Sunday, March 22, 2026

परंपरा के नाम पर चलता रहा खेल

परंपरा के नाम पर महिला शोषण, अत्याचार 

Forced Fattening (Leblouh)
दक्षिण पश्चिम अफ्रीका,  Mauritania में एक  परंपरा है Leblouh (लेब्लूह)। इसमे छोटी लड़कियों को जानबूझकर ज्यादा खासतौर से फैट वाला खाना खिलाया जाता है ताकि वो जल्दी बड़ी और भरे शरीर की दिखाई दे, इसे फोर्स फैटनिंग कहते हैं। वहां भरे शरीर की लड़कियों को सुंदर और समृद्ध परिवार की माना जाता है और इस कारण से उनकी जल्दी शादी भी हो जाती है।
इस परंपरा के कई नुकसान है, सबसे पहले तो महिला स्वतंत्रता का उल्लंघन और कई बीमारियों जैसे डायबिटीज, मोटापा और दिल से जुड़ी बीमारियां ज्यादा होती हैं। United Nations और अन्य NGOs इस प्रथा को child abuse मानते हैं। Mauritania की सरकार ने इस खत्म करने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किए हैं, जिससे कुछ हद तक खास कर शहरी इलाकों में इसका चलन कम हो गया है।

अफ्रीका के कई हिस्सों जैसे कि 
कीनिया, युगांडा, नाइजीरिया, घाना में Widowhood Rituals (विधवा से जुड़े रीति-रिवाज़) प्रचलित है जैसे कि भारत में कभी सती प्रथा थी। यहां माना जाता है कि अगर किसी महिला का पति की मृत्यु हो गई है तो वो महिला अशुद्ध हो गई है और फिर उसे कई तरह के कठोर शुद्धिकरण परंपराओं से गुजरना पड़ता है। उन्हें पति के भाई या रिश्तेदार से शादी करने के लिए भी मजबूर किया जाता है। संपत्ति में उनका अधिकार नहीं दिया जाता है और कई परिवारों में महिलाओं को घर से बाहर निकाल भी दिया जाता है। एक तरह से महिला से उनके अधिकार और स्वतंत्रता छीनने की कोशिश की जाती है। हालांकि अब UN और कुछ लोकल NGO के प्रयास से स्थिति में सुधार हुआ है मगर फिर भी बड़े पैमाने पर शोषण जारी है।

महिला जननांग विकृति (FGM) (खतना)

अफ्रीका, मध्य-पूर्व, भारत, मलेशिया और यूरोप के प्रवासी समुदायों के कुछ हिस्सों में खासकर बोहरा समुदायों ये FGM या खतना प्रचलित हैं। दाऊदी बोहरा जो कि शिया समुदाय है, इसमें 6–7 साल की उम्र की लड़कियों के क्लिटोरिस (clitoris) का कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा काट दिया जाता है। वजह धार्मिक है.. उनका मानना है कि इससे लड़कियां पवित्र और शादी लायक हो जाती है। इस तरह शरीर के एक हिस्से के साथ छेड़छाड़ बिना किसी मेडिकल प्रशिक्षण के किया जाता है। इससे कई घातक परिणाम होते हैं.. शारीरिक पीड़ा के साथ बच्चियों के मन में डर बैठ जाता है और सेक्सुअल संबंधों, मासिक धर्म के दौरान उन्हें दर्द से गुजरना पड़ता हैं। इसे रोकने के लिए कई राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय संगठन सक्रिय है।
2017 में एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता Sunita Tiwari ने Supreme Court of India में एक याचिका (petition) दायर इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, कई महिलाओं ने अपनी आप बीती, पीड़ा को सामने आकर साझा किया ।
ये एक तरह से महिलाओं की स्वतंत्रता का हनन, शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुंचाने वाली क्रूर धार्मिक प्रथा है।

Neck Elongation या गर्दन को लंबा करना 
म्यांमार और उत्तरी थाईलैंड के कायन (कायन लाहवी) समुदाय में, लड़कियाँ लगभग पाँच साल की उम्र से ही अपनी गर्दन के चारों ओर पीतल के छल्ले पहनना शुरू कर देती हैं। समय के साथ इसमें और छल्ले जोड़े जाते हैं। ये छल्ले कॉलरबोन और पसलियों के पिंजरे को नीचे की ओर धकेलते हैं, जिससे गर्दन लंबी दिखाई देती है। यह प्रथा सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि लंबी गर्दन वाली सुंदर लड़की का विवाह संभ्रांत परिवार में होगा।
इससे होने वाले नुकसान की बात करें तो गर्दन और रीढ़ पर दबाव पड़ने से muscles कमजोर हो सकती हैं और अगर अचानक rings हटा दिए जाएँ तो 
दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती हैं। हालांकि अब ऐसी प्रथाएं समय के साथ कम होती जा रही हैं।

ब्रेस्ट आयरनिंग Brest Iroining या छाती को विकसित होने से रोकना 

कैमरून, और नाइजीरिया, टोगो, गिनी और चाड के कुछ समुदायों में  'ब्रेस्ट आयरनिंग' (स्तनों को गर्म चीज़ों से दबाना) की प्रथा प्रचलित है। यहां एक छोटी लड़कियों के स्तन को बढ़ने से रोकने के लिए स्तनों को गर्म चीज़ों से दबाया या कूटा जाता है। इसका मकसद अक्सर यौवन की शुरुआत में देरी करना और यौन आकर्षण को कम करना होता है। यह प्रक्रिया अक्सर परिवार के सदस्यों द्वारा की जाती है; लगभग 58% मामलों में इसे माँ द्वारा अंजाम दिया जाता है।
जब ये प्रथा प्रचलित हुई थी तब उद्देश्य था कि बच्चियों को यौन हिंसा से बचाना, लड़कियां जितनी देर से विकसित होंगी उतनी ही सुरक्षित रहेंगी.. धीरे धीरे कबीले से लोग गांव, शहर में रहने लगे... महिलाओं की सुरक्षा के लिए नियम, कानून तो बनाए गए मगर संस्कृति के नाम पर ऐसी प्रथाएं चलती रही।
इसे चाइल्ड एब्यूज की श्रेणी में रखा गया है और रोकने के लिए तमाम सामाजिक संस्थाएं काम भी कर रही हैं।
लड़कियां तमाम तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से गुजरती हैं। Breasts का असामान्य विकास, Cysts या lumps बनना, breastfeeding में दिक्कत और Skin Damage, Permanent Scars जैसी दिक्कतों के साथ मानसिक तकलीफ और एंजाइटी से रोज दो चार होती है।


Witch Hunting ( महिलाओं को डायन या चुड़ैल 
मानना)

ये भारत के झारखंड, ओडिशा, असम, बिहार और Papua, New Guinea,Africa के कुछ हिस्सों में ऐसे अंधविश्वास प्रचलित हैं। इसमें किसी महिला (कभी-कभी पुरुष भी) को “डायन” या जादू-टोना करने वाली बताकर उसे मारना पीटना, समाज से निकाल देना
जैसे अत्याचार किए जाते हैं। कई बार परिवार के लोग भी अकेली स्त्री या विधवा स्त्री देखकर संपत्ति के लालच से इस अंधविश्वास के पीछे षड्यंत्र रचकर महिला को मारपीट कर भगा देते है या जान से ही मार देते हैं। कई बार घर में किसी की मौत, बीमारी या फसल खराब होने जैसी समस्याओं पर भी किसी महिला पर आरोप मढ़कर उसे डायन बताकर मारपीट कर गांव से बाहर कर देते हैं। हालांकि झारखंड , असम सरकार ने Jharkhand Witchcraft Prevention Act, Assam Witch Hunting Prohibition Act
 कानून बनाकर रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं।

Foot Binding (पैरों को बढ़ने से रोकना)
मुख्य रूप से China में लगभग 1000 साल तक (10वीं सदी से 20वीं सदी की शुरुआत ) ये परंपरा के नाम पर प्रचलित थी। इसमें 4–8 साल की लड़कियों के पैर मोड़ दिए जाते थे। उंगलियाँ (toes) अंदर की ओर दबा दी जाती थीं और फिर कपड़े से बहुत कसकर बांध दिया जाता था। ऐसा सालों तक बांधते रहते थे। 
इससे पैर का आकार 3–4 इंच तक छोटा हो जाता था। छोटा पैर सुंदरता का पर्याय माना जाता था , लड़कियां की शादी उच्च वर्ग में करने के लिए ऐसा किया जाता था। इससे बहुत ज्यादा दर्द होता था, कई 
हड्डियाँ टूट जाती थीं, चलने में दिक्कत (life-long disability) infection और कई बार सड़न (gangrene) पैदा हो जाती थी। बाद में चाइना सरकार ने इस पर बैन लगा दिए थे।

चाहे भारत देश हो या कोई अन्य, सभी जगह और धर्म में लड़कियों का सुंदर होना और विवाह होना ही उनकी जिंदगी का उद्देश्य था तो इस तरह के तमाम प्रयोग पुरुषों को खुश करने के लिए प्रयोग किए जाते थे और तमाम प्रयोग अब भी किए जाते हैं।


Writer Rita Sharma
Social Activist 

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