Monday, October 22, 2018

ट्रेन हादसा


आज सुबह से ही घर में चहल पहल थी, बच्चों की छुट्टियां जो थी l सबने जिद की रावण दहन करने की और तभी पड़ोस से मनकू भी आ गया l मनकू ने बताया कि पास रेलवे लाइन के उस पार शानदार रावण दहन हो रहा है और वह जा रहा है   इस पर मुन्नी पूछ बैठी कि जाओगे कैसे.. लाइन के इस पार तो दीवार है उसे कैसे फादेगे?

मनकू बोला कि अरे फादना नहीं है.. इस तरफ रेलवे लाइन के बीच बड़ी सी TV लगा रहे हैं जिसमें सब कुछ दिखेगा जो भी उधर हो रहा है.. हमें तो बस रेलवे लाइन पर खड़े होकर देखना है.. बच्चों से कहाँ कि शाम को तुम सब तैयार रहना.. और भाई, भाभी तुम भी..

मुन्नी बोल पड़ी.. नहीं.. नहीं.. ये ठीक नहीं होगा कि रेलवे लाइन पर खड़े होकर देखे.. अगर ट्रेन आ गयी तो.. इस पर मनकू छाती फुलाकर बोला कि आयोजक (नेता जी) के आदमी आए थे बताने... और कह रहे थे कि इतनी भीड़ होगी कि रेलवे वाले की हिम्मत न होगी उधर से ट्रेन निकालने की.. l

अब शाम होने को आई तो बच्चे जिद करने लगे.. मुन्नी को ठीक नहीं लग रहा था मगर कल्लू (बच्चो के पिता) को जाते देखकर बच्चे भी तैयार हो गए.. तभी मनकू भी आ गया अपनी बीबी के साथ.. नयी नयी शादी हुई थी.. दोनों बहुत खुश रहते थे.. उन्हें देख कर मुन्नी खुश हो जाती थी.. बस्ती के सभी लोग जा रहे थे..l
रेलवे लाइन से थोड़ा दूर कच्ची सरकारी जमीन पर सभी ने उसके गाँव से आकर झोपड़ी बनायी थी और आसपास के घरों में काम करके अच्छा कमा लेते थे.. बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ रहे थे.. l


तस्वीर साभार 

सब जा रहे थे.. मगर मुन्नी नहीं गयी.. वो बाहर आई तो देखा कि आसपास सब सुनसान हो गया था बस इक्का दुक्का औरते घर में कुछ काम के चलते नहीं गयी थी.. वो अंदर आ गयी और मेम साहब की साड़ी में फाल लगाने बैठ गयी.. l
करीब आधे घंटे हो गए थे और अंधेरा हो रहा था.. वो बल्ब जलाने उठी तो बाहर से कुछ रोने की आवाज़ आई.. दौड़कर बाहर आई तो देखा कि जहां सभी रावण दहन देखने गए थे उधर से लोग रोते पीटते आ रहे हैं.. वो पागलों की तरह बदहवाश होकर दौड़ी.. और रेलवे लाइन पर पहुचते ही.. हर तरफ खून खून.. जगह जगह खोपड़ी.. कटे हुए हाथ पैर पड़े थे.. वो चिल्ला कर.. सोनू.. मोनू.. राधा.. मनकू.. राधा के बाबू.. चिल्लाते चिल्लाते.. कटे हुए हाथ पैर उठाती और मिला मिला कर पहचानने की कोशिश करती... l


Written by Rita Sharma
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