Monday, June 27, 2022

समीक्षा – सोशल कॉकटेल

सौरभ द्विवेदी द्वारा लिखित कहानी संग्रह"सोशल कॉकटेल" जीवन की खट्टे मीठे अनुभव, घटना के साथ जोड़ते हुए दिशा, मार्गदर्शन दिखाते हुए खुद में ही बेहद अनूठा संग्रह है। जहां घर परिवार, समाज की चिंता भी जाहिर होती है तमाम बुरी घटनाओं को महसूस करके। कहानी संग्रह पूरी विविधता को समेटे हुए हैं। कहानी के माध्यम से जिस तरह समाज, देश, दुनिया में घटित हो रहे घटनाओं को बेहद गूढता से अनुभव करके लिखा गया है लेखक के कोमल मन और समाज के प्रति उनकी चिंता को दर्शाता है।


कहानी ‘शख्स से शख्सियत’ में कर्म के सिद्धान्त की बात करते हैं, संदेश देते हैं कि व्यक्ति कर्म के बल पर Dr कलाम जैसी बड़ी शख्सियत बनकर युवाओं के लिए प्रेरणास्पद बन सकते हैं।


कहानी ‘खुशबू रोजगार की’ में वो बताते हैं कि कोई भी काम छोटा बड़ा नही होता है। समाजिक दिखावे के बजाय अवसर अनुसार निर्णय लेने चाहिए।


‘पुष्पक विमान’ कहानी में लेखक मन की तुलना पुष्पक विमान की गति से करता है। हर व्यक्ति को चेतन, अवचेतन मन को समझते हुए बुरे विकारों को नष्ट करने के आध्यात्म की ओर जाना चाहिए और बिना मन की इच्छाओं को खत्म किए सुखमय जीवन बिताना चाहिए।


कहानी ‘विश्व के लिए भारत एक बाजार’ में बढ़ती जनसंख्या से उपजी भुखमरी, कुपोषण, अशिक्षा, असमानता, भ्रष्टाचार आदि पर चिंतन करते दिखते हैं, वो कहानी के माध्यम से बताते हैं कि भारत की बढ़ती जनसंख्या अन्य देशों के लिए केवल एक बाजार भर है जहां वो अपने उत्पादन खपाना चाहते हैं बस।


संग्रह की आखिरी कहानी ‘अर्धविक्षिप्त कौन?’ में वो एक अर्द्ध विकसित लडके कालू के माध्यम से कहानी में बताते हैं कि किस तरह छोटी छोटी बातों बढ़कर बलात्कार का रूप धारण करती है। सब तरफ़ सर्व सुलभ एडल्ट मूवी, वीडियो पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं।

कुल मिलाकर समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, भौतिक, मानसिक आदि पर गहन चिंतन कर कहानियों के रूप में बटोरकर एक कॉकटेल पाठकों के लिए तैयार करते हैं l


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