रोज रोज परिवार के बुजुर्ग के साथ बुरा बर्ताव और उपेक्षा ये सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वाकई अब परिवार में वृद्ध हो चुके माता पिता की कोई जरूरत नहीं?
यहीं माता पिता बच्चों के पालन पोषण के लिए बहुत सारे समझौते करते हैं और हर तरह से उनको आत्म निर्भर करते हैं l बच्चों के आत्म निर्भर होने के साथ यही माता पिता वृद्ध होते हैं और बच्चों पर निर्भर हो जाते हैं l जैसे ही बच्चों का अपना परिवार बनता है तो माता पिता बोझ लगने लगते हैं और एक बार फिर लौट ये बच्चे ही माता पिता बनकर वृद्ध होकर कष्ट भोगते हैं l अब ये संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में आता जा रहा है l
ये सामाजिक व्यवस्था का हनन है और ये भी दर्शाता है कि माननीय संवेदना ख़त्म होती जा रही है l जो बच्चे अपने परिवार में केवल माता पिता और भाई बहन को ही देखते हैं और माता पिता द्वारा दादा - दादी और अन्य बुजुर्गों की उपेक्षा देखते हैं तो उनमें वैसे ही संस्कार आने लगते हैं l फिर यही बच्चे समय आने पर अपने माता पिता के साथ भी ऐसा ही करते हैं l
ब च्चों का प्रथम स्कूल परिवार ही होता है और यहां से सीखी गई हर चीज़ उनके जीवन में, आचार विचार और काम में दिखाई पड़ती है l बढ़ती महंगाई और जिम्मेदारी से बचने के लिए माता पिता का वृद्धा आश्रम छोड़ने का जो चलन शुरू हो गया है वो सामाजिक संरचना के लिए नितांत घातक है l
एक परिवार में अपनी और बच्चे की हर जरूरत पूरी करने के लिए पति पत्नी दोनों का नौकरी करना और बच्चे का घर पर अकेला रहना एक बहुत बड़ा कारण है बाल अपराध बढ़ने का l अकेले रहने पर बच्चे टीवी, इंटरनेट और दोस्तों के साथ अपनी मर्जी का कुछ भी सीखते हैं और उनको गलत सही का पहचान कराने वाला कोई नहीं होता l घर में बड़े बुजुर्ग के होने पर ऐसी समस्या से निपटा जा सकता है l
कुछ बातों पर ध्यान देकर हर व्यक्ति एक अच्छा और खुशहाल जीवन जी सकता है - - -
* हर माता पिता को खुद घर के बड़े बुजुर्ग की देखभाल करनी चाहिए और बच्चों को भी सिखाना चाहिए क्यू कि एक समय हर व्यक्ति इसी अवस्था में होगा और बच्चे जो माता पिता को करते देखेंगे, वही कल खुद भी करेंगे l
* बढ़ती महंगाई से जिंदगी जीना मुश्किल जरूर होता जा रहा है l हर व्यक्ति को अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अपने आगे आने वाली जिंदगी के लिए बचा कर रखना चाहिए ताकि बच्चों पर वो आर्थिक रूप से न निर्भर हो l
* अपने और स्वास्थ्य के प्रति युवावस्था से ही सोचना शुरू कर देना चाहिए ताकि बुढ़ापा अच्छा और निरोगी रहे और इस तरह बच्चों पर भार भी नहीं बनेगे l
*अच्छे अच्छे दोस्त अपने आसपास रखने चाहिए और उनसे अपने सुख दुख बाट कर अपने को खुश रखिये और जरूरत आने पर एक दूसरे का ख्याल भी रखे, सिर्फ परिवार पर ही निर्भर न रहे l
"है चार पल की जिंदगी,
आ जी ले सब मिलकर हंसी खुशी"
यहीं माता पिता बच्चों के पालन पोषण के लिए बहुत सारे समझौते करते हैं और हर तरह से उनको आत्म निर्भर करते हैं l बच्चों के आत्म निर्भर होने के साथ यही माता पिता वृद्ध होते हैं और बच्चों पर निर्भर हो जाते हैं l जैसे ही बच्चों का अपना परिवार बनता है तो माता पिता बोझ लगने लगते हैं और एक बार फिर लौट ये बच्चे ही माता पिता बनकर वृद्ध होकर कष्ट भोगते हैं l अब ये संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में आता जा रहा है l
ये सामाजिक व्यवस्था का हनन है और ये भी दर्शाता है कि माननीय संवेदना ख़त्म होती जा रही है l जो बच्चे अपने परिवार में केवल माता पिता और भाई बहन को ही देखते हैं और माता पिता द्वारा दादा - दादी और अन्य बुजुर्गों की उपेक्षा देखते हैं तो उनमें वैसे ही संस्कार आने लगते हैं l फिर यही बच्चे समय आने पर अपने माता पिता के साथ भी ऐसा ही करते हैं l
ब च्चों का प्रथम स्कूल परिवार ही होता है और यहां से सीखी गई हर चीज़ उनके जीवन में, आचार विचार और काम में दिखाई पड़ती है l बढ़ती महंगाई और जिम्मेदारी से बचने के लिए माता पिता का वृद्धा आश्रम छोड़ने का जो चलन शुरू हो गया है वो सामाजिक संरचना के लिए नितांत घातक है l
एक परिवार में अपनी और बच्चे की हर जरूरत पूरी करने के लिए पति पत्नी दोनों का नौकरी करना और बच्चे का घर पर अकेला रहना एक बहुत बड़ा कारण है बाल अपराध बढ़ने का l अकेले रहने पर बच्चे टीवी, इंटरनेट और दोस्तों के साथ अपनी मर्जी का कुछ भी सीखते हैं और उनको गलत सही का पहचान कराने वाला कोई नहीं होता l घर में बड़े बुजुर्ग के होने पर ऐसी समस्या से निपटा जा सकता है l
कुछ बातों पर ध्यान देकर हर व्यक्ति एक अच्छा और खुशहाल जीवन जी सकता है - - -
* हर माता पिता को खुद घर के बड़े बुजुर्ग की देखभाल करनी चाहिए और बच्चों को भी सिखाना चाहिए क्यू कि एक समय हर व्यक्ति इसी अवस्था में होगा और बच्चे जो माता पिता को करते देखेंगे, वही कल खुद भी करेंगे l
* बढ़ती महंगाई से जिंदगी जीना मुश्किल जरूर होता जा रहा है l हर व्यक्ति को अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अपने आगे आने वाली जिंदगी के लिए बचा कर रखना चाहिए ताकि बच्चों पर वो आर्थिक रूप से न निर्भर हो l
* अपने और स्वास्थ्य के प्रति युवावस्था से ही सोचना शुरू कर देना चाहिए ताकि बुढ़ापा अच्छा और निरोगी रहे और इस तरह बच्चों पर भार भी नहीं बनेगे l
*अच्छे अच्छे दोस्त अपने आसपास रखने चाहिए और उनसे अपने सुख दुख बाट कर अपने को खुश रखिये और जरूरत आने पर एक दूसरे का ख्याल भी रखे, सिर्फ परिवार पर ही निर्भर न रहे l
"है चार पल की जिंदगी,
आ जी ले सब मिलकर हंसी खुशी"

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