मथुरा जिले के जवाहरबाग में अवैध कब्जे को हटाने मैं सत्याग्रहियों द्वारा फायरिंग मैं हमारे प्रदेश के जाबांज अधिकारी शहीद एस.पी.सिटी मथुरा श्री मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह श्री संतोष यादव को शत् शत् नमन💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
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विचारणीय तथ्य ये हैं कि हाइकोर्ट के आदेश के बावजूद सत्याग्रहियों द्वारा जगह ना खाली किये जाने पर मामले की गंभीरता क्यों नहीं समझी गयी? पर्याप्त पुलिस जवान और सुरक्षा के इन्तज़ाम क्यों नहीं किये गए? सीनियर पुलिस अधिकारी मौके पर क्यों नहीं मौजूद थे, अगर थे तो मामला बढ़ते देखकर समय से सही आर्डर क्यों नहीं किये? क्या सीनियर अधिकारी और राजनीतिज्ञ सिर्फ न्यूज़ चैनल पर अफ़सोस जताने के लिए है? लंबे समय से चल रहे इस मामले में पहले से सख्त इंतज़ाम क्यों नहीं किये गए? इन पर पुलिस की निगरानी क्यों नहीं थी, अगर थी तो इतनी भारी मात्रा में गोला- बारूद जवाहर बाग कैसे पहुचे? इनमे किसकी मिलीभगत हैं? सत्याग्रहियों का नेता रामवृक्ष पुलिस के होने के बावजूद कैसे भागा, किसने की सहायता? क्या पुलिस और सेना लापरवाही और देर से आर्डर के चलते शहीद होने के लिए हैं? ये हमारी सुरक्षा के लिए हैं, लेकिन शासन से इन्हें पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी गयी? ऐसे ही लापरवाही चलती रही तो कौन जायेगा सेना और पुलिस में? बेशक देश की सेवा और जनता की सुरक्षा के लिए ये शहीद होते हैं, लेकिन लापरवाही के चलते जान गवाने के लिए नहीं? क्या 20 लाख के मुआवजा से इनकी शहादत को आकां जा सकता है?===========================
अब सरकार को चाहिए कि इस मामले की सख्त जाचं कराये, दोषी जो भी हो, उन पर कारवाही हो। शहीद पुलिस अधिकारी के परिवार को उचित मुआवजा मिले, परिवार को पर्याप्त सहायता और बच्चों की अच्छी शिक्षा की व्यवस्था और आश्रितों को नौकरी दी जाए। घायल पुलिस के जवान को उचित इलाज़ और मुआवजा दिया जाए, ये सरकार का प्रथम और पुनीत कर्त्तव्य और अपनी पुलिस प्रशासन के प्रति जिम्मेदारी है।




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