Saturday, March 18, 2017

नाहिद आफरीन

2015 की रनर अप रही इंडियन आइडल फेम् 16 वर्षीय नाहिद आफरीन पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चर्चा का मुद्दा बनी हुई है, ये असम भाषा में लिखे एक पीले रंग के पर्चे के वायरल होने के बाद शुरू हुई है जिसे नाहिद के खिलाफ 42 मौलवियों द्वारा उसके गाने के खिलाफ जारी फतवा कहा गया। गौरतलब है कि असम के लंका इलाके के उदाली सोनई बीबी कॉलेज में आफरीन की परफॉरमेंस के सामने आने के बाद आया है।
इस बात का खंडन करते हुए आसाम स्टेट जामियात उलेमा, मौलवी फैज़ुल करीम काज़मी ने इन बातों का जोरदार खंडन किया है और मीडिया पर गलत खबरे देने और सनसनी फैलाने का आरोप लगाया है और साथ ही सवाल किया है कि पेपर के एक टुकड़े पर फतवा जारी किया जा सकता है?
चर्चा में आये पीले पेपर पर बचाव करते हुए उनका कहना है कि इसमें कार्यक्रम में ना शामिल होने की बात कही गयी है क्योंकि कार्यक्रम स्थल मस्जिद और कब्रिस्तान के नज़दीक है, इससे पहले भी इस तरह के कार्यक्रम हो चुके है जिसमे लोगों ने शराब पीकर औऱ हो हल्ला से माहौल खराब किया था...जिसे इस्लाम में हराम कहा गया है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस पेपर से कार्यक्रम का बहिष्कार करने और ना शामिल होने की अपील की गयी है...उनके समुदाय को आफरीन पर गर्व है और ये पेपर कार्यक्रम के खिलाफ है आफरीन के नहीं।
सोचनीय बिंदु ये है कि इस तरह के पेपर छपवा कर सरेआम बाटना मतलब कानून की धजिय्या उड़ाना है..अगर उन्हें इससे दिक्कत थी तो स्थानीय प्रशासन से शिकायत कर क़ानूनी रूप से इस कार्यक्रम को रोक सकते थे। मजहब हमें मिलजुल कर रहना सिखाता है...नफरत नहीं, धर्मगुरु धर्म के रास्ते पर चलना सिखाते है, धर्म के नाम पर डराना नहीं..हर बार पर फतवा जारी कर आप अपने समुदाय की तरक्की रोक रहे है। एक तरह हम दूसरे ग्रह पर पहुँच रहे है और दूसरी तरफ आप फतवे का डर दिखा कर उन्हें जंजीरो में जकड रहे है...इससे तो वाकई इस्लाम का आस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
इस बात को आईएसआईएस से जोड़ कर देखा जा रहा है क्योंकि आफरीन ने आईएसआईएस के खिलाफ गाना गया था। असम पुलिस इस मामले की पूरी जांच पड़ताल कर रही है और सुरक्षा की दृष्टि से आफरीन औऱ उसके पूरे परिवार को सुरक्षा मुहैया करा दी गयी है।
इस संबंध में आफरीन का कहना है कि जब उसने फतवे के बारे में सुना तो अंदर से टूट गयी थी, लेकिन मुस्लिम सिंगर ने हौसला अफजाई करते हुए उसे आगे बढ़ने की बात कही है। आफरीन का कहना है कि उसकी आवाज़ खुदा का दिया गया तोहफा है और वो इसका पूरा सदुपयोग करेगी। इस संबंध में तस्लीमा नसरीन ने भी ट्वीट कर उसके बहादुरी की तारीफ की है।
जब कोई मुस्लिम युवती आगे बढ़ने की कोशिश करती है तो ये मुल्ला मौलवी उन्हें धर्म, फतवा और आतंकवादी संगठन उन्हें जान से मारने की कोशिश कर मुह बंद करने की कोशिश करते है, चाहे वो मलाला हो या तालीम नसरीन या तीन तलाक पर आवाज़ उठाने वाली मुस्लिम नवयुवती। माननीय कोर्ट को इस संबंध में सख्ती कर सभी मामलो को कानून के दायरे में लाना चाहिए।
एक तरफ तो गीत संगीत से इस्लामियत में हराम की बात कहते है तो दूसरी तरफ जब मुस्लिम बच्चे बहकावे में आकर आतंकवाद का सहारा लेते है और खून खराबा करते है तो यही धर्म गुरु ये सख्ती इन आतंकी संगठनों पर क्यों नहीं करते? जोर शोर से इनकी खिलाफत करके इस्लाम को बचाने की कोशिश क्यों नहीं करते? पिछले दिनों लखनऊ से पकड़ा गया आतंकवादी इस बात की ओर इशारा करता है कि कैसे भारतीय मुस्लिम बहक रहे है...मौलवियों को यहाँ बोलकर मज़हब को बचाना चाहिए।  गीत संगीत तो ईश्वर, अल्लाह तक पहुचने का रास्ता है...हराम कैसे हो सकता है? मुस्लिम नवयुवक औऱ युवतियों को इन मौलवियों के बहकावे में ना आकर अपनी तरक्की और शांति के रास्ते पर चलना चाहिए...अल्लाह इबादत की चीज है…डराने धमकाने की चीज़ नहीं।

No comments:

Post a Comment