Shaktiswaroopa
Saturday, May 21, 2016
सुकुन
मीलो चलते चलते थक चुके है हम,
मिल जाये कोई घने पेड़ की छाया।
शीतलता और सुकुन का अहसास,
कुछ एक पल सुकुन की नींद।
लेकिन कहाँ मिलेगा ये सुकुन,
जंगलों और पेड़ो को काट चुके है खुद ही हम।।
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