मैरिटल रेप पर बनी आज छह एपिसोड की वेब सीरीज चिरैया देखी तो बहुत सुकून मिला कि देर से सही समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके संघर्ष को लिखा जाने लगा है। एक तरफ मैरिटल रेप पर देश में कानून की कमी तो दूसरी ओर संघर्ष को बखूबी दिखाती वेब सीरीज का आखिरी एपिसोड तो वाकई दमदार है कि जब कोई स्त्री न्याय, इंसाफ और हक के लिए खड़ी होती है तो कैसे उसे अपने घर में ही गिराने का प्रयास पुरुष रूपी पिता, ससुर, भाई करते हैं और इसके लिए किसी भी हद तक पहुंच कर षडयंत्र रचते हैं, वहीं बड़ी बहु के पति और नानाजी को साथ देता दिखाकर "All men are not rapist", "सब पुरुष एक जैसे नहीं होते हैं" ये कहने वाले का मुंह भी बंद करने का प्रयास किया गया है।
इसमें कहानी को बहुत ही महीन तार से बुना गया है और हर महिला अपनी आपबीती से इसे जोड़कर देख सकती हैं। एक स्त्री अपनी ही बेटी, बहु या किसी अन्य का साथ कई बार अप्रत्यक्ष रूप से देती है तो उसमें बगावत करने की हिम्मत नहीं होती, वहीं पितृसत्तात्मक समाज में पुरुष कैसे अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए सही या गलत सब में खुलकर, छाती ठोक कर साथ देता है और अब चाहे वो घर में रेप का मामला क्यों न हो?
एक ससुर के रूप उस व्यक्ति को रचने की कोशिश की गई है जो सार्वजनिक मंच पर महिला उत्थान की बात करता है तो वही घर में हो रहे अपराध को मान मर्यादा की सीमा में दबने की कोशिश करता है।
दिव्या जब चुपके से परिवार पर हो रहे मुकदमा की जानकारी देकर Anticipayory Bail कराती है तो हमें एक ऐसी स्त्री दिखाई देती है तो अपने ऊपर परिवार की दुहाई देकर पितृसत्ता की रक्षा करते दिखाई देती है। और न्याय की राह में चलने वाली हर स्त्री को सही और गलत के रास्ते में उलझा कर कैसे पुरुष अपने को बचाने के लिए नीचता की हर सीमा पार करने की कोशिश करता है इसे बखूबी दिखाया गया है। वहीं एक रेप के मामले मे पूर्व यूपी मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का मंच से दिया गया चर्चित बयान भी इस्तेमाल किया गया है "लड़के है, लड़कों से गलतियां हो जाती हैं"।
साथ ही आखिरी में दादी का अचानक बोलकर अत्याचार को खिलाफ खड़े होना के लिए खुलकर बोलने की जो बात करना बहुत दमदार तरीके से दिखाया गया है क्योंकि हर स्त्री खुलकर, बाहर निकलकर,सामने आकर, खड़ी होकर, लिखकर साथ नहीं दे सकती तो सिर्फ अपने आसपास, घर परिवार में गलत पर चुप्पी तोड़कर स्त्री अपराध को कम करना में साथ दे सकती हैं।
लेखक चाहता तो आखिरी कुछ मिनटों में मारपीट कर, लड़कर इंसाफ दिलाते दिखा सकता था मगर उसने समाज की असल सच्चाई को दिखाने का प्रयास किया है कि जब एक औरत समाज के खिलाफ,एक पुरुष के खिलाफ खड़ी होती है तो उसे किन-किन असल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और कैसे उसे कमजोर और दबाने के सही, गलत प्रयास किए जाते हैं।
कुल मिलाकर सभी को और खासकर पुरूषों को इसे देखना चाहिए, आखिर तक देखकर मुझे इस वेब सीरीज के लेखक का नाम जानने की इच्छा हुई, गूगल किया तो पता चला कि दिव्य निधि शर्मा है, तभी शायद हीरोगिरी के बजाय स्त्री का असल संघर्ष पर पूरी सीरीज बन पाई।
P. S.. इसे कॉपी जरूर कर सकते हैं, मगर नाम/क्रेडिट देना न भूले..।
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