Thursday, March 9, 2017

आतंकवाद का सच

आतंकी मुठभेड़ -"परदे के पीछे का सच"
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई आतंकी मुठभेड़ और उनके पिता का शव लेने से इंकार बहुत सारे सवाल खड़े करता है, समाज के सामने, सरकार के सामने, आतंक और धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों के सामने????
 जैसा कि कहा जाता रहा है कि आतंकवाद और आतंकी का कोई धर्म नहीं होता...कुछ भटके और बेरोजगार नवयुवको को कुछ स्वार्थी, आतंकी संगठन अपना निशाना बनाते हैं और इस तरह उनके आतंक का व्यापार फलता फूलता रहता है। अगर ये सिर्फ धर्म के नाम पर ही होता तो मुस्लिम देश आतंक से अछूते रहते हैं और वहां मासूमों का खून नहीं बहता।
लेकिन सोचनीय तथ्य ये है कि इसकी चपेट में सिर्फ मुस्लिम नवयुवक ही क्यों? जब जब मुस्लिम का पर्याय आतंकवाद कहा गया तो मुस्लिम धर्मगुरुओं ने हर मंच से इसका पुरज़ोर विरोध क्यों नहीं किया?
जैसा कि तीन तलाक को लेकर जितना विरोध और कट्टरता दिखाई जा रही हैं अगर ऐसा ही विरोध और कट्टरता मुस्लिम आतंकवादी संगठन के साथ दिखाई जाए तो एक तो नवयुवक दिशा भ्रमित नहीं होंगे और साथ धर्म के साथ जुड़ता कलंक भी मिटेगा।
जरा सोचे उस परिवार का जो अपने बच्चे को बाहर पढ़ने, लिखने और बनने भेजते है और जब ये पता चलता हैं कि वो बहकावे में आकर एक भयावह रास्ते पर चल पड़े है जिसका अंत उनकी मौत होगी और साथ ही पूरा परिवार संकट में। ताज्जुब इस बात का ज्यादा होता हैं कि इन संगठनो की ट्रेनिंग ना जाने कैसी होती है कि युवक परिवार, समाज, बदनामी, अपनी जिंदगी सब कुछ भूलकर सिर्फ "जिहाद" का नारा लगाता है और उसका ब्रेन वाश किस तरह किया जाता होगा कि उसे मासूमों का खून बहाने में जरा भी दया नहीं आती? मतलब इनकी ट्रेनिंग और लक्ष्य दोनों ही इंसानियत का खून करते हैं। जहाँ तक और जितना मैं इस्लाम को समझ पायी हूं इस्लाम ये तो नहीं कहता कि निर्दोष का खून बहाया जाए और अपनी ही नस्ल का खत्मा कर दिया जाए।

अब दूसरा और गंभीर सोचनीय तथ्य--"आखिर क्यों हमारे बच्चे दिशाभ्रमित और भटक जाते है?" कोई तो कमी हैं हमारे परवरिश में? अभी हम इसे धर्म से जोड़ रहे हैं लेकिन अगर ये नहीं रुका तो वो दिन दूर नहीं कि हम सभी इसकी चपेट में आ जायेंगे।
हमें दिखानी होगी उन्हें ऐसे दिशा कि वो ना हो दिशा भ्रमित। सही और गलत के बीच का फर्क समझाना होगा उन्हें, प्यार, सदभाव, दयाभाव,भाईचारा और इंसानियत का मतलब बताना होगा। अपने परिवार और समाज को बचाने के लिए ये हम सबकी संयुक्त जिम्मेदारी बनती है।

इस संबंध में सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त से सख्त कानून लाये और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये जाए। सुरक्षा एजेंसीयों और सभी राज्य के पुलिस बल को भी इनसे निपटने और चौकन्ने रहने की ट्रेनिंग दी जाए। इन्हें सभी अस्त्र शस्त्र औऱ टेक्नोलॉजी से लैस किया जाए उनकी संख्या बल बढ़ाया जाए।
आतंकी संगठन और आतंकियों से सख्ती से निपटा जाए और इस संबंध में सभी राजनौतिक दल को एकमत होना चाहिए। सीमा पार से भेजा जा रहे आतंक को रोकने का एक स्थायी हल निकाला जाए और उसका कड़ाई से पालन।
 भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहाँ सर्वधर्म समभाव की मान्यता है, जहाँ सभी प्यार और भाईचारे से रहते है ...ये माहौल बना रहे...इसके लिए हम सब को धर्म के नाम पर कट्टरता और राजनीति छोड़कर समाज में व्याप्त बुराई,अवांछित  तथा उपद्रवी और आतंकी तत्वों को दूर करने पर गहन विचार करना चाहिए।

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