बालिका गृह बल्कि स्कूल और कॉलेज में भी inspection कराया जाए और कुछ भी गलत होने पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की जाए और जो भी व्यक्ति या संस्था गलत चीजों में लिप्त दिखे उस पर कानूनी कार्रवाई के साथ आजीवन प्रतिबंध लगा दिया जाए l

कुछ हेल्पलाइन (1090 के तर्ज पर) नंबर रखे जाए जिस पर कोई भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था हो और पहचान गोपनीय रखी जाए l ये नंबर सभी जगह उपलब्ध कराए जाए, अमूमन ऐसा देखा गया है कि कुछ लोगों को पहले से ही आभास होता है मगर डर से बोलते नहीं हैं वहां इस तरह के हेल्पलाइन नंबर होने से स्थिति बिगड़ने से पहले सुधारी जा सकती है l

बच्चे जो देश का भविष्य है, उन्हें सजाने, सवारने, बे‍हतर शिक्षा और माहौल देने की जरूरत है तभी आगे चलकर वो स्वस्थ समाज बना सकते हैं l इसके लिए हर एक नागरिक के सजग और सक्रिय होने की जरूरत है l

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