Monday, October 30, 2017

"जाने पुलिस का सच, क्यों हुई आखिर लाठी चार्ज"


आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का अनशन और उस पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज करना कई तरह के तथ्यों को सामने लाते हैं। मसलन कोई भी मांग सरकार से पूरी करवानी हो तो अनशन का सहारा लिया जाये और इसके लिए सबसे व्यस्त मार्ग को बाधित किया जाए। वैसे तो अनशन, प्रदर्शन एक संवैधानिक अधिकार है लेकिन किसी मार्ग को बाधित करना जो आम जनता के लिए परेशानी का सबब बनें, ये सब करना अब प्रदर्शकारियों की एक प्रवृति बन चुकी है।जिसके चलते कभी स्कूली बच्चे और तो कभी कोई बीमार व्यक्ति जाम में फंस जाता है और कई बार जाम में एम्बुलेंस फंस जाने के कारण मरीज की मृत्यु तक हो जाती है।
यहाँ सवाल ये उठता है कि सरकार से मांगे पूरी कराने के लिए अनुचित तरीके अपनाते हुए क्या हिंसक हो कर प्रदर्शन करना और सड़के जाम करना कितना उचित है?


 अभी हाल में आंगनवाड़ी कर्ताओ द्वारा सड़कों पर आ जाना और रास्ता से न हटना और फिर उनका हिंसक होना और उसके बाद पुलिस द्वारा लाठी चार्ज, जिसमें कई पुलिस कर्मी और प्रदर्शनकारियों का चोटिल होना काफी चर्चा का विषय बना।
इस सम्बन्ध में हमने लोगों से पूछताछ के आधार पर कई तथ्यों को जाना और समझा... पेश है कुछ अंश...

प्रदर्शनकारियों को समझने की कोशिश पूरी की गयी थी। बार बार पुलिस की तरफ से अनुरोध किया जा रहा था कि वो रोड छोड़कर के पार्क या किसी और जगह पर एकत्र हो जाए। लेकिन वे सुनने को तैयार न थे और धीरे धीरे प्रदर्शनकारी उग्र होते गए।
एकाएक उन्होंने न जाने कहाँ से पत्थर, बोतल फेकने शुरू कर दिए। उनके हाथों में डंडे भी आ गए थे और और वो आसपास लगे पेड़ो से टहनियाँ तोड़ कर भी वार करने लगे। उनकी उग्रता देख कर ही पुलिस ने लाठी चार्ज किया।
कुछ फोटोज जो सोशल मीडिया में वायरल हुई जिसमें कुछ पुलिस कर्मी महिलाओं को बाल से खीच रहे है और गर्दन से पकड़ रखा है उसमें फोटोज पूरी नहीं ली गयी है। दरसअल महिला प्रदर्शनकारियों ने एक महिला सिपाही को पूरी तरह से भीड़ में ले लिया था। किसी ने उसके सर पर लाठी भी मारी, उसे गंभीर चोट भी आ सकती थी।



उसे भीड़ से छुड़ाने के लिए  कुछ पुलिस कर्मियों ने उन महिलाओं को पकड़ा जिससे शायद पुलिस की बर्बरता जैसा कुछ नज़र आ रहा है। वैसे तो किसी महिला को इस तरह से पकड़ कर खीचना गलत था लेकिन भीड़ से महिला पुलिस को छुड़ाने का कोई और तरीका भी न नज़र आया।  अगर तुरंत छुड़ाने की कोशिश न करते तो संभवत कुछ अनहोनी भी हो सकती थी।



 उक्त घायलों को समय से चिकित्सा सुविधा मुहैया कराया गया। पुलिसकर्मियों द्वारा उक्त महिलाएं जिन्होंने पुलिस से मार पीट की थी उन पर सरकारी काम में बाधा सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, क्योंकि वहां कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए मौजूद थी। रास्ता जाम करने पर उनसे बार बार किसी और जगह जाने की अपील भी की जा रही थी मगर हिंसक होकर उन्होंने पहले पुलिस पर वार किया जो सरासर अनुचित और गैर क़ानूनी है।
पुलिस कर्मी ने उन्हें मारा नहीं है बस सेल्फ डिफेंस में कुछ मार पीट जरूर नज़र आई वो वार करती प्रदर्शनकारियों का महिला पुलिस को बचाने के उद्देश्य से ही था।
घायलों को अस्पताल पहुचाने के लिये एम्बुलेंस पहले से मौजूद थी, सभी को समय से इलाज़ मुहैया कराया गया।

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